राजनीति सुशासन बाबू के राज में वेंटिलेटर पर बिहार August 5, 2020 / August 5, 2020 by सोनम लववंशी | Leave a Comment कोरोना महामारी थमने का नाम नही ले रही है। इसी बीच कई राज्य बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। वैसे कोरोना ने यूं तो अपना असर हर परिवेश पर डाला है, फिर बात चाहे राजनीति की हो या सांस्कृतिक और धार्मिक या फिर आर्थिक क्षेत्रों की, लेकिन कुछ राज्य ऐसे भी है जो न […] Read more » वेंटिलेटर पर बिहार
राजनीति मेक्समूलर और मैकाले का षडयंत्र बनाम आदिवासी दिवस ! August 4, 2020 / August 4, 2020 by हरिहर शर्मा | Leave a Comment भारत पर अपना औपनिवेशिक प्रभुत्व स्थापित कर लेने के बाद ब्रिटिश हूक्मरानों को यह समझ में आ गया कि इस राष्ट्र की शाश्वतता, इसकी संजीवनी शक्ति इसकी संस्कृति में है और इसकी संस्कृति का संवाहक है यहां का विपुल साहित्य और शिक्षण पद्धति । यह जान लेने के बाद उन्होंनें भारतवासियों की राष्ट्रीय चेतना को नष्ट-भ्रष्ट […] Read more » MaxMuller and Macaulay Conspiracy Tribal Day! आदिवासी दिवस
राजनीति सैंकडों वर्षों की दासता के दंश से मुक्त करेगा भव्य राम मंदिर निर्माण August 4, 2020 / August 4, 2020 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment कई सदियों बाद एक ऐसा सपना साकार होने जा रहा है जिसके लिए लाखों लोगों ने अपनी जिंदगियां खपा दीं और लाखों लोगों ने अपने प्राणों को न्योछावर कर दिए, सिर्फ ये दिन देखने के लिए कि अयोध्या में एक न एक दिन भव्य राम मंदिर का निर्माण होगा। आज की पीढ़ी बहुत ही सौभाग्यशाली है […] Read more » Construction of grand Ram temple Construction of grand Ram temple will free you from the stigma of hundreds of years of slavery भव्य राम मंदिर निर्माण श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर निर्माण भूमि पूजन
राजनीति सशक्त भारत का माध्यम बनेगा राम मन्दिर August 4, 2020 / August 4, 2020 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ः ललित गर्ग:-मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम मन्दिर का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा 5 अगस्त 2020 को अयोध्या में होना, नये भारत के अभ्युदय की शुभ एवं गौरवमय ऐतिहासिक घटना है, जो युग-युगों तक इस देश को सशक्त बनाने का माध्यम बनती रहेगी। हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार त्रेतायुग में रावण के अत्याचारों को समाप्त करने […] Read more » Ram Mandir ram mandir in Ayodhya राम मन्दिर सशक्त भारत का माध्यम सशक्त भारत का माध्यम बनेगा राम मन्दिर
राजनीति श्रीराम जन्मभूमि: देश का मानस एवं विमर्श August 4, 2020 / August 4, 2020 by प्रवीण गुगनानी | Leave a Comment कर सारंग साजि कटि भाथा । अरिदल दलन चले रघुनाथा ।। प्रथम किन्ही प्रभु धनुष टंकोरा। रिपु दल बधिर भयहू सुनि सोरा ।। लगभग पाँच सौ वर्षों के सतत, दुधुर्ष व उत्कट संघर्ष के बाद 5 अगस्त को अयोध्या मे रामलला जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण की प्रथम शिला रखी जानी है। जो समय के भीतर झांक सकते हैं वे जानते हैं कि मंदिर निर्माण की प्रक्रिया तो 6 दिसंबर 1992 के दिन ही प्रारंभ हो गई थी जिस दिन बाबरी ढांचे का कलंक भारत भूमि से हटा था। बाबरी ढांचे से लेकर भव्य निर्माण तक का ये घटनाक्रम और आरोह अवरोह, सब प्रारब्ध है और रामरचित लीला मात्र है। श्रीराम भारत के गुलामी से जकड़े हुये समाज जागरण हेतु जितने बरस स्वयं की जन्मभूमि को आतताइयों के कब्जे मे रहने देना चाहते थे उतने बरस उन्होने रहने दिया। जब श्रीराम का मन किया कि अब लीला को नवस्वरूप देना है और नवविलास करना है तो वे तिरपाल को त्याग कर नए भवन की ओर अग्रसर हो गए हैं। होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा॥