व्यंग्य साहित्य घोड़े की टांग पे, जो मारा हथौड़ा : व्यंग्य March 26, 2016 / March 26, 2016 by आरिफा एविस | 1 Comment on घोड़े की टांग पे, जो मारा हथौड़ा : व्यंग्य आरिफा एविस बचपन में गाय पर निबन्ध लिखा था. दो बिल्ली के झगड़े में बन्दर का न्याय देखा था. गुलजार का लिखा गीत ‘काठी का घोड़ा, घोड़े की दुम पे जो मारा हथौड़ा’ भी मिलजुलकर खूब गाया था. लेकिन ये क्या घोड़े की दुम पर, हथौड़ा नहीं मारा गया बल्कि उसकी टांग तोड़ी गयी. देखो […] Read more » घोड़े की टांग पे जो मारा हथौड़ा
लेख नर सेवा नारायण सेवा March 25, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment आज शेरगढ़ में न कोई दुकान खुली थी और न स्कूल। चूंकि आज ‘निरंजन बाबा’ के अस्थिकलश को भूसमाधि दी जाने वाली थी। पूरा गांव वहीं एकत्र था। सबको लग रहा था कि ‘बाबा’ नहीं, उनका कोई सगा-सम्बन्धी ही चला गया है। सचमुच ‘बाबा’ का व्यक्तित्व था ही ऐसा। निरंजन बाबा के पिताजी उस इलाके […] Read more » नर सेवा नारायण सेवा
कविता साहित्य उलझन March 25, 2016 by बीनू भटनागर | Leave a Comment उलझी हुई सी ज़िन्दगी, बेचैन सी रातें, उलझे हुए तागों मे, पड़ती गईं गाँठे, ये गाँठे अब, खुलती नहीं मुझसे उलझी हुई गाँठों को बक्से बन्द करदूँ, या गाँठों से जुडी बातों को, जहन से अलग कर दूँ। अब कोई मक़सद, नया मै कहीं ढूँढू, ज़िन्दगी की यही चाल है तो, ऐसे ही न क्यो जी लूँ Read more » उलझन
कविता साहित्य केकरा संग खेलहूं फाग March 24, 2016 by विपिन किशोर सिन्हा | 3 Comments on केकरा संग खेलहूं फाग बुरा न मानें होली है — एक ठे स्पेसल फगुआ केकरा संग खेलहूं फाग इटली दूर बसत है इटली दूर बसत है केकरा संग खेलहूं फाग कि नैहर दूर बसत है। परणव से मोहे लाज लगत है मोदिया के मन बेईमान नैहर दूर बसत है केकरा संग खेलहूं फाग नैहर दूर बसत है। दिग्गी मगन […] Read more » Featured केकरा संग खेलहूं फाग
लेख साहित्य सरकारी पानी March 24, 2016 by विजय कुमार | 1 Comment on सरकारी पानी बिजली और पानी को बरबाद होते देख मुझे बहुत गुस्सा आता है। मैं इस मामले में कुछ सनकी स्वभाव का हूं। यदि कहीं ऐसा होता दिखे, तो मैं दूसरों को कुछ कहने की बजाय स्वयं ही आगे बढ़कर इन्हें बंद कर देता हूं। कई लोग इसे मेरी मूर्खता कहते हैं। यद्यपि पीठ पीछे वे इसकी […] Read more » wastage of water पानी सरकारी पानी
व्यंग्य साहित्य रंगहीन दुनिया में राहु – केतु …!! March 24, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | 1 Comment on रंगहीन दुनिया में राहु – केतु …!! तारकेश कुमार ओझा जब पहली बार खबर सुनी कि पाकिस्तान में एक खेल प्रेमी को इसलिए गिरफ्तार कर लिया गया क्योंकि वह विराट कोहली का बड़ा प्रशंसक था और अनजाने में उसने अपने घर पर भारत का झंडा फहरा दिया तो मेरा माथा ठनका और अनिष्ट की आशंका होने लगी। क्योंकि अरसे से मैं यही […] Read more » holi vacation in pakistan India pakistan रंगहीन दुनिया में राहु - केतु ...!!
