व्यंग्य महंगाई की चिता November 5, 2011 / December 5, 2011 by राजकुमार साहू | Leave a Comment राजकुमार साहू हम अधिकतर कहते-सुनते रहते हैं कि चिंता व चिता में महज एक बिंदु का फर्क है। देश की करोड़ों गरीब जनता, महंगाई की आग में जल रही है और उन्हें चिंता खाई जा रही है। वे इसी चिंता में दुबले हुए जा रहे हैं। महंगाई के कारण ही कुपोषण ने भी उन्हें घेर […] Read more » महंगाई महंगाई की चिता
लेख समाज के नशे में घुलता उन्नाद का जहर November 5, 2011 / December 5, 2011 by संजय स्वदेश | 2 Comments on समाज के नशे में घुलता उन्नाद का जहर संजय स्वदेश पिछले दिनों राजस्थान में सांप्रदायिक हिंसा की घटना के बाद फिलहाल अभी ऐसा कोई राष्ट्रिय प्रसंग नहीं है कि धर्म की कट्टरता पर बहस हो। लेकिन प्रसंग नहीं होने की बाद भी इस मुद्दे पर चिंतन आवश्यक है। शांत महौल में देश के किसी न किसी हिस्से में हिंसक मजहबी हिलोरे उठती हैं। […] Read more » communal riots सांप्रदायिक हिंसा
साहित्य कहो कौन्तेय-५२ November 4, 2011 / December 5, 2011 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment विपिन किशोर सिन्हा (पाण्डवों द्वारा हस्तिनापुर को दूत भेजना) विश्वास ही नहीं होता था कि हमने वनवास के बारह वर्ष और अज्ञातवास का एक वर्ष लगभग निर्विघ्न पूरा कर लिया। वैसे भी समय और सागर की लहरें किसकी प्रतीक्षा करती हैं? दोनों अपनी गति से आगे बढ़ते जाते हैं। जो इनकी गति से सामंजस्य स्थापित […] Read more » episodes of mahabharta Kaho Kauntey कहो कौन्तेय
महत्वपूर्ण लेख लेख अपरिभाषित सेक्यूलरिज्म के जलवे : शंकर शरण November 3, 2011 / December 5, 2011 by शंकर शरण | 6 Comments on अपरिभाषित सेक्यूलरिज्म के जलवे : शंकर शरण हाल में कर्नाटक में स्कूलों में गीता पढ़ाने का एक प्रस्ताव आया। यह बच्चों को नैतिक शिक्षा देने हेतु एक मठ का अनुरोध था, जिसमें सरकार ने केवल स्कूलों को इसके लिए एक घंटा समय देने भर का निर्देश दिया था। इसमें सरकार को कुछ खर्च नहीं करना था। पर इस प्रस्ताव को अदालत में […] Read more » secularism अपरिभाषित सेक्यूलरिज्म के जलवे
गजल पड़ौसी पड़ोसी है हिंदू न मुस्लिम……. November 3, 2011 / December 5, 2011 by इक़बाल हिंदुस्तानी | 1 Comment on पड़ौसी पड़ोसी है हिंदू न मुस्लिम……. इक़बाल हिंदुस्तानी हरेक तश्नालब की हिमायत करूंगा, समंदर मिला तो शिकायत करूंगा। अगर आंच आई किसी जिंदगी पर, हो अपना पराया हिफ़ाज़त करूंगा। अभी तो ग़रीबों में मसरूफ हूँ मैं, मिलेगी जो फुर्सत इबादत करूंगा। तरक्की की ख़ातिर वो यूं कह रहा था, मैं जिस्मों की खुलकर तिजारत करूंगा। ज़मीर अपना बेचंू जो दौलत कमाउ, […] Read more » hindu India muslims pakistan पड़ौसी पड़ौसी है हिंदू न मुस्लिम
आलोचना फजीहत का फाईनल अभी बाकी है November 3, 2011 / December 5, 2011 by जगमोहन फुटेला | Leave a Comment जगमोहन फुटेला कांग्रेस और हरियाणा के मुख्यमंत्री दोनों ने वक्ती तौर पर अपने बचाव का इंतजाम कर लिया है. हुड्डा खुद तो क्यों ही जाएंगे. कांग्रेस भी उन्हें नहीं हटाएगी. क्योंकि फजीहत का फाईनल अभी बाकी है. प्रदेश अध्यक्ष फूल चंद मुलाना ने हिसार की नैतिक जिम्मेवारी कबूल ली है. इस्तीफे की पेशकश भी […] Read more » फजीहत का फाईनल अभी बाकी है
