प्रवक्ता न्यूज़

मनोहर सिंह बने डीजेए के नए अध्यक्ष

चुनाव अधिकारी, दधिबल यादव ने आज यहां नए पदाधिकारियों और नई कार्यकारिणी के निर्वाचन की घोषणा की। नेशनल यूनियन आॅफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रासबिहारी और राष्ट्रीय महासचिव रतन दीक्षित ने नई टीम को शुभकामना देते हुए कहा है कि यह टीम दिल्ली में पत्रकारों के हितों की दिशा में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देगी। डीजेए के नए पदाधिकारियों के अनौपचारिक बैठक के दौरान करीब 200 पत्रकार मौजूद रहे। इस दौरान वरिष्ठ पत्रकार और आॅर्गेनाइजर के पूर्व संपादक डॉ. आर. बालाशंकर भी मौजूद रहे और नई टीम को बधाई दी।

सतत विकास के लिये नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा  : प्रकाश जावेडकर

मानव संसाधन मंत्री ने कहा कि सरकार ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों में सबसे अच्छी शोध प्रयोगशालाएँ स्थापित करने का निर्णय लिया है| आई.आई.टी (IITs) भी संयुक्त रूप से विदेशों में रह रहे भारतीय विद्यार्थियों का साक्षात्कार लेंगे ताकि वे उनकी नियुक्ति अपने संस्थानों में अध्यापकों के तौर पर कर सकें | इन विद्यार्थियों को अनुसंधान और परामर्श की स्वतंत्रता होगी

सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट को साकार कर रहा है राजसमन्द लौटने लगा है ऎतिहासिक बावड़ियों का परंपरागत वैभव

राजस्थान को जल संकट से मुक्ति दिलाने के लिए मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे का ड्रीम

मुस्लिम ला बोर्ड ही है सभी मुस्लिम समस्याओं की जड़ : डा सुरेन्द्र जैन

बोर्ड के राम मन्दिर संबंधी बयान पर अपनी प्रतिक्रया व्यक्त करते हुए डा जैन ने कहा कि इस मामले में भी बोर्ड ने अपनी हठ-धर्मिता को ही दोहराया है. वे राम जन्म भूमि के मामले में तो न्यायालय का निर्णय चाहते हैं किन्तु, तीन तलाक में न्यायालय का हस्तक्षेप नहीं. उनकी इस दोहरी मानसिकता से ही स्पष्ट हो जाता है कि वे न्यायपालिका का कितना सम्मान करते हैं. इसलिए उनके बहकावे में आने की बजाए केंद्र सरकार को आगे बढ़कर तीन तलाक, हलाला व बहु विवाह जैसी बर्बर परम्पराओं को समाप्त करने हेतु अतिशीघ्र कानून लाना चाहिए. मुस्लिम महिलाओं तथा जागृत मुस्लिम समाज की मांग के साथ मानवता का भी यही तकाजा है.

किसकी शह पर कर रहे हैं गौरक्षक प्रहार ?

यहाँ प्रश्न यह नहीं है कि गौ वंश को वैध रूप से ले जाया जा रहा था या अवैध रूप से . प्रश्न यह है कि क्या किसी भी व्यक्ति को कानून को एक तरफ रखकर अपने स्तर पर ही सजा देने का अधिकार है ? क्या गौरक्षकों को यह अधिकार है कि वे अपने ही स्तर पर फैसला ले लें और व्यापारियों पर हमला बोल दें ? गौ रक्षकों को किसने यह अधिकार दिया है कि वे स्वयं बिना पुलिस व प्रशासन को सूचित किये ही तथा बिना उनका सहयोग लिए ही अपने स्तर पर चेकिंग करें और पिटाई करें ? क्या राज्य सरकार की मशीनरी इतनी पंगु हो गयी है कि गौरक्षकों को अवैध व्यापार की रोक थाम के लिए स्वयं ड्यूटी देनी पड़े . ?