विविधा अलविदा -२०१० January 1, 2011 / December 18, 2011 by श्रीराम तिवारी | Leave a Comment श्रीराम तिवारी काल चक्र की गणना, मानव सभ्यता के जिस मुकाम पर प्रारंभ हुई होगी, सम्भवत वह भारत के पूर्व वैदिक काल और अमेरिकी माया सभ्यता के अवसान का समय रहा होगा. यह सर्वविदित और सर्वकालिक स्थापित सत्य है की भारत में विदेशी आक्रमणों से पूर्व भी उन्नत सभ्यताएं विद्यमान थी. यह भी सर्वस्वीकार्य सत्य […] Read more » by by अलविदा
विविधा खट्टी-मीठी यादों के साथ महाघोटालों के नाम रहा 2010 January 1, 2011 / December 18, 2011 by रामबिहारी सिंह | Leave a Comment रामबिहारी सिंह हर साल की तरह यह वर्ष 2010 भी अपने साथ कई मीठी यादों के साथ ही कड़वे दर्द देकर खत्म हो गया। वर्ष 2010 में जहां कुछ अच्छे कार्य हुए तो वहीं कई ऐसे कलंक भी लगे जो भारत को दुनिया की नजर में शर्मिंदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा गए। 2010 में […] Read more » scam घोटाला
विविधा 10 जनवरी को घोषित होंगे ऑनलाइन लेख प्रतियोगिता के परिणाम December 31, 2010 / April 9, 2014 by संजीव कुमार सिन्हा | 1 Comment on 10 जनवरी को घोषित होंगे ऑनलाइन लेख प्रतियोगिता के परिणाम ‘प्रवक्ता डॉट कॉम’ के दो साल पूरे होने के अवसर पर गत सितम्बर माह में हमने ऑनलाइन लेख प्रतियोगिता का आयोजन किया था। लेख भेजने की अंतिम तिथि थी 31 दिसम्बर 2010 और विषय था- वेब पत्रकारिता : चुनौतियाँ व सम्भावनाएँ। अभी तक हमें कुल दस लेख प्राप्त हुए हैं- संजय कुमार, पटना (बिहार) उमेश […] Read more » प्रवक्ता डॉट कॉम
विविधा अँधेरे तले चिराग December 31, 2010 / December 18, 2011 by ललित कुमार कुचालिया | Leave a Comment ललित कुमार कुचालिया “कौन कहता है आसमान में छेद नहीं होता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो”, “जिनके हौसलो में जान होती है, उन्हें पंखों की जरुरत नहीं होती”…. आपने इस तरह के जुमले अक्सर सुने होगे लेकिन अँधेरे का यह चिराग अपनी रोशनी से आस-पास के लोगो कों उजाला दे रहा है। हाल […] Read more » अजय कुमार बर्त्वाल
विविधा अंग्रेजी नववर्ष पर निवेदन December 31, 2010 / December 18, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 8 Comments on अंग्रेजी नववर्ष पर निवेदन विजय सोनी प्रवक्ता डॉट कॉम के माध्यम से मैं हिन्दुस्तान के उन सभी देशप्रेमियों को निवेदन करना चाहता हूँ, आज ३१ दिसम्बर २०१० है, सारे भारतवर्ष के सभी चौक-चौराहों पर आधी रात तक शोर शराबा या उत्साह मना कर अपनी बेशकीमती ताकत और ऊर्जा का नाश ना करें। ये याद रखिये कि यदि अंग्रेजी वर्ष […] Read more » New Year अंग्रेजी नववर्ष
विविधा असुविधाओं एवं सरकारी क्षति का कारण बनता प्रशासनिक कुप्रबंधन December 31, 2010 / December 18, 2011 by निर्मल रानी | Leave a Comment हमारा देश प्रगति के पथ पर अग्रसर है। जहां इस समय पूरे देश में तमाम राष्ट्रीय राजमार्ग, उपमार्ग, नगरों, क़स्बों व महल्लों की सडक़े व गलियां, तमाम बड़े से लेकर छोटे तक फ्लाईओवर बन रहे हैं वहीं स्थानीय स्तर पर लगभग प्रत्येक नगरीय व उपनगरीय आबादियों के मध्य अनेक प्रकार के सरकारी व गैर सरकारी […] Read more » Administrative प्रशासनिक
