लेख समाज आस्था के नाम पर शोर से कब तक ब्लैकमेल किया जाता रहेगा ? January 24, 2012 / January 24, 2012 by इक़बाल हिंदुस्तानी | Leave a Comment -इक़बाल हिंदुस्तानी अंधश्रध्दा और कर्मकांड के बहाने लोगों का जीना हराम मत करो! प्रैस काउंसिल के प्रेसीडेंट और न्यायविद मार्कंडेय काटजू का कहना है कि जब भारत वैज्ञानिक रास्ते पर था, तब उसने तरक्की की। साइंस के सहारे हमने विशाल सभ्यताओं का निर्माण हज़ारों साल पहले किया, जब अधिकतर यूरोप जंगलों में रहता था, उन […] Read more » Blackmail आस्था आस्था के नाम पर शोर ब्लैकमेल
व्यंग्य रामभरोसे नगर की रामलीला ………एक व्यंग ………… January 23, 2012 / January 23, 2012 by अनुराग अनंत | Leave a Comment रामभरोसे बड़े ही भरोसे के आदमी है इसलिए नहीं कि उनका नाम रामभरोसे है बल्कि इसलिए कि वो रामभरोसे नगर के निवासी है,राम भरोसे नगर की खास बात ये है कि वहां के सभी निवासियों का नाम रामभरोसे है और नेताओं का नाम राम है,रामभरोसे नगर के सभी निवासियों का नाम रामभरोसे इसलिए है क्योंकि […] Read more »
कविता कविता:एक स्त्री जो हूँ-विजय कुमार January 23, 2012 / January 23, 2012 by विजय कुमार सप्पाती | Leave a Comment स्त्री – एक अपरिचिता मैं हर रात ; तुम्हारे कमरे में आने से पहले सिहरती हूँ कि तुम्हारा वही डरावना प्रश्न ; मुझे अपनी सम्पूर्ण दुष्टता से निहारेंगा और पूछेंगा मेरे शरीर से , “ आज नया क्या है ? ” कई युगों से पुरुष के लिए स्त्री सिर्फ भोग्या ही रही मैं […] Read more » famous poems Hindi Poem poems by Vijay kumar कविता कविताएं विजय कुमार विजय कुमार की कवितायें श्रेष्ठ कविताएं हिन्दी कविता
कविता ममता त्रिपाठी की कविता : सृष्टि January 22, 2012 / January 22, 2012 by ममता त्रिपाठी | 4 Comments on ममता त्रिपाठी की कविता : सृष्टि धन्य है तिमिर का अस्तित्व दीपशिखा अमर कर गया । धन्य है करुणाकलित मन हर हृदय में घर कर गया । ज्योति ज्तोतिर्मय तभी तक जब तक तिमिर तिरोहित नहीं । जगति का लावण्य तब तक जब तक नियन्ता मोहित नहीं । पंच कंचुक विस्तीर्ण जब तक तब तक सृष्टि प्रपञ्च साकार । बालुकाभित्ति […] Read more »
कविता कविता:तुम्हारा आना-विजय कुमार January 22, 2012 / January 21, 2012 by विजय कुमार सप्पाती | Leave a Comment कल खलाओं से एक सदा आई कि , तुम आ रही हो… सुबह उस समय , जब जहांवाले , नींद की आगोश में हो; और सिर्फ़ मोहब्बत जाग रही हो.. मुझे बड़ी खुशी हुई … कई सदियाँ बीत चुकी थी ,तुम्हे देखे हुए !!! मैंने आज सुबह जब घर से बाहर कदम रखा, तो […] Read more » famous poems Hindi Poem poems by Vijay kumar कविता कविताएं विजय कुमार विजय कुमार की कवितायें श्रेष्ठ कविताएं हिन्दी कविता
कविता कविता:मृत्यु-विजय कुमार January 21, 2012 / January 21, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 1 Comment on कविता:मृत्यु-विजय कुमार ये कैसी अनजानी सी आहट आई है ; मेरे आसपास ….. ये कौन नितांत अजनबी आया है मेरे द्वारे … मुझसे मिलने, मेरे जीवन की , इस सूनी संध्या में ; ये कौन आया है …. अरे ..तुम हो मित्र ; मैं तो तुम्हे भूल ही गया था, जीवन की आपाधापी में !!! […] Read more » famous poems Hindi Poem poems by Vijay kumar कविता कविताएं विजय कुमार विजय कुमार की कवितायें श्रेष्ठ कविताएं हिन्दी कविता
