विधि-कानून जनता का मत भी सुने न्यायपालिका July 20, 2013 / July 20, 2013 by सिद्धार्थ शंकर गौतम | Leave a Comment सिद्धार्थ शंकर गौतम देश के सर्वोच्च न्यायालय ने मुंबई समेत महाराष्ट्र के डांस बार पर राज्य सरकार द्वारा लगी पाबंदी को हटाते हुए उच्च न्यायालय का निर्णय बरकरार रखा है। अब एक बार फिर तकरीबन आठ साल से बंद पड़े महाराष्ट्र के डांस बार गुलजार हो सकेंगे। गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार ने २००५ में […] Read more » डांस बार
विधि-कानून भारतीय भाषा सेनानी श्याम रुद्र पाठक का साथ दें July 19, 2013 / July 19, 2013 by प्रवक्ता ब्यूरो | 7 Comments on भारतीय भाषा सेनानी श्याम रुद्र पाठक का साथ दें श्याम रुद्र जी की गिरफ्तारी पर सभी भारतीयों/राष्ट्रवादियों से अनुरोध है, समय निकाल कर अपनी-२ प्रतिक्रिया और विचार यहाँ रखें और सरकार के इस गैरजिम्मेदार कदम की खबर को अपने ट्विटर, फेसबुक, गूगल प्लस और व्हाट्सऐप पर सबके साथ साझा करें। २४ जुलाई २०१३ को पटियाला न्यायालय में उनकी पेशी है दिल्ली के आसपास वाले […] Read more » shyam rudra pathak
विधि-कानून भारतीय भाषाओं का मोर्चा: गूँगे राष्ट्र को बोलने हेतु प्रेरित करने की लड़ाई July 19, 2013 by डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री | 7 Comments on भारतीय भाषाओं का मोर्चा: गूँगे राष्ट्र को बोलने हेतु प्रेरित करने की लड़ाई डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री अन्ततः दिल्ली पुलिस ने श्याम रुद्र पाठक को आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 105 और 151 के अन्तर्गत गिरफ़्तार कर ही लिया । पाठक पिछले 225 दिनों से सोनिया गान्धी के दिल्ली स्थित भारतीय घर के आगे धरना दे रहे थे । पाठक की मांग है कि उच्चतम न्यायालय समेत देश […] Read more » भारतीय भाषा श्याम रुद्र पाठक
विधि-कानून अंग्रेज़ी में न्याय अन्याय है। July 19, 2013 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 1 Comment on अंग्रेज़ी में न्याय अन्याय है। भारत-हितैषी विशेष : सब से पहले, श्री श्याम रुद्र पाठक जी की, भारतीय भाषाओं में (न्याय-संगत) न्याय की माँग का समर्थन करता हूँ। उसी संदर्भ में जान लें, कि, एक ऑस्ट्रेलियन विद्वान को जब पूछा गया, कि, अफ्रिका का सामान्य-जन, क्यों पिछडा है? तो उसका उत्तर था; क्यों कि, अफ्रिका में शासन, शिक्षा, न्याय इत्यादि […] Read more » अंग्रेज़ी में न्याय अन्याय है।
विधि-कानून कानून से ऊपर न्याय-राकेश कुमार आर्य July 18, 2013 by राकेश कुमार आर्य | 2 Comments on कानून से ऊपर न्याय-राकेश कुमार आर्य गंगा यमुना में पानी की रफ्तार बढ़ी हुई है-मौसम बाढ़ का है। समय की रफ्तार भी तेज हो रही है-मौसम चुनावों (2014) का है। सही इसी समय न्यायालयों के निर्णयों की रफ्तार भी तेज हो रही है-मौसम सुधारों का है… शायद। पिछले दिनों न्यायालयों ने कई ऐसे महत्वपूर्ण निर्णय दिये हैं कि जिनके अवलोकन से […] Read more » कानून से ऊपर न्याय
विधि-कानून इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक दिन July 5, 2013 / July 5, 2013 by विपिन किशोर सिन्हा | 1 Comment on इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक दिन बिपिन किशोर सिन्हा दिनांक १९-६-१३, समय दिन के साढ़े बारह बजे। पावर कारपोरेशन के स्टैन्डिंग कौन्सिल का फोन आता है – दिनांक २१-६-१३ को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जमुना कोल्ड स्टोरेज बनाम उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के मामले में अध्यक्ष सह प्रबन्ध निदेशक, उत्तर प्रदेश ट्रान्समिशन कारपोरेशन, प्रबन्ध निदेशक ट्रान्समिशन कारपोरेशन, प्रबन्ध निदेशक पूर्वान्चल एवं […] Read more »
