प्रवक्ता न्यूज़ लगे हाथ एक गणना इनकी भी हो जाए… May 11, 2025 / May 11, 2025 by सुशील कुमार नवीन | Leave a Comment सुशील कुमार ‘नवीन’ पहलगाम हादसे के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच अघोषित युद्ध की शुरुआत हो चुकी है। इसका परिणाम क्या रहेगा? यह अभी भविष्य के गर्भ में है। इस गंभीर माहौल की जहां अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक चिंतन हो रहा है वहीं कुछ कुचक्रिय तत्व अभी भी सक्रिय है। जातीय जनगणना तो जब होगी सो होगी, इससे पहले ऐसे लोगों की गणना बहुत जरूरी है। जो भारत में रहते हैं और भारतीय नहीं है। जो इसी मिट्टी में जन्मे हैं और इसी के विखंडन का स्वप्न देखते हैं। जो यही कमाते हैं और इसका प्रयोग इसी के खिलाफ करते हैं। युद्ध अपने तरीके से चलता रहेगा, युद्ध के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे लोगों की पहचान आज इस घड़ी में करना बेहद जरूरी है। जयचंदों की फौज जिस तरह से बढ़ रही है वो भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है। चाणक्य नीति में साफ लिखा गया है कि – परोक्षे कार्यहन्तारं प्रत्यक्षे प्रियवादिनम्। वर्जयेत्तादृशं मित्रं विषकुम्भ पयोमुखम्॥ इसका सीधा सा भाव है कि पीठ पीछे काम बिगाड़ने वाले और सामने मीठा बोलने वालों को उसी प्रकार त्याग देना चाहिए, जिस प्रकार मुख पर दूध तथा भीतर विष से भरे घड़े को त्याग दिया जाता है। एक सच्चे देशभक्त का इस समय कर्तव्य बनता है कि आपदा आने के समय वो आपसी गिले शिकवे भूल एकमत से राष्ट्रहित में ली गई प्रत्येक कार्रवाई का समर्थन करे। उसमें यथोचित सहयोग करें, उसका संबल बनें। किसी तरफ की छींटाकशी,मीनमेख निकाल दूसरे पक्ष के लिए उदाहरण बनना राष्ट्रविरोधी से कमतर नहीं है। देश आज जिस संकट से गुजर रहा है वह हमारे द्वारा पैदा नहीं किया गया है। गीता का प्रसिद्ध श्लोक यहां सार्थक सिद्ध है। इसके अनुसार कहा गया है – कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ युद्ध से इनकार किए जाने पर श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं – तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करना है। कर्म के फल पर तुम्हारा अधिकार नहीं है। इसलिए तुम केवल निरन्तर कर्म करो। कर्म के फल पर मनन मत करो और अकर्मण्य भी मत बनो। संसार का कोई भी ऐसा देश नहीं है। जहां राष्ट्र विरोधी ताकतें मुंह बाए न खड़ी हो। दुश्मन राष्ट्र से ज्यादा खतरा राष्ट्र के अंदर छिपी पड़ी इन कुचक्रियों से होता है। वक्त बेवक्त इनका सिर्फ एक उद्देश्य होता है कि किसी भी तरह से अपनी विचारधारा को ज्यादा से ज्यादा प्रसारित किया जाए। इन्हें इस बात से मतलब नहीं कि देश किस स्थिति से गुजर रहा है। उन्हें सिर्फ अपनी विचारधारा को अग्रसर रखना होता है, चाहे वो विचारधारा राष्ट्रविरोधी ही क्यों न हो। आज के समय को ही ले लीजिए। पक्ष-विपक्ष आज सरकार के साथ खड़ा है। फिर भी कुछ लोगों की जुबान नहीं रुक रही है। इसी का फायदा सोशल मीडिया के माध्यम से पाकिस्तान द्वारा उठाया गया है हमारे ही लोगों द्वारा की गई बयानबाजी का प्रयोग हमारे ही खिलाफ उनके द्वारा खूब किया गया है। कन्हैयालाल मिस्र का एक निबंध