जन-जागरण समाज सार्थक पहल बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ January 26, 2015 / January 26, 2015 by राहुल सांकृत्यायन | 4 Comments on बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ आप मोदी के समर्थक हों या विरोधी यह आप पर निर्भर है। भले काम करने के तरीके पर सवाल उठाईये लेकिन एक प्रधानमंत्री के तौर पर उन मुद्दों को तरजीह देना जिन पर कितने वर्षों से कोई सवाल नहीं उठा रहा, इसे सभी को मोदी से सीखने की जरूरत है। चाहे मुद्दा नशाखोरी का रहा […] Read more »
समाज विवाह का उद्देश्य एवं वैदिक जीवन की श्रेष्ठता January 24, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment हमारा यह संसार वैदिक परम्परा के अनुसार 1,96,08,53,115 वर्ष पुराना है। इस संसार को बनाने वाले ईश्वर ने संसार को बनाकर सभी प्राणियों को बनाया और उसकी अन्तिम कृति थी ‘मनुष्य’। मनुष्य को बनाने के बाद इसके कर्तव्यों का ज्ञान कराना भी आवश्यक था। अतः ईश्वर ने इसकी पूर्ति के लिए मनुष्यों को स्वाभाविक ज्ञान […] Read more » विवाह का उद्देश्य वैदिक जीवन की श्रेष्ठता’
महिला-जगत समाज गलीज़ धंधे वालियों के लिए January 24, 2015 / January 24, 2015 by अलकनंदा सिंह | Leave a Comment अकसर कहा जाता है कि किसी भी समाज में बड़े बदलाव उस समाज में औरतों की स्थिति और उनकी सामाजिक प्रगति के साथ ही आते हैं । समाज में आम तौर पर औरतों की दशा के ऊपर व्याख्यानों – विमर्शों तथा दावों के प्रलाप भी होते रहते हैं मगर इस कथित प्रगति-गाथा के बीच कहीं […] Read more » धंधे वालियों के लिए
समाज लव जिहाद से ध्वस्त होता भारत January 19, 2015 / January 19, 2015 by शिवदेव आर्य | 3 Comments on लव जिहाद से ध्वस्त होता भारत ब्र. शिवदेव आर्य इस आधुनिकता भरे भौतिकवादी युग की युवतियां पश्चिमी सभ्यता की मैली घिनौनी चादर ओड़कर सही गलत के निर्णय करने में विफल हो रही हैं। भौतिकवादी युग की फिल्मों की चकाचौंध भरी किरणे उनके चित्त पर इस प्रकार प्रस्तारित हो रही है जैसे डीजल में आग। प्यार ;सवअमद्ध शब्द उनमें जीवन की […] Read more » 'लव जिहाद' ध्वस्त होता भारत
जन-जागरण टॉप स्टोरी समाज जनसंख्या बढ़ाओ अभियान के निहितार्थ January 15, 2015 / January 15, 2015 by निर्मल रानी | Leave a Comment निर्मल रानी – केंद्र में पहली बार भारतीय जनता पार्टी की बहुमत की सरकार बनने के बाद कट्टरपंथी हिंदुत्ववादी संगठनों व इनके नेताओं द्वारा हिंदू मतों के ध्रुवीकरण के उद्देश्य से जहां कई प्रकार के नए राग छेड़े गए हैं उनमें हिंदुओं की जनसंख्या बढ़ाने का भी एक नया राग बड़े ही ज़ोर-शोर से अलापा […] Read more » populaion increase जनसंख्या बढ़ाओ अभियान
जन-जागरण समाज गुमराह नौजवान ही कत्लो गारद अंजाम देता है ! January 10, 2015 / January 10, 2015 by प्रभात कुमार रॉय | Leave a Comment प्रभात कुमार रॉय विविधताओं से परिपूर्ण रहे भारत की अंतर्निहित शक्ति वस्तुत इसकी अनेकता में एकता के तहत ही कायम बनी रही है। धार्मिक, मजहबी, भाषाई, इलाकाई और सांस्कृतिक विविधता वस्तुतः भारत की आंतरिक कमजोरी का नहीं, वरन् भारत की विरल राष्ट्रीय एकता और शक्ति का अज्रस स्रोत रही है। ब्रिटिश साम्राज्यवादियों ने भारत पर […] Read more » कत्लो गारद गुमराह नौजवान
