कविता साहित्य प्रेम भी अपरिपक्व होने लगा है………. August 28, 2016 by अर्पण जैन "अविचल" | Leave a Comment अर्पण जैन ‘अविचल’ स्त्री की देह तालाब-सी है, बिल्कुल ठहरी हुई सी उसमे नदी के मानिंद वेग और चंचलता कुछ नहीं फिर भी पुरुष उस तालाब में ही प्रेम खोजता है, सत्य है क़ि खोज की भाषा भी सिमट-सी गई हैं वेग का आवरण भी कभी कुंठा के आलोक में तो कभी पाश्चात्य के स्वर […] Read more » Featured प्रेम भी अपरिपक्व होने लगा है
व्यंग्य साहित्य कांग्रेस टर्न August 28, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment यदि साल के बारह महीनों में सावन और भादों का महीना न हो, तो जीवन में सर्वत्र सूखापन छा जाए। ऋतुराज भले ही बसंत को कहते हैं; पर वर्षाकाल के बिना बसंत भी सूना ही है। लेकिन सावन-भादों में वर्षा यदि जरूरत से ज्यादा होने लगे, तो भी मुसीबत आ जाती है। इस बार भी […] Read more » congress turn Featured कांग्रेस टर्न
लेख साहित्य हिन्दू संघटन : गांधीजी, स्वामी श्रद्घानंद और स्वातंत्र्य वीर सावरकर August 24, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य सफल वक्ता वही होता है जो श्रोताओं को अपनी बात से सहमत और संतुष्ट तो कर ही ले साथ ही उसकी भाषण कला ऐसी हो जिससे लोग वही कुछ करने के लिए प्रेरित और आंदोलित भी हो उठें जिसे वह वक्ता उनसे कराना चाहता है। भाषण के अंत में यदि नेता कहे […] Read more » Featured गाँधीजी स्वातंत्र्य वीर सावरकर स्वामी श्रद्घानंद हिन्दू संघटन
राजनीति लेख साहित्य मनु और वत्र्तमान राजनीति की विश्वसनीयता भाग-2 August 24, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य महर्षि मनु अपने राजधर्म में राजा की पहली योग्यता बताते हुए कह रहे हैं कि ‘राजा’ ब्राह्मण के समान परम विद्वान होना चाहिए। कारण कि परम विद्वान राजा ही परम विद्वान ब्राह्मण से राजकाज संबंधी कार्यों के संबंध में गूढ़ चर्चा कर सकेगा। यदि ‘राजा’ मूर्ख है या अनपढ़, अशिक्षित या निरक्षर […] Read more » Featured मनु मनुस्मृति
व्यंग्य साहित्य चौथ का चांद और पति की मिलीभगत August 24, 2016 by दीपक शर्मा 'आज़ाद' | Leave a Comment बात बढ़ते बढ़ते इतनी बढ़ गई थी कि शहर के शहर सड़क पर आ उतरे और अन्तत: सरकार को पूरे देश में कर्फ्यू लगाना पड़ा। दरअसल, गत दो दिवस पहले चौथ का व्रत था। जिसके चलते सभी घरों में तनाव पसरा था। शर्मा जी, गांधी जी के तीसरे बंदर की तरह अपनी पत्नी के सामने […] Read more » Featured चौथ का चांद पति की मिलीभगत
लेख साहित्य जगनेर के किले को आल्हा-ऊदल के मामा राजा राव जयपाल ने बनवाया August 22, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 2 Comments on जगनेर के किले को आल्हा-ऊदल के मामा राजा राव जयपाल ने बनवाया डा. राधेश्याम द्विवेदी ताजनगरी आगरा से करीब 40 किलोमीटर दूर जगनेर का ऐतिहासिक किला है। उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में जगनेर एक छोटा सा शहर और एक नगर पंचायत है । यह पत्थर और सरसों के तेल निकासी के लिए प्रसिद्ध है। जगनेर के शहर के चारों ओर एक पहाड़ी किला है जो खुद […] Read more » आल्हा-ऊदल जगनेर के किले राजा राव जयपाल
