गजल गजल:इंसानियत-श्यामल सुमन May 27, 2012 / May 26, 2012 by श्यामल सुमन | Leave a Comment इंसानियत ही मज़हब सबको बताते हैं देते हैं दग़ा आकर इनायत जताते हैं उसने जो पूछा हमसे क्या हाल चाल है लाखों हैं बोझ ग़म के पर मुसकुराते हैं मजबूरियों से मेरी उनकी निकल पड़ी लेकर के कुछ न कुछ फिर रस्ता दिखाते हैं खाकर के सूखी रोटी लहू बूँद भर बना […] Read more » gazal by shyamal suman गजल:इंसानियत गजल:इंसानियत-श्यामल सुमन गजल:श्यामल सुमन
कविता कविता:संवाद-श्यामल सुमन May 26, 2012 / May 26, 2012 by श्यामल सुमन | Leave a Comment काम कितना कठिन है जरा सोचना। गाँव अंधों का हो आईना बेचना।। गीत जिनके लिए रोज लिखता मगर। बात उन तक न पहुँचे तो कटता जिगर। कैसे संवाद हो साथ जन से मेरा, जिन्दगी बीत जाती न मिलती डगर। बन के तोता फिर गीता को क्यों बाँचना। गाँव अंधों का हो आईना बेचना।। […] Read more » kavita by shyamal suman poem samvd by shyamal suman कविता:श्यामल सुमन कविता:संवाद कविता:संवाद-श्यामल सुमन
आलोचना जनसत्ता का प्रगतिशीलता विरोधी मुहिम और के. विक्रम राव का सफेद झूठ / जगदीश्वर चतुर्वेदी May 25, 2012 / June 28, 2012 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 3 Comments on जनसत्ता का प्रगतिशीलता विरोधी मुहिम और के. विक्रम राव का सफेद झूठ / जगदीश्वर चतुर्वेदी जगदीश्वर चतुर्वेदी जनसत्ता अपनी प्रगतिशीलता विरोधी मुहिम में एक कदम आगे बढ़ गया है. उसने के.विक्रम राव का जनसत्ता के 13मई 2012 के अंक में “न प्रगति न जनवाद, निपट अवसरवाद” शीर्षक से लेख छापा है। यह लेख प्रगतिशील लेखकों और समाजवाद के प्रति पूर्वग्रहों से भरा है। यह सच है राव साहब की लोकतंत्र […] Read more » के. विक्रम राव जनसत्ता प्रगतिशील मार्क्सवाद वैचारिक अश्पृश्यता
कविता कविता:अन्यथा शब्दोँ के लिए चिँता-मोतीलाल May 25, 2012 / May 25, 2012 by मोतीलाल | Leave a Comment जहाँ कहीँ भी होगा उठती अंतस से हूक अवसाद के चक्रवात मेँ रेखांकित नहीँ उसका वजूद गौर से यदि देखेँ मुखर होने की उनकी उपस्थिति है निश्चित ही हमसे करीब सभी समकालीन परिदृश्य चिँतन की किसी पद्धति मेँ अफसोसजनक नहीँ कि चीजेँ नहीँ वैसी जिन बुनियादोँ पर काटे जा रहे हैँ वनोँ को […] Read more » poem by motilal कविता-मोतीलाल कविता:अन्यथा शब्दोँ के लिए चिँता-मोतीलाल
कविता रघुनाथ सिंह की कविता / कैसा है यह राष्ट्र हमारा May 24, 2012 / May 24, 2012 by रघुनाथ सिंह | Leave a Comment कैसा है यह राष्ट्र हमारा हो रही हैं भ्रूण हत्याएं आई है जब से मशीन जो बता देती है निस्सहाय भ्रूण का लिंग और फिर लोग जो हैं पढ़े लिखे तथा समृद्ध और डाक्टर ली थी शपथ जिन्हों ने जीवन को जीवन देने की कर देते हैं हत्या उस निस्सहाय भ्रूण की ऐसा है यह […] Read more » राष्ट्र
कविता कविता:जहाँ कहीँ भी होगा-मोतीलाल May 23, 2012 / May 23, 2012 by मोतीलाल | Leave a Comment मोतीलाल जहाँ कहीँ भी होगा उठती अंतस से हूक अवसाद के चक्रवात मेँ रेखांकित नहीँ उसका वजूद गौर से यदि देखेँ मुखर होने की उनकी उपस्थिति है निश्चित ही हमसे करीब सभी समकालीन परिदृश्य चिँतन की किसी पद्धति मेँ अफसोसजनक नहीँ कि चीजेँ नहीँ वैसी जिन बुनियादोँ पर काटे जा रहे हैँ वनोँ को […] Read more » kavita by motilal कविता:जहाँ कहीँ भी होगा कविता:जहाँ कहीँ भी होगा-मोतीलाल कविता:मोतीलाल
गजल गजल:गीत ज़िन्दगी के हम गुनगुनाते रहे-हिमकर श्याम May 22, 2012 / May 22, 2012 by हिमकर श्याम | 3 Comments on गजल:गीत ज़िन्दगी के हम गुनगुनाते रहे-हिमकर श्याम जहां तक हुआ खुद को बहलाते रहे गीत ज़िन्दगी के हम गुनगुनाते रहे छूटती रही ख़ुशियों की डोर हाथों से वक़्त हमें, हम उसे आजमाते रहे राहों में न सही हौसलों में दम है बस क़दम दर क़दम हम उठाते रहे आरज़ू थी जो दिल की रह गयी दिल में हादसे दर […] Read more » gazal by himkar shyam गजल:गीत ज़िन्दगी के हम गुनगुनाते रहे-हिमकर श्याम गजल:हिमकर श्याम
