पर्यावरण लेख सूरज के तीखे होते तेवर और अल-नीनो May 26, 2026 / May 26, 2026 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment इस बार गर्मी का मिजाज इसलिए भी अलग है, क्योंकि कई तटीय इलाकों और मैदानी क्षेत्रों में नमी वाली गर्मी यानी उमस का असर भी देखने में आ रहा है। इससे लू लगने का खतरा और अधिक बढ़ जाता है। Read more » अल-नीनो
पर्यावरण लेख तपती धरती, तड़पता जीवन और तंत्र की तंद्रा : बिगड़ता पर्यावरण संतुलन और अस्तित्व का संकट May 25, 2026 / May 25, 2026 by डॉ. शैलेश शुक्ला | Leave a Comment आज भारत का सामान्य नागरिक यह महसूस करने लगा है कि मौसम अब पहले जैसा नहीं रहा। बचपन की गर्मियां और आज की गर्मियों में जमीन-आसमान का अंतर है। कभी मई-जून की दोपहरें भी इतनी भयावह नहीं लगती थीं। गांवों में पेड़ों की छांव, मिट्टी की नमी Read more » Scorching earth Suffering Lives the System's Sleepiness: Deteriorating Environmental Balance and an Existential Crisis तड़पता जीवन तड़पता जीवन और तंत्र की तंद्रा तपती धरती बिगड़ता पर्यावरण संतुलन
लेख अलनीनो से प्रभावित होने के बाद भारत के पास क्या इंतजाम ? May 25, 2026 / May 25, 2026 by सौरभ वार्ष्णेय | Leave a Comment सौरभ वार्ष्णेयदुनिया भर में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच अलनीनो एक बार फिर भारत के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। प्रशांत महासागर के तापमान में असामान्य वृद्धि से उत्पन्न होने वाली यह मौसमी घटना भारतीय मानसून को सीधे प्रभावित करती है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में मानसून की थोड़ी-सी […] Read more » अलनीनो
लेख मूक जीवों के लिए करुणा का संकल्प: यह हमारी सनातन भारतीय संस्कृति का अहम् हिस्सा ! May 23, 2026 / May 23, 2026 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment मूक जीवों के लिए करुणा का संकल्प Read more » मूक जीवों के लिए करुणा का संकल्प
व्यंग्य हाँ, मैं सरकारी बाबू के रूप में कॉकरोच हूँ May 22, 2026 / May 22, 2026 by डॉ. शैलेश शुक्ला | Leave a Comment कॉकरोच अँधेरे में पनपता है। सरकारी बाबू अस्पष्टता में। जितना कम स्पष्ट नियम होगा, उतनी अधिक हमारी शक्ति होगी। यदि नियम सरल हो जाएँ तो जनता सीधे काम करवा लेगी। फिर हमारा महत्व कहाँ रहेगा? इसलिए व्यवस्था को इतना जटिल बना दो कि आदमी जन्म प्रमाणपत्र बनवाते-बनवाते दर्शनशास्त्री हो जाए। Read more » सरकारी बाबू के रूप में कॉकरोच
लेख समाज डिजिटल दौर में पाठकों का सूखता संसार May 22, 2026 / May 22, 2026 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment वास्तव में आज साहित्य के क्षेत्र में रचनाकारों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हर दिन हजारों कविताएँ, लेख, कहानियाँ और विचार सोशल मीडिया पर साझा किए जाते हैं। Read more » The drying world of readers in the digital age डिजिटल दौर में पाठकों का सूखता संसार
लेख हर नए घर के साथ बढ़ रहा कार्बन संकट May 21, 2026 / May 21, 2026 by निशान्त | Leave a Comment संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम यानी United Nations Environment Programme और Global Alliance for Buildings and Construction की नई रिपोर्ट Global Status Report for Buildings and Construction 2025-2026 Read more » कार्बन संकट
लेख तपती कक्षाएँ और संवेदनहीन व्यवस्था May 21, 2026 / May 21, 2026 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment तपती कक्षाएँ Read more » तपती कक्षाएँ
कविता चाहा उन्हें समुद्र दें, वे निकले बदहाल। May 21, 2026 / May 21, 2026 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment चाहा उन्हें समुद्र दें Read more » चाहा उन्हें समुद्र दें
लेख मधुमक्खियां, मानव और प्रकृति : साझी जिम्मेदारी May 21, 2026 / May 21, 2026 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment विश्व मधुमक्खी दिवस Read more » विश्व मधुमक्खी दिवस
लेख विधि-कानून मनुस्मृति और भारतीय संविधान, भाग – 15 क May 20, 2026 / May 30, 2026 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment स्वानि कर्माणि कुर्वाणा दूरे सन्तोऽपि मानवा:। प्रिया भवन्ति लोकस्य स्वे स्वे कर्मण्यवस्थिताः।। Read more » मनुस्मृति और भारतीय संविधान
लेख विधि-कानून मनुस्मृति और भारतीय संविधान – भाग – 14 May 19, 2026 / May 30, 2026 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment महर्षि मनु ने कहा है कि राजा को ऐसे उत्तम वैदिक शिक्षक और विद्वानों के मार्गदर्शन और मर्यादा में रहकर ही अपने सारे कार्य करने चाहिए। कई लोगों ने इस प्रकार की व्यवस्थाओं को ब्राह्मणवाद कहकर उनकी आलोचना की है। Read more » Manusmriti and the Indian Constitution मनुस्मृति और भारतीय संविधान