राजनीति समाजवाद का विकृत चेहरा – सिद्धार्थ मिश्र “स्वतंत्र” June 14, 2013 / June 14, 2013 by सिद्धार्थ मिश्र “स्वतंत्र” | 4 Comments on समाजवाद का विकृत चेहरा – सिद्धार्थ मिश्र “स्वतंत्र” समाजवाद क्या है ? क्या, राममनोहर लोहिया का समाजवादी चिंतन सपा के आचरण जैसा ही रहा होगा ? ऐसे अनेकों प्रश्नो है जो उत्तरप्रदेश में सपा के शासन को देखकर उठते रहते हैं । जहां तक प्रश्न है समाजवाद का तो मेरे विचारों में उसका सर्वप्रथम लक्ष्य है समग्र समाज का सर्वांगिण चिंतन, समाज में […] Read more » समाजवाद का विकृत चेहरा
राजनीति राजनीति के भंवर में एनसीटीसी- प्रमोद भार्गव June 13, 2013 / June 13, 2013 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि हम आतंकवाद और माओवादी नक्सली हिंसा को भी राजनीतिक नफे-नुकसान और राज्यों के संघीय अधिकार के आईने से देख रहे हैं। इस संकुचित दृष्टि ने एनसीटीसी यानी राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्र को राजनीति के भंवरजाल में उलझा दिया है। इस स्थिति से जाहिर होता है कि हमारे केंद्रीय नेतृत्व में […] Read more » राजनीति के भंवर में एनसीटीसी
राजनीति भाजपा और मोदी के आगे भविष्य की चुनौतियाँ — डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री June 13, 2013 by डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री | 7 Comments on भाजपा और मोदी के आगे भविष्य की चुनौतियाँ — डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री आने वाले लोकसभा चुनाव भाजपा किसके नेतृत्व में लड़ेगी ,अब इसमें कोई संशय नहीं रह गया है । गोवा में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में विधिवत घोषणा कर दी गई है कि गुजरात के मुख्यमंत्री यह कमान संभालेंगे । वैसे पार्टी में कार्यकर्ताओं के स्तर पर यह दुविधा पहले ही समाप्त हो गई […] Read more » भाजपा और मोदी के आगे भविष्य की चुनौतियाँ
राजनीति राजग बंधन की खुलती गांठें – सिद्धार्थ मिश्र “स्वतंत्र” June 13, 2013 / June 13, 2013 by सिद्धार्थ मिश्र “स्वतंत्र” | 1 Comment on राजग बंधन की खुलती गांठें – सिद्धार्थ मिश्र “स्वतंत्र” कहते हैं कि सियासत में दोस्ती और दुश्मोनी कुछ भी स्थायी नहीं होती । बात चाहे समर्थन की हो या गठबंधन की सियासत में सब मतलब के यार होते हैं । भारतीय राजनीति की विषम परिस्थितियां कई बार इस जुमले को सत्यन सिद्ध कर चुकी हैं । इस परिप्रेक्ष्य में अगर भाजपानीत राजग गठबंधन को […] Read more » राजग बंधन की खुलती गांठें
राजनीति आडवानी जी जनसंघ और बीजेपी के संस्थापक नही थे-अनिल गुप्ता June 12, 2013 / June 12, 2013 by अनिल गुप्ता | 8 Comments on आडवानी जी जनसंघ और बीजेपी के संस्थापक नही थे-अनिल गुप्ता हाल में भाजपा के वरिष्ठतम नेता श्री लाल कृष्ण अडवाणी जी द्वारा पार्टी की तीन समितियों से त्यागपत्र देने पर समाचार पत्रों और इलेक्ट्रोनिक मीडिया में चर्चाओं में बार बार ये दोहराया गया कि श्री अडवाणी द्वारा भारतीय जनसंघ और भाजपा की स्थापना की गयी थी.लेकिन ये कथन सत्य का एक अंश मात्र है.अतः सही […] Read more » आडवानी जी जनसंघ और बीजेपी संस्थापक नही थे
राजनीति आर- पार की लड़ाई का वक्त June 12, 2013 by वीरेंदर परिहार | 1 Comment on आर- पार की लड़ाई का वक्त वीरेंद्र सिंह परिहार बहुत से किन्तु – परन्तु और आपत्तियों के बावजूद जैसा कि प्रत्याशित था , भाजपा की गोवा में हो रही राष्ट्रीय कार्यकारिणी के अंतिम दिन ९ जून को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने नरेन्द्र मोदी को भाजपा की राष्ट्रीय चुनाव – प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाने की घोषणा कर ही […] Read more » आर- पार की लड़ाई का वक्त
राजनीति घोर अनास्था के युग में संघ-आस्था भाजपा का संकट हल कर गई!! -प्रवीन गुगनानी June 12, 2013 / June 12, 2013 by प्रवीण गुगनानी | Leave a Comment “आज के परिदृश्य यह अविश्सनीय किन्तु सत्य है कि भाजपा संकट के सागर में गहरे धंस जाने के बाद तेजी से वापिस आई और शीघ्र ही सागर की सतह पर शांत-एकाग्र होकर राजयोग हेतु पद्मासन भी लगा चुकी है.” अन्ततोगत्वा तमाम प्रकार के संघर्षों को पार पाकर नरेन्द्र मोदी भारतीय जनता पार्टी की चुनावी समिति […] Read more » घोर अनास्था के युग में संघ-आस्था भाजपा का संकट हल कर गई!!