मै और मेरा देश पढ़ा हो तो उसकी एक पंक्ति आज के समय में अपनी सार्थकता को पूर्ण सिद्ध करती है कि युद्ध में जय बोलने वालों का बड़ा महत्व है। भाव यह है कि युद्ध करना हर किसी के सामर्थ्य में नहीं है। लेकिन अपने साथियों का उत्साह बढ़ाना तो हमारे हाथ में है। लेकिन हम है कि अभी भी बाज नहीं आ रहे। आलोचना या समीक्षा का अभी वक्त थोड़े ही है। अभी तो जो हो रहा है उसे होने दें। वो चाहे अच्छा है या बुरा। हमारा पहला फर्ज बनता है कि उसमें सहयोग करें। लोकतंत्र में सबको बोलने का अधिकार है, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। एक छोटी सी चिनगारी की उपेक्षा से दावानल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। प्राचीन भारत के महान अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ और दार्शनिक आचार्य चाणक्य के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए जीवन सिद्धांत और रणनीतियां न केवल राजनीति, बल्कि व्यक्तिगत जीवन में भी सफलता प्राप्त करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करने का कार्य करते हैं। उनके द्वारा बताये गए नियमों में जीवन की कठिनाइयों का सामना करने और सही दिशा में आगे बढ़ने के उपाय दिए गए हैं। ये न केवल आत्मनिर्भर बनाते हैं, बल्कि जीवन में बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भी प्रेरित करते हैं। आचार्य चाणक्य के अनुसार यदि आपका कोई शत्रु है तो कमजोरियों का पता लगाकर कमजोर करो। शत्रु को नष्ट करने से पहले उसे हराना बहुत जरूरी है। चाणक्य का कहना था कि सच्चाई अक्सर कड़वी होती है, लेकिन यह हमेशा सही होती है, यदि हम सच्चाई को अपनाते हैं, तो जीवन में हमें कोई पछतावा नहीं होगा। आचार्य चाणक्य राष्ट्र शब्द को परिभाषित करते हुए कहते हैं कि राष्ट्र केवल किसी भूखंड मात्र नहीं होता। राष्ट्र संस्कृति, सभ्यता, परंपरा, भाषा, इतिहास इन पांचों विषयों का बोध होता है। उनके अनुसार देश में जन्मे प्रत्येक व्यक्ति को राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण का भाव रखना ही सच्ची राष्ट्र सेवा है। अपने नीति सूत्रों के माध्यम से आचार्य चाणक्य ने तत्कालीन सुप्त जनमानस के पटल पर राष्ट्रीय स्वाभिमान एवं आत्मगौरव की भावना को जाग्रत किया। देश के आत्मगौरव और आत्मस्वाभिमान को सुदृढ़ एवं अखंड रखने के लिए अनिवार्य है राष्ट्र की एकता एवं संगठन। चाणक्य का विचार था कि ‘राष्ट्रीय एकता राष्ट्र रूपी शरीर में आत्मा के समान है। जिस प्रकार आत्मा से हीन शरीर प्रयोजनहीन हो जाता है, उसी प्रकार राष्ट्र भी एकता एवं संगठन के अभाव में टूट जाता है। ऐसे में आज हम सब का भी दायित्व बनता है कि समाज एवं राष्ट्र स्तर पर कहीं भी कुछ ऐसा घटित हो रहा है जो राष्ट्रहित में नहीं है तो एक सजग भारतीय की तरह उस पर मुखर हो। गलत देखकर चुप रह जाना भी किसी अपराध से कम नहीं होता। राष्ट्र-विरोध की स्थितियों से संघर्ष करना समय की जरूरत है। उनसे पलायन करने से राष्ट्रीयता सशक्त मजबूत नहीं हो सकती। महाभारत के शान्तिपर्व में लिखा गया है – दुर्जनः परिहर्तव्यः विध्ययालंकृतोऽपि सन् । मणिना भूषितः सर्पः किमसो न भयंकरः॥ दुर्जन व्यक्ति यदि विद्या से भी अलंकृत हो फ़िर भी उसका छोड़ देना चाहिए। मणि से भूषित सांप क्या भयंकर नही होते? लेखक; सुशील कुमार ‘नवीन‘ Read more »