व्यंग्य राहुल जी को भी आता है गुस्सा November 3, 2011 / November 3, 2011 by राजकुमार साहू | Leave a Comment राजकुमार साहू मुझे अभी-अभी पता चला कि हमारे भावी प्रधानमंत्री कहे जाने वाले युवराज को भी गुस्सा आता है। इससे पहले मैं तो इतना ही जानता था कि वे शांत व सौम्य व्यक्तित्व के धनी हैं। उनमें कई खूबियां हैं, वे गरीबों के घर भोजन करने से परहेज नहीं करते। गरीबों की दाल-रोटी उन्हें खूब […] Read more » राहुल गांधी
आलोचना पीएम सोचो!परमाणु रिएक्टर का इतना विरोध क्यों ? November 3, 2011 / December 5, 2011 by इक़बाल हिंदुस्तानी | Leave a Comment इक़बाल हिंदुस्तानी अमेरिका को खुश करने के लिये भारतीयों की चिंता नहीं! अमेरिका के साथ हमारी सरकार द्वारा किये गये परमाणु क़रार का विवाद ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा है लेकिन हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इस विरोध की कोई खास परवाह नहीं है। इस क़रार को लेकर महाराष्ट्र के जैतापुर में लगने […] Read more » nuclear reactor परमाणु रिएक्टर
आलोचना पुलिस दमन पर सभी दलों की सरकारें एक सी क्यों हो जाती हैं ? November 3, 2011 / December 5, 2011 by इक़बाल हिंदुस्तानी | Leave a Comment इक़बाल हिंदुस्तानी हमारी पुलिस वही करती है जो हमारे राजनेता चाहते हैं। पुलिस सुधार के लिये कई आयोग बने उनकी रिपोर्ट भी आईं लेकिन आज वे कहां धूल चाट रही हैं किसी को नहीं पता। जब भी कोई पार्टी विपक्ष में होती है वह हमेशा इस बात की शिकायत करती है कि पुलिस सत्ताधारी दल […] Read more » Police torchor पुलिस दमन
साहित्य कहो कौन्तेय-५१ November 3, 2011 / December 5, 2011 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment विपिन किशोर सिन्हा (अभिमन्यु का उत्तरा से विवाह) द्यूतक्रीड़ा के बाद जब हम अपना सर्वस्व हारकर, भरी सभा में सिर झुकाकर दीन-हीन बैठे थे, कर्ण ने द्रौपदी तथा हमलोगों के वस्त्र उतारने के लिए दुशासन को निर्देश दिए थे। कटि के उपर हमलोगों को निर्वस्त्र कर दिया गया था। मैंने राजकुमार उत्तर को समस्त महारथियों […] Read more » Kaho Kauntey कहो कौन्तेय
लेख अपना दिल फैला रही है हिंदी November 3, 2011 / December 5, 2011 by अखिलेश आर्येन्दु | Leave a Comment अखिलेश आर्येन्दु दुनिया वालों के दिलों पर राज्य करने के लिए अपना दिल फैला रही है हिंदी हिंदी अब केवल भारत में ही नहीं जानी समझी और बोली जाती बलिक विश्व स्तर पर इसका व्यापक व्यवहार होने लगा है। कर्इ देशों में तो यह वहां की प्रमुख भाषा के रूप में मान्य है। कम्प्यूटर के […] Read more » Hindi Language अपना दिल फैला रही है हिंदी
व्यंग्य किसे कराएं पीएचडी ? November 3, 2011 / December 5, 2011 by राजकुमार साहू | Leave a Comment राजकुमार साहू मुझे पता है कि देश में संभवतः कोई विषय ऐसा नहीं होगा, जिस पर अब तक पीएचडी ( डॉक्टर ऑफ फिलास्फी ) नहीं हुई होगी। कई विषय तो ऐसे हैं, जिसे रगडे पर रगड़े जा रहे हैं। कुछ समाज के काम आ रहे हैं तो कुछ कचरे की टोकरी की शोभा बढ़ा रहे […] Read more » phD किसे कराएं पीएचडी