राजनीति लेख समाज साहित्य देश का वास्तविक गद्दार कौन? गांधी-नेहरू या सावरकर, भाग-3 March 30, 2016 / March 30, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment गांधीजी आजीवन अहिंसा की बात करते रहे। कांग्रेस ने भी इसे अपनाने की घोषणाएं की और स्वतंत्रता के पश्चात यह भी प्रचारित किया कि देश को आजादी केवल गांधीजी की अहिंसा के कारण ही मिली है। इस पर 1961 ई. में वीर सावरकर जी ने एक लेख लिखा-‘क्या स्वराज्य का श्रेय केवल कांग्रेस को ही […] Read more » Featured who is the real traitor of India गांधी देश का वास्तविक गद्दार कौन नेहरू सावरकर
आलोचना साहित्य मान भी जाईये साहब ! ‘शोषण’ ही आज का नया ‘पेशा’ है… March 30, 2016 by हिमांशु तिवारी आत्मीय | Leave a Comment गजब है सियासत भी। आज राजनीतिक पार्टियों के इतर आम जिंदगियों में भी उतर आई है। कहीं न कहीं हर पेशे में अब सियासत दिखाई देने लगी है। दरअसल कुछ लोग अपने सह कर्मचारियों के साथ ही निचले तबके में कार्यरत् लोगों का भी शोषण एकदम जनता सरीखे करना चाहते हैं। जैसे कि कल तक […] Read more » exploitation is the new proffession नया 'पेशा' शोषण
कविता साहित्य नव संवत्सर पर इड़ा, मही, सरस्वती को नमन March 29, 2016 by विमलेश बंसल 'आर्या' | Leave a Comment विमलेश बंसल ‘आर्या’ नमन तुम्हें हे नव संवत्सर, नमन तुम्हें हे आर्य समाज। नमन तुम्हें हे भारत माता, नमन तुम्हें हे प्रिय ऋषिराज।। नव संवत् की चैत्र पंचमी, आर्य समाज बनाया था। गहन नींद से जगाकर ॠषि ने, सत्य का बोध कराया था।। पीकर विष पत्थर खा खाकर, पुनः किया हमको आगाज़॥ नमन तुम्हें […] Read more » नव संवत्सर नव संवत्सर पर इड़ा सरस्वती को नमन
महत्वपूर्ण लेख राजनीति लेख समाज देश का वास्तविक गद्दार कौन? गांधी-नेहरू या सावरकर March 28, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment भाग-2 देश की राष्ट्रभाषा हिंदी के साथ कांग्रेस की दोगली और राष्ट्रद्रोही मानसिकता प्रारंभ से ही रही। वह यह निर्णय नही कर पाई कि इस देश की राष्ट्रभाषा और राजभाषा हिंदी ही रहेगी और उसे धीरे-धीरे संस्कृतनिष्ठ बनाकर देश की अन्य भाषाओं के उन शब्दों का संस्कृत मूल खोजकर भी उसमें डाला जाएगा जो थोड़े […] Read more » Featured traitor of country India गद्दार गांधी देश नेहरू सावरकर
लेख साहित्य कोशल का बौद्ध कालीन नगरक निगम इतिहास एवं पुरातात्विक प्रमाण March 28, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा.राधेश्याम द्विवेदी परिचय एवं अवस्थिति:- नगरक निगम,नगर बाजार,नगर खास, कपिल नगर एवं औरंगाबाद नगर आदि विविध नामों से पुकारा जाने वाला यह ग्राम पंचायत बस्ती जिले व मण्डल की दूसरी सबसे बड़ी ग्राम पंचायत है। जिले व मण्डल की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत इसी तहसील तथा पुराने राज्य क्षेत्र का अंश गनेशपुर है। नगर खास […] Read more » Featured इतिहास कोशल का बौद्ध कालीन नगरक निगम पुरातात्विक प्रमाण बौद्ध कालीन नगरक निगम
