कविता आओ हम मिलकर योग करें। June 20, 2024 / June 20, 2024 by अजय एहसास | Leave a Comment तुम योग करो वो योग करे,हम योग करे सब योग करेंकरें स्वस्थ कामना रहने की,आओ हम मिलकर योग करें। खाने को घर में रहे नहीं,फिर भी मुंह से कुछ कहें नहीसब पूजा, दुआ कराते हैं ।,पर फिर भी कुछ तो लहे नहींसरकार हमारी कहती है ,कि आओ नया प्रयोग करेंकरें स्वस्थ कामना रहने की,आओ हम […] Read more » योग
लेख स्वास्थ्य-योग विवाह के बाद आत्महत्या करने की प्रवृत्ति को होम्योपैथिक दवाइयों से बदलें June 19, 2024 / June 19, 2024 by डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' | Leave a Comment लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणापिछल 5 महीना के दौरान 1 दर्जन से अधिक ऐसे मामले मेरी निजी जानकारी में आये हैं, जिनमें विवाह के 1 से 3 महीना के अंदर नव विवाहिताओं ने आत्महत्या करके अपने जीवन को समाप्त कर लिया है। नवविवाहिताओं की आत्महत्या की प्रवृत्ति एक गंभीर सामाजिक और मानसिक समस्या है। इसे […] Read more »
लेख समाज योग सशक्त माध्यम है महिला सशक्तीकरण एवं शांति का June 19, 2024 / June 19, 2024 by ललित गर्ग | Leave a Comment अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस, 21 जून, 2024 पर विशेष– ललित गर्ग –मनुष्य के सम्मुख युद्ध, महामारी, महंगाई, बेरोजगारी, प्रतिस्पर्धा के कारण जीवन का संकट खड़ा है। मानसिक संतुलन अस्त-व्यस्त हो रहा है। मानसिक संतुलन का अर्थ है विभिन्न परिस्थितियों में तालमेल स्थापित करना, जिसका सशक्त एवं प्रभावी माध्यम योग ही है। योग एक ऐसी तकनीक है, […] Read more » Yoga is a powerful medium for women empowerment and peace अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस
लेख भीषण गर्मी से खुला काम करने वाले मजदूरों को सबसे ज्यादा नुकसान क्यों ? June 19, 2024 / June 19, 2024 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment भारत में हाल ही में आई भीषण गर्मी से डेली वर्कर्स, विशेषकर डिलीवरी कर्मियों, ईंट-भट्ठों पर काम करने वालों और दिहाड़ीदार मजदूरों के लिए कामकाजी परिस्थितियां गंभीर हो गई हैं। भीषण गर्मी ने खुला काम करने वाले वर्कर्स के लिए कठोर कार्य स्थितियों और उनके सामने आने वाली चुनौतियों को उजागर किया है। इस भीषण […] Read more » Why do laborers working outdoors suffer the most from the scorching heat?
लेख आधुनिक होते आंगनबाड़ी केंद्रों में सुविधाओं की कमी June 19, 2024 / June 19, 2024 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment भारती सुथारबीकानेर, राजस्थान इस माह के पहले सप्ताह में राजस्थान के गृह सचिव ने महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक में राज्य के सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्टफोन या टैबलेट उपलब्ध कराने का निर्देश जारी किया है ताकि केंद्र के कामों की ऑनलाइन मॉनेटरिंग की जा सके. इससे आंगनबाड़ी केंद्र में आने वाले बच्चों और उनके स्वास्थ्य […] Read more » Lack of facilities in modernized Anganwadi centers
