विविधा लुप्त होती राष्ट्रीय पंचांग की पहचान April 14, 2013 / April 14, 2013 by प्रमोद भार्गव | 4 Comments on लुप्त होती राष्ट्रीय पंचांग की पहचान प्रमोद भार्गव कालमान एवं तिथिगण्ना किसी भी देश की ऐतिहासिकता की आधारशीला होती है। किंतु जिस तरह से हमारी राष्ट्रभाषा हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषाओं को विदेशी भाषा अंग्रेजी का वर्चस्व धूमिल कर रहा है,कमोवेश यही हश्र हमारे राष्ट्रीय पंचांग,मसलन कैलेण्डर का भी है। किसी पंचांग की कालगण्ना का आधार कोर्इ न कोर्इ प्रचलित […] Read more » लुप्त होती राष्ट्रीय पंचांग की पहचान
विविधा अलविदा! April 12, 2013 / April 12, 2013 by मा. गो. वैद्य | 1 Comment on अलविदा! – मा. गो. वैद्य अलविदा! यह मेरा आखिरी साप्ताहिक भाष्य है. तरुण भारत के मुख्य संपादक का दायित्व १९८३ को छोडने के बाद, गत तीस वर्ष हर रविवार के अंक के लिए यह स्तंभ मैं लिखता रहा हूँ. अब यह लेखन रोक रहा हूँ. अंग्रेजी पंचांग के अनुसार, 90 वर्ष की आयु हो चुकी है […] Read more »
विविधा एक मुख्यमंत्री ऐसा भी April 12, 2013 by मा. गो. वैद्य | 1 Comment on एक मुख्यमंत्री ऐसा भी – मा. गो. वैद्य घटना १८ मार्च की होगी. एक मुख्यमंत्री अपने राज्य की राजधानी से विमान से दिल्ली आ रहे थे. लेकिन आश्चर्य यह कि, उनके साथ कोई नौकर-चाकर नहीं थे. सुरक्षा गार्ड भी नहीं थे. कोई चपरासी भी नहीं दिखा. वे स्वयं ही अपना सामान संभाल रहे थे. विमान में उनका टिकट सादा […] Read more »
विविधा भारतीय लोकतन्त्र में जातीवाद का घुन April 11, 2013 by श्रीराम तिवारी | Leave a Comment दुनिया के समाज शाश्त्रियों के लिए मध्ययुगीन -गैर इस्लामिक , गैर ईसाइयत और तथाकथित विशुद्ध भारतीय उत्तर वैदिक कालीन पृष्ठभूमि वाले भारत के सामाजिक -ताने-बाने को ऐतिहासिक और द्वंदात्मक – वैज्ञानिक क्रमिक विकाश के समग्र रूप में समझ पाना अत्यंत कठिन और जटिल रहा है. भारत के ’सनातन’ हिन्दू समाज – जिसे आजकल हिंदुत्व से […] Read more »
विविधा अब ऐसे परिवर्तन का हो शंखनाद / नरेश भारतीय April 10, 2013 by नरेश भारतीय | Leave a Comment राजनीति को विष बताने के बावजूद राहुल गांधी ने देश के पूंजीपति और उद्योगपति समुदाय के समक्ष बोलते हुए आगामी लोकसभा चुनाव दंगल में अपने प्रवेश का शंखनाद करने का उपक्रम किया है. भले ही वे बार बार यह जतलाने का प्रयास करते हैं कि उन्हें प्रधानमंत्री बनने से कोई सरोकार नहीं है इस पर […] Read more » परिवर्तन
विविधा जम्मू कश्मीर की चर्चा में ज़रुरी है उसका भूगोल जानना April 10, 2013 by डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री | Leave a Comment डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री जम्मू कश्मीर आजकल फिर चर्चा में है । जिस प्रकार बिहार लालू प्रसाद यादव के कारण चर्चा में रहता है , उसी प्रकार जम्मू कश्मीर आम तौर पर अब्दुल्ला परिवार के कारण चर्चा में रहता है । अब्दुल्ला परिवार का वंश वृक्ष तो पुराना ही होगा , लेकिन इस परिवार के […] Read more »