आलोचना साहित्य रिश्ता: ‘आधुनिक अध्यात्म’ और व्यवसाय का ? March 26, 2016 by निर्मल रानी | 2 Comments on रिश्ता: ‘आधुनिक अध्यात्म’ और व्यवसाय का ? निर्मल रानी भारतवर्ष को अध्यात्म के क्षेत्र में विश्व का सबसे बड़ा देश माना जाता है। हमारे देश में अनेक ऐसे तपस्वी व त्यागी,महान अध्यात्मवादी,पीर-फ़क़ीर, सूफ़ी-संत गुज़रे हैं जिन्होंने नि:स्वार्थ रूप से समाज में मानवता के परोपकार हेतु तमाम ऐसे कार्य किए जिसकी बदौलत उनके अनुयाईयों की संख्या तथा उनके प्रति श्रद्धा इस हद तक […] Read more » Featured आधुनिक अध्यात्म व्यवसाय
व्यंग्य साहित्य घोड़े की टांग पे, जो मारा हथौड़ा : व्यंग्य March 26, 2016 / March 26, 2016 by आरिफा एविस | 1 Comment on घोड़े की टांग पे, जो मारा हथौड़ा : व्यंग्य आरिफा एविस बचपन में गाय पर निबन्ध लिखा था. दो बिल्ली के झगड़े में बन्दर का न्याय देखा था. गुलजार का लिखा गीत ‘काठी का घोड़ा, घोड़े की दुम पे जो मारा हथौड़ा’ भी मिलजुलकर खूब गाया था. लेकिन ये क्या घोड़े की दुम पर, हथौड़ा नहीं मारा गया बल्कि उसकी टांग तोड़ी गयी. देखो […] Read more » घोड़े की टांग पे जो मारा हथौड़ा
लेख नर सेवा नारायण सेवा March 25, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment आज शेरगढ़ में न कोई दुकान खुली थी और न स्कूल। चूंकि आज ‘निरंजन बाबा’ के अस्थिकलश को भूसमाधि दी जाने वाली थी। पूरा गांव वहीं एकत्र था। सबको लग रहा था कि ‘बाबा’ नहीं, उनका कोई सगा-सम्बन्धी ही चला गया है। सचमुच ‘बाबा’ का व्यक्तित्व था ही ऐसा। निरंजन बाबा के पिताजी उस इलाके […] Read more » नर सेवा नारायण सेवा
कविता साहित्य उलझन March 25, 2016 by बीनू भटनागर | Leave a Comment उलझी हुई सी ज़िन्दगी, बेचैन सी रातें, उलझे हुए तागों मे, पड़ती गईं गाँठे, ये गाँठे अब, खुलती नहीं मुझसे उलझी हुई गाँठों को बक्से बन्द करदूँ, या गाँठों से जुडी बातों को, जहन से अलग कर दूँ। अब कोई मक़सद, नया मै कहीं ढूँढू, ज़िन्दगी की यही चाल है तो, ऐसे ही न क्यो जी लूँ Read more » उलझन
कविता साहित्य केकरा संग खेलहूं फाग March 24, 2016 by विपिन किशोर सिन्हा | 3 Comments on केकरा संग खेलहूं फाग बुरा न मानें होली है — एक ठे स्पेसल फगुआ केकरा संग खेलहूं फाग इटली दूर बसत है इटली दूर बसत है केकरा संग खेलहूं फाग कि नैहर दूर बसत है। परणव से मोहे लाज लगत है मोदिया के मन बेईमान नैहर दूर बसत है केकरा संग खेलहूं फाग नैहर दूर बसत है। दिग्गी मगन […] Read more » Featured केकरा संग खेलहूं फाग
लेख साहित्य सरकारी पानी March 24, 2016 by विजय कुमार | 1 Comment on सरकारी पानी बिजली और पानी को बरबाद होते देख मुझे बहुत गुस्सा आता है। मैं इस मामले में कुछ सनकी स्वभाव का हूं। यदि कहीं ऐसा होता दिखे, तो मैं दूसरों को कुछ कहने की बजाय स्वयं ही आगे बढ़कर इन्हें बंद कर देता हूं। कई लोग इसे मेरी मूर्खता कहते हैं। यद्यपि पीठ पीछे वे इसकी […] Read more » wastage of water पानी सरकारी पानी
व्यंग्य साहित्य रंगहीन दुनिया में राहु – केतु …!! March 24, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | 1 Comment on रंगहीन दुनिया में राहु – केतु …!! तारकेश कुमार ओझा जब पहली बार खबर सुनी कि पाकिस्तान में एक खेल प्रेमी को इसलिए गिरफ्तार कर लिया गया क्योंकि वह विराट कोहली का बड़ा प्रशंसक था और अनजाने में उसने अपने घर पर भारत का झंडा फहरा दिया तो मेरा माथा ठनका और अनिष्ट की आशंका होने लगी। क्योंकि अरसे से मैं यही […] Read more » holi vacation in pakistan India pakistan रंगहीन दुनिया में राहु - केतु ...!!