विविधा हमारी शिक्षा नीति में सुधार की जरूरत October 29, 2014 / October 29, 2014 by अभिषेक कांत पांडेय | 6 Comments on हमारी शिक्षा नीति में सुधार की जरूरत अभिषेक कांत पांडेय किसी देश के विकास का अंदाजा लगाना हो तो उस देश की प्राइमरी शिक्षा व्यवस्था देखकर आप समझ सकते हैं कि इस देश का नींव, क्या चौतरफा और वास्तविक विकास प्राप्त कर सकता है। भारत के कई राज्यों में प्राइमरी शिक्षा व्यवस्था की हालत दयनीय है। बिहार, राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश जैसे राज्यों में शिक्षा देने […] Read more » हमारी शिक्षा नीति में सुधार की जरूरत
विविधा गाँधी नेहरु का पुनर्मूल्यांकन October 26, 2014 by अनिल गुप्ता | 3 Comments on गाँधी नेहरु का पुनर्मूल्यांकन केरल में संघ परिवार से जुड़े एक अख़बार में किसी का लेख छप गया जिसमे लिखा था कि विभाजन के लिए गांधी से अधिक नेहरू जिम्मेदार थे.उसने यहाँ तक लिख दिया कि गोडसे ने अपना लक्ष्य गलत चुना.कांग्रेस के लोगों द्वारा इसका विरोध किया जाना स्वाभाविक ही है.और संघ तथा समाचार पत्र द्वारा उस लेख […] Read more » अभिव्यक्ति की स्वंत्रता गाँधी नेहरु का पुनर्मूल्यांकन
विविधा चिर विजय की कामना ही राष्ट्र का आधार है October 24, 2014 by विजय कुमार | 1 Comment on चिर विजय की कामना ही राष्ट्र का आधार है जीवन का हर काम वस्तुतः एक युद्धक्षेत्र ही है। पढ़ना हो या पढ़ाना; व्यापार हो या नौकरी; खेती हो या उद्योग का संचालन। सफल होने के लिए मन में विजय प्राप्ति की प्रबल कामना होना आवश्यक है। अन्यथा पर्याप्त साधन और अनुकूल वातावरण होने पर भी सफलता पास आते-आते दूर चली जाती है। इस बारे […] Read more » चिर विजय की कामना ही राष्ट्र का आधार है
जन-जागरण विधि-कानून विविधा रेल यात्रा और क़ानून का यह दोहरा मापदंड ! October 24, 2014 by निर्मल रानी | 3 Comments on रेल यात्रा और क़ानून का यह दोहरा मापदंड ! निर्मल रानी कहने को तो हमारे देश में प्रत्येक नागरिक के लिए समान कानून बनाए गए हैं। परंतु यदि इस बात की धरातलीय पड़ताल की जाए तो कई ऐसे विषय हैं जिन्हें देखकरयह कहा जा सकता है कि या तो वर्ग विशेष कानून की धज्जियां उड़ाने पर तुला हुआ है और कानून की नज़रें कानून […] Read more » रेल यात्रा रेल यात्रा और क़ानून का यह दोहरा मापदंड !
