जन-जागरण विविधा सच्चे कर्म-योगी संत थे मा सोहन सिंह जी July 16, 2015 by विनोद बंसल | 1 Comment on सच्चे कर्म-योगी संत थे मा सोहन सिंह जी विनोद बंसल आज के जमाने में यह बात बडी काल्पनिक सी लगती है कि जब कोई कहे कि एक व्यक्ति जिसने अपने जीवन के 92 वर्ष देश को समर्पित कर दिए और आजीवन न शादी की, न अपना घर बनाया, न ग़ाडी, न पैसा जोडा, न कोई बैंक खाता खोला किन्तु अनेक विपरीत परिस्थितियों […] Read more » सोहन सिंह जी
टेक्नोलॉजी विविधा इंसानी रोबोट के खतरे July 15, 2015 / July 15, 2015 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव अपने आप में रोबोट का आविष्कार और उसका विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ता इस्तेमाल एक बड़ी उपलब्धि है,लेकिन अब रोबोट की कृत्रिम बुद्धि जहां उसे खुंखार हत्यारा बना रही है,वहीं वह बेरोजगारी का बड़ा सबब भी बन रहा है। साथ ही भारत में ‘सेतु‘ नाम से कंप्युटर इंजीनियर एक ऐसा सॉफ्टवेयर विकसित करने में […] Read more » इंसानी रोबोट के खतरे
खेल जगत विविधा 43 साल…बेमिसाल.. July 14, 2015 by पंकज कुमार नैथानी | 3 Comments on 43 साल…बेमिसाल.. रविवार का दिन भारतीय टेनिस जगत के लिए दो खुशखबरी लेकर आया…पहले लड़कों के वर्ग में सुमित नागल ने डबल्स का जूनियर खिताब जीता और उसके दो घंटे बाद ही लिएंडर पेस और उनकी स्विस जोड़ीदार मार्टिना हिंगिस ने विंबल्डन मिक्स डबल्स का खिताब अपने नाम किया…लिएंडर पेस का यह कुल मिलाकर 16वीं खिताब है, […] Read more »
दोहे विविधा स्मित नयन विस्मृत बदन ! July 14, 2015 / July 14, 2015 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment स्मित नयन विस्मृत बदन, हैं तरंगित जसुमति-सुवन; हिय स्फुरण हलकी चुभन, हैं गोपियां गति में गहन । हुलसित हृदय मन स्मरत, राधा रहति प्रिय विस्मरित; आकुल अमित झंकृत सतत, वन वेणुका खोजत रहत । सुर पाति संवित गति लभति, हर पुष्प केशव कूँ लखति; हर लता तन्तुन बात करि, पूछत कुशल हर पल रहति । […] Read more » स्मित नयन विस्मृत बदन !
टॉप स्टोरी विविधा व्यापम:घोटाला या ‘आपदा’? July 14, 2015 by तनवीर जाफरी | 1 Comment on व्यापम:घोटाला या ‘आपदा’? तनवीर जाफ़री वैसे हमारे देश में कहने को तो देश के राजनेता विभिन्न विचारधाराओं में कथित रूप से बंटे हुए हैं। कुछ स्वयं को गांधीवादी विचारधारा का पैरोकार बताते हैं तो कुछ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का झंडा स्वयंभू रूप से उठाए नज़र आते हैं। कुछ समाजवादी विचारधारा के ध्वजावाहक बनते हैं तो कुछ साम्यवादी विचारों के […] Read more » आपदा’? घोटाला व्यापम
विविधा व्यंग्य औरतों का प्रवेश वर्जित है July 14, 2015 by अशोक गौतम | Leave a Comment यूनान के आर्थिक तौर पर दिवालिया होने की खबर ज्यों ही स्वर्गलोक तक पहुंची तो धन की देवी लक्ष्मी और कुबेर के हाथ पावं फूल गए। उन्हें जंबूद्वीप में चारों ओर अंधेरा ही अंधेरा ही दिखाई देने लगा। तब उन्होंने स्वर्गलोक में एकदम आपातकालीन बैठक बुलाई । बैठक की अध्यक्षता करते कुबेर ने कहा कि […] Read more » औरतों का प्रवेश वर्जित है
