आलोचना महत्वपूर्ण लेख ‘नामवर सिंह आलोचक कम और साहित्य के प्रौपेगैण्डिस्ट ज्यादा नजर आते हैं’ May 10, 2012 / June 6, 2012 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 5 Comments on ‘नामवर सिंह आलोचक कम और साहित्य के प्रौपेगैण्डिस्ट ज्यादा नजर आते हैं’ जगदीश्वर चतुर्वेदी हाल ही में राजकमल प्रकाशन के द्वारा नामवर सिंह के विचारों,आलोचना निबंधों ,व्याख्यानों और साक्षात्कारों पर केन्द्रित 4 किताबें आयी हैं। चार और आनी बाकी हैं। इन किताबों का ‘कुशल’ संपादन आशीष त्रिपाठी ने किया है। ये किताबें आधुनिक युग में विचारों की भिड़ंत के सैलीबरेटी रूप का आदर्श नमूना है। सैलीबरेटी आलोचना […] Read more » आलोचना नामवर सिंह
गजल गजल-भारत मेरा काबुल नहीं बग़दाद नहीं है….-इकबाल हिंदुस्तानी May 8, 2012 / May 9, 2012 by इक़बाल हिंदुस्तानी | Leave a Comment खुदग़र्जियां तो है मगर जेहाद नहीं है, सब भूल गये हम हमें कुछ याद नहीं है। बेमेल मुहब्बत का नतीजा ही तो ग़म है, शीरीं तो हैं कर्इ मगर फ़रहाद नहीं है। नेपाल है प्यारा हमें लंका भी पसंद है, भारत मेरा काबुल नहीं बग़दाद नहीं है। हम में से कोर्इ कुछ […] Read more » गजल-भारत मेरा काबुल नहीं बग़दाद नहीं है....-इकबाल हिंदुस्तानी
आलोचना रानी को कौन कहे कि अग्गा ढक May 8, 2012 / May 8, 2012 by एल. आर गान्धी | 2 Comments on रानी को कौन कहे कि अग्गा ढक एल.आर.गाँधी महामहिम अपनी २३वी विदेश यात्रा के साथ अपनी अंतिम घुमक्कड़ जिज्ञ्यासा पूरी कर लेंगी और इसके साथ ही राष्ट्राध्यक्षों में सबसे अधिक विदेश यात्रु महामहिम का कीर्तिमान अपने नाम कर लेंगी . महामहिम पर अब तक करीबन २०६ करोड़ रूपए, इस घुमाकड़ जिज्ञासा को पूरे करने पर सरकार के खर्च आये. राजमाता के मित्त्व्ययता […] Read more »
आलोचना आ केहू खराब नइखे, सबे ठीक बा… May 8, 2012 / May 8, 2012 by संजय स्वदेश | 1 Comment on आ केहू खराब नइखे, सबे ठीक बा… संजय स्वदेश जब भी किसी राज्य की सरकार बदलती है, समाज की आबो-हवा करवट लेती है। भले ही इस करवट से कांटे चुभे या मखमली गद्दे सा अहसास हो, परिर्वतन स्वाभाविक है। बिहार में नीतीश से पहले राजद का शासन था। जब लालू प्रसाद का शायन काल आया था तब भी कमोबेश वैसे ही सकारात्मक […] Read more » police and humanity police and society
कविता कविता-टिमकी बजी मदारी की-प्रभुदयाल श्रीवास्तव May 8, 2012 / May 8, 2012 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment वाहन पंचर हुआ,लिये मैं सड़क सड़क घूमा टिमकी बजी मदारी की मैं बंदर सा झूमा कहीं दूर तक पंचरवाला नहीं दिखाई दिया हर दुकान पर अतिक्रमण का ताला मिला जड़ा जीवन के हर लम्हें में कितने पंचर होते अपने कटे फटेपन को पल पल कंधे ढोते सूजे पैर फूल गये जैसे फूल गया तूमा […] Read more » poem by Prabhudayal Srivastav कविता-टिमकी बजी मदारी की-प्रभुदयाल श्रीवास्तव
आलोचना नामवर सिंह और युवालेखन की उलटबाँसी May 7, 2012 / May 7, 2012 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 1 Comment on नामवर सिंह और युवालेखन की उलटबाँसी जगदीश्वर चतुर्वेदी नामवर सिंह को युवालेखन पसंद है। युवाओं को प्रोत्साहित करना उनके स्वभाव का सामान्य अंग है। लेकिन युवा संस्कृति को वे सरलीकरणों के जरिए व्याख्यायित करते हैं। युवाओं को सरलीकरणों के जरिए नहीं समझा जा सकता। युवाओं के साहित्य को परिवार,स्कूली शिक्षा के दर्शन ,मासकल्चर और मासमीडिया के प्रभाव के बिना नहीं समझा […] Read more » नामवर सिंह युवालेखन
