जन-जागरण महत्वपूर्ण लेख लेख साहित्य देश का वास्तविक गद्दार कौन? भाग-9 April 9, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment वीर सावरकर और पंडित नेहरू का इतिहास संबंधी ज्ञान वीर सावरकर एक उत्कृष्ट कोटि के राष्ट्र प्रचेता लेखक थे। वह लिखते हैं :-‘‘विश्व का इतिहास छान-छानकर हम थक गये। देवासुरों, इंद्र वृत्तासुर, रावण आदि की वैदिक कथाओं से लेकर प्राचीन ईरान, ग्रीस, रोम, अरब, अमेरिका, इंग्लैंड, चीन, जापान, स्पेनिश, मूर, तुर्क, ग्रीस, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रिया, […] Read more » Featured who is the real traitor ? देश का वास्तविक गद्दार कौन
महत्वपूर्ण लेख लेख समाज साहित्य देश का वास्तविक गद्दार कौन? गांधी-नेहरू या सावरकर, भाग-8 April 7, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment जब शास्त्रीजी ने सावरकरजी को देना आरंभ किया था मानधन हमने पूर्व के आलेखों में स्पष्ट किया था कि वीर सावरकर और नेताजी सुभाषचंद्र बोस के आदर्श वीर शिवाजी थे। यही कारण था कि उनके लिए राष्ट्र सर्वप्रथम था। उन दिनों लुई फिशर भारत की यात्रा पर आये थे। देश के विभाजन की संभावनाएं बड़ी […] Read more » गांधी देश नेहरू सावरकर
व्यंग्य साहित्य पुल गिरा है कोई पहाड़ नहीं April 7, 2016 by आरिफा एविस | 1 Comment on पुल गिरा है कोई पहाड़ नहीं पुल गिरा है कोई पहाड़ नहीं गिरा जो इतनी आफत कर रखी है. रोज ही तो दुर्घटनाएं होती हैं. अब सबका रोना रोने लगे तो हो गया देश का विकास.और विकास तो कुरबानी मांगता है खेती का विकास बोले तो किसानों की आत्महत्या. उद्योगों का विकास बोले तो मजदूरों की छटनी, तालाबंदी. सामाजिक विकास […] Read more » पहाड़ पुल गिरा है
व्यंग्य साहित्य शादी के लड्डू और राजनीति के रसगुल्ले…!! April 7, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | 1 Comment on शादी के लड्डू और राजनीति के रसगुल्ले…!! तारकेश कुमार ओझा यदि कोई आपसे पूछे कि देश में हो रहे विधानसभा चुनावों की खास बात क्या है तो आपका जवाब कुछ भी हो सकता है। लेकिन मेरी नजरों से देखा जाए तो चुनाव दर चुनाव अब काफी परिवर्तन स्पष्ट नजर आने लगा है। सबसे बड़ी बात यह कि चुनाव में अब वोटबैंक जैसी […] Read more » राजनीति राजनीति के रसगुल्ले शादी के लड्डू
कहानी साहित्य इतिहास की पुनरावृत्ति April 7, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment कहते हैं कि ‘इतिहास खुद को दोहराता है।’ यद्यपि मेरा इतिहास का अध्ययन बस वहीं तक है, जहां तक कक्षा आठ में पढ़ाया गया था; पर अपने कुछ प्रसंगों को देखकर लगता है कि शायद यह कहावत सच ही है। पिछले दिनों मोदीनगर से मेरे पुराने मित्र आनंद का फोन आया। वहां के मुख्य बाजार […] Read more » इतिहास की पुनरावृत्ति
व्यंग्य साहित्य हरेक बात पर कहते हो घर छोड़ो April 7, 2016 / April 7, 2016 by आरिफा एविस | Leave a Comment (व्यंग्य आलेख) घर के मुखिया ने कहा यह वक्त छोटी-छोटी बातों को दिमाग से सोचने का नहीं है. यह वक्त दिल से सोचने का समय है, क्योंकि छोटी-छोटी बातें ही आगे चलकर बड़ी हो जाती हैं. मैंने घर में सफाई अभियान चला रखा है और यह किसी भी स्तर पर भारत छोड़ो आन्दोलन से कम […] Read more » घर छोड़ो
