पुस्तक समीक्षा साहित्य व्यंग्य नव लेखन में ऊँचे दर्जे का अधिकार : शिकारी का अधिकार June 1, 2016 by आरिफा एविस | 1 Comment on व्यंग्य नव लेखन में ऊँचे दर्जे का अधिकार : शिकारी का अधिकार समीक्षक : वरिष्ठ व्यंग्यकार सुरेशकांत पिछले दिनों आयोजित तीन दिवसीय ‘व्यंग्य की महापंचायत’ में कई अनोखी बातें हुईं। पहली तो यही कि बन्दा ‘अट्टहास’ के प्रोग्राम में पहली बार शामिल हुआ । व्यंग्य में गाली-गलौज के प्रयोग और सपाटबयानी पर मेरे विचारों से सभी अवगत हैं, क्योंकि मैं इन पर बहुत कह और लिख चुका […] Read more » शिकारी का अधिकार
गजल साहित्य खो गया क्या वत्स मेरा ! June 1, 2016 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment खो गया क्या वत्स मेरा, विधि के व्यवधान में; आत्म के उत्थान में, या ध्यान के अभियान में ! उत्तरों की चाह में, प्रश्नों की या बौछार में; अनुभवों की अाग में, या भाव के व्यवहार में ! सहजता के शोध में, या अहंकारी मेघ में; व्याप्तता के बोध में, या शून्य के आरोह […] Read more » खो गया क्या वत्स मेरा !
पुस्तक समीक्षा साहित्य दुश्वारियों में यह जो मीडिया है June 1, 2016 by अमित राजपूत | Leave a Comment अमित राजपूत “जितनी तेज़ी से मीडिया के विविध आयाम विस्तार ले रहे हैं, उतनी ही तेज़ी से उस पर से विश्वास हटने की बात भी सामने आ रही है। ‘कॉरपोरेटिव मीडिया’ नाम की नई खेप हमारे संग है तो ‘ख़बरों’ को ग़ायब करके ‘बहस दर बहस’ करते जाने का मुद्दा भी ज़ोरदार ढंग से उठाया […] Read more »
पुस्तक समीक्षा साहित्य सिंहस्थ की सनातन परंपरा और अमृत की एक बूंद सी – ‘सिंहस्थ” May 30, 2016 by सिद्धार्थ शंकर गौतम | Leave a Comment समीक्षक – डॉ. विकास दवे सिद्धार्थ शंकर गौतम की पुस्तक सिंहस्थ हाथों में है। ‘प्रभात प्रकाशन” की अपनी गौरवशाली परंपरा का निर्वाह करती-सी यह पुस्तक भी एक ही दृष्टि में अपने भौतिक कलेवर से मन मोह लेती है। आकर्षक आवरण सर्वप्रथम आकर्षित करता है। तत्पश्चात् हमारे समक्ष परत दर परत खुलने लगती है विश्व के […] Read more » अमृत की एक बूंद सी सिंहस्थ की सनातन परंपरा
व्यंग्य साहित्य हम मिले, तुम मिले…. May 29, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment चिरदुखी शर्मा जी प्रायः दुखी ही रहते हैं; पर जब कभी वे खुश होते हैं, तो यह खुशी ‘इश्क और मुश्क’ की तरह छिपाए नहीं छिपती। उनकी कंजूसी के बारे में पूरा मोहल्ला जानता है; पर कल वे न जाने कहां से ढेर सारी बूंदी ले आये और सबको बांटने लगे। उनके घर के पास […] Read more » satirical article on third front तुम मिले.... हम मिले
व्यंग्य साहित्य स्टाम्प पेपर वाली निष्ठा May 28, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment आप चाहे कुछ भी कहें साहब, पर मैं हर क्षेत्र में नये विचार और प्रयोगों का पक्षधर हूं। भले ही पुरातनपंथियों को मेरी बात पसंद न आये; पर मैं अपने विचारों पर जितना दृढ़ कल था, उतना ही आज हूं और कल भी रहूंगा। असल में कल शाम को पार्क में इसी विषय पर चर्चा […] Read more » स्टाम्प पेपर वाली निष्ठा