प्रवक्ता न्यूज़ भारत ने 17.1 मिलियन लोगों को ग़रीबी से बाहर निकाला April 28, 2025 / April 28, 2025 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment (विश्व बैंक की ताज़ा रिपोर्ट) पहलगाम आतंकी हमले की बहुत ही दुखद खबर के बाद हाल ही में विश्व बैंक से एक अच्छी खबर आई है। यह खबर ग़रीबी उन्मूलन पर है। ग़रीबी वास्तव में एक बहुत बड़ी व ज्वलंत समस्या है। यदि हम यहां गरीबी की साधारण परिभाषा की बात करें तो बुनियादी आवश्यकताओं […] Read more »
प्रवक्ता न्यूज़ राष्ट्रीय भारतीयता के कवि दिनकर April 23, 2025 / April 23, 2025 by कुमार कृष्णन | Leave a Comment (पुण्यतिथि 24 अप्रैल पर विशेष) कुमार कृष्णन हिंदी साहित्य में दिनकर की पहचान राष्ट्रकवि के रूप में है। उनका साहित्य राष्ट्रीय जागरण व संघर्ष के आह्वान का जीता-जागता दस्तावेज़ है। उनकी राष्ट्रीय चेतना कई स्तरों पर व्यक्त हुई है। दिनकर राष्ट्रीयता की स्थापित पहचान और स्थापना के मूल्यों के दोआब हैं। सच में यहीं से कोई […] Read more »
प्रवक्ता न्यूज़ विनाश के पाँच तोप: शिक्षा से तहसील तक April 22, 2025 / April 22, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment शिक्षा, स्वास्थ्य, चिकित्सा, थाना और तहसील जैसे पाँच संस्थानों की विफलता गंभीर चिंता का विषय है। शिक्षा अब ज्ञान नहीं, कोचिंग और फीस का बाजार बन चुकी है। स्वास्थ्य सेवाएँ निजीकरण की भेंट चढ़ चुकी हैं, जहाँ इलाज से ज्यादा पैकेज बिकते हैं। चिकित्सा व्यवस्था मुनाफाखोरी का अड्डा बन गई है। थाने न्याय की जगह […] Read more »
प्रवक्ता न्यूज़ चमत्कारी ‘पूर्णागिरी’ से होती हैं सभी मुरादें पूरी April 10, 2025 / April 10, 2025 by रमेश ठाकुर | Leave a Comment डॉ. रमेश ठाकुर 51 शक्तिपीठों में शामिल उत्तराखंड का ‘पूर्णागिरी मंदिर’ का मेला लग चुका है। देशभर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मान्यताओं के मुताबिक यह ऐसा स्थान है, जहां सच्चे मन से मांगी हुई प्रत्येक मुराद पूरी होती है। मंदिर उत्तराखंड के चंपावत जिले और नेपाल की सीमा से सटा है। देश के प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में शुमार पूर्णागिरी का मंदिर जमीन से करीब साढ़े पांच हजार मीटर ऊंचे पहाड़ पर स्थित है। 12 से 15 किमी की चढ़ाई के बाद दर्शन नसीब होते हैं। मंदिर चारों तरफ से प्राकृतिक सुंदरताओं से घिरा है। मंदिर के कपाट इस समय खुले हैं। चैत्र नवरात्र से शुरू होकर जून की पहली बारिश तक खुलते हैं। बता दें, यह इलाका उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की विधानसभा ‘खटीमा’ से सटा हुआ है। मेले के वक्त राज्य सरकार द्वारा सुरक्षा-व्यवस्था हर वर्ष चाक चौबंद की जाती है। सालाना करीब 10 लाख से अधिक देश-विदेश से श्रद्धालु मंदिर में मन्नत मांगने पहुंचते हैं। दैवीय चमत्कारी गाथाओं से संबंध रखने वाला यह मेला करीब दो माह तक चलेगा। मार्च-अप्रैल में भीड़ ज्यादा रहती है। सदियों पुरानी मान्यताओं के मुताबिक जो भक्त सच्चे मन से