कविता कविता-पुत्र-पितृ आलिंगन- राजकुमार सोनी May 18, 2012 / May 18, 2012 by राजकुमार सोनी | Leave a Comment कितना पावन मन भावन यह पुत्र-पितृ आलिंगन गणपति-शंकर आलिंगन नमोऽस्तुते जै गिरिजा नंदन जयति जयति जै गजवदन गजानन जै गणपति, जै विघ्न विनाशन कितना पावन मन भावन गणपति- शंकर आलिंगन जयति विनायक, गणाध्यक्ष, इकदन्तन कपिल, सुमुख, रिद्धि-सिद्धि के स्वामिन विघ्न-विनाशक, घूमकेतु जै विकट गजानन भालचन्द्र, लम्बोदर हे- हम सदैव- गजकरण-शरण। स्वीकारो […] Read more » poem by rajkumar soni कविता-पुत्र-पितृ आलिंगन- राजकुमार सोनी
कविता बडबडाहट……गाँधीजी कि पुण्यतिथि पर मेरी दो कड़वी कविताएँ May 16, 2012 / May 16, 2012 by अनुराग अनंत | 1 Comment on बडबडाहट……गाँधीजी कि पुण्यतिथि पर मेरी दो कड़वी कविताएँ कई बार आदमी कुछ कहना चाहता है पर कुछ कह नहीं पाता,ये कुछ न कह पाना उसे बहुत कुछ कहने के लिए मथ देता है,उस वक़्त उस आदमी की स्तिथि त्रिसंकू की तरह होती है वो ”कुछ” और ”बहुत कुछ” के बीच ”कुछ नहीं” को नकार कर खुद से ”कुछ-कुछ” कहने लगता है |ये ”कुछ-कुछ” […] Read more » Death Anniversary of Gandhi Ji Gandhi Ji गाँधीजी गाँधीजी कि पुण्यतिथि
गजल गजल-भेंट मज़दूरों की क्यों लेती बताओ चिमनियां-इकबाल हिंदुस्तानी May 16, 2012 by इक़बाल हिंदुस्तानी | Leave a Comment आये दिन गिरने लगीं जब गुलशनों में बिजलियां, अब संभलकर उड़ रही हैं गुलशनों में तितलियां। उनके कपड़ों की नुमाइश का सबब बनती हैं जो, मुफलिसों की जान ले लेती हैं वो ही सर्दियां। रहबरी जज़्बात की काबू रखो ये जुर्म है, राख़ में तब्दील हो जाती हैं पल में बसितयां। इस […] Read more » gazal by iqbal hindustani गजल-इकबाल हिंदुस्तानी गजल-भेंट मज़दूरों की क्यों लेती बताओ चिमनियां-इकबाल हिंदुस्तानी
कविता कविता: जिन्दगी – लक्ष्मी नारायण लहरे May 16, 2012 / May 16, 2012 by लक्ष्मी नारायण लहरे कोसीर पत्रकार | Leave a Comment आपना पन कहें या दोस्ताना अजीब चाहत है इस जीवन में सिर्फ संघर्ष भरी राहें है अपनों के बीच भी हम अकेले है एक -दुसरे के प्रेम से बंध कर स्वार्थ भरी जीवन जी रहे है जिन्दगी ….. की जंग में भाई -भाई को नहीं समझता माँ -बाप को नही पहचानते स्वार्थ ,भरी जीवन जी […] Read more » कविता कविता - जिन्दगी जिन्दगी लक्ष्मी नारायण लहरे
गजल गजल-दुश्मनों के दुश्मनों का दोस्त बन-इकबाल हिंदुस्तानी May 16, 2012 / May 16, 2012 by इक़बाल हिंदुस्तानी | Leave a Comment शुक्र है मौसम सुहाना हो गया, उनके आने का बहाना हो गया। तुम इसे चाहे कोर्इ भी नाम दो, मुल्क गै़रों का निशाना हो गया। हो हुकूमत पांच दिन तो ठीक है, राज बरसों का पुराना हो गया। बात कुछ भी हो विदेशी हाथ है, यह तो नाकामी छिपाना हो गया। […] Read more » gazal by iqbal hindustani गजल-दुश्मनों के दुश्मनों का दोस्त बन-इकबाल हिंदुस्तानी
लेख सम्बद्धता क्या है? May 14, 2012 / May 16, 2012 by राकेश कुमार आर्य | 1 Comment on सम्बद्धता क्या है? – राकेश कुमार आर्य किसी मान्यता, सिद्धांत, वस्तु व्यक्ति आदि के प्रति सहज रूप में बिना किसी बाहरी दबाव के आपका जुड़ जाना उसके प्रति आपकी सम्बद्धता है। ऐसी मानसिकता के वशीभूत होकर आप पूर्ण मनोयोग और प्राणपण से कार्य करने के लिए तो सक्रिय रहेंगे ही साथ ही उस मान्यता, सिद्धांत, वस्तु, व्यक्ति आदि […] Read more » Rakesh Arya Relativity राकेश आर्या सम्बद्धता