आलोचना साहित्य नेताओं की फोटोबाजी May 27, 2016 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment डा. वेद प्रताप वैदिक आजकल के नेताओं ने अभिनेताओं और सुंदरियों को भी मात कर दिया है। वे खूब बन-ठनकर अपने फोटो खिंचवाते हैं। फिर उन्हें अखबारों के मुखपृष्ठों और टीवी के पर्दों पर सजवा देते हैं। यह ‘छपास’ और ‘दिखास’ की बीमारी अब महामारी बन गई है। एक-एक नेता अपने फोटो छपवानें के […] Read more » नेताओं की फोटोबाजी
व्यंग्य साहित्य कांग्रेस मुक्त भारत दल May 22, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment कोई भारत को धार्मिक देश कहता है, तो कोई सांस्कृतिक। कोई इसे अर्थप्रधान बताता है, तो कोई बलप्रधान। कोई सांप और सपेरों का देश कहता है, तो कोई ज्ञानियों का; पर मेरी विनम्र राय इस बारे में बहुत स्पष्ट है कि ‘मेरा भारत महान’ एक राजनीति प्रधान देश है। यहां कितने राजनीतिक दल हैं, शायद […] Read more » Featured कांग्रेस मुक्त भारत दल
आलोचना राजनीति साहित्य ‘बाप का माल’ में ही नेहरू-गांधी के नाम! May 22, 2016 by शंकर शरण | 3 Comments on ‘बाप का माल’ में ही नेहरू-गांधी के नाम! अभिनेता ऋषि कपूर ने देश में महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थानों को नेहरू परिवार के नाम से बाँधने के अन्याय पर ऊँगली उठाई है। सारी जगहों को नेहरू, इंदिरा, राजीव, आदि मय कर देने पर उन का सवाल हैः इस देश को ‘बाप का माल समझ रखा था?’ देश की स्मृति पर ऐसे पारिवारिक कब्जे पर पहले […] Read more » Featured नेहरू-गांधी
कविता साहित्य बाल हकीकत राय May 20, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment धन्य-धन्य हे बाल हकीकत, धन्य-धन्य बलिदानी। देगी नवजीवन जन-जन को, तेरी अम र कहानी।। प्राण लुटाए निर्भय होकर, धर्म प्रेम की ज्वाला फूंकी। तुझे प्रलोभन देकर हारे, सकल क्रूर मुल्ला अज्ञानी।। नश्वर तन है जीव अमर यह, तत्व ज्ञान का तूने जाना। तेरी गौरव गाथा गा गा, धन्य हुई कवियों की वाणी।। गूंज उठे धरती […] Read more » बाल हकीकत राय
लेख साहित्य हर युग में महाभारत May 19, 2016 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment महाभारत के समय भी दो वर्ग थे — एक निपट भौतिकवादी, जो शरीर के अतिरिक्त कुछ भी स्वीकार नहीं करता था और जिसकी दृष्टि मात्र भोग पर थी। आत्मा के होने, न होने से कोई मतलब न था। जिन्दगी का अर्थ था भोग और लूट, खसोट। उसी वर्ग के खिलाफ कृष्ण को युद्ध करवाना पड़ा। […] Read more » हर युग में महाभारत
व्यंग्य साहित्य अंक के लगाकर पंख , डिग्री मारे डंक May 14, 2016 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment अच्छी शिक्षा-दीक्षा प्राप्त करना प्रत्येक नागरिक का सविंधान प्रदत्त अधिकार है , हालांकी आज के माहौल में शिक्षा प्राप्त करने के प्रयासों और उन प्रयासों से प्राप्त सफलता को देखते हुए लगता है की सविंधान निर्माताओं ने “राइट टू एजुकेशन” देकर सविंधान को ना केवल नीरस होने से बचाया है बल्कि आने वाली पीढ़ियों को […] Read more » अंक के लगाकर पंख डिग्री मारे डंक