समाज बेटियां अल्लाह की रहमत हैं। November 29, 2016 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment निकहत प्रवीन संयुक्त राष्ट्र के विश्व जन्संख्या कोष( world population fund) की रिपोर्ट बताती है कि हमारे देश मे पिछले बीस सालों मे लगभग 10 करोड़ लड़कियों को गर्भ में ही मार दिया गया। रिपोर्ट जितनी स्पष्ट है कारण भी उतना ही स्पष्ट है, गर्भ मे लड़की का होना। वो लड़की जिसके प्रति हर युग […] Read more » बेटियां अल्लाह की रहमत हैं।
समाज सार्थक पहल जिन्दगी में नया करने की ठाने November 29, 2016 by ललित गर्ग | Leave a Comment एक अच्छा, सफल एवं सार्थक जीवन के लिये जरूरी है अच्छी आदतें। अच्छी आदतों वालों व्यक्ति सहज ही अच्छे चरित्र वाला व्यक्ति बन जाता है। बुरी आदतों वाला व्यक्ति खुद-ब-खुद बुरे चरित्र का व्यक्ति बन जाता है। अच्छे और बुरे का मापदण्ड यह है कि जो परिणाम में अच्छा या बुरा हो, वही चीज, विचार या व्यक्ति अच्छा या बुरा होते हैं। Read more » जिन्दगी में नया करने की ठाने
समाज न समाजवाद न बहुजनवाद : साईकिल के चक्कों में फंसा बचपन November 28, 2016 by अनुज हनुमत | Leave a Comment अगर शिक्षा के प्रति बच्चों के ख़त्म होते रुझान की बात करें तो आपको इसका अंदाजा यहाँ के सरकारी विद्यालयों से लग जायेगा । यहाँ के विद्यालय में कहने को तो सारे बच्चों का एडमिशन है और शायद सभी बच्चे कुछ अहम मौके पर उपस्थित भी हो जाते हों पर पर सच्चाई ये थी की विद्यालय में इक्का दुक्का ही बच्चे थे । जब मैं उसी समय गाँव के अंदर गया तो मुझे कई बच्चे साइकिल के चक्के चलाते हुए दिखे । Read more » Featured न समाजवाद न बहुजनवाद : साईकिल के चक्कों में फंसा बचपन बचपन बहुजनवाद समाजवाद
समाज आख़िर परिवर्तन का पाञ्चजन्य कौन फूंकेगा November 28, 2016 by अमित राजपूत | 1 Comment on आख़िर परिवर्तन का पाञ्चजन्य कौन फूंकेगा वास्तव में किन्नर देश के निर्माण में योगदान दे सकते हैं और एक उत्पादक शक्ति बन सकते हैं। उनकी अपनी क्षमता को एक किन्नर से बेहतर भला कोई और कैसे समझ सकता है। इसलिए उन्हें सशक्त बनाने के लिए स्वयं उनको ही नेतृत्व भी संभालना होगा। Read more » Featured role of transgenders transgenders किन्नर देश के निर्माण में योगदान परिवर्तन का पाञ्चजन्य
समाज अल्पसंख्यक की सुरक्षा करना बहुसंख्यकों का दायित्व November 27, 2016 by तनवीर जाफरी | Leave a Comment तनवीर जाफ़री हालांकि धर्म,नीति तथा समाज शास्त्रों द्वारा पूरे विश्व को यही सीख दी जाती है कि छोटे,कमज़ोर,आश्रित तथा असहाय लोगों का आदर किया जाए, उन्हें सुरक्षा व संरक्षण प्रदान किया जाए तथा उनके धर्म तथा विश्वास की रक्षा करते हुए उन्हें अपने रीति-रिवाजों व परंपराओं पर चलने में उनका सहयोग करते हुए उन्हें इस […] Read more » Featured अल्पसंख्यक अल्पसंख्यक की सुरक्षा बहुसंख्यकों बहुसंख्यकों का दायित्व
समाज तीन तलाक,समान नागरिक संहिता और मोदी सरकार November 27, 2016 by जावेद अनीस | Leave a Comment मुस्लिम महिलाओं की तरफ से समान नागरिक संहिता नहीं बल्कि एकतरफा तीन तलाक़, हलाला व बहुविवाह के खिलाफ आवाज उठायी जा रही है उनकी मांग है कि इन प्रथाओं पर रोक लगाया जाए और उन्हें भी खुला का हक मिले. Read more » Featured triple talaq uniform civil code तीन तलाक मोदी सरकार समान नागरिक संहिता
