विविधा असाढ़ में सूखा : का बरखा जब कृषि सुखानी July 2, 2014 by संजय स्वदेश | Leave a Comment -संजय स्वदेश- ——————————————– यह पहला ऐसा मौका नहीं है जब मानसून ने दगाबाजी की हो। आजाद भारत में दर्जनों बार सूखा पड़ा। लेकिन इससे न कोई सबक लिया गया और न ही इससे निपटने कोई ठोस और सार्थक तैयारी ने मूर्त रूप लिया। मौसम विभाग इस बात का आश्वासन दे रहा है कि जून में […] Read more » असाढ़ में सूखा कृषि सुखानी बारिश मानसून सूखा
विविधा ‘पहले शौचालय’ का सोच बनाम जमीनी हकीकत July 2, 2014 by मिलन सिन्हा | Leave a Comment -मिलन सिन्हा- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित देश के कई अन्य प्रभावशाली नेता समय समय पर किसी न किसी मंच से देश में ‘पहले शौचालय’ की चर्चा करके अपनी अपनी चिंता व्यक्त करते रहे हैं। लेकिन बावजूद इसके आकड़ों व तथ्यों पर गौर करें तो शौचालय से जुड़ी समस्या वाकई बेहद सोचनीय है। कहिये, क्या यह […] Read more » भारतीय शौचालय शौचालय
विविधा “माई री मैं कासे कहूं पीर…!” July 2, 2014 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment -गिरीश बिलोरे- विधवा जीवन का सबसे दु:खद पहलू है कि उसे सामाजिक-सांस्कृतिक अधिकारों से आज़ भी समाज ने दूर रखा है. उनको उनके सामाजिक-सांस्कृतिक अधिकार देने की बात कोई भी नहीं करता. जो सबसे दु:खद पहलू है. शादी विवाह की रस्मों में विधवाओं को मंडप से बाहर रखने का कार्य न केवल गलत है, वरन […] Read more » विधवा विधवाएं विधवाओं की स्थिति
विविधा जाकि रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन्हा तेसी… July 1, 2014 by आलोक कुमार | 2 Comments on जाकि रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन्हा तेसी… -आलोक कुमार- हाल के दिनों में स्वरूपानन्द जी जैसे आडंबरी धर्माचार्य जैसे बेतुके और द्वेषपूर्ण बयान दे रहे हैं उसे देख कर लगता है कि “फतवे” जारी करने की एक नई परम्परा की शुरुआत हो रही है! आस्था और श्रद्धा तो हमारी संस्कृति और धर्म के मूल में है। हमारे यहां तो कण-कण में भगवान […] Read more » शंकराचार्य स्वरूपानंद स्वरूपानंद का बयान
विविधा कालाधन से पर्दा उठने वाला है July 1, 2014 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment -प्रमोद भार्गव- चाणक्य ने कहा था, किसी भी देश में न्यूनतम ईमानदार और न्यूनतम ही बेईमान होते है, किंतु जब बेईमानों पर सरकार नकेल कसने में कमजोर पड़ती है या सरकार खुद बेईमान हो जाती है तो देश के ज्यादातर लोड़ बेईमानी का अनुसरण करने लड़ते है। इसी सच्चाई का पर्याय‘ यथा राजा, तथा प्रजा‘ […] Read more » कालाधन कालेधन से उठेगा पर्दा विदेश में धन स्विस बैंक
विविधा कालाधन : अब जागी आशा July 1, 2014 by सुरेश हिन्दुस्थानी | Leave a Comment -सुरेश हिन्दुस्थानी- देश में लगातार हुए घोटालों से देश का आर्थिक विकास रुक गया है। विदेशों में खरबों रुपया कालेधन के तौर पर जमा है और इसे देश में वापस लाना जरूरी है। तभी समग्र विकास हो पाएगा। घोटालों से विकास के अवरुद्ध होने की बात बिल्कुल सही है। इससे भारत में सभी क्षेत्रों में […] Read more » कालाधन कालेधन पर उम्मीद विदेशों में कालाधन स्विस बैंक
