विविधा शख्सियत विद्याचरण शुक्ल – एक अधूरे सपने की अकाल मृत्यु June 11, 2013 by गिरीश पंकज | 1 Comment on विद्याचरण शुक्ल – एक अधूरे सपने की अकाल मृत्यु गिरीश पंकज 25 मई को बस्तर में हुए भयावह नक्सली हमले में घायल हुए विद्याचरण शुक्ल आखिर सबको छोड़ कर चले गए। उनके साथ ही चला गया एक इतिहास जिसे खुद विद्या भैया ने लिखा था। चौरासी साल के इस बुजुर्ग को कभी लोगों ने वयोवृद्ध नहीं कहा। लोग उन्हें ‘विद्या भैया’ ही कहते थे। […] Read more » विद्याचरण शुक्ल
विविधा देश द्रोही कौन? June 11, 2013 / July 19, 2013 by आर. सिंह | 23 Comments on देश द्रोही कौन? श्री विनोद कुमार सर्वोदय का एक आलेख प्रवक्ता में आया है. आलेख का शीर्षक है: क्या भारतीय मुस्लिमों के कारनामे देशभक्ति पूर्ण हैं? इस पूरे आलेख में कुछ ऐसे उदाहरण दिए गये हैं,जिससे वह व्यक्ति विशेष या वे व्यक्ति कठघरे में खड़े किए जा सकते हैं. पर इन उदाहरणों से यह कहाँ सिद्ध होता है […] Read more » देश द्रोही कौन?
मीडिया विधि-कानून विविधा आरटीआर्इ के दायरे में राजनीतिक दल June 10, 2013 / June 10, 2013 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव राजनीतिक दलों में पारदर्शिता लाने के नजरिये से इन्हें आरटीआर्इ के दायरे में लाना एक ऐतिहासिक घटना है। केंद्रीय सूचना आयोग ने राजनीतिक दलों को सूचना का अधिकार कानून के दायरे में लाकर उल्लेखनीय पहल की है। अब प्रमुख दल मांगे गए सवाल का जवाब देने के लिए बाध्यकारी होंगे। अब चिंता यही […] Read more » आरटीआर्इ आरटीआर्इ के दायरे में राजनीतिक दल राजनीतिक दल
विविधा समाज भारतीय जनसंख्या और मुस्लिम समुदाय June 10, 2013 / June 10, 2013 by डॉ.प्रेरणा चतुर्वेदी | 2 Comments on भारतीय जनसंख्या और मुस्लिम समुदाय प्रेरणा चतुर्वेदी भारतीय सभ्यता विश्व की उन दो महान सभ्यताओं में से एक है जो अति प्राचीन काल में उदित हुईं और अर्वाचीन काल तक प्रायः निर्बाध प्रवाहित होती रहीं हैं। भारत का भौगोलिक क्षेत्र चीन, यूरोप अथवा अमेरिका जैसा विस्तृत नहीं है। परन्तु सभ्यता के विकास के लिए आवश्यक प्राकृतिक साधनों की प्रचुरता अन्यों […] Read more » भारतीय जनसंख्या भारतीय जनसंख्या और मुस्लिम समुदाय मुस्लिम समुदाय
विविधा “ताजमहल हिन्दू कलाकृति का उत्कृष्ठ उदाहरण है” June 10, 2013 / June 10, 2013 by डॉ. सौरभ मालवीय | Leave a Comment अनेक विचारकों ने गहन शोध के उपरान्त इस स्थापत्य को बारहवी शताब्दी के पूर्वार्ध में निर्मित भगवान शंकर का मंदिर मानते है । जिसे बुंदेलखंड के महाराजा पर्माद्रि देव ने बनवाया था । पंद्रहवी शताब्दी में जयपुर के राजा ने राजा पर्माद्रि देव के वंशजो को पराजित कर आगरा को अधिन कर लिया । और […] Read more » ताजमहल ताजमहल हिन्दू कलाकृति हिन्दू कलाकृति
विविधा जल ही जीवन है June 8, 2013 by डॉ.प्रेरणा चतुर्वेदी | 1 Comment on जल ही जीवन है जिस देश को ‘सोने की चिड़िया ’ कहा जाता था। जहाँ दूध की नदियाँ बहती थीं। उसी देश में अब दूध तो दूर दो बूँद पानी के लिए भी तरसना पड़ रहा है । क्योंकि प्रकृति द्वारा प्रदत्त इस अपार, अकूत और बहुमूल्य तोहफे का इंसान लगातार अपने स्वार्थ के लिए दुरूपयोग करता ही जा […] Read more » जल ही जीवन है