लेख साहित्य हम होलिका की जय क्यों बोलते हैं ? March 24, 2016 by अनुज अग्रवाल | Leave a Comment होलिका दहन के समय पता नहीं क्यों हमारे यहाँ होलिका माता की जय बोली जाती है | लोग जलती हुई होली में जौ डालते जाते हैं और होली की परिक्रमा करते हुए उसकी जय बोलते हैं | एक राक्षसी जो भक्त प्रह्लाद को जीवित जलाने के लिए स्वयं आग में बैठी और हम उसकी जय […] Read more » holika maata ki jai why do we say holika mata ki jai हम होलिका की जय क्यों बोलते हैं ? होलिका की जय
व्यंग्य साहित्य तीसरे दर्जे के शुभचिंतक March 24, 2016 by अशोक गौतम | Leave a Comment मेरी किसी भी बात से आप भले ही सहमत हों या न, पर मेरी इस बात से तो आप भी हंडरड परसेंट सहमत होंगे कि पहली श्रेणी के शुभचिंतकों का मिलना आज की तारीख में वैसे ही कठिन है जैसे आप शताब्दी की करंट बुकिंग के लिए पांच बजे भी सीट मिलने की उम्मीद में […] Read more » third category of wellwisher तीसरे दर्जे के शुभचिंतक शुभचिंतक
लेख साहित्य दुनिया मेरे आगे लोहिया के कॉलेज में March 22, 2016 by उमेश चतुर्वेदी | Leave a Comment उमेश चतुर्वेदी बचपन में मानस में कुछ कोलॉज चस्पा हो जाते हैं..वे कोलॉज ताउम्र आपका पीछा नहीं छोड़ते..कोलकाता को लेकर बचपन से ही मेरे मन में खास तरह का रोमांस है..कहते हैं ना सपनों का शहर..तो कोलकाता मेरे लिए सपनों का ही शहर है..सपने हकीकत की पथरीली जमीन पर अक्सर झनाक से टूट जाते हैं। […] Read more » दुनिया मेरे आगे लोहिया के कॉलेज में
कविता साहित्य अब हम शिक्षक की बारी है March 19, 2016 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment कई दिनों के बाद आज यें स्वर्णीम अवसर आया है। बड़ी तपस्या करके हमने, शिक्षक रूप को पाया है।। मन में उठी तमन्ना है, पूरी कर ली तैयारी है। बहुत पढ़ाया लोगो ने, अब हम शिक्षक की बारी है।। विश्वविद्यायल की माटी में अब बीज शान के बोना है। कतर््ाव्यों से सींच के […] Read more » अब हम शिक्षक की बारी है
राजनीति व्यंग्य साहित्य एक पाती शत्रुघ्न सिन्हा के नाम March 18, 2016 by विपिन किशोर सिन्हा | 3 Comments on एक पाती शत्रुघ्न सिन्हा के नाम प्रिय शत्रु बचवा तक चच्चा के प्यार-दुलार पहुंचे। आगे यह बताना है कि भगवान के किरिपा से हम इहां राजी-खुशी हैं, और तोहरी राजी खुशी के वास्ते भगवान से आरजू-मिन्नत करते रहते हैं। बचवा, कई बार हम तोसे भेंट करे वास्ते पटना गए, तो मालूम भया कि तुम दिल्ली गए हो – संसद के काम-काज […] Read more » Featured letter in the name of shatrughan sinha शत्रुघ्न सिन्हा
व्यंग्य साहित्य माल्या प्रा… तुस्सी ग्रेट हो…!!! March 16, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा जन – धन योजना तब जनता से काफी दूर थी। बैंक से संबंध गिने – चुने लोगों का ही होता था। आलम यह कि नया एकाउंट खुलवाने के लिए सिफारिश की जरूरत पड़ती। किसी भी कार्य से बैंक जाना काफी तनाव भरा अनुभव साबित होता था। क्योंकि रकम जमा करानी हो या […] Read more » Featured Vijay Mallya माल्या प्रा