गजल गज़ल:रिश्तों में प्यार का व्यापार नहीं होता– सत्येंद्र गुप्ता May 13, 2012 / May 13, 2012 by सत्येन्द्र गुप्ता | 1 Comment on गज़ल:रिश्तों में प्यार का व्यापार नहीं होता– सत्येंद्र गुप्ता रिश्तों में प्यार का व्यापार नहीं होता तराजू से तौलकर भी तो प्यार नहीं होता। दिल की ज़ागीर को मैं कैसे लुटा दूं हर कोई चाहत का हक़दार नहीं होता। उजाड़ शब की तन्हाई का आलम न पूछिए मरने का तब भी तो इंतज़ार नहीं होता। चमकते थे दरो-दीवार कभी मेरे घर के भी अब […] Read more » gazal by satendra gupta गज़ल:रिश्तों में प्यार का व्यापार नहीं होता– सत्येंद्र गुप्ता
कविता कविता:अपने ही कमरे मेँ– मोतीलाल May 13, 2012 / May 13, 2012 by मोतीलाल | Leave a Comment एक विस्मृत जर्जर कमरे मेँ मै गिर जाता हूँ और गुजरता हूँ नम तंतुओँ के बीच से नष्ट हो चुकी चीजोँ के बीच जैसे मवेशियाँ चरते होँ अपने चारागाह मेँ मैँ इस तीखे माहौल मेँ मरणासन्न गंधोँ की लहरोँ के सामने महसूसता हूँ उन हरे पत्तोँ की सरसराहट जो अंधेरे बरामदोँ मेँ कहीँ किसी […] Read more » poem by motilal कविता:अपने ही कमरे मेँ
कविता कविता-श्यामल सुमन May 12, 2012 by श्यामल सुमन | Leave a Comment श्यामल सुमन सेवा है साहित्य सुमन व्यापार नहीं लेखन में प्रतिबंध मुझे स्वीकार नहीं प्रायोजित रचना से कोई प्यार नहीं बच के रहना साहित्यिक दुकानों से जी कर लिखता हूँ कोई बीमार नहीं मठाधीश की आज यहाँ बन आई है कितने डर से करते हैं तकरार नहीं धन प्रभाव के बल पर […] Read more » कविता-श्यामल सुमन
गजल गजल-आये दिन गिरने लगीं जब….-इकबाल हिंदुस्तानी May 12, 2012 / May 12, 2012 by इक़बाल हिंदुस्तानी | 1 Comment on गजल-आये दिन गिरने लगीं जब….-इकबाल हिंदुस्तानी भेंट मज़दूरों की क्यों लेती बताओ चिमनियां….. आये दिन गिरने लगीं जब गुलशनों में बिजलियां, अब संभलकर उड़ रही हैं गुलशनों में तितलियां। उनके कपड़ों की नुमाइश का सबब बनती हैं जो, मुफलिसों की जान ले लेती हैं वो ही सर्दियां। रहबरी जज़्बात की काबू रखो ये जुर्म है, राख़ में तब्दील हो […] Read more »
गजल गजल-वतन महफ़ूज़ रखना है हमें खुद भी फ़ना होकर…..इकबाल हिंदुस्तानी May 12, 2012 / May 12, 2012 by इक़बाल हिंदुस्तानी | Leave a Comment इसी मिटटी में रहना है खुशी से या ख़फ़ा होकर, कहां हम जायेंगे बतलाइये तुमसे जुदा होकर। ये है वक़्ती सभी नज़दीकियां धोखा ना खा जाना, हमारे वोट मांगेंगे ये सब हम पर फि़दा होकर। तुम्हारी भूल को हम 6 दिसंबर याद रक्खेंगे, हज़ारों साल लिपटेंगी तुम्हें अब ये बला होकर। विरासत […] Read more » gazal by iqbal hindustani
आलोचना महत्वपूर्ण लेख ‘नामवर सिंह आलोचक कम और साहित्य के प्रौपेगैण्डिस्ट ज्यादा नजर आते हैं’ May 10, 2012 / June 6, 2012 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 5 Comments on ‘नामवर सिंह आलोचक कम और साहित्य के प्रौपेगैण्डिस्ट ज्यादा नजर आते हैं’ जगदीश्वर चतुर्वेदी हाल ही में राजकमल प्रकाशन के द्वारा नामवर सिंह के विचारों,आलोचना निबंधों ,व्याख्यानों और साक्षात्कारों पर केन्द्रित 4 किताबें आयी हैं। चार और आनी बाकी हैं। इन किताबों का ‘कुशल’ संपादन आशीष त्रिपाठी ने किया है। ये किताबें आधुनिक युग में विचारों की भिड़ंत के सैलीबरेटी रूप का आदर्श नमूना है। सैलीबरेटी आलोचना […] Read more » आलोचना नामवर सिंह