लेख साहित्य काश! यह इतना आसान होता May 14, 2016 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment गीता के छठे अध्याय में श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा कि ऐसा नहीं है कि यह गीता रहस्य मैं तुम्हें पहली बार बता रहा हूँ। सृष्टि के आरंभ में मैंने यह रहस्य सूर्य को बताया था, सूर्य ने इसे मनु को बताया और मनु ने इक्ष्वाकु को। कालान्तर में यह ज्ञान लुप्त हो गया। इसीलिए […] Read more » काश! यह इतना आसान होता
गजल साहित्य हो मुक्त बुद्धि से, हुआ अनुरक्त आत्मा चल रहा ! May 14, 2016 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment हो मुक्त बुद्धि से, हुआ अनुरक्त आत्मा चल रहा; मैं युक्त हो संयुक्त पथ, परमात्म का रथ लख रहा ! मन को किए संयत नियत, नित प्रति नाता गढ़ रहा; चैतन्य की भव भव्यता में, चिर रचयिता चख रहा ! देही नहीं स्वामी रही, मोही नहीं ममता रही; चंचल कहाँ अब रति रही, गति अवाधित […] Read more » हुआ अनुरक्त आत्मा चल रहा हो मुक्त बुद्धि से
व्यंग्य साहित्य मियाँ ये आशिकी इज्जत बिगाड़ देती है” May 11, 2016 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment क्यूँ रे अज्जू!!!!!! क्या हो रिया है आजकल काॅलेज में, क्या माहौल बना है!! अज्जू:- पीके भाई, काॅलेज का तो तुम पूछो ही मत अभी, अजब माहौल बना बैठा है आजकल तो!! पीके:- क्यूँ भाई ऐसा क्या गज्जब हुआ जा रहा है, क्या छात्र वात्र स्ट्राइक विस्ट्राइक कर बैठे है क्या?? अज्जू:- अरे नही नही […] Read more » मियाँ ये आशिकी इज्जत बिगाड़ देती है"
लेख शख्सियत साहित्य कृष्णभक्ति के महाकवि सूरदास May 11, 2016 / May 11, 2016 by मृत्युंजय दीक्षित | Leave a Comment 11 मई पर विशेषः- मृत्युंजय दीक्षित महाकवि सूरदास का हिंदी जगत के साहित्य में अप्रतिम स्थान है। सूरदास के जन्मतिथि स्थान व उनके जन्मांध होने पर विद्वानों मे मतभेद हैं। लेकिन उनकी महानता व कृष्णभक्ति को लेकर सभी विद्वानों में एकरूपता है। सूरदास की साहित्यिक रचनाएं हिंदी जगत के लिए मील का पत्थर साबित हुई […] Read more » Featured कृष्णभक्ति महाकवि सूरदास
लेख साहित्य भोजन के लिए दुर्योधन का श्रीकृष्ण को आमंत्रण May 9, 2016 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment महाभारत का युद्ध टालने और दुर्योधन को समझाने के लिए अन्तिम प्रयास के रूप में श्रीकॄष्ण को हस्तिनापुर की राजसभा में युधिष्ठिर के दूत के रूप में भेजने का निर्णय लिया गया। श्रीकृष्ण ने भी इसे सहर्ष स्वीकार किया। हस्तिनापुर के मुख्य द्वार पर श्रीकृष्ण का भव्य स्वागत किया गया। सबसे औपचारिक मुलाकात के बाद […] Read more » दुर्योधन भोजन भोजन के लिए दुर्योधन का श्रीकृष्ण को आमंत्रण श्रीकृष्ण को आमंत्रण
कविता साहित्य रजनीगन्धा हूँ मैं, May 8, 2016 by के.डी. चारण | Leave a Comment के डी चारण रजनीगन्धा हूँ मैं, रंगोआब खुशबू से शेष जी, हां रजनीगंधा ही हूँ मैं, वह रंगोआब, खुशबू वाला पुष्प नहीं, जो जीवन में भाव भरता है, नयापन लाता है। समय रंगकर होठों की लाली बढाने वाली, पीक के लाल छर्रों वाली, मुलायम-कठोर कणों के गुण धर्म वाली रजनीगन्धा ही हूँ मैं। एक पतली […] Read more » रजनीगन्धा हूँ मैं
राजनीति व्यंग्य साहित्य रंज लीडर को बहुत है मगर… May 8, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment किसी राजनीतिक विश्लेषक ने कहा है कि दिल्ली का रास्ता लखनऊ से होकर जाता है; पर काफी समय से कांग्रेस के लिए लखनऊ के ही रास्ते बंद है। ऐसे में अपने बलबूते पर वह दिल्ली कैसे पहुंचे ? जीवन-मरण जैसा यह बड़ा प्रश्न मैडम जी के सामने है। वे कई साल से कोशिश में हैं […] Read more » Featured रंज लीडर को बहुत है मगर...