अस कहि लगे जपन हरिनामा। गईं सती जहँ प्रभु सुखधामा॥ मैं स्वयं अपने अनुभव से कह सकता हूँ कि यदि इतिहास मे 6 दिसंबर की वीरोचित घटना नहीं हुई होती तो 9 नवंबर 2019 का विवेकपूर्ण निर्णय भी नहीं हो सकता था। साथ ही यह भी कहना ही होगा कि 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या मे जितने भी रामभक्त बाबरी विध्वंस मे प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से सम्मिलित थे उन सभी मे उस दिन रामेश्वरम रामसेतु के निर्माण मे संलग्न देव तुल्य वानरों की आत्मा प्रवेश कर गई थी। गिलहरी, नल, नील, जांबवंत, सुग्रीव, अंगद, हनुमान, सहित भैया लक्ष्मण और श्रीराम वहाँ स्वयं स्वयंसेवक रूप मे उपस्थित थे और एक नए युग के जन्म की कथा का प्रारंभ स्वयं अपने हाथों से लिख रहे थे। गोस्वामी तुलसीदास के इन शब्दों को प्रत्येक स्वयंसेवक कहते हुये आगे बढ़ रहा था – कटि तूनीर पीत पट बाँधें। कर सर धनुष बाम बर काँधें॥पीत जग्य उपबीत सुहाए। नख सिख मंजु महाछबि छाए॥ कमर में तरकस और पीतांबर बाँधे हैं। हाथों में बाण और कंधों पर धनुष तथा पीले यज्ञोपवीत सुशोभित हैं। नख से लेकर शिखा तक सब अंग सुंदर हैं, उन पर महान शोभा छाई हुई है और वे साथ साथ चलते जा रहे हैं। लंका दहन, क्षमा कीजिये बाबरी विध्वंस के बाद देश भर व विश्व मे चले विमर्श के संदर्भ मे कभी किसी प्रसिद्ध लेखक ने लिखा था कि वह विमर्श बड़ा ही भयावह था। समूचे भारतीय व वैश्विक मीडिया ने बड़ा ही अनैतिक, अनर्गल व अनावश्यक प्रलाप किया था। भारतीय सेकुलर विधवा विलाप कर रहे थे और बीबीसी से लेकर न्यूयार्क टाइम्स, मिरर, वाशिंगटन पोस्ट, एकानामिक टाइम्स आदि आदि वही कह रहे थे जो पाकिस्तान का “द डान” कह रहा था। द टाइम मेगज़ीन ने तो लिखा था कि “पवित्र काम भारत मे शांति नष्ट किए दे रहा है।“ टाइम ने उस समय “राम का क्रोध” नाम से भी एक स्टोरी भी प्रकाशित की थी। यूनिवर्सिटी आफ केलिफोर्निया से Ayodhya and the Politics of India’s Secularism: A Double-Standards Discourse जैसा शोध पत्र भी प्रकाशित हुआ था। इस समूचे विमर्श मे एक ही बात पर बल दिया जा रहा था कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने ढाँचा गिराए जाने को ग़ैरक़ानूनी घोषित कर दिया है। बाबरी विध्वंस के बाद देश भर मे ऐसे लेखन को प्रायोजित किया गया जो हिंदू समाज मे घनघोर आत्मग्लानि, दुख, कुंठा व खेद का वातावरण तैयार करे। वामपंथी, तथाकथित सेकुलर व कांग्रेस ने भारत मे इस वितंडावादी वातावरण को निर्मित करने हेतु एड़ी चोटी के प्रयास किए। वस्तुतः बाबरी विध्वंस राम काज था, गौरावान्वित कर देने वाला अवसर था, पाँच सौ वर्षों की कुंठा, अवसाद व कलंक को मिटा देने वाला अवसर था। बाबरी विध्वंस पर 6 दिसंबर 1992 से लेकर 9 अक्तूबर 2019 तक न्यायालय द्वारा जितनी भी प्रतिकूल, अनुकूल प्रतिकूल टिप्पणियां की गई थी उन सभी को इस राष्ट्र के हम हिंदू बंधुओं ने न तो स्मरण करना चाहिए और न ही उन्हें विस्मृत करना चाहिए। मुझे लगता है बाबरी विध्वंस पर हुई तमाम न्यायलीन टिप्पणियों का यथासमय श्माशोधन / न्याय हमारे