कविता साहित्य कविता : “विद्या बालन के लिए गीतों को गाना चाहती हूँ” – कृष्णमूर्ति January 28, 2012 / January 28, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment कविता कृष्णमूर्ति की आवाज में ऐसी कशिश है कि उसे सुन कर कोई भी उनकी आवाज का दीवाना बने हुए नही रह सकता. आज कल कविता फिल्मों में न के बराबर ही गा रही हैं. बहुत दिनों के बाद उनकी आवाज फिल्म “रॉक स्टार” के गीत “तुम हो पास मेरे” में सुनाई दी. पिछले दिनों […] Read more » poem Vidya Balan कविता विद्या बालन
व्यंग्य साहित्य अटेंशन – एक व्यंग्य कथा !!! January 28, 2012 / January 30, 2012 by विजय कुमार सप्पाती | 1 Comment on अटेंशन – एक व्यंग्य कथा !!! कुछ दिन पहले तक मेरी हालत बहुत खराब थी। मुझे कहीं से कोई भी अटेंशन नहीं मिल रही थी। हर कोई मुझे बस टेंशन देकर चला जाता था, जैसे मैं रास्ते का भिखारी हूँ और मुझे कोई भी भीख में टेंशन दे देता था। मैं बहुत दुखी था। कोई रास्ता नहीं दिखाई देता था। मुझे […] Read more » vyangya अटेंशन व्यंग्य कथा
कविता कविता : अलविदा– विजय कुमार January 27, 2012 / January 25, 2012 by विजय कुमार सप्पाती | Leave a Comment सोचता हूँ जिन लम्हों को ; हमने एक दूसरे के नाम किया है शायद वही जिंदगी थी ! भले ही वो ख्यालों में हो , या फिर अनजान ख्वाबो में .. या यूँ ही कभी बातें करते हुए .. या फिर अपने अपने अक्स को ; एक दूजे में देखते हुए हो …. […] Read more » famous poems Hindi Poem poems by Vijay kumar कविता कविताएं विजय कुमार विजय कुमार की कवितायें श्रेष्ठ कविताएं हिन्दी कविता
कविता कविता : देह – विजय कुमार January 26, 2012 / January 25, 2012 by विजय कुमार सप्पाती | Leave a Comment देह के परिभाषा को सोचता हूँ ; मैं झुठला दूं ! देह की एक गंध , मन के ऊपर छायी हुई है !! मन के ऊपर परत दर परत जमती जा रही है ; देह …. एक देह , फिर एक देह ; और फिर एक और देह !!! देह की भाषा […] Read more » famous poems Hindi Poem poems by Vijay kumar कविता कविताएं विजय कुमार विजय कुमार की कवितायें श्रेष्ठ कविताएं हिन्दी कविता
लेख ये भी एक तरह की ‘पेड’ पत्रकारिता है ! January 26, 2012 / January 26, 2012 by जगमोहन फुटेला | Leave a Comment जगमोहन फुटेला मैं ‘टोटल टीवी’ में उत्तर-पश्चिमी राज्यों का ब्यूरो देखता था जब एक दिन मुझे मेरे डायरेक्टर विनोद मेहता का फोन आया. उन ने कहा, फलां नाम का एक बंदा है लुधियाना से. बहुत फोन करता है. एक बार मिल लेना. कोई प्रोपोज़ल है उसके पास. मेरी समझ में नहीं आया. आप देख लेना. […] Read more » 'पेड' पत्रकारिता PAID JOURNALISM
लेख ऐसा हो गणतंत्र हमारा January 25, 2012 / January 25, 2012 by विनोद बंसल | 1 Comment on ऐसा हो गणतंत्र हमारा विनोद बंसल 26 जनवरी 1950 को, जब हमारा संविधान लागू हुआ, तब यह सोचा गया कि यह विश्व के चुनिन्दा देशों के अच्छे संवैधानिक प्रावधानों का सार तत्व है। संविधान सभा का यह मत था कि जिस रूप में यह लागू किया जा रहा है वर्तमान परिस्थितियों में तो सर्वोत्तम है किन्तु, समय-समय पर देश […] Read more » republic day ऐसा हो गणतंत्र हमारा