विविधा सेव दे रहा है रतलाम को अंर्तराष्ट्रिय पहचान October 21, 2014 / November 15, 2014 by हिमांशु जोशी | 2 Comments on सेव दे रहा है रतलाम को अंर्तराष्ट्रिय पहचान हिमांशु जोशी रतलाम के साथ तीन स जुडे है जो रतलाम को विशिष्ट पहचान दिलाते है। सोना, सेव , साडी। सेव सभी की पहुॅच में है ऐसा नही है कि सेव सिर्फ रतलाम मे ही बनती है परन्तु यहा की सेव का टेस्ट एक बार जो कर लेता है वह रतलामी सेव का दिवाना हो […] Read more » रतलाम को अंर्तराष्ट्रिय पहचान
विविधा दुर्गा-महिषासुर प्रसंग, फॉरवर्ड प्रेस में गिरफ्तारियाँ और बौद्धिक लफ्फाजियाँ October 19, 2014 / October 23, 2014 by राजीव रंजन प्रसाद | Leave a Comment राजीव रंजन प्रसाद अभिव्यक्ति की नियति जहर की तरह है, यह संयम और सोचपूर्णता से प्रयुक्त हो तो ओषधि है और यूं ही गटकनी पडे तो प्राणघाती। ताजा चर्चा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में आयोजित महिषासुर दिवस तथा फॉरवर्ड प्रेस के अक्टूबर अंक में प्रकाशित कतिपय सामग्री की है जिसपर स्वाभाविक विवाद हुआ और […] Read more » दुर्गा-महिषासुर प्रसंग
विविधा समाज आदर्श ग्राम योजना का स्वप्न October 15, 2014 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव विकास की दृष्टि से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाकई महत्वाकांक्षी हैं। इसलिए वे एक के बाद एक नई-नई योजनाओं को जमीन पर उतारने की पुरजोर कोशिश में लग गए हैं। महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर को उन्होंने समग्र स्वच्छता अभियान की शुरूआत करते हुए खुद झाडू लगाई थी और 11 अक्टूबर को जयप्रकाश […] Read more » आदर्श ग्राम योजना
विविधा आदर्श ग्राम योजना ग्रामीण विकास के लिए शानदार पहल .. October 15, 2014 by आदर्श तिवारी | 1 Comment on आदर्श ग्राम योजना ग्रामीण विकास के लिए शानदार पहल .. 11 अक्टूबर लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती थी.इसी दिन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक और महत्वाकांक्षी योजना ‘आदर्श ग्राम योजना’ की दमदार तरीके से शुभारंभ किया. इस योजना के तहत हर सांसद को एक गावं को गोद लेंगे. जिसको सभी प्रकार के सुविधाओं से लैस करना होगा . गावं को एक आदर्श गावं […] Read more » आदर्श ग्राम योजना
विविधा बालश्रमिकों के अभिभावक का सम्मान October 14, 2014 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव समाजसेवी कैलाश सत्यार्थी को मिला नोबेल शान्ति पुरूस्कार वास्तव में बालश्रम के शिकार बच्चों के अभिभावक का सम्मान है। किसी भारतीय को पहली बार नोबेल शान्ति के लिए चुना गया है। हालांकि इसके पहले हकदार महात्मा गांधी थे। कैलाश पिछले 34 साल से ‘बचपन बाचाओ आंदोलन‘के जरिए बाल अधिकारों के सरंक्षण में लगे […] Read more » बालश्रमिकों के अभिभावक का सम्मान
विविधा मौत की भगदड़ October 10, 2014 by अरविंद जयतिलक | Leave a Comment अरविंद जयतिलक यह आघातकारी है कि पटना के गांधी मैदान में विजयदशमी के मौके पर रावण दहन के दौरान मची भगदड़ में तीन दर्जन से अधिक लोगों की मौत हुई और सैकड़ों लोग बुरी तरह घायल हुए। समझना कठिन है कि बिहार प्रशासन यह जानते हुए भी कि हर वर्ष रावण दहन के दौरान लाखों […] Read more » मौत की भगदड़
विविधा कार्य- संस्कृति की सुरीली तान …!! October 7, 2014 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा अपने देश में एक चीज कामन है। नई सरकार हो या नया अधिकारी , चार्ज लेते ही वह कार्य संस्कृति की सुरीली तान छेड़ते हुए मातहतों को खूब हड़काता है। … मेरे समय में यह सब नहीं चलेगा… मुझे सब काम समय से चाहिए… बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करूंगा… वगैरह – वगैहर। एेसी […] Read more » कार्य- संस्कृति
विविधा यू.जी.सी नहीं रख सका उच्च शिक्षा में एकरूपता October 2, 2014 / October 4, 2014 by प्रो. एस. के. सिंह | Leave a Comment सम्बद्धता से प्रभावित प्रादेशिक विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता भारतीय विश्वविद्यालयीन शिक्षा में सुधार, विस्तार तथा भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर 1948 में डा. एस. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय शैक्षिक आयोग (यूनिवर्सिटी एज्यूकेशन कमीशन) का गठन किया गया था। इस आयोग की अनुशंसा के आधार पर नवम्बर 1956 में ‘विश्वविद्यालय अनुदान आयोग‘ की स्थापना […] Read more » यू.जी.सी नहीं रख सका उच्च शिक्षा में एकरूपता