लेख भारतीय धर्म और मन्दिर June 18, 2024 / June 18, 2024 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment भारतीय संस्कृति व धर्म में मन्दिरों को सदा से ही महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है, मन्दिर धर्म के आधारभूत अंगो में सदा से ही विद्यमान हैं। सनातन धर्म में वृक्ष, वन भी मन्दिर हैं यहाँ तक कि मानव शरीर को भी मन्दिर के सदृश माना गया है; परन्तु दुर्भाग्यवश भारतीय संस्कृति के आधारभूत अंग मन्दिरों को आज सोशल मीडिया से मस्त भारतवासी मान्दरों को सेल्फी पॉइट व नाच-गान करके रील बनाने में व्यक्त हैं, और मन्दिरों को धूमिल करने मे लगे हुये हैं, इन भारतवासियों ने नाट्य-शास्त्र को भी दूषित कर दिया है। भारतवासियों ने ब्रह्म को अपनी चेतना से अभिव्यक्त कर ईश्वर को साकार रूप में प्रदर्शित करने हेतु बुद्धि, चेतना के द्वारा मूर्तियों का निर्माण किया मूर्तियों को स्थापित करने के लिये शास्त्रों के गहन अध्ययन, ज्यामिति अध्ययन, “गणित व अभियांत्रिकी के फलस्वरूप ईश्वर के साकार रूप की विद्यमान करने हेतु शास्त्रीय संरचनाओं का निर्माण किया जो मंदिर कहलायीं। योग ने मानव शरीर की भाँति पृथ्वी पर भी कुछ स्थान पवित्र स्थान बताये है जिनका उल्लेख महाभारत में भी मिलता है, वही क्षेत्र तीर्थ कहलाये महान तपस्वियों ने संपूर्ण भारतवर्ष का विचरण किया और मन्दिर निर्माणस्थलों का चुनाव भी किया, वस्तुत: जब मानव अपने अंतः करण से वास्तु कला के माध्यम से प्रतिबिंबित करता है, वही मन्दिर है मन्दिर निर्माण में स्थान के साथ-साथ अन्य भौतिक व आध्यात्मिक घटक भी अनिवार्य होते हैं, ज्यामिति, गणित, स्थान के साथ-साथ उस स्थान का आध्यात्मिक इतिहास का अध्ययन भी किया जाता है; मान्दरों का निर्माण उस स्थान पर किया जाता है जहाँ जीवन शाक्त विद्यमान हो, उदाहरणतः प्राचीन मान्दर जीवनदायिनी नदियों के निकट, वृक्षों के निकट बनाये जाते थे, जिनका उद्देश्य मानव को प्रकृति के निकट पहुँचाकर आनन्द की अनुभूति करना है। रूपरहित ब्रह्म इस संसार की माता है चूंकि एक माता ही इस अनन्त संसार, चेतनारहित वस्तु, जीव-जन्तु का पालन पोषण करती है, विष्णु, शिव, का रूप है, रूपरहित ब्रह्म अनन्त है, उसका न कभी जन्म हुआ। ब्रह्म को दिव्यदृष्टि से देखने वाला वीर अर्जुन भी घबरा गया, जब उसे ब्रह्म ने अपने चतुर्भन रूप को दिखाकर शांति दी, उसी दिव्यदृष्टि व चतुर्भुजी रूप का प्रत्यक्ष रूप सूर्यदेव हैं। मन्दिरों में देवताओं की प्रतिमाओं की प्राणप्रतिष्ठा की जाती है, जिसके पश्चात वह प्रतिमा देवताओं की छावे रूप मे मन्दिर में सदा विद्यमान रहती है. मन्दिरों में प्रतिमा बनाने के लिये दिनो उपवास करते हैं, अपनी चेतना की पराकाष्ठा से देवता को साकार रूप में विराजित होने का आग्रह करते हैं, और अपने हाथों से ईश्वर का प्रत्यक्ष रूप प्रतिमाओं व मूर्तियों के रूप में प्रदर्शित करते भारतीय संस्कृति में चेतनारहित पत्थर में भी प्रतीत होती है, चूंकि वह भी ब्रह्म की रचना है अर्थात ब्रह्म का ही रूप है प्राणप्रतिष्ठा के पश्चात प्रतिमाओं को भोग, काव्य. संगीत व नाट्य शास्त्र भी समर्पित किया जाता है। लिंग पुराण के लिंग ज्योति है अर्थात ब्रह्म का ही रूप है, अनुसार जिस भाँति आग का लिंग परिचय) धुंआ है, उसी प्रकार ब्रह्म का लिंग जगत है। भारतीय संस्कृति में शिवरात्रि के दिन शिव लिंग रूप में प्रकट हुये। भारतवर्ष में धर्मनिष्ठ काम के मन्दिर हुआ करते थे, काम यहाँ देवता है, लोग काम के मन्दिरों में उत्सव व दर्शन करते थे। यहाँ मृत्यु के देवता के लिये भी मन्दिर विद्यमान हैं, चूंकि भारतवासी जीवन के चक्र अर्थात जन्म-मृत्यु से भली भाँति परिचित थे भारतवासी वट वृक्ष में शिव, पीपल में विष्णु व नीम में सूर्य का निवास मानकर उनकी स्तुति करते हैं। यहाँ नाट्य- शास्त्र के द्वारा भी मुक्ति प्राप्त की जा सकती है. महायोगी शिव भरतमुनि के नारयशास्त्र के अनुसार नटराज कहलाये जिनकों चरणों के नीचे मुक्ति है नटराज की नेत्रों में शांति है, मुख पर तेज है, भुजाओं में अग्नि,डमरू कंपन का प्रतीक है, जटाये उड रही हैं, और नीचे मुक्ति चरणों में है। उपास्य के नाम साकार रूप के बिना उपासना अत्यधिक कठिन है। आक्रमणकारियों ने मन्दिर तोड़े उनके ही वंशज राष्ट्र के टूटने के लिये जिम्मेदार हैं,धर्मनिष्ठ काम के मन्दिर तोडने वाले रिलीजनों ने संस्कृति को तीव्र ठेस पहुचाई। मंदिरों को तोड़कर अपनी संरचनाएं बना डाली। उन्होंने भारतीयों से ज्ञान भी लिया और घृणा भी की, सबको एक किताब व एक भगवान में बदलने में कभी सफल नहीं हो सके चूँकि जिस संस्कृति को महाकाल ने बनाया हो उसका काल क्या ही कर पायेगा पवन गोला Read more » Indian religion and temples
