समाज पीडि़तों की सेवा मनुष्य का धर्म November 18, 2014 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment ओ३म मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। उसके चारों ओर अपने निकट सम्बन्धी और पड़ोसियों के साथ मि़त्र व पशु-पक्षी आदि का समुदाय दृष्टिगोचर होता है। समाज में सभी मनुष्यों की शारीरिक, सामाजिक, शैक्षिक, स्वास्थ्य की स्थिति व आर्थिक स्थिति समान नहीं होती है। इनमें अन्तर हुआ करता है। यह सम्भव है कि एक व्यक्ति आर्थिक […] Read more » ‘पीडि़तों की सेवा Religion of Man serving victims
समाज ऐसे बाल दिवस के क्या मायने November 17, 2014 by अरविंद जयतिलक | Leave a Comment बच्चे भविष्य के निर्माता हैं। राष्ट्र की संपत्ति हैं। सभ्य समाज के निर्माण की पूंजी हैं। लेकिन दुर्भाग्य है कि उनका जीवन संकट में है और बचपन दांव पर। देश की सर्वोच अदालत को उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा को लेकर लगातार चिंता जतानी पड़ रही है। बच्चों की सुरक्षा व स्वास्थ्य को लेकर केंद्र […] Read more » importance of bal diwas ऐसे बाल दिवस के क्या मायने
समाज नास्तिकता बनाम् आस्तिकता November 16, 2014 / November 17, 2014 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment हमारे देश व समाज में कुछ बन्धु स्वयं को नास्तिक कहते हैं। उनसे पूछिये कि नास्तिक का क्या अर्थ होता है तो वह कहते हैं कि हम ईश्वर और जीवात्मा के अस्तित्व को नहीं मानते। यदि उनसे पूछा जाये कि क्या आपने ईश्वर व जीवात्मा से सम्बन्धित उपलब्ध सभी साहित्य का अनुसंधानात्मक अध्ययन किया है […] Read more » Atheism Atheism theism theism आस्तिकता नास्तिकता
समाज मनुष्य को अछूत मानने वाला स्वयं ‘अछूत’ है November 13, 2014 / November 15, 2014 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment अस्पृश्यता को लेकर पुन: एक बार चर्चा चली है। पुरी के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने इस विषय में पुन: आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया है और शूद्रों को मंदिर में प्रवेश पाने से निषिद्घ करने की बात कही है। जब विश्व मंगल ग्रह पर जाकर पृथ्वी के मंगल गीतों से मंगल पर मंगल मना रहा […] Read more » मनुष्य को अछूत मानने वाला स्वयं ‘अछूत’ है
समाज आभासी दुनिया में अश्लीलता November 4, 2014 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव अंतर्जाल की आभासी व मायावी दुनिया से अश्लील सामग्राी हटाने की मांग ने जोर पकड़ा है। यह मांग इंदौर के जागरूक और जिम्मेबार नागरिक कमलेश वासवानी ने सर्वोच्च न्यायालय के दरवाजे पर दस्तक देकर उठाई है। याचिका में दलील दी गई है कि इंटरनेट पर अवतरित होने वाली अश्लील वेबसाइटों पर असलिए प्रतिबंध […] Read more » आभासी दुनिया में अश्लीलता
चिंतन जन-जागरण समाज ‘हमारा स्वर्णिम अतीत और देश की अवनति के कारणों पर विचार’ October 29, 2014 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment ओ३म् संसार में वैदिक धर्म व संस्कृति सबसे प्राचीन है। इसका आधार चार वेद – ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद एवं अथर्ववेद हैं। वेदों का लेखक कोई मनुष्य या ऋषि-मुनि नहीं अपितु परम्परा से इसे ईश्वर प्रदत्त बताया जाता है। वैदिक प्रमाणों एवं विचार करने पर ज्ञात होता […] Read more » ‘हमारा स्वर्णिम अतीत और देश की अवनति के कारणों पर विचार’
