समाज प्यार ने दिलाई धंधे से मुक्ति December 11, 2018 / December 11, 2018 by अनिल अनूप | Leave a Comment अनिल अनूप “पहले तो वो कभी-कभी कोठे पर आता था. कभी मेरे साथ तो कभी किसी और लड़की के साथ बैठता था…”“लेकिन धीरे-धीरे जैसे वो बस मेरे लिए उस कोठे पर आने लगा. पता नहीं कैसे उसके और मेरे बीच एक ख़ास रिश्ता बन गया.”मेरठ के रेड लाइट एरिया कबाड़ी बाज़ार में एक कोठे पर […] Read more » प्यार ने दिलाई धंधे से मुक्ति सामान्य लड़कियों सेक्स वर्कर
समाज शब्दों के जरिए सांस्कृतिक फासले भरने की कोशिश December 11, 2018 / December 11, 2018 by अनिल अनूप | Leave a Comment अनिल अनूप लुधियाना में बिहारी प्रवासी मजदूर हर काम में नहीं हैं. जैसे यहाँ के साइकिल उद्योग में उनका अनुपात उतना नहीं है जितना हौजरी में या लोहे के पुर्जे वगैरह बनाने में. रिक्शा चलानेवालों में भारी बहुमत में हैं, तो ठेला-रेहड़ी, छोटी दुकान लगाने के मामले में एकदम कम हैं. दिल्ली की तरह यहाँ […] Read more » इंडस्ट्रियल एरिया कंगनवाल रोड गिल रोड ट्रांसपोर्ट नगर फोकल प्वाइंट भगत सिंह कॉलोनी मुस्लिम कॉलोनी मोती नगर शब्दों के जरिए सांस्कृतिक फासले भरने की कोशिश शेरपुर समराला चौक हीरा नगर
समाज मानवाधिकार दिवस समय है आत्ममंथन करने का December 10, 2018 / December 10, 2018 by डॉ नीलम महेन्द्रा | Leave a Comment डॉ नीलम महेंद्रद्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान सम्पूर्ण विश्व में मानव समाज एक बहुत ही बुरे दौर से गुजर रहा था। यह वो समय था जब मानव सभ्यता और मानवता दोनों ही शर्मसार हो रही थीं। क्योंकि युद्ध समाप्त होने के बाद भी गरीब और असहायों पर अत्याचार, जुल्म, हिंसा और भेदभाव जारी थे। यही वो परिस्थितियाँ थीं जब संयुक्त […] Read more » 119 देशों द्वितीय विश्वयुद्ध मानवाधिकार दिवस समय है आत्ममंथन करने का संयुक्त राष्ट्र महासभा
समाज स्वस्थ यौन संबंध और आपका परिवार December 10, 2018 / December 10, 2018 by अनिल अनूप | Leave a Comment अनाल अनूपआज भी भारत में सेक्स को वर्जना की तरह देखा जाता है। जबकि हमारे देश में खजुराहो से लेकर वात्सायन के कामसूत्र जैसी कृतियों में सेक्स के हर पहलू पर रोशनी डाली गई है। स्वस्थ व सुखी जीवन के लिए संयमित सेक्स को उपयोगी बताया गया है। सेक्स का स्थान जीवन में पहला तो […] Read more » 'कामसूत्र'. मूलत: रतिक्रीड़ा कला शिल्पकला एवं साहित्य स्वस्थ यौन संबंध और आपका परिवार
समाज आप जानते हैं भारत की ‘रोटी टोकरी’ किसे कहा जाता है? December 10, 2018 / December 10, 2018 by अनिल अनूप | Leave a Comment अनिल अनूप पंजाबी व्यंजन सबसे विशिष्ट और लोकप्रिय भारतीय व्यंजनों में से एक है और पंजाब के क्षेत्र से आंशिक रूप से भारत और पाकिस्तान में स्थित है। यह विविध पारंपरिक पाक शैली, विशेष रूप से तंदूरी शैली के साथ तैयार किए जाने वाले मनोरंजक और विदेशी शाकाहारी और मांसाहारी व्यंजनों की एक विस्तृत विविधता प्रदान […] Read more » आप जानते हैं भारत की ‘रोटी टोकरी' किसे कहा जाता है? घी जन दही पनीर मक्खन मसालेदार समृद्ध स्पष्ट मक्खन
समाज कोठे पर “रखैल” और “चादर ” प्रथा December 10, 2018 / December 10, 2018 by अनिल अनूप | 1 Comment on कोठे पर “रखैल” और “चादर ” प्रथा अनिल अनूपबिना किसी दलाल के हमलोग सामने वाली गली के ही एक पक्के दो मंजिली मकान में जा घुसे। अंदर जाते ही सामान्य साज सज्जा के एक बड़े हॉल में बैठी दो उम्रदराज महिलाओं ने स्वागत किया। मेरे साथ वाले छायाकारों ने दनादन इनकी तस्वीर समेत हॉल के रंग रूप को कैमरे में बंद कर […] Read more » कोठे पर “रखैल” और “चादर ” प्रथा महिलाओं वेश्याओं
