जन-जागरण लेख समाज शुक्र मनाइए कि आपकी नौकरी बची हुई है ! August 21, 2020 / August 21, 2020 by निरंजन परिहार | Leave a Comment -निरंजन परिहार शुक्र मनाइए कि आप उन दो करोड़ लोगों में नहीं है, जिनकी, लॉकडाउन में चलती नौकरियां चली गई हैं और अगर आप उन 22 करोड़ लोगो में नहीं है, जो लॉकडाउन में काम धंधा बंद होने से बेरोजगार होकर घर बैठने को मजबूर हैं, तो भी शुक्र मनाइए। क्योंकि हमारे हिंदुस्तान में कोरोना ने कोहराम मचा रखा […] Read more »
लेख समाज हमारा मन आखिर क्या चाहता है ? August 17, 2020 / August 17, 2020 by पंडित विनय कुमार | Leave a Comment अक्सर जब मैं अकेला रहता हूं तो स्वभावत: मेरा मन नहीं लगता । मैं अपने आप से पूछता भी हूं कि आखिर मन क्यों नहीं लग रहा है ? किंतु सच्चाई यह है कि उसका उत्तर मुझे नहीं मिलता । उत्तर नहीं मिलने के कई कारण हैं! एक कारण तो यह है कि मैं इसके […] Read more » What does our mind want? मन आखिर क्या चाहता है हमारा मन आखिर क्या चाहता है ?
खेल जगत फ़ेस बुक पेज़ से समाज धोनी जैसे सेनापति रिटायर नहीं होते, केवल रणक्षेत्र बदलते हैं !! August 17, 2020 / August 17, 2020 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment अजय बोकिलवरिष्ठ संपादक‘माही’ के खेल से रिटायर होने का मुझ जैसे क्रिकेट के अल्पज्ञानी के लिए क्या मतलब है? जीत को आदत में बदलने के आग्रही सेनापति की रणक्षेत्र से स्वैच्छिक निवृत्ति या फिर उस लाजवाब हेलीकाॅप्टर शाॅट का स्मृति के हैंगर पर हमेशा के लिए टंग जाना ? एक लंबे बालों वाले मर्द क्रिकेटर […] Read more » Senators like Dhoni do not retire
राजनीति समाज कोरोना संकट काल में लौटे झारखण्डी युवाओं के लिए चुनौतियाँ August 16, 2020 / August 16, 2020 by अशोक “प्रवृद्ध” | Leave a Comment -अशोक “प्रवृद्ध” कोविद 19 के संक्रमण काल में अर्थात कोरोना संकट के दौरान सम्पूर्ण देश के गाँवों की भांति झारखण्ड के गाँव की ओर लौटने वाले युवाओं व श्रमिकों की संख्या बढ़ी है। जहां पूर्व में गाँव वीरान और सिर्फ बुजुर्गों का गाँव दिखाई देता था, वहीँ अब युवाओं के गाँव लौटने के कारण गाँवों […] Read more » Challenges for Jharkhandi youth who returned to Corona crisis Manrega झारखण्डी युवाओं के लिए चुनौतियाँ मनरेगा मुख्यमंत्री शहरी रोजगार गारंटी योजना योजना महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना
समाज आत्महत्याएं केवल मनोवैज्ञानिक या भावनात्मक कारक नहीं हैं August 16, 2020 / August 16, 2020 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment — डॉo सत्यवान सौरभ, हर 40 सेकंड में, दुनिया में कोई न कोई अपनी जान लेता है। समाजशास्त्री एमिल दुर्खीम ने प्रसिद्ध रूप से परिकल्पना की थी कि ‘आत्महत्याएं केवल मनोवैज्ञानिक या भावनात्मक कारक नहीं हैं, बल्कि सामाजिक कारक भी हैं।’ दुनिया भर में कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं जहां लोग कोविड -19 संक्रमण, सामाजिक कलंक, […] Read more » Suicides Suicides are not just psychological or emotional factors आत्महत्याएं
समाज कैसे रुकेगा हिंसक एवं धार्मिक उन्माद August 16, 2020 / August 16, 2020 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग –बैंगलोर में फेस बुक पर एक विवादास्पद पोस्ट के बाद एक धर्म विशेष के उपद्रवी तत्वों ने जो हिंसक तांडव किया और उसी धर्म के कुछ युवकों ने वीरतापूर्वक एक मन्दिर को को क्षतिग्रस्त करने से रोका और उसकी सुरक्षा में चक्रव्यूह रच डाला। अहिंसा एवं सर्वधर्म सद्भाव के इस अनुकरणीय उदाहरण वाले […] Read more » bangalore violence धार्मिक उन्माद साम्प्रदायिक संकीर्णता साम्प्रदायिक संकीर्णता एवं धार्मिक उन्माद हिंसक एवं धार्मिक उन्माद
