लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-6 November 21, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment वैदिक गीता-सार सत्य गीता ज्ञान व्यक्ति को भी परिमार्जित करता है और समाज को भी परिमार्जित करता है। उसका परिमार्जनवाद उसे हर व्यक्ति के लिए उपयोगी और संग्रहणीय बनाता है। अपने इस प्रकार के गुणों के कारण ही गीता सम्पूर्ण संसार का मार्गदर्शन हजारों वर्षों से करती आ रही है। विश्व के अन्य ग्रन्थों में […] Read more » Featured गीता गीता का कर्मयोग विश्व
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-5 November 21, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment वैदिक गीता-सार सत्य हम अपनों को अपना मानकर उधर से किसी हमला की या विश्वासघात की अपेक्षा नहीं करते। अपनों की ओर से हम पीठ फेरकर खड़े हो जाते हैं। यह मानकर कि इधर से तो मैं पूर्णत: सुरक्षित हूं। कुछ समय बाद पता चलता है कि हमारी पीठ पर तीर आकर लगता है और […] Read more » Featured geeta गीता गीता का कर्मयोग विश्व
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-4 November 18, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment वैदिक गीता-सार सत्य डा. देसाई को अपने लक्ष्य की खोज थी और वह अपने लक्ष्य पर पहुंच भी गये थे, परन्तु अभी वास्तविक लक्ष्य (पण्डा और राजा से मिलना) कुछ दूर था। उन्होंने अपने साथ एक मुसलमान पथप्रदर्शक रख लिया था। यह पथप्रदर्शक वहां के लोगों को यह भी बताता जा रहा था कि देखो […] Read more » Featured karmayoga of geeta आज का विश्व कर्मयोग गीता गीता का कर्मयोग
लेख साहित्य तुलसीदास की रचना “दोहाशतक” में श्रीराम जन्मभूमि विध्वंस का वर्णन November 18, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 2 Comments on तुलसीदास की रचना “दोहाशतक” में श्रीराम जन्मभूमि विध्वंस का वर्णन डा. राधेश्याम द्विवेदी गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपने साहित्य व रचनाओं में अपने समय की प्रमुख घटनाओं का, राम जन्म भूमि पर हुए अत्याचार तथा बाबरी मस्जिद के बनाये जाने का उल्लेख किया है।आम तौर पर हिंदुस्तान में ऐसे परिस्थितियां कई बार उत्पन्न हुई जब राम -मंदिर और बाबरी मस्जिद (ढांचा ) एक विचार-विमर्श का […] Read more » तुलसीदास दोहाशतक श्रीराम जन्मभूमि विध्वंस का वर्णन
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-3 November 16, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment वैदिक गीता-सार सत्य : मानव जीवन की ऊहापोह हमारा सारा जीवन इस ऊहापोह में व्यतीत हो जाता है कि मुझे क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए? मेरे लिए क्या उचित है? और क्या अनुचित है? महाभारत के युद्ध के समय अर्जुन के समक्ष भी यही प्रश्न आ उपस्थित हुआ था। तब उसे कृष्णजी ने […] Read more » Featured गीता गीता का कर्मयोग मानव जीवन की ऊहापोह विश्व वैदिक गीता-सार सत्य
लेख गीता का कर्मयोग और आज का विश्व भाग-2 November 16, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment वैदिक गीता-सार सत्य गीता की उपयोगिता इसलिए भी है कि यह ग्रन्थ हमें अपना कार्य कत्र्तव्य भाव से प्रेरित होकर करते जाने की शिक्षा देती है। गीता का निष्काम-भाव सम्पूर्ण संसार को आज भी दु:खों से मुक्ति दिला सकता है। परन्तु जिन लोगों ने गीता ज्ञान को साम्प्रदायिकता का प्रतीक मान लिया, उनके स्वयं के […] Read more » Featured geeta karmayoga गीता गीता का कर्मयोग विश्व