समाज दलित राजनीति में मनुवाद का सर्वाधिक दुरपयोग November 25, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment मनुवाद व ब्राह्मणवाद दो स्वार्थ-परक शब्द पिछले 100 साल में भारत की राजनीति में बहुत आये। दूसरे शब्द हैं जैसे की 'अल्पसंख्यक", 'बहुसंख्यक", "साम्प्रदायिकता", 'दलित", "महा-दलित", "हरिजन", "सर्वहारा-वर्ग",और भी कुछ शब्द हैं जिनको सभी राजनीतिक दल अपने- अपने फायदे के अनुसार परिभाषित करते हैं। समय आने पर खुद अपने ही दिये "परिभाषा" से मुकर जाते हैं। Read more » Featured ब्राह्मणवाद मनुवाद
समाज दहेज प्रथा – एक सामाजिक अभिशाप November 25, 2016 by ललित गर्ग | 4 Comments on दहेज प्रथा – एक सामाजिक अभिशाप भारतीय समाज में अनेक प्रथाएं प्रचलित हें । पहले इस प्रथा के प्रचलन में भेंट स्वरूप बेटी को उसके विवाह पर उपहारस्वरूप कुछ दिया जाता था परन्तु आज दहेज प्रथा एक बुराई का रूप धारण करती जा रही है । दहेज के अभाव में योग्य कन्याएं अयोग्य वरों को सौंप दी जाती हैं । लोग […] Read more » dowry dowry system एक सामाजिक अभिशाप दहेज प्रथा
समाज बेडरूम में भूलकर भी नहीं लगाएं झरने, तालाब की तस्वीर.. November 24, 2016 by पंडित दयानंद शास्त्री | Leave a Comment एक ही गद्दा हो---फेंगशुई के अनुसार पति-पत्नी के बेड पर एक ही गद्दा होना चाहिए। मसलन अगर डबल बेड है तो भी गद्दा एक ही फुल साइज होना चाहिए। दो गद्दों का प्रयोग वैवाहिक जोड़े के भविष्य के लिए हानिकारक माना जाता है। अलगाव नहीं संबंधों को दें जगह। Read more » बेडरूम
समाज निरीह जीवों की निर्मम हत्या से बना भोजन क्यों? November 23, 2016 by ललित गर्ग | Leave a Comment निया के किसी भी धर्म में मांसाहार का उपदेश नहीं दिया गया है। महर्षि दयानन्द सरस्वती ने कहा है कि मांसाहार से मनुष्य का स्वभाव हिंसक हो जाता है, जो लोग मांस भक्षण या मदिरापान करते हैं, उनके शरीर तथा वीर्यादि धातु भी दूषित हो जाते हैं। बौद्ध धर्म में पंचशील अर्थात सदाचार के पाँच नियमों में प्रथम और प्रमुख नियम किसी प्राणी को दुःख न देना है। बौद्ध धर्म के मतानुसार बुद्धिमान व्यक्ति को आपातकाल में भी मांस खाना उचित नहीं है। Read more » Featured पाश्चात्य देशों में शाकाहार आन्दोलन मांस भक्षण मांसाहार विश्व मांसाहार निषेध दिवस
समाज जानिए किन वास्तु दोषों के कारण लोग करते हैं आत्महत्या— November 20, 2016 by पंडित दयानंद शास्त्री | Leave a Comment आए दिन अखबार के किसी कोने में देखने को मिल जाता हैं की कभी किसी ने परीक्षा मे फेल होने पर फांसी लगाई तो किसी ने प्यार में नाकाम होने पर किसी ने खुद को आग के हवाले कर दिया।बदलती जीवनशैली के कारण आज युवाओं के भीतर सहनशक्ति में भी अत्याधिक कमी देखी जा रही […] Read more » आत्महत्या किन वास्तु दोषों के कारण लोग करते हैं आत्महत्या
शख्सियत समाज नेहरु और पटेल का संगम थीं इंदिराजी November 20, 2016 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | 2 Comments on नेहरु और पटेल का संगम थीं इंदिराजी डॉ. वेदप्रताप वैदिक श्रीमती इंदिरा गांधी का शताब्दि-वर्ष आज शुरु हो रहा है। केंद्र में कांग्रेस की सरकार नहीं है और बड़े नोटों की भगदड़ मची हुई है। ऐसे बदहवासी के माहौल में इस अवसर पर इंदिराजी को पता नहीं कितना याद किया जाएगा लेकिन इसमें शक नहीं है कि वे बेजोड़ प्रधानमंत्री रही हैं, […] Read more » Featured Indira Gandhi इंदिराजी नेहरु और पटेल का संगम