लेख साहित्य शिकार करने का जन्मसिद्ध अधिकार April 5, 2016 by आरिफा एविस | Leave a Comment एक बार जंगल राज्य में राजा का चुनाव होना था. अजी चुनाव क्या… बस खाना-पूर्ति तो करनी थी ताकि जंगल लोकतंत्र का भी ख्याल रखा जा सके. भला वर्षों पुरानी इस प्राचीन प्रथा को नया जंगल निजाम कैसे बदल सकता है? जंगल के राजा के चुनाव में कोई जीते या हारे … राजा तो नागनाथ […] Read more » Featured जन्मसिद्ध अधिकार शिकार
लेख शख्सियत साहित्य ‘सेल्यूलॉयड मैन’ पीके नायर को याद करते हुए April 5, 2016 / April 5, 2016 by मनोज कुमार | Leave a Comment मनोज कुमार 50 साल पहले लगभग-लगभग 32-35 साल का एक युवा बनाना तो फिल्में था लेकिन उसकी रूचि सिनेमा के इतिहास को संजोने की हुई. एक बड़े सपने को लेकर छोटी सी कोशिश करने वाले परमेश कृष्णनन नायर ने अपने हौसले से एक ऐसे संग्रहालय गढ़ दिया जिसे आज हम नेशनल फिल्म आर्काइव ऑफ इंडिया […] Read more » ‘सेल्यूलॉयड मैन’ Featured pk nair remembering saluloid man पीके नायर
मीडिया लेख विधि-कानून विविधा साहित्य तब सम्पादक की जरूरत ही क्यों है ? April 2, 2016 by मनोज कुमार | Leave a Comment मनोज कुमार इस समय की पत्रकारिता को सम्पादक की कतई जरूरत नहीं है। यह सवाल कठिन है लेकिन मुश्किल नहीं। कठिन इसलिए कि बिना सम्पादक के प्रकाशनों का महत्व क्या और मुश्किल इसलिए नहीं क्योंकि आज जवाबदार सम्पादक की जरूरत ही नहीं बची है। सबकुछ लेखक पर टाल दो और खुद को बचा ले जाओ। […] Read more » Featured need of editor तब सम्पादक की जरूरत ही क्यों है
व्यंग्य साहित्य सही हैं बॉस April 2, 2016 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment विज्ञानियों ने पेट्रोल को सबसे ज्वलनशील पदार्थ माना हैं लेकिन अगर प्राणीमात्र की बात करे तो “बॉस” नाम का प्राणी सबसे ज़्यादा ज्वलनशील माना जाता हैं । “दूध के जले” , भले छाछ फूंक-फूंक कर पीते हैं लेकिन “बॉस के जले” तो ऑफिस की कैंटीन में “कोल्ड -कॉफी” भी फूंक- फूंक कर पीते हुए […] Read more » boss is always right सही हैं बॉस
महत्वपूर्ण लेख लेख समाज साहित्य देश का वास्तविक गद्दार कौन? गांधी-नेहरू या सावरकर, भाग-6 April 2, 2016 by राकेश कुमार आर्य | 2 Comments on देश का वास्तविक गद्दार कौन? गांधी-नेहरू या सावरकर, भाग-6 जब सुभाष के मार्गदर्शक बने वीर सावरकर जब क्रांतिवीर सावरकर ने 26 फरवरी 1966 को अपना नाशवान शरीर त्यागा तो उस समय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी भावना व्यक्त करते हुए कहा था-‘‘सावरकर जी की मृत्यु से विद्यमान भारत के एक महान व्यक्ति को हमने खो दिया।’’ बात स्पष्ट है कि इंदिराजी की दृष्टि में […] Read more » who is the real traitor of India गांधी देश का वास्तविक गद्दार नेहरू सावरकर हिंदुओं का सैनिकीकरण
मनोरंजन लेख सिनेमा रोमांस से डूबा करिअर! April 2, 2016 / April 2, 2016 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment कंगना रानाउत ने कुछ समय पहले एक और धमाका किया था। अपने संघर्ष के दिनों के अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा था कि किसी हीरो से रोमांटिक रिश्तो जोड़ने में किसी हीरोइन की पसंद या नापसंद को तरजीह नहीं दी जाती। कुछ को करिअर की खातिर समझौता करना पड़ता है तो कुछ भावनात्मक […] Read more » #bollywood in hindi #film article in hindi actor Shahrukh Khan Dilip Kumar Dilip Kumar's career Featured Film Industry films Heroine Kamini Kaushal Kangana Ranaut Marital relationship relationship Shahrukh and Priyanka प्रियंका चोपड़ा रोमांस से डूबा करिअर! शाहरुख खान
