व्यंग्य साहित्य अभिनंदन करो नए राजा का November 15, 2015 by अशोक गौतम | 1 Comment on अभिनंदन करो नए राजा का अभिनंदन करो नए राजा का हे मेरे जंगलवासियो ! आपको यह जानकर खुशी होगी कि असली दांत टूट जाने के बाद चार- चार बार नकली दांत लगवा आपके हिस्से का मर्यादाओं के बीच रह खा -खाकर आनंद करने वाला आज सहर्ष घोषणा करता है कि मैं, आपका राजा, बेहोशी के हालात में अपने खाने -कमाने […] Read more » Featured अभिनंदन करो नए राजा का
साहित्य बर्बर शासक टीपू सुल्तान का महिमा मंडन क्यों? November 10, 2015 by विनोद बंसल | 3 Comments on बर्बर शासक टीपू सुल्तान का महिमा मंडन क्यों? हिंदू मानबिंदुओं पर प्रहार तथा हिंदू धार्मिक आस्था पर चोट करना आज के ‘सेक्यूलरवादियों’ का अधिकार-सा बनता जा रहा है। भारत, जो कि सोने की चिड़िया थी को पहले मुगलों ने, उसके बाद अंग्रेज़ों ने लूटा। उन्होंने न सिर्फ़ आर्थिक बल्कि धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और बौद्धिक रूप से भी हमें कंगाल किया। भारत की […] Read more » टीपू सुल्तान
लेख साहित्य पुरस्कार वापसी – अंर्तराष्ट्रीय साजिश November 8, 2015 / November 8, 2015 by डा. अरविन्द कुमार सिंह | 3 Comments on पुरस्कार वापसी – अंर्तराष्ट्रीय साजिश डा. अरविन्द कुमार सिंह जरा सोचिए, यदि संपूर्ण प्रिंट एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया का प्रकाशन एवं प्रसारण बंद कर दिया जाए तो हम राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य की घटनाओं तथा राजनेताओं के बारे में कितना जान पाते? राहुल गाॅधी, अरविन्द केजरीवाल तथा नरेन्द्र मोदी के बारे में कितना जानते? हमारी विचारधारायें सूचना के आभाव में कितनी धारदार हो […] Read more » Featured अंर्तराष्ट्रीय साजिश पुरस्कार वापसी
आलोचना साहित्य साहित्य,स्वहित के बीच पुरस्कार वापसी पर प्रश्न… November 8, 2015 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on साहित्य,स्वहित के बीच पुरस्कार वापसी पर प्रश्न… अक्षय दुबे ‘साथी’ कहा जाता है कि साहित्य समाज का दर्पण होता है,साहित्य कालचक्र का साक्षी होता है.समाज में अच्छाइयों की रचना और बुराइयों की भर्त्सना करते हुए एक लोकतांत्रिक समाज को रचता है यही कारण है कि साहित्य अर्थात ‘सबका हित’ की परंपरा के निर्वहन करने वालों अर्थात साहित्यकारों को समाज बड़े सम्मान […] Read more » samman wapsi पुरस्कार वापसी
आलोचना समाज छोटा राजन को देश और दलितों का आदर्श मत बनाइये November 7, 2015 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on छोटा राजन को देश और दलितों का आदर्श मत बनाइये “ अपराध का रंग हरा है तो वह आतंकवाद और अगर गैरुआ है तो वह राष्ट्रवाद ,एक मुल्क के रूप में आखिर कहां जा रहे है हम ? “ ………………………………………………………………………………………………………………………………………….. अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन की इंडोनेशिया के बाली शहर में नाटकीय गिरफ्तारी तथा उसका आनन फानन में भारत लाया जाना किसी पूर्व निर्धारित पटकथा जैसा […] Read more » Featured छोटा राजन देश और दलितों का आदर्श मत बनाइये