समाज द्वारा स्वमेव ही कर दिया जाएगा। एक सर्वव्यापी मंथन कभी न कभी होगा जो इस विमर्श के सत्व को स्थापित करेगा। जिस राष्ट्र ने श्रीराम को अपना पूर्वज, अपना कुटुंबपति, अपना पुरोधा, अपना प्रभु, अपना नीतिनियंता और अपना आदर्श माना हो उस समाज मे रामकाज करना प्रत्येक नागरिक का प्रथम कर्तव्य है। निस्संदेह मंदिर निर्माण रामकाज ही है और बाबरी का विध्वंस भी रामकाज ही था। यदि समाज, देश व विश्व यह सोचता है कि अयोध्या मे श्रीराम मंदिर निर्माण ही अंतिम रामकाज है तो वह गलत सोचता है। आप चिंता न करें मैं यहां मथुरा, काशी आदि आदि की बात नहीं कर रहा हूँ। मथुरा काशी अपने आप मे एक सामाजिक कार्य है जो समय आने पर विधिवत अभियान का स्वरूप लेगा; मैं तो यहां यह चर्चा कर रहा हूँ कि ये जो पाँच सौ वर्षों तक हमारे माथे पर कलंक का टीका लगा रहा है वह मंदिर बनने मात्र से समाप्त नहीं होगा। इस कलंक को समाप्त करने हेतु हमें हमारे समाज मे चले पाँच सौ वर्षों के षड्यंत्रकारी व लज्जाधारी विमर्श के विरुद्ध भी एक व्यापक विमर्श खड़ा करना होगा। मंदिर स्थूल है किंतु मंदिर का व्यापक विमर्श एक दिव्य विचार है। हमें इस दिव्य विचार की स्थापना हेतु कार्य करना होगा ताकि हम हमारी आने वाली पीढ़ियों को आत्मग्लानि, कुंठा व खेद के भाव से निकालकर वीरोचित भाव से आत्मविभोर कर पाएँ। आप कल्पना कीजिये कि जिस देश मे नरेंद्र मोदी के पूर्व किसी प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक मंच से जय श्रीराम का उद्घोष ही नहीं किया, उस देश मे राममंदिर के निर्माण हेतु एक प्रधानमंत्री का जाना सतह के नीचे कितनी लहरों को जन्म दे रहा होगा। हम आज यदि लगभग बीते तीन दशकों के बाबरी ढांचा विध्वंस पर हुये विमर्श को जांचे परखे तो लगता है इस विषय पर बहुत दीर्घ, सतत व विस्तृत अध्ययन विमर्श की आवश्यता है। द वीक पत्रिका द्वारा जारी 7 सितंबर, 2003 की रिपोर्ट “ The layers of truth” हो, या आउटलूक इंडिया पत्रिका की “What If Rajiv Hadn’t Unlocked Babri Masjid? हो, या 3 अक्टूबर 2010 को प्रकाशित द हिन्दू की प्रकाशित स्टोरी Ayodhya verdict yet another blow to secularism: Sahmat हो, ऐसी पचासों स्टोरीज़ और दसियों पुस्तके हैं जिनके सामयिक विचारमंथन या समाशोधन (हिसाब किताब बराबर करना) की सख्त आवश्यकता हमारे समाज को है। निस्संदेह इस सामाजिक, अकादमिक समाशोधन हेतु यह समय सर्वाधिक उपयुक्त व समीचीन है। Read more » श्रीराम जन्मभूमि
राजनीति मुहूर्त,मोदी जी और अयोध्या August 4, 2020 / August 4, 2020 by डॉ.रामकिशोर उपाध्याय | Leave a Comment अयोध्या भूमि पूजन के लिए सज चुकी है जैसे त्रेता युग में जब 14 वर्ष के वनवास के बाद प्रभु श्री राम अयोध्या लौटे थे तब भी ऐसे ही अयोध्या सजाई गयी थी | गोस्वामी जी ने लिखा है “अवधपुरी अति रुचिर बनाई ,देवन्ह सुमन बृष्टि झरि लाई | “ अब लगभग 500-600 वर्ष बाद […] Read more » अयोध्या भूमि पूजन मोदी जी और अयोध्या
राजनीति सबके चहेते नेता और समाज की अग्रिम पंक्ति के नायक का अंत August 2, 2020 / August 2, 2020 by अनिल अनूप | Leave a Comment अनिल अनूप राज्यसभा सांसद और पूर्व समाजवादी पार्टी नेता अमर सिंह ने शनिवार (1 अगस्त, 2020) को इस दुनिया को अलविदा कह दिया। अमर सिंह को राजनीति का वो शख्स माना जाता था जिसकी पहुंच सियासत से लेकर बिजनेस और फिल्मी दुनिया की हस्तियों तक थी। अमर सिंह इस दुनिया को अलविदा कह गए लेकिन […] Read more » अमर सिंह राज्यसभा सांसद और पूर्व समाजवादी पार्टी नेता अमर सिंह