विविधा गीतालेख/ गौ माता, तेरा ये ”वैभव” (?) अमर रहे December 29, 2010 / December 18, 2011 by गिरीश पंकज | 6 Comments on गीतालेख/ गौ माता, तेरा ये ”वैभव” (?) अमर रहे गिरीश पंकज गाय के सवाल पर मैं निरंतर कुछ न कुछ लिखता रहता हूँ. यह बता दूं कि मैं धार्मिक नहीं हूँ. पूजा-वगैरह में कोई यकीन नही करता. मंदिर भी नहीं जाता. भगवान् के सामने हाथ जोड़ने की ज़रुरत ही नहीं पडी, क्योंकि मेरा मानना है, कि ”जिसका मन निर्मल होता है/जीवन गंगाजल होता है” […] Read more » Cow गाय
विविधा अंग्रेजी नववर्ष का भारतीयकरण December 29, 2010 / December 18, 2011 by विजय कुमार | 3 Comments on अंग्रेजी नववर्ष का भारतीयकरण विजय कुमार कुछ दिन बाद फिर एक जनवरी आने वाली है। हर बार की तरह समाचार माध्यमों ने वातावरण बनाना प्रारम्भ कर दिया है। अतः 31 दिसम्बर की रात और एक जनवरी को दिन भर शोर-शराबा होगा, लोग एक दूसरे को बधाई लेंगे और देंगे। सरल मोबाइल संदेशों (एस.एम.एस) के आदान-प्रदान से मोबाइल कंपनियों की […] Read more » New Year नव वर्ष
विविधा मप्र में कुपोषण के नाम पर किसका ‘पोषण’ December 29, 2010 / December 18, 2011 by रामबिहारी सिंह | 1 Comment on मप्र में कुपोषण के नाम पर किसका ‘पोषण’ रामबिहारी सिंह मध्यप्रदेश के माथे पर लगे चुके कुपोषण के कलंग को मिटाने के लिए प्रदेश सरकार जहां पानी की तरह पैसा बहा रही है वहीं आज भी मप्र में कुपोषण के नाम पर कुपोषित का नहीं, बल्कि किसी और का पोषण हो रहा है। हाल ही में प्रदेश की भाजपा सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च […] Read more » Madhya pradesh कुपोषण मध्यप्रदेश
विविधा ठेके से राष्ट्र निर्माण बनाम श्रम शोषण के निहितार्थ December 28, 2010 / December 18, 2011 by श्रीराम तिवारी | 3 Comments on ठेके से राष्ट्र निर्माण बनाम श्रम शोषण के निहितार्थ श्रीराम तिवारी वर्तमान वैश्वीकरण और आधुनिकीकरण के बरबस दबाव में भारत की आर्थिक नीति बेहद बेलगाम हाथों में सिमट चुकी है. आधुनिक संचार एवं सूचना तकनालाजी में क्रांतीकारी विकास के चलते मानवीय श्रम की गुणवत्ता तो बढ़ती जा रही है किन्तु जनसँख्या विस्फोट और कड़ी बाजारगत स्पर्धा के चलते भयानक बेरोजगारी ने वर्तमान युवा पीढी […] Read more » Labor exploitation श्रम शोषण
विविधा हक़ीक़त और सियासत के मध्य मंहगाई का समाधान December 26, 2010 / December 18, 2011 by तनवीर जाफरी | Leave a Comment तनवीर जा़फरी किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में मंहगाई का बढऩा एक सामान्य व साधारण प्रक्रिया है। महंगाई पूरे विश्व में हमेशा से ही बढ़ती रही है और भविष्य में भी बढ़ती रहेगी। उत्पादन में कमी तथा खपत में होने वाली अधिकता ही आमतौर पर मंहगाई का कारण बनती है। हमारे देश में भी महंगाई […] Read more » Inflation महंगाई
विविधा विनायक सेन, माओवाद और बेचारा जनतंत्र December 25, 2010 / December 18, 2011 by संजय द्विवेदी | 7 Comments on विनायक सेन, माओवाद और बेचारा जनतंत्र -संजय द्विवेदी डा. विनायक सेन- एक मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं, पढ़ाई से डाक्टर हैं, प्रख्यात श्रमिक नेता स्व.शंकरगुहा नियोगी के साथ मिलकर मजदूरों के बीच काम किया, गरीबों के डाक्टर हैं और चाहते हैं कि आम आदमी की जिंदगी से अंधेरा खत्म हो। ऐसे आदमी का माओवादियों से क्या रिश्ता हो सकता है ? लेकिन रायपुर […] Read more » Vinayak Sen नक्सलवाद माओवाद विनायक सेन