महत्वपूर्ण लेख लेख समाज साहित्य देश का वास्तविक गद्दार कौन? भाग-5 April 2, 2016 by राकेश कुमार आर्य | 1 Comment on देश का वास्तविक गद्दार कौन? भाग-5 बात दिसंबर 1929 की है। यही वह वर्ष और महीना था जब कांग्रेस भारत की स्वतंत्रता के लिए अपनी पुरानी मांग ‘अधिशासी अधिराज्य’ अर्थात डोमिनियन स्टेटस-को छोडक़र पूर्ण स्वराज्य की मांग करने वाली थी, और इसी माह के अंत में कांग्रेस ने लाहौर में अपनी बैठक में पूर्ण स्वाधीनता का संकल्प प्रस्ताव पारित कर दिया। […] Read more » who is the real traitor of India गद्दार देश का गद्दार देश का वास्तविक गद्दार कौन
लेख समाज साहित्य देश का वास्तविक गद्दार कौन? भाग-4 March 31, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment गांधी जी अपने स्वभाव से ही हिंदू विरोधी थे। इसे आप ऐसे भी कह सकते हैं कि बापू देश का विभाजन कराने के लिए आतुर शक्तियों या व्यक्तियों के सामने इतने झुक गये थे कि वह ‘हिंदू विरोधी’ हो गये थे। इन्दुलाल याज्ञिक ने अपनी पुस्तक ‘गांधीजी’ (पृष्ठ 195) पर लिखा है-‘‘हम पुराने जेल खाने […] Read more » Featured देश का वास्तविक गद्दार कौन
व्यंग्य साहित्य सचमुच निराली है महिमा चुनाव की …!! March 30, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा वाकई हमारे देश में होने वाले तरह – तरह के चुनाव की बात ही कुछ औऱ है। इन दिनों देश के कई राज्यों में विधानसभा के चुनाव हो रहे हैं। इस दौरान तरह – तरह के विरोधाभास देखने को मिल रहे हैं। पता नहीं दूसरे देशों में होने वाले चुनावों में एेसी […] Read more » चुनाव
कहानी साहित्य दर्द March 30, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment मैं दिल्ली के पास एक छोटे से नगर का रहने वाला हूं। वहां आसपास के लोग खेती के काम से खाली होकर दोपहर में खरीदारी करने आते हैं। शाम होते तक वहां का जनजीवन शांत हो जाता है। यद्यपि बिजली, सड़क, सिनेमा, वाहनों की उपलब्धता आदि से अब वहां का स्वरूप काफी बदल गया है। […] Read more » दर्द
पुस्तक समीक्षा साहित्य पांचो नौबत बाजती –(समीक्षा) March 30, 2016 / March 30, 2016 by बी एन गोयल | 2 Comments on पांचो नौबत बाजती –(समीक्षा) बी एन गोयल कल्पना कीजिये- कल्पना क्यों – ये दो वास्तविक प्रकरण हैं. मंच पर कुमार गन्धर्व का गायन चल रहा है – ….उड़ जायेगा ……हंस अकेला ……..भक्ति की रस धार बह रही है, गायक के स्वर सीधे ब्रह्म से जुड़े हैं श्रोता वर्ग मंत्र मुग्ध है, आँखें बंद हैं, कुछ मुंडियां हिल रही […] Read more » पांचो नौबत बाजती
व्यंग्य साहित्य पुरस्कार का मापदंड March 30, 2016 by आरिफा एविस | Leave a Comment आरिफा एविस पुरस्कार किसी भी श्रेष्ठ व्यक्ति के कर्मो का फल है बिना पुरस्कार के किसी भी व्यक्ति को श्रेष्ठ नहीं माना जाना चाहिए. बिना पुरस्कार व्यक्ति का जीवन भी कुछ जीवन है? जैसे “बिन पानी सब सून.” इसलिए कम से कम जीवन में एक पुरस्कार तो बनता है जनाब. चाहे वह राष्ट्रीय, प्रदेशीय, धार्मिक, जातीय या कम से […] Read more » पुरस्कार का मापदंड