लेख साहित्य शिकार करने का जन्मसिद्ध अधिकार April 5, 2016 by आरिफा एविस | Leave a Comment एक बार जंगल राज्य में राजा का चुनाव होना था. अजी चुनाव क्या… बस खाना-पूर्ति तो करनी थी ताकि जंगल लोकतंत्र का भी ख्याल रखा जा सके. भला वर्षों पुरानी इस प्राचीन प्रथा को नया जंगल निजाम कैसे बदल सकता है? जंगल के राजा के चुनाव में कोई जीते या हारे … राजा तो नागनाथ […] Read more » Featured जन्मसिद्ध अधिकार शिकार
लेख शख्सियत साहित्य ‘सेल्यूलॉयड मैन’ पीके नायर को याद करते हुए April 5, 2016 / April 5, 2016 by मनोज कुमार | Leave a Comment मनोज कुमार 50 साल पहले लगभग-लगभग 32-35 साल का एक युवा बनाना तो फिल्में था लेकिन उसकी रूचि सिनेमा के इतिहास को संजोने की हुई. एक बड़े सपने को लेकर छोटी सी कोशिश करने वाले परमेश कृष्णनन नायर ने अपने हौसले से एक ऐसे संग्रहालय गढ़ दिया जिसे आज हम नेशनल फिल्म आर्काइव ऑफ इंडिया […] Read more » ‘सेल्यूलॉयड मैन’ Featured pk nair remembering saluloid man पीके नायर
मीडिया लेख विधि-कानून विविधा साहित्य तब सम्पादक की जरूरत ही क्यों है ? April 2, 2016 by मनोज कुमार | Leave a Comment मनोज कुमार इस समय की पत्रकारिता को सम्पादक की कतई जरूरत नहीं है। यह सवाल कठिन है लेकिन मुश्किल नहीं। कठिन इसलिए कि बिना सम्पादक के प्रकाशनों का महत्व क्या और मुश्किल इसलिए नहीं क्योंकि आज जवाबदार सम्पादक की जरूरत ही नहीं बची है। सबकुछ लेखक पर टाल दो और खुद को बचा ले जाओ। […] Read more » Featured need of editor तब सम्पादक की जरूरत ही क्यों है
व्यंग्य साहित्य सही हैं बॉस April 2, 2016 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment विज्ञानियों ने पेट्रोल को सबसे ज्वलनशील पदार्थ माना हैं लेकिन अगर प्राणीमात्र की बात करे तो “बॉस” नाम का प्राणी सबसे ज़्यादा ज्वलनशील माना जाता हैं । “दूध के जले” , भले छाछ फूंक-फूंक कर पीते हैं लेकिन “बॉस के जले” तो ऑफिस की कैंटीन में “कोल्ड -कॉफी” भी फूंक- फूंक कर पीते हुए […] Read more » boss is always right सही हैं बॉस
महत्वपूर्ण लेख लेख समाज साहित्य देश का वास्तविक गद्दार कौन? गांधी-नेहरू या सावरकर, भाग-6 April 2, 2016 by राकेश कुमार आर्य | 2 Comments on देश का वास्तविक गद्दार कौन? गांधी-नेहरू या सावरकर, भाग-6 जब सुभाष के मार्गदर्शक बने वीर सावरकर जब क्रांतिवीर सावरकर ने 26 फरवरी 1966 को अपना नाशवान शरीर त्यागा तो उस समय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी भावना व्यक्त करते हुए कहा था-‘‘सावरकर जी की मृत्यु से विद्यमान भारत के एक महान व्यक्ति को हमने खो दिया।’’ बात स्पष्ट है कि इंदिराजी की दृष्टि में […] Read more » who is the real traitor of India गांधी देश का वास्तविक गद्दार नेहरू सावरकर हिंदुओं का सैनिकीकरण
मनोरंजन लेख सिनेमा रोमांस से डूबा करिअर! April 2, 2016 / April 2, 2016 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment कंगना रानाउत ने कुछ समय पहले एक और धमाका किया था। अपने संघर्ष के दिनों के अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा था कि किसी हीरो से रोमांटिक रिश्तो जोड़ने में किसी हीरोइन की पसंद या नापसंद को तरजीह नहीं दी जाती। कुछ को करिअर की खातिर समझौता करना पड़ता है तो कुछ भावनात्मक […] Read more » #bollywood in hindi #film article in hindi actor Shahrukh Khan Dilip Kumar Dilip Kumar's career Featured Film Industry films Heroine Kamini Kaushal Kangana Ranaut Marital relationship relationship Shahrukh and Priyanka प्रियंका चोपड़ा रोमांस से डूबा करिअर! शाहरुख खान