कविता राजनीति व्यंग्य साहित्य ‘इण्डियन भारत’ के ‘महाभारत’ का दुर्योद्धन-प्रसंग May 18, 2019 / May 18, 2019 by मनोज ज्वाला | 1 Comment on ‘इण्डियन भारत’ के ‘महाभारत’ का दुर्योद्धन-प्रसंग मनोज ज्वाला ‘इण्डिया दैट इज भारत’ के संविधान से संचालित भारतीय लोकतंत्र के महापर्व का १७वां आयोजन जारी है । वर्षों तक सत्ता-सुख भोगता रहा विपक्ष पांच वर्ष पहले १६वें पर्व के दौरान सत्ता गंवा चुके होने के बाद अब इस बार उसे किसी भी तरह हासिल कर लेने के बावत आसमान सिर पर उठा […] Read more » ‘इण्डियन भारत’ poem poetry sattire poem sattire poetry दुर्योद्धन-प्रसंग महाभारत
लेख संघ व गोड्से के सम्बन्ध की अंतर्कथा May 18, 2019 / May 18, 2019 by प्रवीण गुगनानी | Leave a Comment गांधी जी की हत्या के पश्चात के प्रत्येक दशक में दस पांच बार गोएबल्स थियरी के ठेकेदारों ने ये प्रयास सतत किये हैं कि गांधीजी की हत्या को संघ के मत्थे मढ़ दिया जाए जिसमें वे हर बार असफल रहें हैं। अब देश भर में गांधी व गोड़से को लेकर नया विमर्श प्रारम्भ है, इस […] Read more » Godse Mahatma Gandhi Sangh
कविता कलयुग में गौतम बुद्ध कैसे बन पाओगे May 18, 2019 / May 18, 2019 by आर के रस्तोगी | 1 Comment on कलयुग में गौतम बुद्ध कैसे बन पाओगे आर के रस्तोगी इस कलयुग में अब गौतम बुद्ध कैसे बन पाओगे तुम ? चारो तरफ अन्धकार है,कैसे बुद्ध पूर्णिमा मनाओगे तुम ? करो निस्वार्थ सेवा जन जन की,किसी को कष्ट न देना तुम | सत्य अहिंसा का मार्ग अपनाकर,सबको गले से लगा लो तुम || जाना है सबको संसार को छोड़कर,ये बात समझ अब […] Read more » Inspiration poem poem on gautam buddha poetry
कविता व्यंग्य बदला —आर के रस्तोगी May 17, 2019 / May 17, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment पप्पू के जीजा ने,बुआ के भतीजे ने ,जनता को लूटकर,की काली कमाई ,काली कमाई से, दोनों ने मौज उड़ाई,कोठी बंगले बनवाये, फार्म हाउस बनवाये,जब चुनाव आया तो,जनता की बारी आई,जनता ने भी दोनों के कान पकडवा कर खूब, उठक बैठक लगवाई | भाई ने बहन को बुलाया,पार्टी का महासचिव बनाया ,चुनाव का प्रचार कराया ,पर रिजल्ट कुछ न आया […] Read more » poetry political poetry
कविता तितली हूं या परी May 16, 2019 / May 16, 2019 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment ओंठों पर मुस्कान खिली है, आंखों में है जादू। मुझे देखकर खुश कितने हैं, मेरे अम्मा बापू। प्रभूदयाल श्रीवास्तव Read more » poem for children poem for kids तितली हूं या परी
साहित्य इसी गाँव चला आता है । May 15, 2019 / May 15, 2019 by अजय एहसास | Leave a Comment लौट के फिर क्यों इसी गाँव चला आता है ,छोड़ के शहर इसी गाँव चला आता है ।अब तो इस गांव से पतझड़ कभी नहीं जाता ,लेकर आँधी वो इसी गाँव चला आता है ।धर्म , मजहब है और जाति का फसाद यहाँ ,वक़्त बेवक्त इसी गाँव चला आता है ।कभी बुलाने पर सुनते नहीं […] Read more »
कविता नेताओ की विशेषताये May 15, 2019 / May 15, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment जब ये नेता आपस में लड़ते है,जनता को क्या सबक सिखायेगे ?धर्म जाति का भेद बताकर,जनता को यूही आपस में लडायेगे || सत्ता के लालच में ये नेता किसी भी सीमा तक गिर जायेगे |दल बदलू तो आम बात है,ये देश को भी बेचकर खा जायेगे || चोर चोर मौसरे ये भाई है,ये कुर्सी के […] Read more »
कविता ओ३म् की महिमा May 15, 2019 / May 15, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment ओ३म् की महिमा सुनो, ओ३म् में ही सुखी संसार है |ओ३म् में ही प्राण है,ओ३म् ही जग का पालन हार है || ओ३म् ही गीता है,ओ३म् ही कुरान है |ओ३म् ही सब धर्मो की एक खान है || ओ३म् ही बल तेजधारी,ओ३म ही सर्व शक्तिमान है |ओ३म् ही ज्ञान-वर्धक ,ओ३म् ही सबसे ज्ञानवान है || […] Read more » the importance of om ओ३म् की महिमा
लेख साहित्य महान पेशवा बालाजी विश्वनाथ May 14, 2019 / May 14, 2019 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment अध्याय 11 मराठा शासनकाल में प्रधानमंत्री को ही पेशवा कहा जाता था । राजा की अष्टप्रधान परामर्शदात्री परिषद में इसका स्थान सबसे प्रमुख होता था ।इसलिए बराबर वालों में प्रथम या प्रधान होने के कारण यह पद प्रधानमंत्री का पद बन गया । यही स्थिति हमारे आज के शासन में प्रधानमंत्री की होती हैं , […] Read more »
कविता माँ की ममता का कोई मोल नहीं | May 14, 2019 / May 14, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment माँ की ममता का कोई मोल नहीं |उसके प्यार की कोई तोल नहीं || माँ की बिन है ये जिन्दगी कोरी |उसकी है सबसे मीठी सुंदर लोरी || माँ के बिन कोई जन्म नहीं ले सकता |उसके ऋण को कभी नहीं चुका सकता || माँ का स्थान कोई नही ले सकता |उसका पूरक कोई नहीं […] Read more » mother's day
लेख साहित्य प्रथम स्वतंत्र्य समर की 162वीं वर्षगांठ (10 मई)पर विशेष May 10, 2019 / May 10, 2019 by दिनेश कुमार | Leave a Comment हरियाणा के जर्र जर्रे ने लिखी है यह बलिदान गाथादिनेश कुमार आज देश 1857 के महासमर की 162वीं वर्षगांठ मना रहा है। पराधीनता की बेड़ियों में जकड़े भारत का यह पहला सामूहिक और योजनाबद्ध प्रयास था, जब उसने अंग्रेज की सत्ता को खुली चुनौती दी। आजादी की इस पहली लड़ाई के योद्धा ब्रिटिश हुकूमत से […] Read more » प्रथम स्वतंत्र्य समर
कविता साहित्य चाह है तेरे दरबार में आने की May 10, 2019 / May 10, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment चाह नहीं अब कुछ खाने की |चाह नहीं अब और कमाने की ||चाह बस केवल प्रभु जी मेरी |तेरे ही दरबार में बस आने की || चाह नहीं अब किसी खजाने की |चाह नहीं अब मकान बनाने की ||करो प्रभुजी आदेश तुम यम को मुझको अपने दरबार बुलाने की || हर चाह को मैंने त्याग दिया […] Read more »