विविधा लाल चौक पर राष्ट्र-ध्वजा हम, जा करके फहराएंगे…. January 8, 2011 / December 16, 2011 by गिरीश पंकज | 3 Comments on लाल चौक पर राष्ट्र-ध्वजा हम, जा करके फहराएंगे…. गिरीश पंकज किसी भी राष्ट्र की अस्मिता का प्रतीक है उसका ध्वज, उसकी भाषा, उसका राष्ट्र-गान. दुनिया में भारत ही वह अनोखा उदारवादी देश है जहाँ दिन दहाड़े संविधान जला दिया जाता है. ध्वज का अपमान होता है. बेचारी राष्ट्र भाषा की हालत क्या है, ये सब जानते है. अपने यहाँ तो कोई भी देशविरोधी […] Read more » national flag तिरंगा राष्ट्रध्वज
विविधा विधायक की हत्या से सुलगते सवाल January 8, 2011 / December 16, 2011 by निर्मल रानी | 2 Comments on विधायक की हत्या से सुलगते सवाल निर्मल रानी हमारे देश में वैसे तो लगभग सभी प्रकार के जुर्म के ग्राफ में लगातार इज़ाफा होता जा रहा है। परंतु गत कुछ वर्षों से बलात्कार तथा बलात्कार के बाद हत्या, सामूहिक बलात्कार एवं महिला यौन उत्पीडऩ जैसे अपराधों की संख्या में कुछ ज्य़ादा ही बढ़ोतरी देखी जा रही है। इन अपराधों से निपटने […] Read more » Murder रूपम पाठक विधायक
विविधा राजीव भाई दीक्षित आप अमर हैं… January 8, 2011 / December 16, 2011 by दिवस दिनेश गौड़ | 10 Comments on राजीव भाई दीक्षित आप अमर हैं… ई. दिवस दिनेश गौड़ मित्रों, राजीव दीक्षित एक महत्वपूर्ण नाम होने के बाद भी बहुत जाना पहचाना नहीं है। बहुत से लोग तो इन्हें जानते भी नहीं होंगे। कुछ लोगों ने केवल उनका नाम ही सुना है। यही होते हैं नींव के पत्थर जो पूरी इमारत को अपने ऊपर खड़ा रखते हैं किन्तु किसी को […] Read more » rajiv dixit आजादी बचाओ आंदोलन राजीव दीक्षित
विविधा भ्रष्टाचार के खिलाफ अब निर्णायक जंग की जरूरत January 7, 2011 / December 16, 2011 by प्रो. बृजकिशोर कुठियाला | 3 Comments on भ्रष्टाचार के खिलाफ अब निर्णायक जंग की जरूरत छद्म शिष्टाचारियों ने पैदा ही किया है संकट – प्रो. बृज किशोर कुठियाला कुशासन का जो डरावना चेहरा वर्तमान में भारत के जनमानस के सामने उभरकर आया है, वैसा तो उस समय भी नहीं था जब भारतीय राजनीति की व्यवस्था में छोटे-छोटे राजा-रजवाड़े आपस में युद्धरत थे और जिसका लाभ उठाकर मुगलों ने अपना आधिपत्य […] Read more » Corruption भ्रष्टाचार
विविधा पश्चिमी रंग में रंगा भारत: नकलची भूरा बंदर / विश्व मोहन तिवारी January 6, 2011 / June 6, 2012 by विश्वमोहन तिवारी | 21 Comments on पश्चिमी रंग में रंगा भारत: नकलची भूरा बंदर / विश्व मोहन तिवारी विश्व मोहन तिवारी, एयर वाइस मार्शल, (से.नि.) आज जिस तरह के राक्षसी अपराध तथा भ्रष्ट कारनामें भारत में देखने मिल रहे हैं तब यह प्रश्न सहज ही उठता है कि क्या भारत सभ्य है? यही प्रश्न बीसवीं शती के प्रारंभ में विलियम आर्चर ने उठाया था और अपनी कट्टर सांप्रदायिक दृष्टि तथा औपनिवेशिक अहंकार में […] Read more » India भारत
विविधा कूपमंडूक विचारक हतप्रभ हैं वैश्वीकरण से January 6, 2011 / December 16, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 1 Comment on कूपमंडूक विचारक हतप्रभ हैं वैश्वीकरण से जगदीश्वर चतुर्वेदी कूपमंडूक विचारकों को वैश्वीकरण अभी तक समझ में नहीं आया है। वे यह देखने में असफल हैं कि भारत का बुनियादी आर्थिक नक्शा बदल चुका है। कूपमंडूक विचारकों में कठमुल्लापन इस कदर हावी है कि उनकी कूपमंडूकता के समाने विनलादेन भी शर्मिंदा महसूस करता है। भूमंडलीकरण और आर्थिक उदारीकरण को औचक और कूपमंडूक […] Read more » Capitalism बुद्धिजीवी वैश्वीकरण
