व्यंग्य साहित्य सूट बूट का प्रस्ताव October 29, 2015 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment डॉ वेद व्यथित बच्चा जब थोड़ा सा बड़ा होने लगता है तो उस की माँ उसे स्कूल जाने से पहले थोड़ा सा अंग्रेज बनाने की तैयारी शुरू कर देती है। वह भारत के तथाकथित अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों की अपेक्षा के अनुसार ‘पार्ट ऑफ़ बॉडी ‘,फाइव फ्रूटस नेम आदि रटवाना शुरू कर देती है। फिर […] Read more » सूट बूट का प्रस्ताव
लेख विविधा सर्व प्रथम, यह पाखण्ड नहीं है. October 27, 2015 / October 28, 2015 by आर. सिंह | 16 Comments on सर्व प्रथम, यह पाखण्ड नहीं है. संगोष्ठी (सम्मान वापसी -प्रतिरोध या पाखंड?) सर्व प्रथम, यह पाखण्ड नहीं है. आज यह प्रश्न उठ रहा है या उठाया जा रहा है कि अवार्ड इस समय ही क्यों लौटाए जा रहे हैं,पहले क्यों नहीं?आम लोगों को यह प्रश्न स्वाभाविक लग रहा है,पर मेरे विचार से यह प्रश्न एक सिरे से अस्वाभाविक है.यह प्रश्न उन […] Read more » Featured यह पाखण्ड नहीं है.
लेख विविधा लेखक के विरोध का तरीका केवल लेखन है October 27, 2015 / October 28, 2015 by राजीव रंजन प्रसाद | Leave a Comment राजीव रंजन प्रसाद व्यवस्था के विरुद्ध सभी लड़ाईयों में जो सर्वाधिक कारगर हथियार सिद्ध होता रहा है वह है – कलम। सामाजिक-सांस्कृतिक आन्दोलन हों अथवा साम्प्रदायिक असहिष्णुताओं को समरसताओं में कायांतरित किये जाने के प्रयास, यह अब तक लेखकों के कंधों का दायित्व रहा है। व्यवस्था कोई भी हो और सरकारें कैसी भी हों, लेखन […] Read more » Featured लेखक के विरोध का तरीका
कला-संस्कृति कविता ए नये भारत के दिन बता.. October 27, 2015 / October 28, 2015 by अरुण तिवारी | Leave a Comment ए नये भारत के दिन बता…… ए नदिया जी के कुंभ बता, उजरे-कारे सब मन बता, क्या गंगदीप जलाना याद हमें या कुंभ जगाना भूल गये ? या भूल गये कि कुंभ सिर्फ नहान नहीं, ग्ंागा यूं ही थी महान नहीं । नदी सभ्यतायें तो खूब जनी, पर संस्कृति गंग ही परवान चढी। नदियों में […] Read more » Featured ए नये भारत के दिन बता..
लेख साहित्य साहित्यकार पुरस्कार वापसी के अलावा और क्या क्या कर सकते हैं October 26, 2015 by इक़बाल हिंदुस्तानी | Leave a Comment इक़बाल हिंदुस्तानी सबकी कट्टरता का विरोध व समाज की स्वस्थ मानसिकता बनायें ! देश में बढ़ रही असहिष्णुता कट्टरता और तीन साहित्यकारों की उनके विचारों के कारण एवं यूपी के दादरी में एक मुस्लिम की गोमांस खाने की अफवाह पर हत्या होने के बाद विरोध के तौर पर लगभग तीन दर्जन से अधिक साहित्यकार अपने […] Read more » Featured पुरस्कार वापसी साहित्यकार
लेख साहित्य ऐसी पुरस्कार वापसी से सवाल तो उठेंगे ही.. October 26, 2015 / October 26, 2015 by सिद्धार्थ शंकर गौतम | Leave a Comment इन दिनों देश में बढ़ती धार्मिक असहिष्णुता एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हो रहे हमले के खिलाफ विरोधस्वरूप साहित्यकारों द्वारा पुरस्कार वापसी का दौर सा चल पड़ा है। हालांकि जिस अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और असहिष्णुता की साहित्यकार दुहाई दे रहे हैं; उसमें एक ख़ास विचारधारा वाली पार्टी के खिलाफ षड़यंत्र की बू आती है। जनसामान्य […] Read more » Featured पुरस्कार वापसी
व्यंग्य साहित्य न्यूज करे कन्फयूज…!! October 26, 2015 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा चैनल पर ब्रेकिंग न्यूज चल रही है… टीम इंडिया मैच हारी…। कुछ देर बाद पर्दे पर सुटेड – बुटेड कुछ जाने – पहचाने चेहरे उभरे। एक ने कहा … आफ कोर्स … कैप्टन किंग को समझना होगा…. वे अपनी मनमर्जी टीम पर नहीं थोप सकते… । आखिर उन्होंने ऐसा फैसला किया ही […] Read more » न्यूज करे कन्फयूज...!!