विविधा बारिश June 8, 2013 by डॉ.प्रेरणा चतुर्वेदी | Leave a Comment आधी रात से शहर में झमाझम बारिश हो रही है। रह-रहकर बिजली जब तेज आवाज से कड़कती है, तो दिल बैठने लगता है। बादलों को चीरती हुई तेज गड़गडाहट के साथ, युद्ध में किसी महाबली सम्राट की चमकती, तेज, खून की प्यासी, तलवार की तरह बिजली चमक रही है। सुबह के सवा आठ बज चुके […] Read more » बारिश
जरूर पढ़ें विविधा चित्रा, विशाखा, फाल्गुनी….. नक्षत्रों का शब्द गुंजन June 8, 2013 / July 19, 2013 by डॉ. मधुसूदन | 11 Comments on चित्रा, विशाखा, फाल्गुनी….. नक्षत्रों का शब्द गुंजन ॐ–नक्षत्रों की अवधारणा भारत की देन ॐ –विश्व-व्यापी अंतरिक्षी मानसिकता ॐ –नक्षत्रों के काव्यमय सुंदर नाम (एक)गुजराती विश्वकोश गुजराती विश्वकोश कहता है, कि,”नक्षत्रों की अवधारणा भारत छोडकर किसी अन्य देश में नहीं थी। यह, अवधारणा हमारे पुरखों की अंतरिक्षी वैचारिक उडान की परिचायक है, नक्षत्रों का नामकरण भी पुरखों की कवि कल्पना का और […] Read more » चित्रा फाल्गुनी..... नक्षत्रों का शब्द गुंजन विशाखा
विविधा इन्सानियत और मानवता है सबसे बड़ा धर्म June 7, 2013 by नरेंद्र भारती | 5 Comments on इन्सानियत और मानवता है सबसे बड़ा धर्म इनसानियत व मानवता सबसे बड़ा धर्म है । कहते हैं दुनिया में कोई ऐसी शक्ति नहीं है जो इनसान को गिरा सके, इन्सान ,इन्सान द्वारा ही गिराया जाता है । दुनिया में ऐसा नहीं है कि सभी लोग बुरे हैं, इस जगत में अच्छे-बुरे लोगों का संतुलन है । आज संस्कारों का चीरहरण हो रहा […] Read more » इन्सानियत और मानवता है सबसे बड़ा धर्म
महिला-जगत विविधा बेटियों को देवी रूप में चरण स्पर्श करने की परंपरा June 6, 2013 / June 7, 2013 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment यदि कन्या को किसी व्यक्ति का पैर छू जाए तो तुरंत उस कन्या के (देवी रूप मानकर) चरण स्पर्श करने की परंपरा भारत में है। चरण छूने की यह परंपरा इसलिए है कि कन्या के शरीर से पैरों का स्पर्श होना ‘पाप’ माना जाता है। उस पाप से मुक्त होने के लिए ही व्यक्ति क्षमा […] Read more » भारत में बेटियों को देवी रूप में चरण स्पर्श करने की परंपरा
विविधा कहां गुम हो जाती हैं टॉपर बेटियां? क्या सपने सचमुच साकार हो रहे हैं ? June 6, 2013 / June 7, 2013 by लीना | 2 Comments on कहां गुम हो जाती हैं टॉपर बेटियां? क्या सपने सचमुच साकार हो रहे हैं ? इन दिनों परीक्षा परिणामों का दौर रहा है। बेटियां इतिहास रच रही हैं, अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। लगभग सभी परीक्षाओं में लड़कों के मुकाबले वे ही अव्वल आ रही हैं, टॉप कर रही हैं। छात्राओं के उतीर्ण होने का प्रतिशत भी छात्रों की अपेक्षा अधिक ही रह रहा है। सीबीएससी 10वीं की […] Read more » कहां गुम हो जाती हैं टॉपर बेटियां? क्या सपने सचमुच साकार हो रहे हैं ?
विविधा समाज देश में बढते अपराध, बेलगाम होते अपराधी, जिम्मेवार कौन ? June 5, 2013 / June 6, 2013 by नरेंद्र भारती | 2 Comments on देश में बढते अपराध, बेलगाम होते अपराधी, जिम्मेवार कौन ? कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक अपराधों का काला साया फैलता जा रहा है यह बहुत ही घातक व अशुभ संकेत है। विश्वगुरु के नाम से विख्यात भारत संगीन अपराधों के कारण कुख्यात होता जा रहा है। प्रतिदिन अपराधों की इबारतें लिखी जा रही हैं। खून की होली खेली जा रही है, हत्याओं ,बलात्कारों, की घटनाओं […] Read more » जिम्मेवार कौन ? देश में बढते अपराध बेलगाम होते अपराधी