खेल जगत व्यंग्य साहित्य व्यंग्य ; क्रिकेट के नायक और खलनायक – राजकुमार साहू January 30, 2012 / January 29, 2012 by राजकुमार साहू | Leave a Comment इतना तो है, जब हम अच्छा करते हैं तो नायक होते हैं। नायक का पात्र ही लोगों को रिझाने वाला होता है। जब नायक के दिन फिरे रहते हैं तो उन पर ऊंगली नहीं उठती और जो लोग ऊंगली उठाते हैं, उनकी ऊंगली, उनके चाहने वाले तोड़ देते हैं। नायक की दास्तान अभी की नहीं […] Read more » Cricket vyangya क्रिकेट के नायक और खलनायक व्यंग्य
कविता व्यंग्य साहित्य व्यंग्य कविता ; काम वालियां – प्रभुदयाल श्रीवास्तव January 30, 2012 / January 29, 2012 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment काम वालियां नहीं कामपर बर्तन वाली दो दिन से आई इसी बात पर पति देव पर पत्नि चिल्लाई काम वालियां कभी समय पर अब न आ पातीं न ही ना आने का कारण खुलकर बतलातीं बिना बाइयों के घर तो कूड़ाघर हो जाता बड़ी देर से कठिनाई से सूर्य निकल पाता छोटी बच्ची गिरी फिसल […] Read more » poem vyangya काम वालियां व्यंग्य कविता
चुनाव व्यंग्य वादा तेरा वादा (चुनावी व्यंग-एक सच्ची घटना पर आधारित) January 30, 2012 / January 29, 2012 by संदीप ठाकुर | Leave a Comment संदीप ठाकुर चुनावी मुद्दों के बाद अब लोक-लुभावन वादों से, पूरे प्रदेश में सियासी हलचल मची हुई है. किस पार्टी के मेनीफेस्टो कौन सा चुनावी आफर निकल कर आ जाय किसी कुछ पता नही. कोई साईकिल बाँट रहा है तो कोई टेबलेट व लैपटॉप देने की बात कर रहा है. कहीं शिक्षा मुफ्त की जा […] Read more » election vyangya चुनावी व्यंग वादा तेरा वादा
गजल साहित्य गज़ल ; देवी देवता सखा सहोदर – प्रभुदयाल श्रीवास्तव January 30, 2012 / January 30, 2012 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment देवी देवता सखा सहोदर सबके सब बेकार हो गये ज्योंही मां उतरी आंखों में सपने सब साकार हो गये|| जैसे गये रसोई में तो मां की सूरत याद आई लोटा थाली डोंगे मग्गे सब मां के आकार हो गये|| जब जब भी तड़्फा हूं मां की किसी तरह सूरत देखूं सारी रात दिखाऊं […] Read more » gazal गज़ल देवी देवता सखा सहोदर
व्यंग्य व्यंग्य – घोषणा ही तो है… January 29, 2012 / January 29, 2012 by राजकुमार साहू | Leave a Comment राजकुमार साहू मैं बचपन से ही ‘घोषणा’ के बारे में सुनते आ रहा हूं, परंतु यह पूरे होते हैं, पता नहीं। इतना समझ में आता है कि ‘घोषणा’ इसलिए किए जाते हैं कि उसे पूरे करने का झंझट ही नहीं रहता। चुनावी घोषणा की बिसात ही अलग है। चुनाव के समय जो मन में आए, […] Read more »
कविता विपिन किशोर सिन्हा की कविता : वसन्त January 29, 2012 / January 29, 2012 by विपिन किशोर सिन्हा | 1 Comment on विपिन किशोर सिन्हा की कविता : वसन्त झीने कोहरे की साड़ी का अवगुंठन सूर्य उठाता था, पोर-पोर में मस्ती भर जब पवन जगाने आता था। आम्र-कुन्ज में बौरों पर, भौंरे संगीत सुनाते थे, पंचम स्वर में श्यामल कोयल के गीत उभरते जाते थे। रक्त-पुष्प झूमे पलाश, सम्मोहित करते दृष्टि को, रसभरे फूल महुआ के गिर, मदहोश बनाते सृष्टि को। फूली सरसों ने […] Read more » बसंत