राजनीति पी.एम. पद की घोषणा और संविधान-राकेश कुमार आर्य June 12, 2013 / June 12, 2013 by राकेश कुमार आर्य | 5 Comments on पी.एम. पद की घोषणा और संविधान-राकेश कुमार आर्य भारत का संविधान कहीं भी ये घोषणा नही करता कि जब आम चुनाव हों तो किसी भी राजनीतिक दल या गठबंधन को अपना भावी पी.एम. पहले ही घोषित कर देना चाहिए। संविधान इस विषय में यही व्यवस्था देता है कि देश का प्रधानमंत्री वही होगा जिसे देश की संसद के निचले सदन में निर्वाचित सदस्यों […] Read more » पी.एम. पद की घोषणा और संविधान
राजनीति बड़ी ही कठिन हैं राह पनघट की-राकेश कुमार आर्य June 12, 2013 / June 12, 2013 by राकेश कुमार आर्य | 2 Comments on बड़ी ही कठिन हैं राह पनघट की-राकेश कुमार आर्य इतिहास लिखा जाता है, संघर्षों से। संघर्षों की यदि बात करें तो भाजपा के संघर्षशील व्यक्तित्व के धनी अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी इतिहास लिखकर पटल से अब दूर हो गये हैं, और उनकी कलम वक्त ने अब नरेन्द्र मोदी और राजनाथ सिंह के हाथ में सौंप दी है। अटल और आडवाणी की जोड़ी […] Read more » बड़ी ही कठिन हैं राह पनघट की
राजनीति मोदी का महिमा मंडन -प्रमोद भार्गव June 11, 2013 by प्रमोद भार्गव | 2 Comments on मोदी का महिमा मंडन -प्रमोद भार्गव लोकतंत्र में लोकप्रियता को कैसे भुनाया जाता है, यह सबक राजनेताओं को नरेंद्र मोदी से सीखना चाहिए। वाजपेयी के स्वास्थ्य कारणों के चलते मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य से बाहर हो जाने और आडवाणी के अतिरिक्त महत्वाकांक्षा की गिरफ्त में आ जाने जैसी वजहें रहीं कि मोदी ने पनजी ;गोवा के मंच से भाजपा चुनाव अभियान समिति […] Read more » मोदी का महिमा मंडन
राजनीति कंटकाकीर्ण मार्गम… June 11, 2013 by नरेश भारतीय | Leave a Comment एक स्वस्थ लोकतंत्रीय परम्परा के अनुरूप भारतीय जनता पार्टी ने गोवा की अपनी कार्यकर्ता बैठक में सर्वसम्मति और सहमति तक पहुंचने का दुर्गम रास्ता तय करने के बाद नरेंद्र मोदी को अपने चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष घोषित किया। लोकतंत्र और लोकप्रियता का अटूट नाता हैं। नरेंद्र मोदी को एक लोकप्रिय नेता बताते हुए पार्टी […] Read more » कंटकाकीर्ण मार्गम...
राजनीति राजा ययाति और लाल कृष्ण आडवानी June 10, 2013 / June 10, 2013 by विपिन किशोर सिन्हा | 10 Comments on राजा ययाति और लाल कृष्ण आडवानी विनोद कुमार सिन्हा वैदिक युग में आर्यावर्त्त में एक अति पराक्रमी राजा हुआ करते थे। नाम था ययाति। वे सूर्यपुत्र मनु के वंशज और इन्द्रासन के अधिपति रहे महान राजा नहुष के पुत्र थे। यश, पराक्रम और कुशल प्रजापालन में वे कही से भी अपने पिता नहुष से उन्नीस नहीं थे। एक बार आखेट करते […] Read more » लालकृष्ण आडवानी