व्यंग्य व्यंग्य-तो कोतवाल जी कहिन-अशोक गौतम May 22, 2012 / May 22, 2012 by अशोक गौतम | Leave a Comment सरकार के घर तो दिन रात डाके पड़ते रहते हैं, कोर्इ पूछने वाला नहीं। कोर्इ सारा दिन दफतर की कुर्सी पर ऊंघने के बाद शाम को दफतर से चुन्नू को रफ काम के लिए सरकारी रजिस्टर बगल में दबाए, जेब में चार पैन डाले शान से घर आ रहा है तो कोर्इ घर के कर्टन […] Read more » satire by Ashok Gautam व्यंग्य-अशोक गौतम व्यंग्य-तो कोतवाल जी कहिन-अशोक गौतम
गजल गजल-खूं बहाके दंगों में जन्नतें नहीं मिलती…..इक़बाल हिंदुस्तानी May 20, 2012 / May 20, 2012 by इक़बाल हिंदुस्तानी | 6 Comments on गजल-खूं बहाके दंगों में जन्नतें नहीं मिलती…..इक़बाल हिंदुस्तानी महनती ग़रीबों को देवता बना देना, कुदरती वसाइल पर सबका हक़ लिखा देना। लोग जिनके ज़हनों को रहनुमा चलाते हैं, अब भी वो गुलामी में जी रहे बता देना। सच को सच बताने की क़ीमतें जो चाहते हैं, उनकी खुद की क़ीमत भी माथे पर लिखा देना। जुल्म और हक़तल्फ़ी ख़ामोशी से […] Read more » .इक़बाल हिंदुस्तानी gazal by iqbal hindustani गजल-खूं बहाके दंगों में जन्नतें नहीं मिलती.....इक़बाल हिंदुस्तानी
लेख शख्सियत भारत के नोबेल पुरस्कार विजेता : गुरूदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर May 19, 2012 / July 22, 2012 by राकेश कुमार आर्य | 1 Comment on भारत के नोबेल पुरस्कार विजेता : गुरूदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर राकेश कुमार आर्य भारत की पावन धरती पर कितनी ही महान विभूतियों ने जन्म लिया है, कितने ही विदेशी महापुरूषों ने इस पावन धरती को अपनी कर्म स्थली बनाया है। प्राचीन काल से ही भारत की पावन धरा ने मातृवत मानवता को अपने पुनीत पयोधर से पावन पयपान कराकर उसे सत्कृत्यों के लिए प्रेरित किया […] Read more » amartya kumar sen amartya kumar sen in the field of economy Chandra shekhar venkat raman Chandra shekhar venkat raman in the field of physics dr. hargobind khurana dr. hargobind khurana in the field of medical Mother Teresa mother Teresa in the field of peace nobel prize winners from India prominent recipients of nobel prize from India Rabindranath Tagore v.s. naayyal vidyadhar surajprasad naayyal अमत्र्य कुमार सेन गुरूदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर चंद्रशेखर वेंकट रमण चंद्रशेखर वेंकट रमण भौतिकी के क्षेत्र में डा. हर गोविंद खुराना डा. हर गोविंद खुराना को चिकित्सा क्षेत्र भारत के नोबेल पुरस्कार विजेता भौतिकी के क्षेत्र में अमत्र्य कुमार सेन को 1998 में मदर टेरेसा मदर टेरेसा को शांति के क्षेत्र में विद्याधर सूरजप्रसाद नाययाल को 2001 में साहित्य के क्षेत्र में
लेख साहित्य नोबेल पुरस्कार की कहानी May 19, 2012 / May 19, 2012 by राकेश कुमार आर्य | 1 Comment on नोबेल पुरस्कार की कहानी राकेश कुमार आर्य आज की दुनिया में नोबेल पुरस्कार सबसे बड़ा पुरस्कार है। इसे प्राप्त करना हर किसी के लिए संभव नहीं है। बड़े भागीरथ प्रयासों से ही किसी सौभाग्यशाली को यह पुरस्कार मिलता है। इस पुरस्कार को पाने की जितनी इच्छा लोगों में रहती है उतनी ही इच्छा इसके विषय में ये जानकारी लेने […] Read more » how nobel prize came into existence story of nobel prize नोबेल पुरस्कार की कहानी
कविता कविता – अगली सदी-मोतीलाल May 19, 2012 / May 19, 2012 by मोतीलाल | Leave a Comment बहुत संभव है चक्कियोँ के पाट से कोई लाल पगडंडी निकल आये और आँसूओँ के सागरोँ पर कोई बादल उमड़ता चला जाये गिरते पानी मेँ कदमोँ की आहट प्रायद्वीप बनने से रहे बहुत संभव है कोहनियोँ पे टिका जमीन पानी मेँ घुले ही नहीँ और बना ले प्रकृति की सबसे सुन्दर आकृति इन […] Read more » poem by motilal poem-agli sadi by motilal कविता - अगली सदी कविता - अगली सदी-मोतीलाल मोतीलाल