विविधा स्वभाषा विकास और हिन्दी साहित्य सम्मेलन January 5, 2011 / December 18, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 2 Comments on स्वभाषा विकास और हिन्दी साहित्य सम्मेलन राजीव मिश्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग भारत में एकमात्र हिन्दी की संस्था है, जिससे समस्त हिंदी जगत की कामनाओं को पूर्ण करने का प्रयास किया। इसका जन्म खोई हुई आत्मनिष्ठा को वापस करने के लिए था। देश के विषाक्त वातावरण को नष्ट करके राष्ट्र की देशी मनः स्थिति, भारतीय संस्कृति और भारतीय भाषाओं में अटूट […] Read more » hindi हिंदी हिंदी साहित्य सम्मेलन
विविधा गाँधीगिरी बनाम आतंकवाद January 4, 2011 / December 18, 2011 by एल. आर गान्धी | 1 Comment on गाँधीगिरी बनाम आतंकवाद एल.आर. गाँधी निरंतर पिटने और कौक्रोच पालने को हमने अपना राष्ट्रीय व्यसन बना लिया है। कोई एक गाल पर मारे तो अपना दूसरा गाल उसके आगे कर दो! राष्ट्रपिता? की नीति थी, जिसे हमने अपनी नियति मान लिया और उन्हीं की नीतियों पर चलते हुए ‘आस्तीन में सांप पालने’ का व्यसन हमारे सेकुलर शैतानों की […] Read more » terrorism आतंकवाद
विविधा साल के पड़ाव पर, भई संतन की भीड़ January 3, 2011 / December 18, 2011 by जयप्रकाश सिंह | 7 Comments on साल के पड़ाव पर, भई संतन की भीड़ जयप्रकाश सिंह 1 जनवरी 2011 की दोपहर को भुवनेश्वर से एक परम मित्र का फोन आया। यह फोन रोमन नववर्ष की बधाई देने के लिए नहीं था। उन्होंने एक सूचना दी कि आज पूरी में भगवान जगन्नाथ के दर्शनार्थियों की संख्या रथयात्रा के समय होने वाली संतों की भीड़ से कम नहीं है। उन्होंने प्रत्येक […] Read more » Crowd भीड़
विविधा बिनायक सेन तो महज मोहरा है, असली मकसद तो कुछ और है January 2, 2011 / December 18, 2011 by दानसिंह देवांगन | 5 Comments on बिनायक सेन तो महज मोहरा है, असली मकसद तो कुछ और है हे भारत मां इन्हें माफ करना दानसिंह देवांगन जब से रायपुर की एक अदालत ने पीयूसीएल के उपाध्यक्ष बिनायक सेन को उम्रकैद की सजा सुनाई है। देश-विदेश के सैकड़ों देशतोड़क तथाकथित बुद्धिजीवी एवं मानव अधिकार के ठेकेदार हायतौबा मचाने लगे हैं। कोई दिन ऐसा नहीं गया, जब अखबारों में बिनायक सेन के समर्थक कोर्ट और […] Read more » Vinayak Sen डॉ. विनायक सेन
विविधा वर्षांत-2010/ बात तो साफ हुई कि मीडिया देवता नहीं है ! January 1, 2011 / December 18, 2011 by संजय द्विवेदी | Leave a Comment -संजय द्विवेदी यह अच्छा ही हुआ कि यह बात साफ हो गयी कि मीडिया देवता नहीं है। वह तमाम अन्य व्यवसायों की तरह ही उतना ही पवित्र व अपवित्र होने और हो सकने की संभावना से भरा है। 2010 का साल इसलिए हमें कई भ्रमों से निजात दिलाता है और यह आश्वासन भी देकर जा […] Read more » media मीडिया
विविधा 2010 अलविदा: खु़शामदीद 2011 January 1, 2011 / December 18, 2011 by तनवीर जाफरी | 1 Comment on 2010 अलविदा: खु़शामदीद 2011 तनवीर जाफ़री प्रत्येक वर्ष की भांति वर्ष 2010 भी आखिरकार हम सब को अलविदा कह गया और हमेशा की तरह हमने तमाम नई आशाओं व उ मीदों के साथ नववर्ष 2011 को खु़शामदीद कहा। बीता वर्ष अपने पीछे तमाम खट्टी-मीठी यादें, राजनैतिक, आर्थिक तथा राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कई यादगार घटनाओं को इतिहास के […] Read more » by by अलविदा