लेख हमारा गणतंत्र ‘धनतंत्र और गनतंत्र’ में तब्दील हो चुका है! January 25, 2012 / January 25, 2012 by इक़बाल हिंदुस्तानी | Leave a Comment इक़बाल हिंदुस्तानी राजनेताओं की विश्वसनीयता ख़त्म होने से लोकतंत्र को ख़तरा ? गणतंत्र आज धनतंत्र और गनतंत्र में तब्दील होने से सवाल उठ रहा है कि इन हालात में हमारा लोकतंत्र और संविधान सुरक्षित रह सकेगा? इसकी वजह यह है कि नेताओं का विश्वास जनता में बिल्कुल ख़त्म होता जा रहा है। उनमें से अधिकांश […] Read more » ‘धनतंत्र republic day गणतंत्र गनतंत्र
कविता कविता : मेरा होना और न होना – विजय कुमार January 25, 2012 / January 23, 2012 by विजय कुमार सप्पाती | Leave a Comment मेरा होना और न होना …. उन्मादित एकांत के विराट क्षण ; जब बिना रुके दस्तक देते है .. आत्मा के निर्मोही द्वार पर … तो भीतर बैठा हुआ वह परमपूज्य परमेश्वर अपने खोलता है नेत्र !!! तब धरा के विषाद और वैराग्य से ही जन्मता है समाधि का पतितपावन सूत्र […] Read more » famous poems Hindi Poem poems by Vijay kumar कविता कविताएं विजय कुमार विजय कुमार की कवितायें श्रेष्ठ कविताएं हिन्दी कविता
लेख उत्तराखण्ड में नेताजी सुभाश चंद्र बोस की याद में बसा है एक गांव January 25, 2012 / May 16, 2012 by डॉ0 आशीष वशिष्ठ | 1 Comment on उत्तराखण्ड में नेताजी सुभाश चंद्र बोस की याद में बसा है एक गांव भारत रत्न नेताजी सुभाश चंद्र बोस को भारतीय इतिहास में एक बहेद महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। नेता जी का जन्म 23 जनवरी 1897 को कटक, उड़ीसा में हुआ था, लेकिन बहुत कम लोग यह जानते होंगे कि उड़ीसा से हजारों किलोमीटर दूर उत्तराखण्ड में नेताजी की याद में उनके नाम से एक गांव बसा हुआ […] Read more » Netaji Subhash Chandra Bose Utrakhand नेताजी सुभाश चंद्र बोस
पर्व - त्यौहार लेख 26 जनवरी / गणतंत्र दिवस विशेष / गणतंत्र के समक्ष समस्याएं यत्र-तत्र-सर्वत्र January 25, 2012 / January 25, 2012 by राजेश कश्यप | 1 Comment on 26 जनवरी / गणतंत्र दिवस विशेष / गणतंत्र के समक्ष समस्याएं यत्र-तत्र-सर्वत्र -राजेश कश्यप छह दशक पार कर चुके गौरवमयी गणतंत्र के समक्ष यत्र-तत्र-सर्वत्र समस्यांए एवं विडम्बनाएं मुंह बाए खड़ी नजर आ रही हैं। देशभक्तों ने जंग-ए-आजादी में अपनी शहादत एवं कुर्बानियां एक ऐसे भारत के निर्माण के लिए दीं, जिसमें गरीबी, भूखमरी, बेरोजगारी, बेकारी, शोषण, भेदभाव, अत्याचार आदि समस्याओं का नामोनिशान भी न हो और राम […] Read more » 26 januaryAC 26 जनवरी गणतंत्र के समक्ष समस्याएं यत्र-तत्र-सर्वत्र गणतंत्र दिवस विशेष
कविता कविता:जोगन-विजय कुमार January 24, 2012 / January 23, 2012 by विजय कुमार सप्पाती | 1 Comment on कविता:जोगन-विजय कुमार मैं तो तेरी जोगन रे ; हे घनश्याम मेरे ! तेरे बिन कोई नहीं मेरा रे ; हे श्याम मेरे !! मैं तो तेरी जोगन रे ; हे घनश्याम मेरे ! तेरी बंसुरिया की तान बुलाये मोहे सब द्वारे छोड़कर चाहूं सिर्फ तोहे तू ही तो है सब कुछ रे , हे श्याम मेरे […] Read more » famous poems Hindi Poem poems by Vijay kumar कविता कविताएं विजय कुमार विजय कुमार की कवितायें श्रेष्ठ कविताएं हिन्दी कविता
लेख समाज फ़ेसबुक से दुःखी January 24, 2012 / January 24, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment आजकल हर कोई फ़ेसबुक से दुःखी है. सबसे ज्यादा दुःखी तो सरकार है. सरकार फ़ेसबुक से इतना दुःखी हो चुकी है कि वो इस पर बैन करने की बात कहने लगी है. और अब तो न्यायालय भी चीनी तर्ज पर फ़ेसबुक को ब्लॉक करने की धमकियाँ देने लगी है. उधर फ़ेसबुक में घुसे पड़े रहने […] Read more » Facebook फ़ेसबुक फ़ेसबुक से दुःखी