कला-संस्कृति समाज गुरूकुल शिक्षा का उद्देश्य वेद प्रचारक वैदिक विद्वान बनाना है January 8, 2015 / January 8, 2015 by मनमोहन आर्य | 2 Comments on गुरूकुल शिक्षा का उद्देश्य वेद प्रचारक वैदिक विद्वान बनाना है सृष्टि के आरम्भ से जो गुरूकुल वा विद्यालयीय शिक्षा आरम्भ हुई और महाभारत काल व उसके अनेक वर्षों बाद तक सफलतापूर्वक चली, वह निश्चित ही गुरूकुलीय शिक्षा प्रणाली थी। आजकल की विद्यालयीय शिक्षा में विद्यार्थी अपने परिवार और विद्यालय के बीच में फंसा रहता है। उसकी सर्वांगीण शारीरिक व आत्मिक उन्नति नहीं हो पाती। उसका […] Read more » गुरूकुल शिक्षा
समाज धर्म परिवर्तन के पीछे का कड़वा सच January 6, 2015 by तनवीर जाफरी | 5 Comments on धर्म परिवर्तन के पीछे का कड़वा सच तनवीर जाफ़री भारतवर्ष में इन दिनों धर्म परिवर्तन जैसे अतिसंवेदनशील मुद्दे को लेकर गर्मागर्म बहस छिड़ी हुई है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इस मुहिम में शामिल अपने सहयोगी दूसरे हिंदू संगठनों की इन शब्दों में हिमायत की है कि वे ‘लूटे हुए’ अपने माल को वापस ले रहे हैं। संघ के […] Read more » घर वापसी धर्म परिवर्तन
समाज पास से दूर, दूर के पास…! December 28, 2014 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा अंकल सीरियस … कम शून…। भैया बीमार – चले आओ…। टेलीफोन, मोबाइल व इंटरनेट से वंचित उस दौर में तब अपनों को याद करने का एक ही जरिया होता था टेलीग्राम । जिसका पाने वालों पर बड़ा मारक असर होता था। इसके आते ही प्राप्तकर्ता के घर में सनसनी फैल जाती […] Read more » पास से दूर
टॉप स्टोरी समाज सावधान : बाड़ खेत को खा रही है December 26, 2014 / December 26, 2014 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment महर्षि व्यास लिखते हैं :- जात्या च सदृशा: सर्वे कुलेन सदृशास्तथा। न चोद्योगे न बुद्घया वा रूपद्रव्येण वा पुन:। भेदोच्चैव प्रदानच्च भिद्यन्ते भिद्यन्ते निपुभिर्गणा:।। (महा. शा. 107. – 30, 31) अर्थात जाति और कुल में सभी एक समान हो सकते हैं, परंतु उद्योग, बुद्घि, रूप, तथा सम्पत्ति में सबका एक सा होना संभव नही है। […] Read more » dharmantaran
समाज गोद में मोची December 23, 2014 / December 23, 2014 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव उत्तर प्रदेश की अखिलेष यादव सरकार द्वारा मोचियों को गोद लिए जाने का फैसला अनुकरणीय है। आजादी के 67 साल बाद अपने ही दायरे में सिमटे इन शिल्पकारों के प्रति पहली बार किसी राज्य सरकार ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय दिया है। अन्यथा पूरे देश में मौजूद दलित की श्रेणी में आने वाले […] Read more » मोची
टॉप स्टोरी समाज धर्मांतरणः हंगामा क्यों है बरपा? December 22, 2014 by संजय द्विवेदी | Leave a Comment – संजय द्विवेदी धर्मान्तरण के मुद्दे पर मचे बवाल ने यह साफ कर दिया है कि इस मामले पर शोर करने वालों की नीयत अच्छी नहीं है। किसी का धर्म बदलने का सवाल कैसे एक सार्वजनिक चर्चा का विषय बनाया जाता है और कैसे इसे मुद्दा बनाने वाले धर्मांतरण के खिलाफ कानून बनाने के विषय […] Read more »