विविधा मानव तस्करी की मंडी में मासूम June 30, 2014 by संजय स्वदेश | 1 Comment on मानव तस्करी की मंडी में मासूम -संजय स्वदेश- -हर राज्य के अखबारों में बच्चों के गायब होने की खबर किसी ने किसी पन्ने के कोने में झांकती रहती है। देश बड़ा है। आबादी बड़ी है। संभव हो आपके आसपास कोई ऐसा नहीं मिले, जिसके बच्चे होश संभालने से पहले ही गायब हो चुके हो। इसलिए आपको जानकार थोड़ा आश्चर्य होगा, लेकिन […] Read more » बच्चों की तस्करी मानव तस्करी मानव मंडी
विविधा राष्ट्राभिमान का जागरण June 27, 2014 by प्रवीण दुबे | 2 Comments on राष्ट्राभिमान का जागरण -प्रवीण दुबे- अपनी संस्कृति, परम्परा और राष्ट्र पर अभिमान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। जो लोग या राष्ट्र ऐसा नहीं करते वे नष्ट हो जाते हैं। इस दृष्टि से भारत का विचार किया जाए तो किसी ने ठीक ही कहा है- ‘यूनान मिश्र रोमां सब मिट गए जहां से कुछ बात है कि हस्ती […] Read more » देशभक्ति भारतीय संस्कृति राष्ट्राभिमान राष्ट्राभिमान का जागरण
विविधा विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो June 27, 2014 by राजीव गुप्ता | 1 Comment on विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो -राजीव गुप्ता- विश्व प्रतिष्ठित दिल्ली विश्वविद्यालय में इन दिनों कोहराम मचा हुआ है. कहीं पर शिक्षक हड़ताल कर रहे हैं तो कही पर विद्यार्थी विजय जुलूस निकाल रहे हैं. इसी बीच दिल्ली विश्वविद्यालय के उपकुलपति के इस्तीफा देने की खबर भी आई परंतु उस खबर की पुष्टि नहीं हो पाई. दिल्ली विश्वविद्यालय में मचे इस […] Read more » डीयू डीयू विवाद दिल्ली छात्र दिल्ली विवि
विविधा मानवता को शर्मसार करते यह धनलोभी June 27, 2014 by निर्मल रानी | 5 Comments on मानवता को शर्मसार करते यह धनलोभी -निर्मल रानी- वैसे तो हमारे देश में प्रचलित प्राचीन कहावत के अनुसार झगड़े और विवाद के जो तीन प्रमुख कारण चिन्हित किए गए हैं- वे हैं ज़र, ज़मीन और जोरू अर्थात् धन, भूमि और औरत। प्रायः इन्हीं के कारण विवाद व झगड़े होते सुने भी जाते हैं। परंतु इनमें भी सर्वप्रमुख कारण ज़र यानी धन […] Read more » गर्मी के मौसम पानी की किल्लत रेलवे प्लेटफॉर्म
विविधा तेल संकट का खतरा June 27, 2014 by अंकुर विजयवर्गीय | Leave a Comment -अंकुर विजयवर्गीय- इराक में ढाई दशक से जारी अशांति और उथल पुथल के बावजूद भारत ने कच्चे तेल की अपनी मांग को पूरा करने के लिये न तो कोई वैकल्पिक स्त्रोत तलाश किया और न ही इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने के उपाय किये, जिसके कारण वहां जारी गृहयुद्ध आज हमारे लिए बडा संकट बन […] Read more » इराक तेल तेल संकट तेल संकट का खतरा
विविधा शंकराचार्य के बयान के संदर्भ में… June 25, 2014 / June 25, 2014 by बीनू भटनागर | 6 Comments on शंकराचार्य के बयान के संदर्भ में… -बीनू भटनागर- हिंदू धर्म सबसे पुराना धर्म है जिसको मानने वालों की विश्व में तीसरे स्थान पर है। हिन्दू धर्म में अनेक देवी देवताओं की पूजा करने की परम्परा है।हर क्षेत्र में कुछ स्थानीय देवी देवताओं की भी पूजा होती है, जिन्हें आम तौर पर मुख्य देवी देवताओं का रूप ही बता दिया जाता है। […] Read more » शंकरचार्य बयान शंकराचार्य साईं बाबा