कविता साहित्य मां, पर पीर तो होती होगी May 3, 2016 by अरुण तिवारी | Leave a Comment गांव की सबसे बङी हवेली उसमें बैठी मात दुकेली, हवेली से बाते करते, दीवारों से सर टकराना, ईंट सरीखा मन हो जाना, दूर बैंक से पैसा लाना, नाज पिसाना, सामान मंगाना, हर छोटे बाहरी काम की खातिर दूजों से सामने गिङगिङ जाना, किसी तरह घर आन बचाना, शूर हो, मज़बूर हो मां, पर पीर तो […] Read more » Featured poem on mother पर पीर तो होती होगी मां
कविता साहित्य विकृतियाँ समाज की May 2, 2016 by राघवेन्द्र कुमार 'राघव' | Leave a Comment राघवेन्द्र कुमार राघव मेरे मन की बेचैनी को, क्या शब्द बना लिख सकते हो ? तक़लीफ़ें अन्तर्मन की, क्या शब्दों मे बुन सकते हो ? लिखो हमारे मन के भीतर, उमड़ रहे तूफ़ानों को । लिखो हमारे जिस्मानी, पिघल रहे अरमानों को । प्यास प्यार की लिख डालो, लिख डालो जख़्मी रूहें । लिखो ख़्वाहिशों […] Read more » विकृतियाँ समाज की
व्यंग्य साहित्य चने के पेड़ पे…!! April 28, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा दुनिया में कई चीजें दिखाई पहले पड़ती है , लेकिन समझ बाद में आती है। बचपन में गांव जाने पर चने के पेड़ तो खूब देखे। लेकिन इस पर चढ़ने या चढ़ाने का मतलब बड़ी देर से समझ आया।इसी तरह हेलीकाप्टर से घूम – घूम कर जनसभा को संबोधित करने , राजप्रसाद […] Read more » चने के पेड़
कहानी साहित्य मन की गांठ April 27, 2016 by विजय कुमार | 3 Comments on मन की गांठ पिछले दिनों मैं रेलगाड़ी से हरिद्वार से दिल्ली आ रहा था। सर्दी के दिन थे। मेरे साथ बैठे यात्री के मफलर पर ‘नवभारत उद्योग, हरिद्वार’ का लेबल लगा था, जबकि मेरे मफलर पर ‘भारत उद्योग, हरिद्वार’ का। इस सुखद संयोग पर बात छिड़ी, तो उन्होंने ‘भारत’ और ‘नवभारत उद्योग’ की कहानी सुनायी। इसके मुख्य पात्र […] Read more » मन की गांठ
व्यंग्य साहित्य ईमानदार राजनीती पर भारी बेईमान मौसम April 23, 2016 by अमित शर्मा (CA) | 3 Comments on ईमानदार राजनीती पर भारी बेईमान मौसम आजकल गर्मी और आईपीएल के साथ साथ “सम-विषम” (ऑड-इवन) और पुतले लगाए जाने का भी मौसम हैं ताकि कलेजे से बीड़ी जला सकने वाले इस मौसम में चौके-छक्के , सुनी सड़के और अपने पंसदीदा पुतले देखकर आपकी रूह को बिना “रूह -अफजा” पिए ही ठंडक पहुँचे। इसी मौसम में “गतिमान एक्सप्रेस” भी लांच हो चुकी हैं लेकिन […] Read more » ईमानदार राजनीती बेईमान मौसम
लेख विविधा साहित्य भक्ति रस से उपजा वीर रस April 22, 2016 by डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री | Leave a Comment डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री भारत पर विदेशी हमलों की शोकगाथा बहुत पुरानी है । उतनी ही पुरानी इसकी संघर्ष गाथा है । लेकिन संघर्ष और शत्रु से मुक़ाबला कितना ही शौर्यपूर्ण क्यों न रहा हो , अन्ततः भारत के भाग्य में परवश होना ही वदा था । शायद इसीलिए आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ,भारतीय साहित्य, ख़ासकर […] Read more » Featured Guru Arjun Dev भक्ति रस वीर रस श्री अर्जुन देव श्री गोविन्द सिंह श्री तेगबहादुर