विविधा तो चपरासी बन जाते.. April 10, 2013 by अरुण कान्त शुक्ला | 2 Comments on तो चपरासी बन जाते.. जिस व्यवस्था में लोग पार्षद बनने के लिए चुनाव लाखों रूपये खर्च करते हों और पार्षद बनते ही उनके चेहरे और घर दोनों की रंगत में चमक आ जाती हो, उस व्यवस्था में यदि विधानसभा में बैठने वाले मंत्री और विधायक अपने वेतन-भत्ते बढाने के लिए अपने गरीब होने का रोना रोयें तो इसे […] Read more »
विविधा भाषा पौरूषेय नही अपौरूषेय है April 8, 2013 / May 14, 2013 by राकेश कुमार आर्य | 5 Comments on भाषा पौरूषेय नही अपौरूषेय है संस्कृत के विषय में ये सर्वमान्य और सर्वग्राह्य तथ्य है कि संस्कृत विश्व की सर्वाधिक प्राचीन भाषा है। इसीलिए हमारे भारतीय मत के अनुसार संस्कृत मनुष्य की ईश्वर प्रदत्त भाषा है। यही कारण है कि संस्कृत को देव भाषा भी कहा जाता है। पश्चिमी जगत के कई विद्वान भी भारत की इस देवभाषा के विषय […] Read more »
विविधा दास्ता –ए – ज़ुल्म April 8, 2013 / April 8, 2013 by परमजीत कौर कलेर | Leave a Comment परमजीत कौर कलेर 13 अप्रैल स्पैशल वो कत्लेआम….वो चीत्कार…दे गया जो दुख…उसे न भूला है कोई…न भूल पाएगा…वो ज़ख्म… आज भी हैं हरे…हो जैसे कल की बात…भर रहा है गवाही ये बाग भी…न भूला है कोई…न भूल पाएगा…वो कत्लेआम दोस्तों वो दर्दनाक वाक्या…दे गया न भुलाने वाला गम…आज भी जो करता है उस […] Read more »
विविधा अन्ना, केजरीवाल के एक पृष्ठ बाद! April 4, 2013 by विकास कुमार गुप्ता | 2 Comments on अन्ना, केजरीवाल के एक पृष्ठ बाद! भारत में बहुत से आन्दोलन हुये है। हाल के वर्षों में हुये आन्दोलनों में अन्ना-केजरीवाल आन्दोलन सबसे प्रबल और सशक्त रहा। इनका मुख्य उद्देश्य भ्रष्टाचार मिटाने को लेकर था। लेकिन आन्दोलन बिना किसी प्रतिफल के धाराशायी हो गया। भ्रष्टाचार को लेकर हमारे देश में पहले से ही इतने अधिक कानून है कि यदि उन्हीं कानूनों […] Read more » अन्ना केजरीवाल के एक पृष्ठ बाद!
विविधा हिन्दी क्षेत्र की चुनोतियाँ ओर उसके अददतन विमर्श April 2, 2013 by श्रीराम तिवारी | 7 Comments on हिन्दी क्षेत्र की चुनोतियाँ ओर उसके अददतन विमर्श श्रीराम तिवारी डिजिटल नेटवर्क ,इलेक्ट्रोनिक मीडिया, इन्टरनेट,ब्राड-बेंड ,सोशल-मीडिया,प्रिंट-श्रव्य-दृश्य तमाम तरह के परम्परागत और अधुनातन संप्रेष्य माध्यमों के पुरजोर दोहन के वावजूद वैश्विक क्षितिज पर भारतीय जनता का बहुत बड़ा हिस्सा-जिसे जन-साधारण या आम आदमी भी कहते हैं ,अपने हिस्से के -जंगल-जमीन-और आसमान से इस 2 1 वीं शताब्दी में भी महरूम है. साहित्यिक परिद्रश्य में […] Read more » हिन्दी क्षेत्र की चुनोतियाँ ओर उसके अददतन विमर्श
विविधा आतंकवाद से मुकाबला और राज्यों के अहंकार / मा. गो. वैद्य March 21, 2013 by मा. गो. वैद्य | 1 Comment on आतंकवाद से मुकाबला और राज्यों के अहंकार / मा. गो. वैद्य हमारे देश में आतंकवाद की भीषण समस्या है, आतंकवाद हमारे देश पर का एक महान संकट है, इस बारे में हमारे देश में दो मत होगे ऐसा नहीं लगता. अपवाद करना ही होगा, तो वह, आतंकवादी कारवाईंयॉं करने वाले दो प्रकार के समूहों का करना होगा. एक समूह जिहादी आतंकवादियों को है, तो दूसरा माओवादी […] Read more »