कविता जीवन है अनमोल November 26, 2020 / November 26, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment जीवन है बडा अनमोल,इसका कोई नहीं है मोल।इसको बचा कर तुम रखिए,मास्क लगा कर तुम रखिए।। घर छोड़कर नहीं जाओ,कोरोना को नहीं बुलाओ।भले ही कितनी हो मजबूरी,दो गज की रक्खो तुम दूरी।। कोरोना है बहुत घातक,यह किसी को नहीं बख्शता।चाहे वह हो राजा व रंक,भर लेता है वह अपने अंक।। बरतो न इसमें कभी ढिलाई,चूकि […] Read more » जीवन है अनमोल
कविता जो शहीद हुए हैं वतन पे November 26, 2020 / November 26, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकजो शहीद हुए हैं वतन पेउन्होंने ऐसे वतन को रख छोड़ा हैजो अभिमान है सबके! जो शहीद हुए हैं वतन पेउन्होंने ऐसे पिता से मुख मोड़ा हैजो पहचान थे उनके! जो शहीद हुए हैं वतन पेउन्होंने ऐसी माता से नाता तोड़ी हैजो दिलोजान थी उनके! जो शहीद हुए हैं वतन पेउन्होंने ऐसी पत्नी […] Read more » जो शहीद हुए हैं वतन पे
कविता जीवन में आशा निराशा November 26, 2020 / November 26, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment लाओ न निराशा जीवन में,आशा का तुम संचार करो।निराशा कर देती जीवन नष्ट,इसका तुम बहिष्कार करो।। आशा ही तो एक जीवन है,निराशा तो अंधकार लाती है।करो साकार स्वप्न आशा के तुम,आशा ही निराशा को भगाती है।। बनाओ आशा को जीवन संगनी,निराशा तो जीवन की सौतन है।उसके पास न जाना कभी तुम,वह तो जीवन की एक […] Read more » जीवन में आशा निराशा
कविता राजगृह का राजवैद्य जीवक November 25, 2020 / November 25, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमगधराज बिम्बिसार की अभिषिक्त,शालवती थी नगर वधू राजगृह की!राजतंत्र की देवदासी सी एक कुरीति,वैशाली की गणिका आम्रपाली जैसी!किन्तु गणिका नहीं राज नर्तकी थी,गणिका तो गण की हुआ करती थी! मगध गणराज्य नहीं महाजनपद था,राजगृह का राजवैद्य जीवक पुत्र थापरित्यक्त, नगर वधू शालवती औरसम्राट बिम्बिसार की अवैध संतति!जिसे उठाके कूड़े की ढेर से पाले […] Read more » bimbisar बिम्बिसार राजगृह का राजवैद्य जीवक
कविता भगतसिंह : तेरा वैभव अमर रहे मां, हम दिन चार रहें या न रहें! November 25, 2020 / November 25, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकविद्यावती व किशन सिंह के बेटे भगत ये कह गए,तेरा वैभव अमर रहे मां,हम दिन चार रहें या न रहें! भगत, राजगुरु, सुखदेव ने मां, तेरी शान में प्राण देके,गुलाम वतन में जन्म ले करके, वो गुमनाम ना रहे! सत्ताईस सितंबर उन्नीस सौ सात में भगतसिंह आए,अमर कथा इस वीर की, तेईस वर्ष […] Read more » Bhagat Singh Bhagat Singh: May your glory be immortal mother poem on Bhagat Singh भगतसिंह
कविता सब जगत ब्राह्मण है November 24, 2020 / November 24, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —–विनय कुमार विनायकमनु-स्मृति है मानव पितामनु के आदेश से भृगुऋषिरचित मानव आचारसंहिता! जिसमें सब गरल नहीं,है अमृत वाणी पुनीता,पढ़ने, सुनने,गुनने की! ऐसा है मनु का कहना-शुद्र ही ब्राह्मण होताब्राह्मण ही शूद्र होता!‘शूद्रो ब्राह्मणतामेतिब्राह्मणश्चैति शूद्रताम्।‘(मनु.अ.10/65) महाभारत शांतिपर्वका शांतिपाठ कहता–ब्राह्मण ही शूद्र है!शूद्र ही ब्राह्मण है!ब्राह्मण भृगुऋषि का कहना-पूर्व में सृष्टि कर्ता ब्रह्मा नेआत्म तेज युक्त सूर्य-अग्नि […] Read more » सब जगत ब्राह्मण है