व्यंग्य साहित्य धीरे-धीरे बोल बाबा सुन ना ले October 25, 2015 by प्रवक्ता ब्यूरो | 2 Comments on धीरे-धीरे बोल बाबा सुन ना ले दाल वो भी अरहर की दाल ,इसे लेकर बाबा रामदेव ने बड़े पते की बात कही है.बाबा ने जो कुछ कहा है उसके बारे में खुद योगाचार्य पतंजलि को कुछ पता नहीं था. बाबा बोले-दाल खाने से घुटनों का दर्द पैदा होता है.सचमुच हमें भी ये ब्रम्हज्ञान ब्राम्हण होने के बावजूद आज तक नहीं था.हमारे […] Read more » धीरे-धीरे बोल
शख्सियत साहित्य तस्लीमा नसरीन को १६ वीं सदी छोड़कर २१ वीं में आ जाना चाहिए ! October 23, 2015 by श्रीराम तिवारी | 3 Comments on तस्लीमा नसरीन को १६ वीं सदी छोड़कर २१ वीं में आ जाना चाहिए ! यद्द्पि तस्लीमा नसरीन अपने मादरे -वतन ‘बांग्ला देश ‘ में वहाँ के अल्पसंख्यक हिन्दुओं -ईसाइयों के सामूहिक कत्लेआम की गवाह रहीं हैं।उन्होंने नस्लीय और मजहबी उन्मादियों के हिंसक हमलों को भी अनेक बार भुगता है।ऐंसा लगता है की उन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप में हिन्दुओं की दुर्दशा को बहुत नजदीकी से देखा है। इसीलिये नियति ने उन्हें […] Read more » Featured Tasleema Nasrin तस्लीमा नसरीन
कला-संस्कृति कविता रामचरित October 23, 2015 / October 23, 2015 by अरुण तिवारी | Leave a Comment धरियो, रामचरित मन धरियो तजियो, जग की तृष्णा तजियो। परहित सरिस धर्म मन धरियो मरियो, मर्यादा पर मरियो।। धरियो, रामचरित…. भाई बने तो स्वारथ तजियो संगिनी बन दुख-सुख सम धरियोे। मात बने तो धीरज धरियो पुत्र बने तो पालन करियो।। धरियो, रामचरित… सेवक सखा समझ मन भजियो ़शरणागत की रक्षा करियो। शत्रु संग मत धोखा […] Read more » रामचरित
व्यंग्य साहित्य नेता जी कहिन, अबकी बार, गाय हमार, October 20, 2015 by रवि श्रीवास्तव | Leave a Comment देश में एक मौसम सदाबहार रहता हैं. जाने का नाम ही नही लेता है. वो है चुनावी मौसम. कभी इस राज्य में तो कभी उस राज्य में. जहां भी ये मौसम शुरू होता है. वहां तो जैसे चार चांद लग जाते हैं.गली मोहल्लों में चहल-पहल बहुत बढ़ जाती है. चाय की दुकानों पर दो चुस्की […] Read more » अबकी बार गाय हमार नेता जी कहिन
कविता आरक्षण या भीख October 17, 2015 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment हमें भीख दे दो.. हम अपाहिज जो हो चले, अब तो हमारे भी हाथ पैर में जंग और दिमाग में अलीगढ़ के ताले पड़ गये | कुछ करना अब असंभव सा हो गया है अब तो हमको भी आरक्षण चाहिए | हम भी अब २०-३० नंबर से आई.आई.टी. , एम.बी.बी. एस.पास करेंगे, आरक्षण के फायदे […] Read more » आरक्षण या भीख