समाज कुरीतियों से लड़ते जीत गई ‘माँ’ December 10, 2018 / December 10, 2018 by अनिल अनूप | Leave a Comment अनिल अनूप एक बार जब मेरी मां कोलकाता से मुंबई मुझसे मिलने आयी, तो उन्होंने मुझसे पूछा, ‘ये कंप्यूटर-इंटरनेट पर कितने सारे लोगों की तस्वीरें आती हैं, तूने मेरी फोटो क्यों नहीं लगाई?’उन्हें लगा कि मैंने उनसे शर्मिंदा होकर उनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर नहीं की है, लेकिन मैंने इस बारे में कभी सोचा […] Read more » (समाज की भाषा कंप्यूटर-इंटरनेट कुरीतियों से लड़ते जीत गई ‘माँ’ घुँघरू तबला बाजा
प्रवक्ता न्यूज़ समाज क्या आत्महत्या समस्या का समाधान है या नयी समस्या का सर्जक December 10, 2018 / December 10, 2018 by अनिल अनूप | Leave a Comment अनिल अनूपहाल ही में शाहाबाद (कुरुक्षेत्र) में एक व्यक्ति ने फांसी लगा कर खुदकुशी कर ली और मरने से पहले उसने अपने घर की दीवारों और फेसबुक पर लिखा कि मेरी मौत के लिए मेरी पत्नी जिम्मेवार है। अपनी पत्नी के साथ हुई अनबन को इसका कारण बताया गया। हिसार में एक दंपति ने ट्रेन […] Read more » क्या आत्महत्या समस्या का समाधान है या नयी समस्या का सर्जक नातेदारी परिवार मित्रता विवाह संबंध व्यावसायिक
समाज प्रवासी मजदूर बनाम सच्चे सर्वहारा December 7, 2018 / December 7, 2018 by अनिल अनूप | Leave a Comment अनिल अनूप मज़दूरों का प्रवासी होना (‘माइग्रेशन’, आप्रवास या प्रव्रजन) पूँजीवाद की आम परिघटना, लक्षण और परिणाम है। यूँ तो ज़्यादातर औद्योगिक मज़दूर या अन्य शहरी मज़दूर भी ऐसे ही लोग हैं जो (या जिनकी पूर्ववर्ती पीढ़ियाँ) कभी न कभी गाँव से प्रवासी होकर शहर आये थे। धीरे-धीरे वे किसी एक शहर या औद्योगिक क्षेत्र […] Read more » कैजुअल ठेका दिहाड़ी प्रवासी मजदूर बनाम सच्चे सर्वहारा भारतीय पूँजीपतियों
राजनीति समाज किसान ऋण माफ़ी योजनाएँ एवं उनके सामाजिक सरोकार December 7, 2018 by अभिलेख यादव | Leave a Comment डॉ. जीतेंद्र प्रताप भारत सदियों से कृषि प्रधान देश रहा है। विगत वर्षों में या यूँ कहें आजादी के बाद से ही विविध सरकारों ने अपने-अपने तरीकों से किसानों का उपयोग ही किया है। लेकिन जिस तरह से आजकल किसान या उनके मुद्दे चर्चा में रह रहे हैं, वह खासकर एक किसान के लिए, थोड़ा […] Read more » आंध्र प्रदेश किसान ऋण माफ़ी योजनाएँ एवं उनके सामाजिक सरोकार कृषि लोन गरीब बिचौलियों बैंकों मजदूर मध्य प्रदेश महाजनों महाराष्ट्र
राजनीति समाज उन चिराग़ों को बुझा दो तो उजाला होगा December 5, 2018 by अभिलेख यादव | Leave a Comment निर्मल रानी उत्तर प्रदेश के बुलंद शहर में पिछले दिनों गौमांस की अफ़वाह को लेकर फैली हिंसा में एक जांबाज़ व कर्मठ पुलिस अधिकारी सुबोध कुमार सिंह की उग्र भीड़ ने हत्या कर दी। पुलिस व उग्र भीड़ के मध्य हुए संघर्ष में भारतीय जनता पार्टी के एक कार्यकर्ता की भी हत्या हो गई। इस […] Read more » उन चिराग़ों को बुझा दो तो उजाला होगा हिंदू-मुस्लिम
समाज कितनी किरदार निभाती औरत December 4, 2018 / December 4, 2018 by अनिल अनूप | 1 Comment on कितनी किरदार निभाती औरत अनिल अनूप हर समय हर लम्हा दूसरों की फिक्र करने वाली औरत के रुप में मां,एक बेटी, एक पत्नी और एक बहू ना जाने कितने ही किरदार निभाती !महिला चाहे कुछ भी करे लेकिन ये एक ऐसा कठोर सत्य है जो हमेशा से होता आया है और शायद होता भी रहेगा.. हमेशा दर्द औरतों को […] Read more » -ऐसि़ड एटेक कितनी किरदार निभाती औरत छेड़छाड़ रेप