लेख साहित्य संस्कृत भाषा: विश्व की प्रथम अमरभाषा है August 10, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 2 Comments on संस्कृत भाषा: विश्व की प्रथम अमरभाषा है डा. राधेश्याम द्विवेदी जिस प्रकार देवता अमर हैं उसी प्रकार सँस्कृत भाषा भी अपने विशाल-साहित्य, लोक हित की भावना ,विभिन्न प्रयासों तथा उपसर्गो के द्वारा नवीन-नवीन शब्दों के निर्माण की क्षमता आदि के द्वारा अमर है ।आधुनिक विद्वानों के अनुसार संस्कृत भाषा का अखंड प्रवाह पाँच सहस्र वर्षों से बहता चला आ रहा है। भारत […] Read more » Featured heart of all languages Sanskrit विश्व की प्रथम अमरभाषा संस्कृत भाषा
कला-संस्कृति लेख साहित्य भक्तिधारा के महान कवि – गोस्वामी तुलसीदास August 10, 2016 / August 10, 2016 by मृत्युंजय दीक्षित | Leave a Comment 10 अगस्त पर विशेष:- मृत्युंजय दीक्षित हिंदी साहित्य के महान कवि संत तुलसीदास का जन्म संवत् 1956 की श्रावण शुक्ल सप्तमी के दिन अभुक्तमूल नक्षत्र में हुंआ था।इनके पिता का नाम आतमा रामदुबे व माता का नाम हुलसी था। जन्म के समय तुलसीदास रोये नहीं थे अपितु उनके मुंह से राम शब्द निकला था। साथ […] Read more » Featured गोस्वामी तुलसीदास भक्तिधारा के महान कवि
व्यंग्य साहित्य शर्मसार भी तो किसके आगे August 9, 2016 by अशोक गौतम | Leave a Comment बाजार द्वारा अपने ठगे जाने की अनकही प्रसन्नता के चलते गुनगुनाता- भुनभुनाता हुआ घर की ओर आ रहा था कि घर की ओर जा रहा था राम जाने। बाजार द्वारा ठगे जाने के बाद आदमी होश खो बैठता है और मदहोशी में घर की ओर अकसर लौटता है मंद मंद मुस्कुराते कि उसे बाजार से […] Read more » शर्मसार
व्यंग्य साहित्य उम्मीद August 9, 2016 by चारु शिखा | Leave a Comment उम्मीद (क्षणिकाएं ) उम्मीद सालों की सुस्त पड़ी ज़िंदगी में , कुछ मुस्कुराहट आ है । फिर से जीने की उमंग और खुद को जानना जैसे लौटे पंछी अपने देश डूबते को तिनके का सहारा काफी होता है । प्यार शाख से टूट कर अलग हो गए हवा से भी खफा हो गए क्या […] Read more » उम्मीद
व्यंग्य साहित्य नेता बीमार, दुखी संसार August 9, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment शर्मा जी कल मेरे घर आये, तो उनके चेहरे से दुख ऐसे टपक रहा था, जैसे बरसात में गरीब की झोंपड़ी। मैंने कुछ पूछा, तो मुंह से आवाज की बजाय आंखों से आंसू निकलने लगे। उनके आंसू भी क्या थे, मानो सभी किनारे तोड़कर बहने वाली तूफानी नदी। यदि मैं कविहृदय होता, तो इस विषय […] Read more » दुखी संसार नेता बीमार
लेख साहित्य गोरी हुकूमत को खुली चुनौती थी काकोरी कांड August 8, 2016 by पुष्पेन्द्र दीक्षित | Leave a Comment क़ाकोरी कांड विशेष -9 अगस्त स्वतंत्रता आंदोलन का बहुचर्चित काकोरी कांड जिसने ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला कर रख दी थी। वह काकोरी कांड 9 अगस्त 1947 को काकोरी स्टेशन पर हुआ था किन्तु यदि हमारे क्रांति पुरोधाओं को पहुँचने में देरी न हुई होती तो इस कांड को 8 अगस्त 1947 को ही अंजाम […] Read more » Featured Kakori Kand काकोरी कांड गोरी हुकूमत को खुली चुनौती
