लेख कैसे फैलेगा शिक्षा का उजियारा February 25, 2020 / February 25, 2020 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment अमित बैजनाथ गर्ग जयपुर, राजस्थान बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ जैसे नारे गांवों तक तो पहुंच गए, लेकिन शिक्षा नहीं पहुंची। ऐसे देश में जहां शिक्षा बच्चों का मूल अधिकार है, वहां हर 10 अशिक्षित बच्चों में से 8 लड़कियों का होना शर्म की बात है। शिक्षा के लिए जद्दोजहद करती ग्रामीण बालिकाएं बड़ी मुश्किल से यदि […] Read more » कैसे फैलेगा शिक्षा का उजियारा शिक्षा का उजियारा
कहानी सदमा February 25, 2020 / February 25, 2020 by आलोक कौशिक | Leave a Comment *दो महीने हो गये। शांति देवी की हालत में कुछ भी सुधार ना हुआ। पुरुषोत्तम बाबू को उनके मित्रों और रिश्तेदारों ने सुझाव दिया कि एक बार अपनी पत्नी को मनोचिकित्सक से दिखवा लें। पुरुषोत्तम बाबू को सुझाव सही लगा। अगले ही दिन अपने बड़े पुत्र सौरभ एवं पुत्रवधू संध्या के साथ अपनी पत्नी को […] Read more » सदमा
कविता अभी जिंदा हूं खुद को बताना February 25, 2020 / February 25, 2020 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment अभी मरी नहीं हूं यह जतलाना खुदसे कहना, घर को जाती हूं मैं खुदसे कहना, घर को आती हूं मैं खुद से कहना, खाना खा लिया क्या खुद ही कहना, अभी कहां,खाती हूं मैं। जब भी घर में अकेली होती है, वह सभी काम कर रोती है बर्तन-कपड़े साफ करना खाना पकाना और खिलाना एक […] Read more » अभी जिंदा हूं खुद को बताना
कविता एससी एसटी एक्ट February 25, 2020 / February 25, 2020 by मुकेश चन्द्र मिश्र | Leave a Comment राष्ट्रवाद का झोला टांगे मैं सवर्ण आवारा हूँ। मुसलमान से यदि बच जाऊं तो दलितों का चारा हूँ॥ कांग्रेस ने दर्द दिए तब हमने कमल का फूल चुना। किंतु जेल में डाल रहे ये हमे कोई पड़ताल बिना॥ पशुवों की भी चिंता होती उनके हित सरकार खड़ी। हम उनसे भी बदतर हमपर लोकतन्त्र की मार […] Read more » एससी/एसटी एक्ट कविता
लेख उर्दू सिर्फ मुसलमानों की भाषा नहीं है. February 24, 2020 / February 24, 2020 by डॉ. अमरनाथ | Leave a Comment · डॉ. अमरनाथ इधर उर्दू को मुसलमानों की भाषा के रूप में रेखांकित करने का चलन बढ़ा है. यह गलत अवधारणा है. कोई भी भाषा किसी खास मजहब की नहीं होती. हर भाषा किसी न किसी जाति ( कौम) की होती है. उर्दू भी सिर्फ मुसलमानों की भाषा नहीं है. यदि वह सिर्फ मुसलमानों […] Read more » उर्दू
कविता आदमी की कोई हद न रही February 20, 2020 / February 25, 2020 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment जाने ये क्या हद हो गयी ? कि आदमी की हद सरहदों में खो गयी सरहद बना ये आदमी,आदमी है कहाँ खोखला उसका वजूद और झूठा उसका जहाँ, सगे भाईयों के बीच,आपस में ठनी हो गयी, आंगन में लगी बाँगड़., और घनी हो गयी ? जाने ये क्या हद हो गयी कि आदमी मुस्कान गमों […] Read more » आदमी की कोई हद न रही
कविता साहित्य दान… February 20, 2020 / February 26, 2020 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment उतारो उतारो आज तुम जिस्म से अपनी खूबसूरत आत्मा का यह गहना उठो दुआयें देकर यमराज को, यह आत्मा दान दे दो। बनाकर भेजी थी विधाता ने तेरी निराली सूरत जिस्म इंसान का देकर, गढी गजब की मूरत उठो प्रार्थनायें गाकर अपने प्रभु को, इन साँसों का आभार दे दो। आज मगरूर है कितना, तेरा […] Read more » दान
कविता पहनी है धरती ने ज्योति की पायल February 20, 2020 / February 26, 2020 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment आज आसमाँ से ये जाकर कह दे कोई सितारों की महफिल कहीं और सजायें। पहनी है धरती ने ज्योति की पायल, दीपों के घुंघरू, स्वर झाँझन सुनायें। खैर नहीं तेरी ओ अमावस्या के अंधेरे धरती से उठा ले तू आज अपने ड़ेरे। रोशनी को देख अंधेरा थरथराया खूब चीखा पटाखों में, अंधेरे का हुआ सफाया। […] Read more » पहनी है धरती ने ज्योति की पायल
कविता खाली हाथ February 20, 2020 / February 21, 2020 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment सारी रात नींद आँखों से कोसों दूर है ख्यालों का पुलिंदा मधुर पल की चाह में एक पल के लिये जीने को उत्सुक है। नितांत अकेला, कुर्सी पर बैठा आदमी विचारों में ड़ूबा तलाश रहा है उस पल को और वह मधुर पल उसके हाथों से खिसक कर बहुत दूर असीम में सरकता हुआ चला […] Read more » खाली हाथ
कविता जो करना है अभी करें, आज के दिन February 20, 2020 / February 21, 2020 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment दिल में नये अरमान बसायें,आज के दिन। दिल को गूंचे की तरह खिलायें, आज के दिन॥ फूलों की तरह हँसे-हँसायें, आज के दिन। बादल की तरह झूमे-छा जायें, आज के दिन॥ मुस्कान की बरखा में नहायें,आज के दिन। कलियों की तरह खिल जायें, आज के दिन॥ भँवरों की तरह भनभनायें, आज के दिन। झरनों सा […] Read more » Do what you want to do nowadays जो करना है अभी करें
कविता ओ भारत की संतानों जागो February 20, 2020 / February 21, 2020 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment ओ सोये हुये नादानों जागो, ओ भारत की संतानों जागो परिवर्तन का सूर्य उगा है,नीदं भगाओ लम्बी न तानों। ओ माझी तूफान से लड़ने वालों देश सारा ड़ूब रहा है उसे बचालो । तोड़. सभी रूढ़ियों की कच्ची रस्सी इन रस्सियों को, आज जरा आजमालो । परिवर्तन का तूफान उठा है, पतवार उठाओं बाधमान तानों। […] Read more » Awake children of India ओ भारत की संतानों जागो
कविता मेरी बिटिया रानी February 20, 2020 / February 20, 2020 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment मेरे घर जन्मी मेरी बिटिया, जैसे कोई नन्ही सी परी हो। छोटी सी प्यारी मेरी बिटिया जैसे गुड़िया कोई फूल सी हो। दिल की सच्ची मेरी बिटिया सबसे बातें करती न्यारी न्यारी। तुतलाती कोमल हाथों वाली, दिल चुराती बिटिया मेरी प्यारी। गिरती सँभलती, नन्हें पैरों वाली ऊगली मम्मी की थामे मेरी बिटिया। दादा दादी ओर […] Read more » मेरी बिटिया रानी