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-1 November 13, 2017 / November 14, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य   वैदिक गीता-सार सत्य कभी-कभी मन में आता है कि वह समय कितना पवित्र और प्यारा होगा, जब भगवान श्री कृष्ण जी इस भूमण्डल पर विचरते होंगे? पर अगले ही क्षण मन में यह विचार भी आता है कि उस काल को भी पवित्र और प्यारा नहीं कहा जा सकता, क्योंकि […] Read more » Featured आज का विश्व कर्मयोग गीता का कर्मयोग
लेख साहित्य हमें इतिहास में जीना छोड़ना होगा October 30, 2017 by राजू पाण्डेय | Leave a Comment यह विवाद जोरों पर है कि सत्ता पक्ष देश के इतिहास को परिवर्तित कर नया इतिहास गढ़ रहा है जो उचित नहीं है। सत्ता हमेशा ही इतिहास का उपयोग अपनी नीतियों और विचारधारा को उचित ठहराने के लिए करती रही है और इतिहास की पुनर्व्याख्या होती रही है। वर्तमान कोशिश में नया कुछ भी नहीं […] Read more » Featured
लेख साहित्य अयोध्या की दीवाली और टीपू सुल्तान की जयन्ती October 28, 2017 by डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री | Leave a Comment डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री दीवाली की शुरुआत आज से लगभग पौने दो लाख साल पहले त्रेता युग में अयोध्या से हुई थी । उस दिन श्री राम चन्द्र चौदह साल का वनवास काट कर , श्री लंका के रावण को पराजित कर अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण सहित अपने शहर अयोध्या वापिस आए थे […] Read more » Featured अयोध्या अयोध्या की दीवाली टीपू सुल्तान टीपू सुल्तान की जयन्ती दीवाली
लेख साहित्य प्लेग रोगी के जीवन की रक्षा के लिए अपना जीवन दांव पर लगाने वाले महात्मा प. रूलिया राम जी October 26, 2017 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य पंडित रूलिया राम जी एक ऐसे महात्मा वा महापुरुष हुवे हैं जिन्होंने एक प्लेग के लोगी की जान बचाने के लिए अपने जीवन को संकट में डाला था। इतिहास में शायद ऐसा दूसरा उदाहरण नहीं मिलता। आज इनके जीवन की कुछ प्रेरक घटनाएं प्रस्तुत कर उन्हें श्रद्धांजली दे रहे हैं। […] Read more » रूलिया राम जी
लेख साहित्य टीपू सुल्तान — इंसान या हैवान October 26, 2017 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment पता नहीं कर्नाटक के कांग्रेसी मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को शान्त कर्नाटक में अशान्ति उत्पन्न करने और अलगाववाद को हवा देने में कौन सा आनन्द आता है। कभी वे हिन्दी के विरोध में वक्तव्य देते हैं तो कभी कर्नाटक के लिए जम्मू कश्मीर की तर्ज़ पर अलग झंडे की मांग करते हैं। आजकल उन्हें टीपू सुल्तान को […] Read more » Featured The Tyrant of Mysore Tipu Sultan Tipu Sultan : The Tyrant of Mysore टीपू सुल्तान
लेख हिंदी दिवस आर्यसमाज विश्व की प्रथम धार्मिक सामाजिक संस्था जिसने हिन्दी को धर्मभाषा के रूप में अपनाकर वेदों का प्रचार किया September 15, 2017 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment आज हिन्दी दिवस पर- मनमोहन कुमार आर्य आर्य समाज की स्थापना गुजरात में जन्में स्वामी दयानन्द सरस्वती जी ने 10 अप्रैल, सन् 1875 को मुम्बई नगरी में की थी। आर्यसमाज क्या है? यह एक धार्मिक एवं सामाजिक संस्था है जिसका उद्देश्य धर्म, समाज व राजनीति के क्षेत्र से असत्य को दूर करना व उसके स्थान […] Read more » धर्मभाषा हिन्दी