राजनीति आदिवासी दिवस के बहाने अलगाववाद की राजनीति August 2, 2020 / August 2, 2020 by डॉ नीलम महेन्द्रा | 8 Comments on आदिवासी दिवस के बहाने अलगाववाद की राजनीति वैशविक परिदृश्य में कुछ घटनाक्रम ऐसे होते हैं जो अलग अलग स्थान और अलग अलग समय पर घटित होते हैं लेकिन कालांतर में अगर उन तथ्यों की कड़ियाँ जोड़कर उन्हें समझने की कोशिश की जाए तो गहरे षड्यंत्र सामने आते हैं। इन तथ्यों से इतना तो कहा ही जा सकता है कि सामान्य से लगने […] Read more » Politics of separatism Politics of separatism on the pretext of tribal day tribal day आदिवासी दिवस
राजनीति रामभक्त मुसलमान घर वापसी करें August 2, 2020 / August 2, 2020 by विनोद कुमार सर्वोदय | Leave a Comment यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि लगभग पांच शतकों के अथक संघर्षों व लाखों हुतात्माओं के बलिदानों के पश्चात हिन्दू समाज अपने आराध्य प्रभू श्री राम की जन्मभूमि आयोध्या में पुन: एक विशाल मन्दिर के नव निर्माण अभियान में सफल हो रहा है।इस ऐतिहासिक भव्य मन्दिर का शिलान्यास पांच अगस्त को हमारे प्रखर राष्ट्रवादी […] Read more » प्रबल रामभक्त भक्ति जिहाद मुस्लिम राष्ट्रीय मंच राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ
राजनीति लेख हिन्दी के योद्धा राजर्षि पुरुषोत्तमदास टण्डन के जन्मदिवस् पर August 2, 2020 / August 2, 2020 by प्रो. अमरनाथ | Leave a Comment प्रो. अमरनाथ भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के अग्रणी पंक्ति के नेता राजर्षि पुरुषोत्तमदास टण्डन (1.8.1882- 1.7.1962) का राजनीति में प्रवेश हिन्दी प्रेम के कारण ही हुआ. 17 फ़रवरी 1951 को मुजफ्फरनगर ‘सुहृद संघ’ के 17 वें वार्षिकोत्सव के अवसर पर टण्डन जी ने कहा था- “हिन्दी के पक्ष को सबल करने के उद्देश्य से ही मैंने कांग्रेस जैसी संस्था में प्रवेश किया, क्योंकि मेरे हृदय […] Read more » राजर्षि पुरुषोत्तमदास टण्डन
राजनीति स्नेह एवं सौजन्य की छांह देने वाला बरगद : श्री फतेहचन्दजी भंसाली August 2, 2020 / August 2, 2020 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग-राजस्थान की माटी महाजन, महाधन एवं महाकर्म व्यक्तियों से सुशोभित होती रही है। राजस्थान के सुजानगढ़ में जन्में एवं कोलकता, मुंबई एवं दिल्ली में कर्म करते हुए समृद्धि के उच्चे शिखरों पर सवार होकर भी अकिंचन का परोपकारी एवं धार्मिक जीवन जीने वाले श्री फतेहचन्दजी भंसाली न केवल तेरापंथ समाज बल्कि सम्पूर्ण जैन समाज-मारवाडी […] Read more » Shri Fatehchandji Bhansali श्री फतेहचन्दजी भंसाली
राजनीति श्रीराम मन्दिर निर्माण के उजालों का स्वागत करें August 1, 2020 / August 1, 2020 by ललित गर्ग | 1 Comment on श्रीराम मन्दिर निर्माण के उजालों का स्वागत करें -ः ललित गर्ग:-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 अगस्त 2020 को अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन करेंगे, सुप्रीम कोर्ट के फैसले और केंद्र सरकार की पहल के बाद भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण की शुभ शुरुआत एवं नये प्रस्थान के साथ अयोध्या सहित समूचे भारत की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलेंगे और नये युग […] Read more » 5 अगस्त 2020 को अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण श्रीराम मन्दिर निर्माण