मनोरंजन लेख सिर्फ लूटते हैं फर्जी ट्रैवल एजेंट, एजेंसी और वेबसाइट February 13, 2025 / February 13, 2025 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment भारत में, हाल ही में धोखाधड़ी करने वाली ट्रैवल एजेंसियों में उछाल आया है जो अयोग्य व्यक्तियों को विदेश भेजने का वादा करती हैं। भले ही बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया गया हो, लेकिन निस्संदेह अभी भी बड़ी संख्या में लोग धोखाधड़ी से काम कर रहे हैं। अवैध छुट्टियों के पैकेज, पंजीकरण धोखाधड़ी […] Read more » Only fake travel agents फर्जी ट्रैवल एजेंट
लेख गरल के समंदर से भी गंगाजल निकलेगा February 11, 2025 / February 11, 2025 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment हाल ही में 10 फरवरी 2025 के दिन हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘परीक्षा पे चर्चा’(पीपीसी) कार्यक्रम में छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से परीक्षा के तनाव को कम करने के उपायों पर चर्चा की। मीडिया रिपोर्ट्स बतातीं हैं कि इस बार परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में 3.30 करोड़ से अधिक छात्र, 20 लाख […] Read more »
लेख शख्सियत समाज साक्षात्कार रैदास युगपुरुष और युगस्रष्टा सिद्ध संत थे February 11, 2025 / February 13, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment संत रविदास जयन्ती- 12 फरवरी, 2025ललित गर्गमहामना संत रविदास कहो या रैदास-भारतीय संत परम्परा, भक्ति आन्दोलन और संत-साहित्य के जहां महान् हस्ताक्षर है, वहीं वे अलौकिक-सिद्ध संत, समाज सुधारक, साधक और कवि हैं। दुनियाभर के संत-महात्माओं में उनका विशिष्ट स्थान है। सद्गुरु रामानंद के पारस स्पर्श ने चर्मकार रैदास को भारत वर्ष का महान चमत्कारी […] Read more » Raidas was a proven saint of the era and the creator of the era. संत रविदास जयन्ती- 12 फरवरी
लेख धनाढ्यों के विदेश पलायन पर प्रदर्शन क्यों नहीं? February 10, 2025 / February 10, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ः ललित गर्ग:- डॉनल्ड ट्रंप के अमेरिका के राष्ट्रपति पद संभालने के बाद सौ से अधिक अवैध भारतीयों के पहले बैच को अपराधियों की तरह अपमानजनक तरीके से भारत भेजा गया है। सितम्बर- 2024 तक सालभर में अवैध रूप से अमेरिका जाने की कोशिश में 90 हजार से अधिक लोग पकडे़ गये थे। ये लोग […] Read more » धनाढ्यों के विदेश पलायन पर प्रदर्शन क्यों नहीं
आर्थिकी लेख रेपोदर में कमी के साथ ही भारत में ब्याज दरों के नीचे जाने का चक्र प्रारम्भ February 10, 2025 / February 10, 2025 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment भारतीय रिजर्व बैंक के नवनियुक्त अध्यक्ष श्री संजय मल्होत्रा ने अपने कार्यकाल की प्रथम मुद्रानीति दिनांक 7 फरवरी 2025 को घोषित की। अभी तक प्रत्येक दो माह के अंतराल पर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा घोषित की गई मुद्रा नीति के माध्यम से लिए गए निर्णयों का देश में मुद्रा स्फीति को नियंत्रण में रखने में विशेष योगदान रहा है। हालांकि पिछले लगभग 5 वर्षों में रेपो दर में किसी भी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया गया है। मई 2020 में अंतिम बार रेपो दर में वृद्धि की घोषणा की गई थी। इसके बाद घोषित की गई 29 मुद्रा नीतियों में रेपो दर को स्थिर रखा गया है और यह अभी भी 6.5 प्रतिशत के स्तर पर कायम है। परंतु,अब फरवरी 2025 माह में घोषित की गई मुद्रा नीति में रेपो दर में 25 आधार बिंदुओं की कमी करते हुए इसे 6.50 प्रतिशत से 6.25 प्रतिशत पर लाया गया है। केंद्र सरकार द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक को देश में मुद्रा स्फीति की दर को नियंत्रण में रखने हेतु मेंडेट दिया गया है और इस मेंडेट पर ध्यान रखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने देश में मुद्रा स्फीति को नियंत्रण में रखने में सफलता भी पाई है। परंतु, वित्तीय वर्ष 2024-25 के प्रथम एवं