व्यंग्य साहित्य खा “ना” खजाना April 16, 2016 / April 16, 2016 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment खाली दिमाग शैतान का घर होता हैं और खाली पेट चूहों का. जब दिमाग और पेट दोनों भर जाते हैं तो शैतान और चूहे, रोहित शर्मा के टैलेंट की तरह अदृश्य हो जाते हैं. लेकिन जब ज़्यादा खाकर दिमाग और पेट दोनों पर चर्बी चढ़ जाये तो इंसान “विजय माल्या” गति को प्राप्त होता हैं. […] Read more » खजाना
महत्वपूर्ण लेख लेख समाज साहित्य देश का वास्तविक गद्दार कौन ? भाग-14 April 15, 2016 by राकेश कुमार आर्य | 4 Comments on देश का वास्तविक गद्दार कौन ? भाग-14 गांधीजी से चार गुणा अधिक जेल में रहे सावरकरजी हमारे क्रांतिकारियों ने हर वर्ष की भांति 1933 के प्रारंभ से ही कई स्थानों पर बम विस्फोट कर करके सरकार की नाक में दम कर दिया था। सरकार का उन दिनों वश चलता तो वह एक क्रांतिकारी को भी छोड़ती नही। परंतु क्रांतिकारियों के पीछे जनता […] Read more » Featured who is the real traitor of India देश का वास्तविक गद्दार कौन
महत्वपूर्ण लेख राजनीति लेख समाज साहित्य देश का वास्तविक गद्दार कौन? भाग-13 April 14, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment गांधीजी और सावरकरजी की कार्य शैली में था मौलिक मतभेद अब हम देखेंगे कि गांधीजी और वीर सावरकरजी की कार्यशैली व चिंतनशैली में कितना मौलिक मतभेद था? सावरकर जी ने उन मुस्लिम लीगी और अलगाववादी मुस्लिम नेताओं को लताड़ते हुए कहा था, जो देश के बंटवारे की कीमत पर ही स्वतंत्रता आंदोलन में सहयोग करने […] Read more » Featured real traitor of India देश का वास्तविक गद्दार कौन
व्यंग्य साहित्य चिंतन बढ़े तो चिंता घटे …!! April 14, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा चिंता और चिंतन की दुनिया भी अजीब है। हर इंसान की चिंता अलग – अलग होती है। जैसे कुछ लोगों की चिंता का विषय होता है कि फलां अभिनेता या अभिनेत्री अभी तक शादी क्यों नहीं कर रहा या रही। या फिर अमुक जोड़े के बीच अब पहले जैसा कुछ है या […] Read more » चिंतन बढ़े तो चिंता घटे ...!!
लेख साहित्य जलियांवाला नरसंहार की कहानी April 13, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी जालियाँवाला बाग के पंजाब प्रान्त के अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के पास का एक छोटा सा बगीचा है बैसाखी के दिन 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में रौलेट एक्ट का विरोध करने के लिए एक सभा रखी गई, जिसमें कुछ नेता भाषण देने वाले थे। शहर में कर्फ्यू लगा हुआ था, फिर भी इसमें सैंकड़ों […] Read more » Featured Jaliawalan blood bath जलियांवाला नरसंहार जलियांवाला नरसंहार की कहानी
महत्वपूर्ण लेख लेख समाज देश का वास्तविक गद्दार कौन? भाग-12 April 12, 2016 by राकेश कुमार आर्य | 1 Comment on देश का वास्तविक गद्दार कौन? भाग-12 सावरकरजी के हिन्दुत्व और नेहरूजी की ‘हिन्दुस्तान की कहानी’ का सच स्वतंत्रता आंदोलन के काल में हमारे क्रांतिकारी जब भी कोई ‘आतंकी घटना’ कर ब्रिटिश सरकार को हिलाने का प्रशंसनीय कार्य करते थे तभी हमारे कांग्रेसी नेताओं की कंपकंपी छूट पड़ती थी। उस कंपकंपी से मुक्ति पाने के लिए गांधीजी की कांग्रेस तुरंत एक ‘माफीनामा’ […] Read more » Featured who is the real traitor of India गद्दार देश का वास्तविक गद्दार कौन सावरकर