कविता मेरी लाज तुम्हारे हाथ, पवनसुत अंजनी के लाला June 18, 2024 / June 18, 2024 by नन्द किशोर पौरुष | Leave a Comment मेरी लाज तुम्हारे हाथ, पवनसुत अंजनी के लाला -2हो मेरी लाज तुम्हारे हाथ -2, पवनसुत अंजनी के लाला | मेरी लाज तुम्हारे हाथ….. Read more »
लेख समाज क्या प्रवासी मजदूरों के बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार नहीं है? June 18, 2024 / June 18, 2024 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment मुकेश कुमार योगीउदयपुर, राजस्थान वर्ष 2009 में बच्चों को मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम प्रदान कर उन्हें शिक्षा से जोड़ने का बहुत बड़ा कदम उठाया गया. इससे शिक्षा से वंचित देश के लाखों बच्चों को लाभ जरूर हुआ लेकिन अधिनियम लागू होने के 15 साल बाद भी यदि हम धरातल पर वास्तविक […] Read more »
कविता अब कोई सपना नहीं June 17, 2024 / June 17, 2024 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment अब कोई सपना नहीं।सब टूट गया सपना वहीं।।जब बेटी ने जन्म लिया।तब पिता की आंखें नम हुई।अब जितना मैं कमाऊंगा।संजोकर उसे रख पाऊंगा।ताकि बेटी की शादी में।दहेज लूटा मैं पाऊंगा।।कहते हैं सब, वह बेटी है।तो क्या उसका मान नहीं?जन्म से पराया बना के।क्या उसका आत्म सम्मान नहीं?क्या लिखी है उसकी किस्मत में?क्या वह माता-पिता की […] Read more » अब कोई सपना नहीं
कविता भगवान राम कृष्ण काल्पनिक नहीं थे June 17, 2024 / June 17, 2024 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकअक्सर लोग कहा करते कि राम कृष्ण ब्राह्मणी कल्पना प्रसूत थेफिर क्यों राम कृष्ण कृषक खत्ती-खत्तीय या क्षत्री-क्षत्रिय सपूत थे?क्यों नहीं याजक ब्राह्मणों ने उन्हें कहा है अपने ब्राह्मण वर्ण के?क्यों राम के श्वसुर और सीता के पिता जनक थे हलवाहा कर्म से? क्यों सीता की संज्ञा हल के फाल की जोत सीत […] Read more » भगवान राम कृष्ण काल्पनिक नहीं थ
राजनीति लेख समाज भारत में लैंगिक असमानता की बढ़ती खाई June 17, 2024 / June 17, 2024 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग विश्व आर्थिक मंच द्वारा हाल में प्रस्तुत किये गए लैंगिक अंतर के आंकड़ों ने एक ज्वलंत प्रश्न खड़ा किया है कि शिक्षा, आय, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में आधी दुनिया को उसका हक क्यों नहीं मिल पा रहा है? निस्संदेह, हमारे सत्ताधीशों को सोचना चाहिए कि लैंगिक अंतर सूचकांक में भारत 146 […] Read more » भारत में लैंगिक असमानता
कविता खोदी धरती बोई बीज June 15, 2024 / June 15, 2024 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment किरण दोसादगरुड़, उत्तराखंड खोदी धरती बोई बीज,ये मिट्टी है बड़े काम की चीज,इसने दिया भोजन हमको,सूरज ने दिया जब ताप,फूटा अंकुर उसमें जब,ऊपर आया अपने आप,ऊपर का संसार उसने पाया सुंदर,लिया जब रुप उसने नन्हे पौधे का,हरा रंग जब उसने पाया,फिर तो सबके मन को भाया,पत्तियों का हरा रंग,क्लोरोफिल कहलाता है,सूरज हवा पानी से मिलकर,वह […] Read more » खोदी धरती बोई बीज