मंदिर में चुन्नी से गांठ बांधकर कुछ मांगता, तो उसकी मुराद तकरीबन पूरी होती है। मंदिर में मुंडन कराने से बच्चा दीर्घायु और बुद्धिमान बनता है। इसी विशेष महत्वता के चलते लाखों तीर्थ यात्री वहां बच्चों का मुंडन कराने जाते हैं। पूर्णागिरी धाम में प्राकृतिक सुंदरता और अध्यात्म के मिलन का एहसास होता है। जहां हरियाली, शीतल हवा और शारदा नदी के साथ प्राकृतिक सौंदर्य हर ओर फैली हुई है। पुराणों में जिक्र है कि दक्ष प्रजापति की कन्या और शिव की अर्धांगिनी सती की नाभि का भाग यहां विष्णु चक्र से कटकर गिरा था। उसके बाद वहां 51 सिद्ध पीठों की स्थापना हुई और मां पूर्णागिरि मंदिर के रूप में प्रसिद्ध हुआ। मां पूर्णागिरि के मंदिर के लिए सड़क, रेल व वायु मार्ग से पहुंच सकते हैं। निकटतम रेलवे स्टेशन टनकपुर है। सड़क मार्ग से ठूलीगढ़ तक जा सकते हैं। इसके अलावा वायु मार्ग से जाने के निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है। बरेली-पीलीभीत से मंदिर पहुंचने के लिए तमाम सुगम पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधाएं 24 घंटे उपलब्ध रहती हैं। पुराणों में ये भी बताया है कि महाभारत काल में प्राचीन ब्रह्मकुंड के निकट पांडवों द्वारा देवी भगवती की आराधना तथा बह्मदेव मंडी में सृष्टिकर्ता ब्रह्मा द्वारा आयोजित विशाल यज्ञ में एकत्रित अपार सोने से वहां सोने का पर्वत भी निकला था, जो अदृश्य है। व्यवस्थापक बताते हैं, सोने का मंदिर 100 साल में एक बार दर्शन देता है। सोने का विशालकाय मंदिर धरती फाड़कर उपर निकलता है और थोड़ी देर दिखने के बाद औछल हो जाता है। इसलिए देश के चारों दिशाओं में स्थित कालिका गिरि, हिमगिरि व मल्लिका गिरी में पूर्णागिरि का ये शक्तिपीठ बहुत महत्व रखता है।वेदों में ज्रिक है कि एक समय दक्ष प्रजापति द्वारा यज्ञ का आयोजन किया गया जिसमें देवी-देवताओं का बुलाया गया लेकिन शिव भगवान को नहीं? तभी, सती द्वारा अपने पति भगवान शिव शंकर का अपमान सहन न होने के कारण अपनी देह की आहुति उसी यज्ञ में दे दी। सती की जली हुई देह लेकर भगवान शिव आकाश में विचरण करने लगे। जब भगवान विष्णु ने शिव शंकर को ताण्डव नृत्य करते देखा, तो उन्हें शांत करने के लिए सती के शरीर के सभी अंगों को पृथक-पृथक कर दिया। उसके बाद जहां-जहां सती के अंग गिरे, वहां शांति पीठ स्थापित हो गए। पूर्णागिरी में सती की नाभि गिरी थी। नाभि चंपावत जिले के “पूर्णा” पर्वत पर गिरने से मां “पूर्णागिरी मंदिर” की स्थापना हुई। ‘मल्लिका गिरि’ ‘कालिका गिरि’ ‘हमला गिरि’ में भी यही मान्यताएं हैं लेकिन पूर्णागिरि का स्थान सर्वोच्च है। डॉ. रमेश ठाकुर Read more »
प्रवक्ता न्यूज़ महाराणा सांगा के मायने April 4, 2025 / April 4, 2025 by वीरेंदर परिहार | Leave a Comment वीरेंद्र सिंह परिहार महाराणा सांगा में दृढ़ निश्चय, सैन्य कुशलता और उच्चकोटि की नेतृत्व क्षमता थी, जो किसी अन्य राजा में नहीं मिलती । राणा ने अज्ञातवास तक भोगा था पर वह मेवाड़ के सर्वश्रेष्ठ राज्य पुरूषों में से एक बनकर उभरे। सांगा के समय में मेवाड़ की सेनाओं की मालवा और दिल्ली की सेनाओं से 18 […] Read more »