कविता ये सन्नाटा है November 24, 2020 / November 24, 2020 by बीनू भटनागर | Leave a Comment भीतर कोलाहल हैबाहर सन्नाटा है।ग़म हो या हो ख़ुशीकौन किसके घर जाता है।आभासी आधार लियेसबसे नाता है।सभी बहुत एकाकी हैं,औरइस एकाकीपन मेंशाँति नहीं ,बस सन्नाट्टा है।हर इंनसान ज़रा साघबराया है,कभी कोई भी मिल जाये तोडर जाता है,कहीं किसी कोविड वाले से,क्या उसकाकोई नाता है।काम ज़रूरी करने होवो करता है,जीविका चलाने को अबजीता या फिर मरता […] Read more » ये सन्नाटा है
कविता बीती अपने आप पर November 22, 2020 / November 22, 2020 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment बैठ न सौरभ हार के, रखना इतना ध्यान !चलने से राहें खुले, हो मंजिल का भान !! सुख में क्या है ढूंढ़ता, तू अपनी पहचान !संघर्षों में जो पले, बनते वही महान !! संबंध स्वार्थ से जुड़े, कब देते बलिदान !वक्त पड़े पर टूटते, शोक न कर नादान !! आंधी या बरसात हो, सहते एक […] Read more » Past on its own
कविता नरमेध आकांक्षी मगधराज जरासंध November 22, 2020 / November 22, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमगध साम्राज्य के संस्थापकजरासंध के पिता बृहद्रथ नेअपने पिता वसु के वसुमतिनाम की नगरी को गिरिव्रजमां गिरि के नाम किया था! आगे चलकर यह बार्हद्रथपुर,मागधपुर,कुशाग्रपुर,श्रषभपुर,बिम्बिसारपुरी बना नयानगर,राजगृह था जरासंध का घरअब राजगीर पर्यटन स्थल! जरासंध था मगध का राजामिश्रित आर्य असुर कुल का,उनकी दो बेटियां ब्याही गईआर्य अन्धक यादव कंश सेजो मामा था […] Read more » Maramedh Aspire Magadharaj Jarasandh मगधराज जरासंध
कविता सबका ईश्वर एक है November 22, 2020 / November 22, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment सबका ईश्वर एक है,ईश्वर ने सबको एक बनाया हैईश्वर की नही कोई जातिकिसने ईश्वर की जाति बनाई? सबका ईश्वर नेक है,ईश्वर ने सबको नेक बनाया हैईश्वर में नहीं कोई बदीकिसने ईश्वर में बदी घुसाई? सबका ईश्वर विवेक है,ईश्वर ने सबको विवेक दिया है,ईश्वर नहीं है अविवेकीकिसने ईश्वर में भरी बुराई? सबका ईश्वर प्रेम हैईश्वर ने […] Read more » सबका ईश्वर एक है
कविता दूसरा अभिमन्यु: चन्द्रशेखर ‘आजाद’ नाम पिता ‘स्वाधीन’ November 22, 2020 / November 22, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमां जगरानी और पंडित सीताराम का लाला,बड़ा ही जिगरा, हिम्मतवाला, वीर मतवाला, वो रोबीला, मूंछोंवाला, छैल छबीला चंदूबाबा,आजादी का दीवाना, सरदार भगत का साथी, चन्द्रशेखर ‘आजाद’ नाम पिता का ‘स्वाधीन’पता मत पूछो उनका, पूछ लो सिर्फ मंजिल, राजगुरु, बटुकेश्वर दत्त, राम प्रसाद ‘बिस्मिल’सबके सब आजादी के दीवाने, लोहे के दिल! भारत के बेटे […] Read more » चन्द्रशेखर ‘आजाद’ दूसरा अभिमन्यु
कविता मैंने जिस मिट्टी में जन्म लिया वो चंदन है November 19, 2020 / November 19, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमैंने जिस मिट्टी में जन्म लिया वो चंदन है,मैं जिस गोद में खेला हूं उसका अभिनंदन है! जिसने ये तन दिया उस मां को मेरा नमन है,जिस पिता का मैं पुण्य फला उनका वन्दन है! इस मिट्टी को मेरे नाम किया जिस ईश्वर नेउनकी शान में समर्पित मेरा संपूर्ण जीवन है! मूक-बधिर,अंधा-लंगडा बना […] Read more » The soil I was born in is sandalwood मैंने जिस मिट्टी में जन्म लिया वो चंदन है