लेख नैतिक मूल्य मानवता की पहचान होते हैं August 8, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी असंतोष, अलगाव, उपद्रव, आंदोलन, असमानता, असामंजस्य, अराजकता, आदर्श विहीनता, अन्याय, अत्याचार, अपमान, असफलता अवसाद, अस्थिरता, अनिश्चितता, संघर्ष, हिंसा यही सब घेरे हुए है आज हमारे जीवन को.व्यक्ति में एवं समाज में साम्प्रदायिकता, जातीयता, भाषावाद, क्षेत्रीयतावाद, हिंसा की संकीर्ण कुत्सित भावनाओं व समस्याओं के मूल में उत्तरदायी कारण है मनुष्य का नैतिक और […] Read more » नैतिक मूल्य मानवता की पहचान
लेख नये सपने बुनकर स्वतंत्रता को सार्थक दिशा दें August 6, 2016 / August 6, 2016 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग पन्द्रह अगस्त हमारे राष्ट्र का गौरवशाली दिन है, इसी दिन स्वतंत्रता के बुनियादी पत्थर पर नव-निर्माण का सुनहला भविष्य लिखा गया था। इस लिखावट का हार्द था कि हमारा भारत एक ऐसा राष्ट्र होगा जहां न शोषक होगा, न कोई शोषित, न मालिक होगा, न कोई मजदूर, न अमीर होगा, न कोई गरीब। […] Read more » independence आजादी के 69 वर्ष स्वतंत्रता
व्यंग्य साहित्य विवादों की बाढ़ में इंसान…!! August 4, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा मैं जिस शहर में रहता हूं वहां कोई नदी नहीं है इसलिए हम बाढ़ की विभीषिका को जानने – समझने से हमेशा बचे रहे। कहते हैं अंग्रेजों ने इस शहर में रेलवे का कारखाना बसाया ही इसलिए था कि यह हमेशा बाढ़ के खतरे से सुरक्षित रहेगा। हालांकि मेरे शहर से करीब […] Read more » बाढ़ बाढ़ में इंसान विवादों की बाढ़
आलोचना साहित्य बरखा जी! आप पहले भारतीय हैं या पत्रकार? August 3, 2016 / August 3, 2016 by विश्व गौरव | 1 Comment on बरखा जी! आप पहले भारतीय हैं या पत्रकार? बरखा दत्त के नाम खुला पत्र बरखा जी नमस्ते, आशा है राष्ट्रवाद और निष्पक्षता की बहस को नए आयाम देने के लिए आपका अध्ययन जारी होगा। मैडम, हाल ही में आपके द्वारा की गई फेसबुक पोस्ट को पढ़ा। उसे पढ़कर मन में एक सवाल उठा कि आप और आपके कुनबे के लोग पहले भारतीय हैं […] Read more » आप पहले भारतीय हैं पत्रकार बरखा जी.featured
लेख शख्सियत साहित्य राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती ‘कवि दिवस’ August 2, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी जीवन परिचय:- मैथिलीशरण गुप्त का जन्म ३ अगस्त सन १८८६ ई. में पिता सेठ रामचरण कनकने और माता कौशिल्या बाई की तीसरी संतान के रुप में उत्तर प्रदेश में झांसी के पास चिरगांव में हुआ। माता और पिता दोनों ही वैष्णव थे। वे “कनकलता” नाम से कविता करते थे। इनके पिता सेठ […] Read more » ‘कवि दिवस’ मैथिलीशरण गुप्त राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त
जन-जागरण महत्वपूर्ण लेख विविधा साहित्य प्राचीन कश्मीर का अनसुना इतिहास August 1, 2016 / August 1, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 2 Comments on प्राचीन कश्मीर का अनसुना इतिहास डा. राधेश्याम द्विवेदी हम आपको एक ऐसी दर्दनाक सच्चाई बताने जा रहे है। जो देश के 99% से ज्यादा लोगो को पता नहीं है। आप सभी ने सुना होगा कश्मीरी पंडितो के बारे में। हम सभी ने सुना है की हा कुछ तो हुआ था कश्मीरी पंडितो के साथ। लेकिन क्या हुआ था क्यों हुआ […] Read more » Featured history of Kashmir कश्मीर का अनसुना इतिहास प्राचीन कश्मीर इतिहास