मीडिया विधि-कानून विविधा आरटीआर्इ के दायरे में राजनीतिक दल June 10, 2013 / June 10, 2013 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव राजनीतिक दलों में पारदर्शिता लाने के नजरिये से इन्हें आरटीआर्इ के दायरे में लाना एक ऐतिहासिक घटना है। केंद्रीय सूचना आयोग ने राजनीतिक दलों को सूचना का अधिकार कानून के दायरे में लाकर उल्लेखनीय पहल की है। अब प्रमुख दल मांगे गए सवाल का जवाब देने के लिए बाध्यकारी होंगे। अब चिंता यही […] Read more » आरटीआर्इ आरटीआर्इ के दायरे में राजनीतिक दल राजनीतिक दल
विधि-कानून पुलिस हिंसा और भ्रष्टाचार की बुनियाद अंग्रेजी साक्ष्य कानून June 6, 2013 / June 7, 2013 by एडवोकेट मनीराम शर्मा | Leave a Comment ब्रिटिश साम्राज्य के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए गवर्नर जनरल ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 बनाया था | यह स्वस्प्ष्ट है कि राज सिंहासन पर बैठे लोग ब्रिटिश साम्राज्य के प्रतिनिधि थे और उनका उद्देश्य कानून बनाकर जनता को न्याय सुनिश्चित करना नहीं बल्कि ब्रिटिश साम्राज्य का विस्तार करना और उसकी पकड़ को […] Read more » पुलिस हिंसा और भ्रष्टाचार की बुनियाद अंग्रेजी साक्ष्य कानून
विधि-कानून न्यायालयों में हिन्दी May 25, 2013 by विपिन किशोर सिन्हा | 1 Comment on न्यायालयों में हिन्दी सदियों से भारत में आम जनता की आवाज़ दबाई जाती रही है और उन्हें उनके नैसर्गिक अधिकारों से वंचित किया जाता रहा है। चाहे वह कोई युग रहा हो अथवा कोई राजा रहा हो। लोक भाषा कभी भी राज भाषा नहीं रही। संस्कृत को देवभाषा का अलंकरण देकर, इसे जनभाषा बनने से सोद्देश्य रोका […] Read more » न्यायालयों में हिन्दी
विधि-कानून न्याय पाने की भाषायी आज़ादी May 19, 2013 / May 19, 2013 by राजीव गुप्ता | Leave a Comment राजीव गुप्ता स्वतंत्रता पूर्व भारत मे सरकारी समारोहों में ‘गाड सेव द किंग’ या ‘गाड सेव द क़्वीन’ गाया जाता था. पर्ंतु 15 अगस्त 1947 से उसका स्थान ‘जन-गण-मन-अधिनायक जय हे’ ने लिया. रातोंरात सभी सरकारी भवनो पर से ‘यूनियन जैक’ झंडा उतारकर तिरंगा झंडा लहरा दिया गया. भारत में स्वतंत्रता का जश्न मनाया गया. […] Read more » न्याय पाने की भाषायी आज़ादी
विधि-कानून सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों में भारतीय भाषा में न्याय पाने का हक May 18, 2013 by प्रवक्ता ब्यूरो | 4 Comments on सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों में भारतीय भाषा में न्याय पाने का हक 1. यह है कि माननीय संसदीय राजभाषा समिति ने 1958 में संस्तुति की थी कि उच्चतम न्यायालय में कार्यवाहियों की भाषा हिंदी होनी चाहिए| उक्त अनुशंसा को पर्याप्त समय व्यतीत हो गया है किन्तु इस दिशा में आगे कोई प्रगति नहीं हुई है| 2. यह है कि राजभाषा विभाग ने अपने पत्रांक 1/14013/05/2011-O.L.(Policy/C.T.B.) दिनांक 11.09.12 […] Read more » न्याय की भाषा
विधि-कानून न्यायालयों में भारतीय भाषा में न्याय पाने का हक May 16, 2013 by विजन कुमार पाण्डेय | Leave a Comment विजन कुमार पाण्डेय केवल तीन प्रतिशत भारतीय ही अंग्रजी को अच्छी तरह जानते हैं। इसके बावजूद भी हमारे न्यायालयों में अंग्रेजी का प्रयोग अधिकतम होता है। हमारा संविधान भी इसकी इजाजत देता है। यह बात सच है कि हमारा संविधान के अनुच्छेद 348(1)(क) के तहत उच्चतम न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय में सभी कार्यवाहियां केवल […] Read more »