द्वितीय तिमाही में देश के सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर घटकर 5.2 प्रतिशत एवं 5.4 प्रतिशत के निचले स्तर पर आ गई थी, जबकि वित्तीय वर्ष 2023-24 में सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत की रही थी। अतः देश में आर्थिक विकास की दर पर भी अब विशेष ध्यान देने की आवश्यकता प्रतिपादित हो रही थी, इसीलिए भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो दर में 25 आधार बिंदुओं में कमी की घोषणा की है। रेपो दर में कमी करने का उक्त निर्णय मुद्रानीति समिति के समस्त सदस्यों ने एकमत से लिया है। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकलन के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-45 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर 6.4% की रहेगी और वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 6.7 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच जाएगी। इस वर्ष खरीफ की फसल बहुत अच्छे स्तर पर आई है एवं आगे आने वाली रबी की फसल भी ठीक रहेगी क्योंकि मानसून की बारिश अच्छी रही थी और देश के जलाशयों में, क्षमता के अनुसार, पर्याप्त पानी इन जलाशयों में उपलब्ध है, जिसे कृषि सिंचाई के लिए उपयोग में लाया जा रहा है और जो अंततः कृषि की पैदावार को बढ़ाने में सहायक होगा। इससे ग्रामीण इलाकों में उत्पादों की मांग में वृद्धि देखी गई है। हालांकि शहरी इलाकों में उत्पादों की मांग में अभी भी सुधार दिखाई नहीं दिया है। परंतु हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा मध्यमवर्गीय करदाताओं को आय कर में दी गई जबरदस्त छूट के चलते आगे आने वाले समय में शहरी क्षेत्रों में भी उत्पादों की मांग में वृद्धि दर्ज होगी और विनिर्माण क्षेत्र में कार्यरत औद्योगिक इकाईयों की उत्पादन वृद्धि दर तेज होगी। सेवा क्षेत्र तो लगातार अच्छा प्रदर्शन कर ही रहा है। प्रयागराज में आयोजित महाकुम्भ मेले में धार्मिक पर्यटन के चलते देश की अर्थव्यवस्था में लगभग 2 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त योगदान होने की सम्भावना व्यक्त की जा रही है। इस प्रकार, भारत की आर्थिक विकास दर के वित्तीय वर्ष 2023-24 में लगभग 7 प्रतिशत एवं वित्तीय वर्ष 2024-25 में लगभग 8 प्रतिशत रहने के प्रबल सम्भावना बनती है। भारतीय रिजर्व बैंक का आंकलन उक्त संदर्भ में कम ही कहा जाना चाहिए। इसी प्रकार मुद्रा स्फीति के संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमान के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई की दर वित्तीय वर्ष 2024-25 में 4.8 प्रतिशत एवं वित्तीय वर्ष 2025-26 में घटकर 4.2 प्रतिशत रह सकती है। भारत में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई की दर मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों के महंगे होने के चलते ही बढ़ती है, जिसे ब्याज दरों को बढ़ाकर नियंत्रण में नहीं लाया जा सकता है। हेडलाइन मुद्रा स्फीति की दर अक्टूबर 2024 में अपने उच्चत्तम स्तर पर पहुंच गई थी परंतु उसके बाद से लगातार नीचे ही आती रही है। इसी प्रकार, कोर मुद्रा स्फीति की दर भी लगातार नियंत्रण में बनी रही है। केवल खाद्य पदार्थों में के महंगे होने के चलते उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई पर दबाव जरूर बना रहा है। इस प्रकार महंगाई दर के नियंत्रण में आने से अब भारत में ब्याज दरों में कमी का दौर प्रारम्भ हो गया है। आगे आने वाले समय में भी भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में कमी की घोषणा की जाती रहेगी ऐसी सम्भावना व्यक्त की जा रही है और दिसम्बर 2025 तक रेपो दर में लगभग 100 आधार बिंदुओं की कमी की जा सकती है और रेपो दर घटकर 5.25 प्रतिशत तक नीचे आ सकती है। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक का कहना है कि देश में आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर रेपो दर में परिवर्तन के बारे में समय समय पर विचार किया जाएगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने नीति उद्देश्य को भी निष्पक्ष रखा है परंतु चूंकि ब्याज दरों में अब कमी करने का चक्र प्रारम्भ हो चुका है अतः इसे उदार रखा जा सकता था। इसका आश्य यह है कि आगे आने वाले समय में भी रेपो दर में कमी की सम्भावना बनी रहेगी। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में की गई कमी की घोषणा के बाद अब विभिन्न बैकों को ऋणराशि पर ब्याज दरों को कम करते हुए ऋणदाताओं को लाभ पहुंचाने के बारे में शीघ्रता से विचार करना चाहिए जिससे आम नागरिकों द्वारा बैकों को अदा की जाने वाली किश्तों एवं ब्याज राशि में कुछ राहत महसूस हो सके। इससे अर्थव्यवस्था में भी कुछ गति आने की सम्भावना बढ़ेगी। दिसम्बर 2024 माह में देश में तरलता में कुछ कमी महसूस की जा रही थी और बैकों के पास ऋण प्रदान करने योग्य फंड्ज की कमी महसूस की जा रही थी। भारतीय रिजर्व बैंक ने तुरंत निर्णय लेते हुए आरक्षित नकदी अनुपात (CRR) को 4.5 प्रतिशत से घटाकर 4 प्रतिशत कर दिया था, जिससे बैकों की तरलता की स्थिति में कुछ सुधार दृष्टिगोचर हुआ था। बैकों के लिए इसे अधिक सरल बनाने की दृष्टि से जनवरी 2025 में भी भारतीय रिजर्व बैंक ने लगभग 1.50 लाख करोड़ रुपए बांड्ज विभिन्न बैकों से खरीदे थे ताकि इन बैकों की तरलता की स्थिति में और अधिक सुधार किया जा सके और बैकिंग सिस्टम में तरलता की वृद्धि की जा सके। उक्त वर्णित उपायों का परिणाम यह है कि आज भारतीय बैकों का ऋण:जमा अनुपात 80.8 प्रतिशत के स्तर पर बना हुआ है और बैकों की लाभप्रदता में भी लगातार सुधार होता दिखाई दे रहा है। विभिन्न बैकों द्वारा अभी तक घोषित किए गए परिणामों के अनुसार, बैकों ने लगभग 1.50 लाख करोड़ रुपए का लाभ घोषित किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जरूर परिस्थितियां अभी भी अस्थिर बनी हुई हैं और वैश्विक स्तर पर रुपए पर दबाव बना हुआ है। अभी हाल ही में डॉलर इंडेक्स 109 के स्तर तक पहुंच गया था और 10 वर्षीय यू एस बांड यील्ड भी 4.75 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, इससे अन्य देशों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ता जा रहा है और आज अमेरिकी डॉलर के मुकाबले में रुपए की कीमत अपने निचले स्तर 87.66 पर पहुंच गई थी। परंतु, आगे आने वाले समय में अमेरिका में भी यदि ब्याज दरों में कमी की घोषणा होती है तो भारत में भी ब्याज दरों में कमी का चक्र और भी तेज हो सकता है। ब्रिटेन एवं कुछ अन्य यूरोपीयन देशों ने भी हाल ही के समय में ब्याज दरों में कमी की घोषणा की है। चूंकि अब कई देशों में मुद्रा स्फीति नियंत्रण में आ चुकी है अतः अब लगभग समस्त देश ब्याज दरों में कमी की घोषणा करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इससे अब आने वाले समय में इन देशों में आर्थिक विकास दर में कुछ तेजी आते हुए भी दिखाई देगी। अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने के चलते अमेरिका के शेयर बाजार में केवल जनवरी 2025 माह में ही 15,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि निवेशकों द्वारा डाली गई है, जबकि भारत के शेयर बाजार से 2.50 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा निकाली गई है, इससे भी भारतीय रुपए पर दबाव बना हुआ है। परंतु भारतीय रिजर्व बैंक को शायद आभास है कि यह समस्या अस्थायी है एवं भारतीय कम्पनियों की लाभप्रदता में सुधार होते ही विदेशी संस्थागत निवेशक पुनः भारतीय शेयर बाजार में अपने निवेश को बढ़ाएंगे। अमेरिका एवं चीन के बीच छिड़े व्यापार युद्ध का प्रभाव भी भारत पर सकारात्मक रहने की सम्भावना है क्योंकि इससे यदि चीन से अमेरिका को निर्यात कम होते हैं तो सम्भव हैं कि भारत से अमेरिका को निर्यात बढ़ें। भारत से निर्यात बढ़ने पर भारतीय रुपए पर दबाव कम होने लगेगा, जिससे भारतीय रिजर्व बैंक को भारत में रेपो दर को कम करने में और अधिक आसानी होगी। प्रहलाद सबनानी Read more » the cycle of downward trend in interest rates has started in India. With the reduction in repo rate भारत में ब्याज दरों के नीचे जाने का चक्र