टेक्नोलॉजी महत्वपूर्ण लेख विविधा मिसाइल निर्माण में आत्मनिर्भर हुआ देश July 13, 2015 / July 13, 2015 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment संदर्भ-‘आकाश‘मेक इन इंडिया का कमाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना ‘मेक इन इंडिया‘ ने आकार लेना शुरू कर दिया है। इस परिप्रेक्ष्य में सबसे बड़ी उपलब्धि पहली स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली तकनीक से र्निमित ‘आकाश मिसाइल‘ अस्तित्व में आ गई है। इसे औपचारिक रूप से थल सेना के बाद वायु सेना के बेड़े में […] Read more » मिसाइल निर्माण
खेत-खलिहान विविधा दालों की बढती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए आयात करने का निर्णय July 13, 2015 by अशोक “प्रवृद्ध” | Leave a Comment अशोक “प्रवृद्ध” देश में दालों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार 5,000 टन उड़द और 5,000 टन तुअर दाल का आयात करने जा रही हे। उड़द दाल के साथ 5,000 टन तुअर के आयात के लिए सरकार पहले ही निविदा जारी कर चुकी है। उपभोक्ता मामलों के सचिव […] Read more »
विविधा व्यंग्य व्यंग्य बाण : गाड़ी नंबर ग्यारह July 11, 2015 by विजय कुमार | Leave a Comment पिछले दिनों 21 जून को पूरी दुनिया में ‘योग दिवस’ मनाया गया। इससे बाकी लोगों को कितना लाभ हुआ, ये तो वही जानें; पर हमारे शर्मा जी में एक चमत्कारी परिवर्तन हुआ। उनके पड़ोसी गुप्ता जी ने उन्हें रोज कुछ देर ‘शीर्षासन’ करने की सलाह दी थी। पहले तो शर्मा जी ने सिर नीचे और […] Read more » गाड़ी नंबर ग्यारह
विविधा तब का और अब का भारत—एक अवलोकन July 11, 2015 by गंगानन्द झा | Leave a Comment जेरेमी सीब्रुक अनुवाद—गंगानन्द झा तीस साल पहले जिस भारत को मैं गया था, वह आज के भारत से बिलकुल अलग मुल्क था। विदेशी के जेहन में उस वक्त यह अभी भी एक धुँधले, लेकिन व्यापक खतरे के खिलाफ आगाह करता था। सैलानी जरते थे कि उन्हें कोई छूत न लग जाए. भारत गन्दगी और मुसीबत […] Read more » भारत
विविधा समाज विनाश की ओर बढ़ती मानवता July 11, 2015 / July 16, 2015 by अनिल कुमार पाण्डेय | 1 Comment on विनाश की ओर बढ़ती मानवता 11 तारीख को मनाए जाने वाले विश्व जनसंख्या दिवस पर अनिल कुमार पाण्डेय विश्व जनसंख्या दिवस कोई साधारण दिवस नहीं, बल्कि सयुंक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित एक अंतर्राष्ट्रीय दिवस है। विश्व में सुपर सोनिक गति से बढ़ती जनसंख्या के प्रति लोगों में जागरुकता लाने के उद्देश्य से ही यह दिवस मनाया जाता है। ये बात […] Read more » विश्व जनसंख्या दिवस
विविधा व्यापमं बनाम यमराज July 11, 2015 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment गंगा प्रसाद मरते पत्रकार… निडर होते अपराधी हर रोज कही ना कही कोई ना कोई और किसी ना किसी की डोर टूट ही जाती है…जमाने में जीना है तो जमाने के हिसाब से जीना होगा… अगर जमाने के हिसाब से नहीं जिया तो किसी ना किसी दिन जिंदगी की डोर तोड़ दी जाएगी…और ये भी […] Read more » व्यापमं बनाम यमराज