साहित्य विचार देखें, विचारधारा नहीं May 6, 2012 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on विचार देखें, विचारधारा नहीं तेजेंद्र शर्मा हिंदी साहित्य की त्रासदी है कि लंबे अरसे तक इस पर साम्यवादियों का कब्जा रहा। उनका मानना है कि उनकी विचारधारा के बाहर जो कुछ लिखा जा रहा है, साहित्य ही नहीं है। जबकि मेरा मानना है कि साहित्य के लिए विचार आवश्यक है, जो लेखक के भीतर से जन्म लेता है। विचारधारा […] Read more » विचार विचारधारा
कहानी कहानी : प्रवालगढ़ । लेखक : आर. सिंह May 4, 2012 by आर. सिंह | 8 Comments on कहानी : प्रवालगढ़ । लेखक : आर. सिंह मियामी से चालीस किलोमीटर दक्षिण एक छोटा सा शहर है, . अटलांटिक महासागर के किनारे बसा हुआ यह शहर मियामी से की द्वीप जाने के रास्ते में आता है. की द्वीप जाते हुए बरबस ही ध्यान खींच जाता है, जब निगाह पड़ती है प्रवालगढ़ लिखे हुए नामपट्ट(साइन बोर्ड) पर. .पत्थरों से बने अहाते के दीवार […] Read more »
आलोचना ‘मन करता है नामवर सिंह की खूब प्रशंसा करूँ, विवेक कहता है आलोचना करूँ’ May 3, 2012 / May 3, 2012 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 8 Comments on ‘मन करता है नामवर सिंह की खूब प्रशंसा करूँ, विवेक कहता है आलोचना करूँ’ जगदीश्वर चतुर्वेदी नामवर सिंह पर लिखना बेहद असुविधाएं पैदा करता है। मन करता है उनकी खूब प्रशंसा करूँ , विवेक कहता है आलोचना करूँ। आलोचना को विवेक संचालित करता है। लेकिन नामवर सिंह के लेखन में विवेक के साथ भावुकता का भी विशेष योगदान रहा है। वे जब भी बोलते हैं ,मन से बोलते हैं।भावुक […] Read more » जगदीश्वर चतुर्वेदी नामवर सिंह
आलोचना अमेरिकी पूंजी, अशोक वाजपेयी और आलोचना का अवमूल्यन April 29, 2012 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 1 Comment on अमेरिकी पूंजी, अशोक वाजपेयी और आलोचना का अवमूल्यन जगदीश्वर चतुर्वेदी भारत में जब से फोर्ड फाउंडेशन जैसी अमेरिकी संस्थाओं का कला,साहित्य,संस्कृति,सिक्षा आदि में पैसा आना आरंभ हुआ है उसके बाद तेजी से आलोचना और अकादमिक अवमूल्यन आरंभ हुआ है। हिन्दी आलोचना और साहित्य में अमेरिकी हस्तक्षेप कोई नयी चीज नहीं है। कॉग्रेस फॉर कल्चरल फ्रीडम के हिन्दी में आगमन के साथ यह सिलसिला […] Read more » अशोक वाजपेयी
कविता कविता ; बस दिल्ली का समाचार है – श्यामल सुमन April 29, 2012 / April 30, 2012 by श्यामल सुमन | 1 Comment on कविता ; बस दिल्ली का समाचार है – श्यामल सुमन श्यामल सुमन सबसे पहले हम पहुँचे। हो करके बेदम पहुँचे। हर चैनल में होड़ मची है, दिखलाने को गम पहुँचे। सब कहने का अधिकार है। चौथा-खम्भा क्यूँ बीमार है। गाँव में बेबस लोग तड़पते, बस दिल्ली का समाचार है। समाचार हालात बताते। लोगों के जज्बात बताते। अंधकार में चकाचौंध है, दिन को भी […] Read more » poem Poems कविता बस दिल्ली का समाचार है कविता
कविता कविता ; खबरों की अब यही खबर है – श्यामल सुमन April 29, 2012 / April 30, 2012 by श्यामल सुमन | 1 Comment on कविता ; खबरों की अब यही खबर है – श्यामल सुमन श्यामल सुमन देश की हालत बुरी अगर है संसद की भी कहाँ नजर है सूर्खी में प्रायोजित घटना खबरों की अब यही खबर है खुली आँख से सपना देखो कौन जगत में अपना देखो पहले तोप मुक़ाबिल था, अब अखबारों का छपना देखो चौबीस घंटे समाचार क्यों सुनते उसको बार बार क्यों इस […] Read more » poem Poems कविता खबरों की अब यही खबर है कविता