लेख समाज बेटी नहीं बचाओगे, तो बहू कहाँ से लाओगे? February 10, 2025 / February 10, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम ने बेटे को प्राथमिकता देने के मुद्दे पर सफलतापूर्वक जागरूकता बढ़ाई है, लेकिन अपर्याप्त कार्यान्वयन और निगरानी के कारण, यह अपने वर्तमान स्वरूप में अपने मुख्य लक्ष्य को प्राप्त करने में विफल रहा है। 22 जनवरी, 2015 को बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम की शुरुआत की गई थी, जिसका उद्देश्य […] Read more » बहू कहाँ से लाओगे
राजनीति लेख हर बुजदिल हिंदू मुसलमान है : कहना कितना सही ? February 6, 2025 / February 6, 2025 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment सामान्यतया जब भी किसी हिंदू युवा को मुसलमानों या इस्लामिक आतंकवाद पर या मुस्लिम फंडामेंटलिज्म पर बोलना होता है तो यह बात सुनने को अक्सर मिलती है कि जो आज मुसलमान हैं ,वह कभी हिंदू थे। परंतु उनके पूर्वज कायर थे, जिन्होंने सनातन को छोड़ दिया और इस्लाम स्वीकार कर लिया। वे मुस्लिम अत्याचारों को […] Read more » हर बुजदिल हिंदू मुसलमान
लेख बाबर व अकबर के शासन काल में हिंदू दमन February 6, 2025 / February 6, 2025 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment डॉ राकेश कुमार आर्य अकबर के हरम में हिन्दू महिलाओं की स्थिति जिसका उल्लेख आर०सी० मजूमदार ने ‘दी मुगल एंपायर’ खंड 7 में किया है। वह लिखते हैं – सन् 1564 में अकबर ने अपनी हवस की शान्ति के लिए रानी दुर्गावती पर आक्रमण कर दिया, किन्तु एक वीरतापूर्ण संघर्ष के बाद अपनी हार निश्चित […] Read more » Hindu oppression during the rule of Babar and Akbar बाबर व अकबर के शासन काल में हिंदू दमन
लेख हिंदी महत्व February 6, 2025 / February 6, 2025 by नन्द किशोर पौरुष | Leave a Comment हिंदी है मेरी मात्र भाषा, जो हिंदुस्तान की पहचान कराती हैदेव नागरी रसमय हो कर, नव रास यह बरसाती हैहिंदी है मेरी मात्र भाषा…………………… आलोकिक श्रृंगार है इसका, समास और अलंकारों सेमुहावरों और कहावतों से, सबका मन बहलाती हैहिंदी है मेरी मात्र भाषा…………………… हर्षित करके तन मन सबका, विश्व स्तर पर अपना रंग जमातीसंस्कृत भाषा […] Read more »
लेख हर घर नल जल योजना: लक्ष्य तक पहुंचने की चुनौती February 6, 2025 / February 6, 2025 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment प्रिया रानीपटना, बिहार केंद्र सरकार की हर घर नल जल योजना ने शहरों से लेकर गांवों तक लोगों के जीवन को सरल बना दिया है। इस योजना का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ जल की आपूर्ति सुनिश्चित करना है, जिससे लोगों का जीवन सुगम हो और जल जनित बीमारियों में कमी आए। देश के कई […] Read more » Har Ghar Nal Jal Yojana हर घर नल जल योजना
लेख सुप्रीम कोर्ट – शव के साथ सेक्स करना रेप की श्रेणी में नहीं आता February 6, 2025 / February 6, 2025 by रामस्वरूप रावतसरे | Leave a Comment रामस्वरूप रावतसरे सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में 4 फरवरी 2025 को नेक्रोफिलिया (महिला के मृत शरीर से यौन क्रिया) को बलात्कार मानने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि यह भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 375 के तहत बलात्कार […] Read more » शव के साथ सेक्स
लेख समाज बढ़ता तनाव: हर शख्स परेशां सा क्यों है? February 6, 2025 / February 6, 2025 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment अमरपाल सिंह वर्मा रोजमर्रा की भागमभाग और आपाधापी में लोगों का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। बढ़ता मानसिक तनाव एवं अवसाद लोगों के जीवन में ऐसा खलल डाल रहा है, जिससे वह बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। टेंशन एवं डिप्रेशन से जूझने वाले लोग ऐसे निराशाजनक दौर से गुजर रहे हैं जो न उन्हें दिन में चैन लेने दे रहा है और न रात को आराम। यह समस्या न केवल युवाओं बल्कि हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर रही है। अब तो बच्चे भी तनाव से अछूते नहीं रहे हैं। यह ऐसी विश्वव्यापी समस्या है, जिसके शिकार लोग रहते भले ही अलग-अलग देशों में हों पर उनका दर्द एक जैसा है। हमारे देश में तनाव ने लोगों की जीवनचर्या को अस्त व्यस्त कर दिया है। एक ओर जहां बढ़ती महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने का दबाव तनाव की वजह है, वहीं परिस्थितियों के साथ सामंजस्य न बैठाने से भी मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता भी तनाव का कारण बन रही है। आर्थिक संकट का सामना करने वाले व्यक्तियों को बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में आ रही कठिनाई भी तनाव और अवसाद की वजह है। किसान, मजदूर, अधिकारी, कर्मचारी, इंजीनियर, अभिनेता, नेता, व्यापारी, दुकानदार, स्त्री, पुरुष सब इससे पीडि़त हैं। शायद ही कोई ऐसा वर्ग है जिसे तनाव ने छोड़ा हो। स्कूल-कॉलेज के बच्चों को शिक्षा और कॅरियर को लेकर बढ़ता दबाव परेशान किए हुए है। परीक्षा जनित तनाव, अच्छे अंक प्राप्त करने का प्रेशर और अच्छी नौकरी पाने का दबाव युवाओं को मौत को गले लगाने पर मजबूर कर रहा है। समाज में कुछ बनकर दिखाने की चाहत भी तनाव का प्रमुख कारण बन गई है। जब महत्वाकांक्षाएं पूरी नहीं होतीं तो दिमाग में केमिकल लोचा पैदा होने लगता है। बढ़ती नशावृत्ति और बिखरते परिवार भी टेंशन का सबब बन रहे हैं। परिवारों में संघर्ष और रिश्तों में खटास मानसिक बीमारियों को बढ़ावा रहा है। हाल के सालों में सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग भी मानसिक अवसाद की नई वजह बनकर उभरा है। वर्चुअल दुनिया में व्यस्त लोग हकीकत में अकेले पड़ते जा रहे हैं। देश में मानसिक स्वास्थ्य पर मंडराता संकट गंभीर स्थिति बन चुका है। इसका खतरनाक परिणाम बढ़ती आत्महत्याओं के रूप में सामने आ रहा है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार देश में वर्ष 2021 में 1,64,033 लोगों ने आत्महत्या की जबकि 2022 में 1.70 लाख से ज्यादा लोगों ने मौत को गले लगा लिया। यह भयावह आंकड़े समाज के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश लोग अवसाद, चिंता, मानसिक विकारों और अकेलेपन की वजह से आत्महत्या करते हैं। रिश्तों में तनाव, विवाह संबंधी समस्याएं और फेमिली स्पोर्ट का अभाव भी बड़ी वजह है। कर्ज का बोझ और वित्तीय समस्याएं भी इसके प्रमुख कारणों में हैं। कई बार शारीरिक- मानसिक उत्पीडऩ, विशेष रूप से यौन उत्पीडऩ के कारण भी लोग आत्महत्या करने पर मजबूर हो रहे हैं। देश में महिलाओं से ज्यादा शादीशुदा पुरुष आत्महत्या कर रहे हैं। छात्रों द्वारा सुसाइड की बढ़ती घटनाएं भी चिंता की वजह बन रही हैं।यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में मानसिक स्वास्थ्य की हालत खराब है। 15 से 24 साल के प्रत्येक 7 लोगों में से एक व्यक्ति खराब मेंटल हेल्थ से गुजर रहा है। एक सर्वे से पता चलता है कि खराब मेंटल हेल्थ से पीडि़त लोगों में से 41 फीसदी ही किसी काउंसलर या मनोचिकित्सक के पास जाना उचित समझते हैं। गांवों में तो मानसिक बीमारी को कोई बीमारी ही नहीं समझा जाता है। गांवों में मनो चिकित्सकों का अभाव भी एक समस्या है। लोगों में मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता बढ़ानी जरूरी है। लोगों को बताया जाना चाहिए कि मानसिक समस्याएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं जितनी शारीरिक बीमारियां होती हैं। गांवों में मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति को ‘पागल’ करार देकर उसके हाल पर छोड़ दिया जाता है। जगह-जगह जंजीरों में बंधे मनोरोगी समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति उदासीनता का ज्वलंत उदारण हैं। मौजूदा दौर में यह समझना जरूरी है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं कोई कमजोरी नहीं हैं बल्कि यह एक चुनौती है जिसका सामना परस्पर सहयोग, समझ और संवेदनशीलता से किया जाना चाहिए। अमरपाल सिंह वर्मा Read more » बढ़ता तनाव