कविता साहित्य कह रही है ‘अजन्मी’ November 7, 2015 by लक्ष्मी जायसवाल | Leave a Comment कह रही है ‘अजन्मी’ मां मैं भी इस दुनिया में आना चाहती हूँ नन्हे नन्हे पैरो से मैं भी गिरकर ठोकर खाना चाहती हूँ गिरते गिरते उठकर सम्भलना चाहती हूँ तेरी उंगली पकड़कर चलना चाहती हूं तोतली जबान में कभी तो कभी लाड में माँ मैं भी तुझे माँ कहना चाहती हूँ। क्यों नहीं कर […] Read more » कह रही है 'अजन्मी'
कविता साहित्य चुटकी भर सिन्दूर November 7, 2015 / November 7, 2015 by लक्ष्मी जायसवाल | Leave a Comment चुटकी भर सिन्दूर डला मांग में और बदल गया जीवन। चुटकी भर सिन्दूर के बदले में मिला उम्र भर का बंधन। सजी मैं संवरी मैं निभायी रस्में और स्वीकारा ये गठबंधन। इस सिन्दूर के बदले मिला मुझे किसी का जीवन भर का साथ इस साथ के बदले छूटे सभी अपने और छूटा अपनों का हाथ। […] Read more » Featured चुटकी भर सिन्दूर
आलोचना टॉप स्टोरी राजनीति झूठी लोकप्रियता के माफिक November 6, 2015 by प्रवक्ता ब्यूरो | 3 Comments on झूठी लोकप्रियता के माफिक आज जिस तरह से असहिष्णुता का राग आलाप करते हुये हमारे तथाकथित कुछ बुद्धिजीवी साहित्यकार,कलाकार,वैज्ञानिक और इतिहासकार एक झूठी मनसा तथा सस्ती लोकप्रियता पाने के चलते जिस तरह से सरकार को घेरने की कोशिश मे लगे है इससे एक बात तो साफ जाहिर होती है कि इन बुद्धिजीवियों का मकसद सीधे सीधे सरकार का दमन […] Read more » असहिष्णुता का राग आलाप झूठी लोकप्रियता झूठी लोकप्रियता के माफिक सस्ती लोकप्रियता हासिल करना
आलोचना ये बाबा नाव डूबा कर रहेंगे नमो की November 6, 2015 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment असहिष्णुता के मुद्दे पर प्रधानमंत्री की चुप्पी और उनके समर्थक साधुओं और योगियों की तल्खी से लगता है कि ये आग फिलहाल बुझने वाली नहीं है.पद्मश्री के लिए केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के पहले से शीर्षासन कर रहे बाबा रामदेव की मांग है कि ‘अगर शाहरुख सच्चे देशभक्त हैं तो उन्हें पद्मश्री सम्मान […] Read more » नमो
व्यंग्य साहित्य रिटायरमेंट की पीड़ा …!! November 6, 2015 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा मि. खिलाड़ी और लक्ष्मीधर दोनों की आंखों में आंसू थे। क्योंकि दोनों संयोग से एक ही दिन रिटायर हो गए या यूं कहें कि कर दिए गए। हालांकि रिटायर दोनों ही नहीं होना चाहते थे। बल्कि रिटायरमेंट का ख्याल भी दोनों को डरा देता था। मि. खिलाड़ी पिछले तीन साल से टीम […] Read more » रिटायरमेंट
लेख साहित्य फुटपाथ पर सोया बालक और मेरा ममत्व November 4, 2015 / November 4, 2015 by अनुप्रिया अंशुमान | Leave a Comment मुझे ये लगता है कि माँ होना या माँ बनना, दोनो ही बातें, अपने में एक विशेषता लिए आती है । हमेशा ही मेरी आँखें माँ के नाम पर नम हो जाती है; और माँ बनने की अभिलाषाओं को त्वरित कर देती है । कहते है कि स्त्री तब तक माँ नहीं बनती जब तक […] Read more » फुटपाथ पर सोया बालक मेरा ममत्व
कविता साहित्य ये अकेलापन November 4, 2015 by अनुप्रिया अंशुमान | Leave a Comment बहुत ही दूर तक दिखता है मुझको ये अकेलापन तुम्हारे साथ होने पर भी नहीं हटता है ये अकेलापन कभी किया करती हूँ खुद से बातें मैं बेपर्दा कि _छुप के देखता है मुझको ये अकेलापन हृदय के एक कोने में जब याद उठती है तुम्हारी कि_छुप के साँस लेता है मुझमें ये अकेलापन कितनी […] Read more » ये अकेलापन