लेख शख्सियत साहित्य झंडेवाला पार्क का क्रांतिवीर शहीद ”गुलाब सिंह लोधी” August 20, 2016 by ब्रह्मानंद राजपूत | 1 Comment on झंडेवाला पार्क का क्रांतिवीर शहीद ”गुलाब सिंह लोधी” (81 वें बलिदान दिवस 23 अगस्त 2016 पर विशेष) भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास ऐसे वीर वीरांगनाओं की कहानियों से भरा पडा है। जिनके योगदान को कोई मान्यता नहीं मिली है। ऐसे ही हमारे अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी हैं। जिनका योगदान भी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम मैं अग्रणी रहा है। लेकिन दुर्भाग्य यह रहा है […] Read more » ''गुलाब सिंह लोधी'' Featured
आलोचना साहित्य परसाई के जबलपुर में शक्तिपुंज …!! August 20, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा प्रख्यात व्यंग्यकार स्व. हरिशंकर परसाई , चिंतक रजनीश और फिल्मों के चरित्र अभिनेता रहे प्रेमनाथ के गृह शहर जबलपुर जाने का अवसर मिला तो मन खासा रोमांचित हो उठा। अपने गृह प्रदेश उत्तर प्रदेश में रोजी – रोजगार के सिलसिले में महाकौशल के जबलपुर और आस – पास के जिलों में बस […] Read more » Featured जबलपुर परसाई शक्तिपुंज
लेख साहित्य सम्राट विक्रमादित्य की नगरी उज्जयिनी August 20, 2016 / August 20, 2016 by शीतलकुमार अक्षय | Leave a Comment शीतलकुमार अक्षय इतिहासकारों के अनुसार वैसे तो इस उज्जैन में पूर्वोत्तर समय के दौरान कई राजा-महाराजाओं का अधिपत्य स्थापित रहा है, लेकिन सर्वाधिक रूप में यह नगरी सम्राट विक्रमादित्य की नगरी के रूप में स्थापित रही है। सम्राट विक्रमादित्य को न्यायप्रिय सम्राट माना जाता है और उनके बारे में कई किवदंतिया प्रचलित है। इतिहासकारों ने […] Read more » उज्जयिनी सम्राट विक्रमादित्य सम्राट विक्रमादित्य की नगरी उज्जयिनी
लेख साहित्य भारत में देशी रियासतें और उनका इतिहास August 18, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 3 Comments on भारत में देशी रियासतें और उनका इतिहास डा. राधेश्याम द्विवेदी ब्रिटिश राज के दौरान अविभाजित भारत में नाममात्र के स्वायत्त राज्य थे। इन्हें आम बोलचाल की भाषा में “रियासत”, “रजवाड़े” या व्यापक अर्थ में देशी रियासत कहते थे। ये ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा सीधे शासित नहीं थे बल्कि भारतीय शासकों द्वारा शासित थे। परन्तु उन भारतीय शासकों पर परोक्ष रूप से ब्रिटिश शासन […] Read more » Featured आसाम इंदौर उडीसा कछार काठियावाड़ कुर्ग कोल्हापुर ग्वालियर छत्तीसगढ़ जयंतिया ट्रावनकोर तंजोर त्रिपुरा देशी रियासतें का इतिहास नागपुर बघेलखण्ड बड़ौदा तथा राजपूताना बुंदेलखण्ड भारत में देशी रियासतें मध्य भारत और हिमांचल प्रदेश मनीपुर सतारा
लेख साहित्य स्वाभिमानी महाराणा प्रतापसिंह बढ़ चले हल्दीघाटी की ओर August 18, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य शक्तिसिंह का शक्ति प्रदर्शन एक बार की बात है कि राणा उदयसिंह के दरबार में हथियार निर्यातक/निर्माता व्यक्ति अपने हथियारों का प्रदर्शन करने के लिए आया हुआ था, तब वह हथियार निर्यातक व्यक्ति अपनी एक तलवार की तीव्र धार का प्रदर्शन रूई को काट-काटकर के दिखा रहा था। इतने में ही […] Read more » Featured महाराणा प्रतापसिंह हल्दीघाटी
कविता साहित्य सलामती की दुआ मै करती रहूँगी August 18, 2016 by शालिनी तिवारी | Leave a Comment तुम्हारी कलाइयों में रक्षा की राखी, बरस दर बरस मैं बाँधती रहूँगी, दिल में उमंगे और चेहरे पर खुँशियाँ, हर एक पल मै सजाती रहूँगी, कभी तुम न तन्हा स्वयं को समझना, कदम से कदम मैं मिलाती रहूँगी, तुम हर इक दिन आगे बढ़ते ही रहना, सलामती की दुआ मै करती रहूँगी । खुदा ने […] Read more » Featured सलामती की दुआ मै करती रहूँगी