व्यंग्य साहित्य किसी की सफलता , किसी की सजा…!! April 22, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा उस दिन मैं दोपहर के भोजन के दौरान टेलीविजन पर चैनल सर्च कर रहा था। अचानक सिर पर हथौड़ा मारने की तरह एक एंकर का कानफाड़ू आवाज सुनाई दिया। देखिए … मुंबई का छोरा – कैसे बना क्रिकेट का भगवान। फलां कैसे पहुंचा जमीन से आसमान पर। और वह उम्दा खिलाड़ी कैसे […] Read more »
कविता साहित्य सखी वे हैं भी या कि हैं ही नहीं April 21, 2016 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment सखी वे हैं भी या कि हैं ही नहीं, हुआ अहसास नहीं उम्र गई; कबहुँ बौराई कबहुँ भायी रही, जगत की माया समझ पाई नहीं ! सहज गति आई नहीं धायी रही, मग़ज मैं मारी रही बूझी नहीं; कर्म बहुतेरे करी धर्म बही, तबहु मैं तरी कहाँ मर्म गही ! ध्यान दुनियाँ कौ रह्यौ उनकौ […] Read more »
कला-संस्कृति जन-जागरण लेख साहित्य विश्व का सबसे बड़ा कोहिनूर हीरा April 19, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा राधेश्याम द्विवेदी 1.परी कथाओं सा रोमांचक कहानी:- कोहिनूर फारसी का शब्द है, जिसका अर्थ है : आभा या रोशनी का पर्वत । कोहिनूर (फ़ारसी: कूह-ए-नूर) एक 105 कैरेट (21.6 ग्राम) का हीरा है जो किसी समय विश्व का सबसे बड़ा ज्ञात हीरा रह चुका है। कोहिनूर दुनिया के सभी हीरों का राजा है । […] Read more » Featured history of kohinoor hira कोहिनूर हीरा
कविता साहित्य भारत – स्वच्छ – अस्वच्छ April 19, 2016 / April 21, 2016 by आशा वर्मा | 1 Comment on भारत – स्वच्छ – अस्वच्छ आँख में उँगली डाल एक ज़ोरदार नारे ने हमें झकझोर कर जगा दिया – “स्वच्छ भारत” आजतक पता ही नहीं था कि हम स्वच्छ नहीं हैं । हम तो अबतक यही मानते रहे कि हमने नहा कर तन बदन साफ़ किया । घर-द्वार बुहार कर कूडा कचरा घर के बाहर कर दिया। पूजा-पाठ करके मन […] Read more » अस्वच्छ भारत स्वच्छ
व्यंग्य साहित्य बाबा हँस रहे थे… April 18, 2016 by अमित राजपूत | Leave a Comment ∙ अमित राजपूत बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के पैदाईश की 125वीं सालगिरह पर मैं दिल्ली में ही था। अन्य लोगों की तरह मेरे लिए भी आज यह एक भरपूर छुट्टी का ही दिन है। लेकिन आज भी मुझे आकाशवाणी की शक्ल देखनी ही पड़ी। ख़ुदा का ख़ैर है कि आज रिपोर्ट बनाने से बचा […] Read more » Featured अंबेडकर जयंती बाबा हँस रहे थे...
लेख साहित्य सूखा April 16, 2016 / April 17, 2016 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment डॉ.अमित प्रताप सिंह सुबह अचानक घबराकर आँख खुली, झटके से उठकर बिस्तर पर बैठ गए, माथे पर पसीना छलक रहा था, दिल की धड़कन किसी सुपरफास्ट ट्रेन के इंजन की तरह बहुत जोर की आवाज कर रही थी. तेज़ी से उठकर खिड़की से बाहर झांककर देखा, माली बगीचे में पौधों को पानी दे रहा […] Read more » drought in India Featured सूखा