कविता साहित्य नारी March 6, 2016 by शकुन्तला बहादुर | 3 Comments on नारी हरिश्चन्द्र से पति के हाथों,बिकी शैव्या थी सतयुग में । निर्वासित हुई श्री राम के द्वारा , सीता त्रेता युग में ।। छला इन्द्र ने और अहिल्या,शापित हुई निज पति के द्वारा । दमयन्ती भी त्यक्त हुई थी , द्यूतपराजित नल के द्वारा ।। पंचपती न बचा सके थे, लाज द्रौपदी की द्वापर में । […] Read more » नारी
महत्वपूर्ण लेख विविधा साहित्य आपका सुंदर नाम रचिए। March 6, 2016 by डॉ. मधुसूदन | 3 Comments on आपका सुंदर नाम रचिए। डॉ. मधुसूदन (एक) प्रवेश: शायद आप कविता नहीं करते, पर कवियों या कवयित्रियों की भाँति अपना अलग और अच्छा-सा नाम अवश्य रच सकते हैं। आज आप को, ऐसे नाम रचने की सरल विधि समझाने का उद्देश्य है। विषय विस्तृत है, इस लिए कुछ ही उदाहरणों से इसे विशद किया जाएगा। कवि और कवयित्रियाँ, ऐसे सुन्दर […] Read more » Featured आपका सुंदर नाम रचिए।
कविता साहित्य आज के सवाल हैं कि आज ही जवाब दो। March 6, 2016 by अरुण तिवारी | Leave a Comment नदी जिये या जल मरें, बची रहे श्री सदा ऐसा भी कमाल हो, सत्ता ही दलाल हो, तो क्यों न ईमान पे सवाल हो ? जल रही मशाल है कि उठ रहे सवाल हैं कि आज के सवाल हैं कि आज ही जवाब दो। चुन गये तो क्या तुम्हीं भगवान हो गये? चुन रहा जो […] Read more » Featured आज के सवाल हैं कि आज ही जवाब दो।
कहानी साहित्य देवी की लीला March 1, 2016 by विजय कुमार | 1 Comment on देवी की लीला परसों मेरा एक मित्र रामपुर से आया। उसके पास जो अखबार था, उसमें ‘मां लीलावती निराश्रित कन्या आश्रम’ के ‘दीवाली मिलन’ का समाचार छपा था। उससे पता लगा कि इन दिनों आश्रम के अध्यक्ष मेरे मामाजी हैं। मामाजी के इस आश्रम से जुड़ने की कहानी बड़ी रोचक है; पर इसके लिए हमें लगभग दस […] Read more » देवी की लीला
व्यंग्य साहित्य और बड़कू मामा बन गए बुद्धिजीवी…!! March 1, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा बड़कू मामा गरीब बैकग्राऊंड से थे। लेकिन जैसा कि नाम से स्पष्ट है , वे अपने परिवार के दूसरे भाई – बहनों में बड़े थे। लिहाजा उन्हें अपनों का सुनिश्चित सम्मान बराबर मिलता था। घर के बड़े बुजुर्ग भी परिवार के सभी सदस्यों को बड़े के नाते उन्हें अनिवार्य सम्मान देने का […] Read more » और बड़कू मामा बन गए बुद्धिजीवी...!!
व्यंग्य साहित्य (ब)जट : यमला पगला दीवाना February 29, 2016 / February 29, 2016 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment अमित शर्मा प्रतिवर्ष संसद में आम बजट पेश किया जाता हैं. इसे आम बजट इसीलिये कहाँ जाता हैं क्योंकि ये आम के सीजन के पहले आता है. बजट पेश करने के पीछे आय-व्यय का वार्षिक लेखा -जोखा रखना तो गौण कारण हैं इसके पीछे (सुविधानुसार चाहे तो आगे भी मान सकते हैं)मुख्य कारण ये हैं […] Read more » (ब)जट : यमला पगला दीवाना satire on bidget
कहानी साहित्य प्रेम की जीत !! February 29, 2016 by विजय कुमार सप्पाती | Leave a Comment बिहार के दरभंगा जिले के दो परिवार है . एक है भूमिहार और दूसरा क्षत्रिय. दोनों के परिवार एक दुसरे से अपरिचित है . दो अलग अलग जगहों में रहते है . दोनों के बच्चे शहर में जाकर एक ही कॉलेज में एडमिशन लेते है . भूमिहार परिवार का पुत्र का नाम राजेश है और […] Read more » प्रेम की जीत !!