लेख साहित्य द्रौपदी की हँसी May 8, 2016 / May 8, 2016 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था। हस्तिनापुर के सिंहासन पर युधिष्ठिर का अभिषेक भी संपन्न हो चुका था। कुरुक्षेत्र की रणभूमि में भीष्म पितामह सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा में शर-शैया पर यातना सहते हुए लेटे हुए थे। उस युग में श्रीकृष्ण और विदुर के बाद भीष्म पितामह ही राजनीति, धर्म और शास्त्र […] Read more » Featured द्रौपदी की हँसी
दोहे साहित्य हलके से जब मुसका दिए ! May 7, 2016 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment हलके से जब मुसका दिए, उनको प्रफुल्लित कर दिए; उनकी अखिलता लख लिए, अपनी पुलक उनको दिए ! थे प्रकट में कुछ ना कहे, ना ही उन्हें कुछ थे दिए; पर हिया आल्ह्वादित किए, कुछ उन्हें वे थिरकित किए ! जो रहा अन्दर जगाए, उर तन्तु को खिलखिलाए; सब नाड़ियाँ झँकृत किए, हर चक्र को […] Read more »
कला-संस्कृति लेख साहित्य साहित्य और समाज May 7, 2016 by डॉ. सौरभ मालवीय | Leave a Comment डॊ. सौरभ मालवीय साहित्य समाज का दर्पण है, समाज का प्रतिबिम्ब है, समाज का मार्गदर्शक है तथा समाज का लेखा-जोखा है. किसी भी राष्ट्र या सभ्यता की जानकारी उसके साहित्य से प्राप्त होती है. साहित्य लोकजीवन का अभिन्न अंग है. किसी भी काल के साहित्य से उस समय की परिस्थितियों, जनमानस के रहन-सहन, खान-पान व […] Read more » Featured साहित्य और समाज
कहानी साहित्य स्टेशन के कानून May 6, 2016 by विजय कुमार | 1 Comment on स्टेशन के कानून रामलाल रेलवे स्टेशन पर फलों की ठेली लगाता था। बिहार के अपने गांव से बारह साल पहले जब वह यहां आया था, तब उसकी उम्र खेलने-खाने की थी; पर पेट की भूख क्या नहीं करा लेती ? शुरू मंे तो उसने स्टेशन के बाहर एक होटल में बरतन साफ किये। फिर स्टेशन पर फल बेचने […] Read more » स्टेशन के कानून
राजनीति व्यंग्य वायु सेना चीफ का सीबीआई जाना! May 4, 2016 by हरि शंकर व्यास | Leave a Comment अपन को रिटायर वायु सेना चीफ एसपी त्यागी का सीबीआई दफ्तर जाना अच्छा नहीं लगा! पैदल, कंधे पर एक बैग लटकाए, सीबीआई बिल्डिंग में जाते एसपी त्यागी की जो टीवी फुटेज देखी तो मन खिन्न हुआ। जो शख्स भारत की वायुसेना का प्रमुख रहा, जिसने लाखों सैनिकों को लीडरशीप दी उसका व्यक्तित्व-कृतित्व, उसकी गरिमा, प्रतिष्ठा […] Read more » Featured अगस्ता वेस्टलैंड एसपी त्यागी वायु सेना चीफ सीबीआई