प्रवक्ता न्यूज़ संघ-भाजपा में तालमेल से जुड़े सुखद संकेत April 1, 2025 / April 1, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के 25 साल बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय के अंगने में पहुंचकर संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार और दूसरे सरसंघचालक माधव सदाशिव गोलवलकर (गुरुजी) के स्मारक स्मृति मंदिर में श्रद्धांजलि दी, जिससे संघ एवं भाजपा के बीच एक नई तरह की ऊर्जामयी सोच एवं […] Read more » संघ-भाजपा में तालमेल
प्रवक्ता न्यूज़ रेल विकास : एक पहलू यह भी March 26, 2025 / March 26, 2025 by निर्मल रानी | Leave a Comment निर्मल रानी भारतीय रेल विकास के नित्य नये अध्याय लिख रहा है। अनेक तीव्रगामी ट्रेन संचालित की जा रही हैं। मुंबई-अहमदाबाद के मध्य तो हाई स्पीड रेल/ बुलेट ट्रेन चलने की योजना है। दिसंबर 2023 तक बुलेट ट्रेन संचालन की तैयारी को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। परन्तु अभी तक इसका निर्माण कार्य पूरा नहीं […] Read more » रेल विकास
प्रवक्ता न्यूज़ रोज़गार के हर क्षेत्र में महिलाएं सशक्त हैं March 12, 2025 / March 12, 2025 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment नरेंद्र कुमार शर्माजयपुर, राजस्थान जब हम रोजगार की बात करते हैं, तो सबसे पहले हमारे मन में संगठित क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों की छवि उभरती है. लेकिन समाज के असली नायक वे लोग होते हैं जो असंगठित क्षेत्र में रहकर भी अपने हौसले से रोजगार के नए आयाम गढ़ते हैं. खासकर महिलाओं की […] Read more »
प्रवक्ता न्यूज़ मजहब और क्रूसेड युद्ध अर्थात धार्मिक युद्ध March 7, 2025 / March 5, 2025 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment ( मज़हब ही तो सिखाता है आपस में बैर रखना पुस्तक से ..) मजहब के नाम पर ईसाइयों, यहूदियों और मुसलमानों के बीच एक से एक बढ़कर खूनी संघर्ष हुए हैं। जिनमें मानवता का भारी अहित हुआ है। लाखों लोगों को इन युद्धों में या तो अपने प्राण गंवाने पड़े या फिर विस्थापित होने के […] Read more »
प्रवक्ता न्यूज़ खेती में हो उर्वरकों का सीमित, संतुलित और वैज्ञानिक उपयोग March 6, 2025 / March 6, 2025 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment सुनील कुमार महला भारत आज भी विश्व का एक बड़ा कृषि प्रधान देश है। कृषि ही यहां की मुख्य आजीविका का केंद्र बिंदु रहा है और आज भी है। कहना चाहूंगा कि आज हमारे देश की खेती लगातार रासायनिक खादों/उर्वरकों पर निर्भर होती चली जा रही है। यह ठीक है आज अनेक स्थानों पर आर्गेनिक […] Read more »
प्रवक्ता न्यूज़ चिंतन: धर्म, कर्म, ज्ञान और प्रेम का अद्भुत समागम है प्रयागराज March 3, 2025 / March 3, 2025 by डॉ दिनेश चंद्र सिंह | Leave a Comment @ डॉ दिनेश चंद्र सिंह, आईएएस प्रयागराज मेरी कर्मभूमि है। मैंने इसे हर नजरिए से पढ़ा है और आत्मीयता भाव पूर्वक उसे गढ़ा है। इस शहर की इंद्रधनुषी सांस्कृतिक छँटा आपको भाव विभोर किये बिना नहीं रहेगी। महाकुंभ 2025 के आयोजन से इसकी विश्वव्यापी प्रसिद्धि बढ़ी है। धार्मिक आस्था और पौराणिक महत्व वाले इस शहर […] Read more »