समाज हिंद स्वराज स्वतंत्रता दिवस और देश की आधी आबादी August 16, 2020 / August 16, 2020 by सोनम लववंशी | Leave a Comment देश की आजादी को 73 सावन बीत गए है और हम 74 वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहें लेकिन इस आजाद देश में आज भी आधी आबादी गुलामी की जंजीरों में जकड़ी हुई है। हम कहने को 21वीं सदी में जी रहे है। जहां समता और स्वतंत्रता की बात भी बहुतायत में होती है। हमारे […] Read more » भ्रूणहत्या महिला सशक्तिकरण और फेमिनिज्म स्वतंत्रता दिवस
विधि-कानून समाज बेटियां हकदार लेकिन कई मुश्किलें August 13, 2020 / August 13, 2020 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment डॉ. वेदप्रताप वैदिक सर्वोच्च न्यायालय के ताजा फैसले ने देश की बेटियों को अपने पिता की संपत्ति में बराबरी का हकदार बना दिया है। अदालत के पुराने फैसले रद्द हो गए हैं, जिनमें कई किंतु-परंतु लगाकर बेटियों को अपनी पैतृक संपत्ति का अधिकार दिया गया था। मिताक्षरा पद्धति या हिंदू कानून में यह माना जाता […] Read more » पैतृक संपत्ति में बेटियों का अधिकार बेटों के बराबर बेटियों को अपने पिता की संपत्ति में बराबरी का हकदार सर्वोच्च न्यायालय
महिला-जगत विश्ववार्ता समाज वर्क फ्रॉम होम के दौर में लैंगिक उत्पीडन का बदलता स्वरूप August 12, 2020 / August 12, 2020 by उपासना बेहार | Leave a Comment उपासना बेहार कोरोना वाइरस के कारण देश में सम्पूर्ण लाक डाउन किया गया था जिसने सबको घर के अंदर रहने को बाध्य कर दिया था इस दौर में लोग घर से ऑफिस का काम (work from home) करने लगे. पहले भारत में कम संख्या में वर्क फ्राम होम होता था लेकिन लाक डाउन के कारण […] Read more » Changing nature of sexual harassment Changing nature of sexual harassment during the era of work from home era of work from home लैंगिक उत्पीडन वर्क फ्रॉम होम वर्क फ्रॉम होम के दौर में लैंगिक उत्पीडन
लेख समाज सर्पदंश :हर दस मिनिट में असमय मरता एक गरीब भारतीय August 12, 2020 / August 12, 2020 by डॉ अजय खेमरिया | Leave a Comment डॉ अजय खेमरियाकोरोना महामारी के शोर में इस साल जून से अब तक करीब बीस हजार भारतीय अपने खेतों में सर्पदंश से मौत का शिकार हो चुके हैं। देश भर में करीब तीन लाख लोग हर साल सांप के काटने का शिकार होते है ।हर दस मिनिट में एक व्यक्ति की मौत इसके चलते हो […] Read more » प्रीमियम सीरम्स एन्ड वैक्सीन्स सर्पदंश
समाज सार्थक पहल पुलिसकर्मियों के दुख-दर्द को समझने के लिए गाजियाबाद के एसएसपी कलानिधि नैथानी ने की सराहनीय पहल August 12, 2020 / August 12, 2020 by दीपक कुमार त्यागी | Leave a Comment दीपक कुमार त्यागीपुलिस चाहे किसी भी राज्य या देश की हो उसका काम बेहद महत्वपूर्ण व जिम्मेदारी वाला होता है। चंद गलत व्यवहार वाले कर्मियों, लापरवाह कर्मियों और भ्रष्टाचारियों की वजह से पुलिस के प्रति पूरे देश में आम लोगों का भाव ऐसा बन चुका है कि वो चाहे कितनी भी निष्ठापूर्वक, ईमानदारी व निष्पक्षता […] Read more » गाजियाबाद के एसएसपी कलानिधि नैथानी
समाज वनवासी महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने की ज़रूरत August 11, 2020 / August 11, 2020 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment नरेन्द्र सिंह बिष्ट नैनीताल, उत्तराखंड महिलाओं के जीवन और उनके अधिकारों के संबंध में आज भी भारतीय समाज दोराहे पर खड़ा है। एक तरफ जहां उसके बिना समाज का अस्तित्व मुमकिन नहीं माना जाता है वहीं दूसरी ओर उसे उसके सभी अधिकारों से भी वंचित रखने का प्रयास किया जाता है। हालांकि पितृसत्तात्मक समाज की बहुलता होने के […] Read more » वनराजि समुदाय वनवासी महिला