कहानी साहित्य बेटी February 29, 2016 by विजय कुमार सप्पाती | Leave a Comment आज शर्मा जी के घर में बड़ी रौनक थी, उनकीएकलौतीबेटी ममता की शादी जो थी. बहुत से मेहमानों से घर भरा हुआ था, दरवाजे पर शहनाई बज रही थी, खुशियों का दौर था. शर्मा जी बड़े व्यस्त थे. फेरे हो रहे थे.बेटी की विदाई के बारे में सोच सोच कर ही शर्मा दम्पति […] Read more » बेटी
कहानी साहित्य दंगा February 29, 2016 by विजय कुमार सप्पाती | Leave a Comment कल से इस छोटे से शहर में दंगे हो रहे थे. कर्फ्यू लगा हुआ था. घर, दूकान सब कुछ बंद थे. लोग अपने अपने घरो में दुबके हुए थे. किसी की हिम्मत नहीं थी कि बाहर निकले. पुलिससडको पर थी. ये शहरछोटा सा था, पर हर ६ – ८ महीने में शहर में दंगा […] Read more » short story on riots दंगा
कहानी साहित्य माँ February 29, 2016 / February 29, 2016 by विजय कुमार सप्पाती | Leave a Comment मैंने रेडसिग्नल पर अपनी स्कूटर रोकी . ये सिग्नल सरकारी हॉस्पिटल के पास था . उस जगह हमेशाबहुत भीड़ रहती थी.मरीज , बीमार, उनके रिश्तेदार और भी हर किस्म के लोगो की भीड़ हमेशा वहां रहती थी, अब चूँकि सरकारी हॉस्पिटल था तो गरीब लोग ही वहां ज्यादा दिखाई देते थे. अमीर किसी और […] Read more » short story on mother मां
व्यंग्य साहित्य अगड़ों मे अगड़े, पिछड़ों मे पिछड़े February 26, 2016 by बीनू भटनागर | 2 Comments on अगड़ों मे अगड़े, पिछड़ों मे पिछड़े आजकल जाति के आधार पर पिछड़ापन तय हो रहा है तो मैने सोचा अपनी जाति के अगड़े पिछड़े परकुछ रिसर्च करूँरिसर्च तो वैसे घर बैठे करने के लिये विकीडिया ही काफ़ी है पर किसी यूनिवर्सिटी से रि सर्च हो तो नाम के आगे डाक्टर का ठप्पा लगाना बड़ा अच्छा लगे गा।बड़ी पुरानी ख़वाहिश करवट ले रही है।रिसर्च के लियें आजकल सबसे अधिक चर्चित यूनीवर् सिटी तो जे.एन यू, ही और वहाँ ना उम्र की सीमा है, ना जन्म का है बंधन…….. और जे. एन यू. मे सोश्योलोजी मे शोध छात्रा बन जाऊं या ऐन्थोपौलोजी की , चाहें […] Read more » satire on reservation system
कहानी साहित्य मजबूरी February 26, 2016 by विजय कुमार | 1 Comment on मजबूरी चंदन मेरा बचपन का दोस्त है। हम दोनों हमउम्र हैं। घर भी एक ही गली में है। वह मुझसे दो महीने बड़ा है; पर पढ़ना हम दोनों ने एक ही स्कूल और कक्षा में साथ-साथ शुरू किया। स्कूल जाते समय मेरे पिताजी अपनी साइकिल पर हम दोनों को ले जाते थे, तो वापसी पर यही […] Read more » Featured मजबूरी