गजल साहित्य गज़ल ; हवा से न कहना – सत्येंद्र गुप्ता January 29, 2012 / January 29, 2012 by सत्येन्द्र गुप्ता | 2 Comments on गज़ल ; हवा से न कहना – सत्येंद्र गुप्ता हवा से न कहना, वो सब को बता देगी तेरा हर ज़ख्म दुनिया को दिखा देगी। तू डूबा हुआ होगा अपने गम में कहीं वो जमाने भर में बहुत शोर मचा देगी। चाहना उसे दिल से एक फासला रखकर शुहरत बिगड़ गई तो हस्ती मिटा देगी। तू दरिया प्यार का है, वो चाँद सूरत है […] Read more » gazal गज़ल हवा से न कहना
लेख बच्चो को ‘मार्क्स-वाद’ का शिकार होने से बचाना होगा! January 29, 2012 / January 29, 2012 by इक़बाल हिंदुस्तानी | 5 Comments on बच्चो को ‘मार्क्स-वाद’ का शिकार होने से बचाना होगा! -इक़बाल हिंदुस्तानी शिक्षा का मक़सद धन कमाना है तो ज्ञान कहां से आये ? केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने एक गैर सरकारी संस्था ‘प्रथम’ द्वारा तैयार जो एनुअल स्टेट्स ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट पिछले दिनों जारी की उसमें चौंकाने वाला निष्कर्ष सामने आया है। ग्रामीण शिक्षा से जुड़ा देश का यह सबसे बड़ा अध्ययन […] Read more » Kapil Sibbal right to education मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल शिक्षा का अधिकार कानून
गजल साहित्य गज़ल ; जंग लगे हथियारों में – सत्येंद्र गुप्ता January 28, 2012 / January 28, 2012 by सत्येन्द्र गुप्ता | Leave a Comment जंग लगे हथियारों में अब नई धार लगानी है नये अंदाज़ में वन्दे-मातरम की आवाज़ सुनानी है। नहीं खेलने देंगे किसी को हम अपने सम्मान से भ्रष्टाचार की होली भी तो हमको ही जलानी है। सशक्त और समर्द्ध राष्ट्र अपना हमें बनाना है इसके लिए हम को कोई नई चाल अपनानी है। घोटालों का ताना […] Read more » gazal Gazalen गज़ल
लेख अन्ना के “थप्पर” की गुंज ! January 28, 2012 / January 28, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment एस के चौधरी 1986 मे एक फिल्म बनी थी “कर्मा” जिसमे दिलीप कुमार नायक मुख्य भूमिका मे थे और अनुपम खेर खलनायक का मुख्य निभा रहे, उस फिल्म के एक सिन मे दिलीप कुमार अनुपम खेर को तमाचा मारते हैं जिसकी गुंज कई सालों तक अनुपम खेर नहीं भूल पाए थे और पूरे फिल्म मे […] Read more » Anna Hazare Dilip Kumar अन्ना हजारे दिलीप कुमार
आलोचना लेख साहित्य “द्विअर्थी संवादों से भरे हुए हैं कॉमेडी शो” January 28, 2012 / January 28, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment लोग अपने व्यस्त जीवन से कुछ पल चुरा कर हंसना – हँसाना चाहते हैं और इसके लिए वो टी वी पर प्रसारित होने वाले कॉमेडी शो को देखते हैं लेकिन क्या सही मायनों में आज के हास्य शो को देख कर दर्शक हँसते हैं या उन्हें द्विअर्थी संवादों को झेलना पड़ता है. पूरा परिवार एक […] Read more » comedy show Double meaning conversation कॉमेडी शो द्विअर्थी संवादों
लेख विश्व विजेता भारत January 28, 2012 / January 28, 2012 by डॉ. राजेश कपूर | 7 Comments on विश्व विजेता भारत विश्व की सभ्यताओं का प्रारम्भ अथवा उनका मूल भारतीय संस्कृति में ही मिलता है। यह बात केवल भारत नहीं , विश्व के अनेक विद्वानों ने कहीलिखी है। अतीत काल में भारत में सबसे अधिक प्रचलित भाषा संस्कृत रही है। यूँ तो अनेक बोलियाँ और भाषाएँ सदा ही प्रचालन में रहती आई हैं पर संस्कृत का […] Read more » India Indian Culture भारतीय संस्कृति विश्व विजेता भारत