कविता कविता:तलाश-विजय कुमार January 20, 2012 / January 20, 2012 by विजय कुमार सप्पाती | Leave a Comment कुछ तलाशता हुआ मैं कहाँ आ गया हूँ ….. बहुत कुछ पीछे छूट गया है ….. मेरी बस्ती ये तो नहीं थी ….. मट्टी की वो सोंघी महक … कोयल के वो मधुर गीत … वो आम के पेड़ो की ठंडी ठंडी छांव .. वो मदमाती आम के बौरो की खुशबू … वो खेतो […] Read more » famous poems Hindi Poem poems by Vijay kumar कविता कविताएं विजय कुमार विजय कुमार की कवितायें श्रेष्ठ कविताएं हिन्दी कविता
कविता कविता:तेरा नाम क्या है मेरे प्रेम?-विजय कुमार January 20, 2012 / January 23, 2012 by विजय कुमार सप्पाती | Leave a Comment अचानक ही ये कैसे अहसास है कुछ नाम दूं इसे या फिर ; अपने मौन के साथ जोड़ दूं इसे किसी मौसम का नया रंग हो शायद या फिर हो ज़िन्दगी की अनजानी आहट एक सुबह हो ,सूरज का नया रूप लिये पता नहीं ….. मेरी अभिव्यक्ति की ये नयी परिभाषा है […] Read more » famous poems Hindi Poem poems by Vijay kumar कविता कविताएं विजय कुमार विजय कुमार की कवितायें श्रेष्ठ कविताएं हिन्दी कविता
कविता कविता:आखिरी दिन-खुशबू सिंह January 20, 2012 / January 20, 2012 by खुशबू सिंह | Leave a Comment ये बात उस दोपहर की है जब शहर से भागता हुआ शोर एकाएक गाँव की सरहदों को ताकने लगा था देख रहा था यूं ही जैसे देखते है गली मे टहलते आवारा कुत्ते घरो के खुले दरवाजो को अक्सर फिराक मे ठीक उसी नियत से शहर से खदेड़ा हुआ शोर हाँफता हुआ दाखिल होने को […] Read more » famous hindi poems Hindi Poem कविता कविताएं श्रेष्ठ कविताएं हिन्दी कविता
महत्वपूर्ण लेख विविधा साहित्य ॥अमृत भाषा संस्कृत॥- डॉ. मधुसूदन उवाच January 19, 2012 / June 6, 2012 by डॉ. मधुसूदन | 23 Comments on ॥अमृत भाषा संस्कृत॥- डॉ. मधुसूदन उवाच (१) सुस्वागतम् यवन देशे” २६ अप्रैल २००७ को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम जी ग्रीस देश गए थे। वहाँ आप के स्वागत समारम्भ में ग्रीस के राष्ट्रपति श्री कार्लोस पम्पाडॅलिस ने “राष्ट्रपति महाभाग। सुस्वागतम् यवन देशे” इस संस्कृत वाक्य से अपने भाषण का प्रारंभ कर स्वागत किया था । अपने भाषण में उन्हों […] Read more » Sanskrit संस्कृत
कविता नरेश भारतीय की कविता /बाट जोह रहा हूँ January 19, 2012 / January 19, 2012 by नरेश भारतीय | 5 Comments on नरेश भारतीय की कविता /बाट जोह रहा हूँ बुझा चाहती है आँख के दिए की बाती पीती रही है रुधिर की धार जो अवरूद्ध होने लगी है. मेरे मन संकल्प का दिया कब तक जलेगा नहीं जानता, मस्तिष्क में बहुत सोच बाकी है शब्दों का रूप देने की उतावली है, लेकिन जलते बुझते इस दिए के अनिश्चित से व्यवहार को देख प्रकाश के […] Read more »
कविता कविता : बर्फ के रिश्ते – विजय कुमार January 19, 2012 / January 17, 2012 by विजय कुमार सप्पाती | Leave a Comment बर्फ के रिश्ते अक्सर सोचता हूँ , रिश्ते क्यों जम जातें है ; बर्फ की तरह !!! एक ऐसी बर्फ .. जो पिघलने से इनकार कर दे… एक ऐसी बर्फ .. जो सोचने पर मजबूर कर दे.. एक ऐसी बर्फ… जो जीवन को पत्थर बना दे…… इन रिश्तों की उष्णता , दर्द की […] Read more » Hindi Poem poems by Vijay kumar कविता विजय कुमार विजय कुमार की कवितायें हिन्दी कविता