समाज ‘वर्तमान समाज में शूद्र संज्ञक कोई नहीं’ October 29, 2014 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment ओ३म् मनमोहन कुमार आर्य वेद एवं वैदिक साहित्य में मनुष्य समाज को गुण, कर्म तथा स्वभाव के अनुसार चार वर्णों ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य तथा शूद्र में वर्गीकृत किया गया था। गुण, कर्म व स्वभाव पर आधारित इस वैदिक वर्ण व्यवस्था में चारों वर्णों के लिए गुणों व कर्तव्यों का निर्धारण किया गया था। आज इस […] Read more » वर्तमान समाज में शूद्र संज्ञक कोई नहीं
समाज समाज में निहित है ‘हेट स्पीच’ October 29, 2014 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment राजीव यादव चुनाव आए और गए पर सवाल उन विवादास्पद सवालों का है जिनसे ‘हेट स्पीच’ के नाम से हम परिचित होते है। हेट स्पीच से हमारा वास्ता सिर्फ चुनावों में ही नहीं होता पर यह जरुर है कि चुनावों के दरम्यान ही उनका मापन होता है कि वो हेट स्पीच के दायरे में है। […] Read more » हेट स्पीच
समाज ‘लव -जेहाद’ की चर्चा – वैज्ञानिक विमर्श से कोसों दूर है। October 26, 2014 by श्रीराम तिवारी | Leave a Comment भारत में विदेशियों के आक्रमण और विदेशी गुलामी के दौर में भी ये तथाकथित ‘लव -जेहाद’ नामक बीमारी हुआ करती थी। सोलहवीं सदी में मांडव [धार] का तुर्क मुसलमान राजा – बाज बहादुर नरवर की राजकुमारी के रूप सौंदर्य ही नहीं बल्कि उस राजकुमारी की कोकिलकंठी गायकी पर भी फ़िदा था। उसने रूपमती को जबरन अपने हरम में डाल लिया। जैसा कि […] Read more » लव जेहाद
समाज लव-जेहाद October 17, 2014 / October 17, 2014 by रोहित श्रीवास्तव | 3 Comments on लव-जेहाद आजकल इलेक्ट्रोनिक मीडिया हो या प्रिंट मीडिया या फिर सबसे ज्यादा पहुँच रखने वाला ‘सोशल-मीडिया’ हर जगह बस ‘लव-जेहाद’ ही चर्चा का विषय बना हुआ है …… आखिर किस ‘बला’ का नाम है यह ‘लव-जेहाद’! प्रेम…. इश्क़…प्यार…आशिक़ी ….. कुछ भी कहे आप इस ‘जुनून-ए-मोहब्बत’ को ….. इसका ‘नशा’ कुछ ऐसा चढ़ता है की ‘उतरता’ ही […] Read more » लव जेहाद
विविधा समाज आदर्श ग्राम योजना का स्वप्न October 15, 2014 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव विकास की दृष्टि से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाकई महत्वाकांक्षी हैं। इसलिए वे एक के बाद एक नई-नई योजनाओं को जमीन पर उतारने की पुरजोर कोशिश में लग गए हैं। महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर को उन्होंने समग्र स्वच्छता अभियान की शुरूआत करते हुए खुद झाडू लगाई थी और 11 अक्टूबर को जयप्रकाश […] Read more » आदर्श ग्राम योजना
समाज ‘लव-जेहाद ‘ भाग – एक October 15, 2014 by श्रीराम तिवारी | Leave a Comment खरखौदा थाना -जिला मेरठ [उत्तरप्रदेश] के एक गाँव की वह लड़की – जिसके साथ विगत अगस्त में दुष्कर्म और गैंग रेप की वारदात हुई थी -अब वो स्वयं ही इस वारदात से इंकार कर रही है। उस तथाकथित पीड़िता ने अब अपने ही माता-पिता और परिवार वालों को जेल भिजवाने का पूरा इंतजाम कर दिया […] Read more » लव जेहाद