कविता साहित्य “ऐसा अपना भारतवर्ष हो” April 11, 2016 by प्रवक्ता ब्यूरो | 2 Comments on “ऐसा अपना भारतवर्ष हो” रँग वर्ण और सम्प्रदाय का, भेदभाव ना हो आपसी I कर्तव्यपरायण प्रशासक हों, राजधर्म की हो वापसी II अटूट अलौकिक ऐसे ग्रह पर, अपनी भी एक अदभुत छवि हो विश्व-गुरु अति प्रेरणात्मक, ऐसा अपना भारतवर्ष हो II तमिल तेलुगू और केरल में, रिमझिम रिमझिम सी वर्षा हो I कन्नड़ गोवा महाराष्ट्र में, मलयपवन मय मधु […] Read more » ऐसा अपना भारतवर्ष हो
लेख साहित्य लंगड़ा गए तो मरने चले : आत्महत्या April 10, 2016 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment आत्महत्या एक ऐसा भयंकर लव्ज़ जिसके सुनते ही हमारी आँखों के आगे एक भयानक मंज़र सामने आता है। कोई भी तब नहीं मरता जब वो सबसे हार जाता है, वो तब मौत के आग़ोश में जाता है जब वो खुदसे हार जाता है। कहने को तो ये मनचाही मौत होती है,पर ये एक ऐसी स्थिति […] Read more » आत्महत्या मरने चले
व्यंग्य साहित्य पानी नहीं है तो क्या हुआ कोका कोला पियो April 10, 2016 by आरिफा एविस | 2 Comments on पानी नहीं है तो क्या हुआ कोका कोला पियो देखो भाई बात एकदम साफ है, क्रिकेट ज्यादा जरूरी है या खेती-किसानी? जाहिर है क्रिकेट ही ज्यादा जरूरी है क्योंकि ये तो राष्ट्रीय महत्व का खेल बन चुका है जो हमारे देश की आन बान शान है. यह सिर्फ देशभक्ति पैदा करने के लिए खेला जाता है. महानायक से लेकर नायक तक सिर्फ देश के […] Read more »
कविता साहित्य प्रष्फुटित चित्त है हुआ जब से ! April 10, 2016 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment प्रष्फुटित चित्त है हुआ जब से, महत महका किया है अन्तस से; अहम् विकसित हुआ किया चुप से, शिशु सृष्टि को निरखता उर से ! चाहता द्रश्य हर लखे झट से, किए विचरण तके प्रकृति पट से; दृष्टि आकाश अग्नि जड़ ताके, बना सम्बन्ध जीव जग समझे ! ललक ले समझे भाषा लय मुद्रा, बोलता […] Read more » प्रष्फुटित चित्त है हुआ जब से !
महत्वपूर्ण लेख लेख विविधा साहित्य देश का वास्तविक गद्दार कौन? भाग-10 April 9, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment क्रांति को लेकर गांधीजी और सावरकरजी का चिंतन गांधीजी जिस आंदोलन को अहिंसक रूप से चलाने के पक्षधर थे उसे उस समय के कई विद्वानों ने जनविरोधी और क्रांतिविरोधी कहा है। प्रश्न है कि गांधीजी का आंदोलन क्या वास्तव में ही जनविरोधी और क्रांतिविरोधी था? इस प्रश्न पर विचार करते समय हमें यह ध्यान रखना […] Read more » Featured traitor of India देश का वास्तविक गद्दार
लेख साहित्य सबसे बड़ी माता भारत माता April 9, 2016 by अनुज अग्रवाल | Leave a Comment बात करीब २ साल पहले की है | नवरात्रि का पहला दिन था | छुट्टियों में कॉलेज से घर आ रहा था | आगरा रेलवे स्टेशन से ऑटो किया ट्रांसपोर्ट नगर तक | शुरुवात में तो सब कुछ ठीक था पर जैसे ही हम कचहरी पहुंचे ड्राईवर ने ऑटो रोक दिया | वैसे तो आगरा […] Read more »