विविधा महात्मा गांधी का सर्वोदय दर्शन July 3, 2010 / December 23, 2011 by डॉ. मनोज चतुर्वेदी | 2 Comments on महात्मा गांधी का सर्वोदय दर्शन – डॉ. मनोज चतुर्वेदी महात्मा गांधी भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के पितामह थे। यदि उनको अपने समय का अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री, दार्शनिक, वैद्य, शिक्षाविद, समाज सुधारक, राजनीतिज्ञ, पत्रकार, लेखक, कानूनविद्, साहित्यकार, सौदर्यशास्त्री, संत, संयासी कहा जाय तो उसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। अर्थात् वे सबकुछ थे। जब हम संपूर्ण गांधी वाङगमय में गांधी के विचारों मे गोता […] Read more » Mahatma Gandhi महात्मा गांधी
विविधा अलगाव का एहसास और निजी ईमानदारी July 3, 2010 / December 23, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 2 Comments on अलगाव का एहसास और निजी ईमानदारी -हरिकृष्ण निगम आज कभी-कभी लगता है कि भावनाओं के लोक में विचरण करने वाले ही सुखी हैं। यथार्थ की कड़वाहट, जीवन के संघर्ष और मन के मुताबिक कुछ न कुछ होने से हम सब हतास होते रहते हैं। अत्तिशय महत्वाकांक्षी और असंतुष्ट साथी या जो बहुत संवेदनशील है, हर दम लोकलाज की बात करते हैं […] Read more » Integrity ईमानदारी
विविधा मूल्यपरक जीवन का अभाव July 3, 2010 / December 23, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment – राजीव मिश्र आज जिंदगी समस्याओं से संकुल बन रही है, क्योंकि भौतिकता प्रधान एवं अध्यात्मिकता गौण हो रही है। आवेश, उत्तेजना एवं चंचलता से जीवन की धारा बदल गई है, इसलिए मन में अशांति बढ़ रही है। इसी कारण सृजन की नवीन दिशाओं का उद्धाटन नहीं हो पा रहा है। साधारणतः हम कार्य तनाव […] Read more » life मूल्यपरक जीवन
विविधा उत्तर आधुनिक आंदोलन क्यों असरहीन हो जाते हैं July 2, 2010 / December 23, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 3 Comments on उत्तर आधुनिक आंदोलन क्यों असरहीन हो जाते हैं -जगदीश्वर चतुर्वेदी यह आयरनी है कि जिस आंदोलन के लिए लोग पागलपन की हद तक दीवाने थे, गलियों-मुहल्लों में वैचारिक मुठभेड़ें हो रही थीं और चारों ओर लग रहा था कि यह आंदोलन मूलगामी परिवर्तनों का वाहक बनेगा। एक अवधि के बाद पाते हैं कि वही आंदोलन और उससे जुड़ा विचार गायब है.मेरा संकेत रामजन्मभूमि-बाबरी […] Read more » Movement उत्तर आधुनिक आंदोलन
विविधा राष्ट्रविरोधी तत्व अमरनाथ यात्रा को बाधित कर रहे हैं: बजरंग दल July 1, 2010 / December 23, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 3 Comments on राष्ट्रविरोधी तत्व अमरनाथ यात्रा को बाधित कर रहे हैं: बजरंग दल बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक श्री प्रकाश शर्मा ने एक विज्ञप्ति के माध्यम से कश्मीर घाटी में घट रही घटनाओं की कड़े शब्दों में निन्दा करते हुए उन्हें पूर्व नियोजित बताया है। श्री शर्मा ने कहा कि इन घटनाओं का एकमात्र उद्देश्य किसी भी प्रकार से अमरनाथ की वार्षिक यात्रा को बाधित करना है। पिछले […] Read more » Amarnath Yatra अमरनाथ यात्रा
विविधा विचार स्वातन्त्र्य की मर्यादा July 1, 2010 / December 23, 2011 by विजय कुमार | Leave a Comment -विजय कुमार किसी भी लोकतान्त्रिक देश में विचार स्वातन्त्र्य होना ही चाहिए। फिर भी इस विषय पर बार-बार विवाद खड़े होते हैं। प्राय: लोग इसे राजनीति में घसीटकर इस या उस दल को कटघरे में खड़ा कर देते हैं। इस संदर्भ में कानून भी अस्पष्ट और ढीले हैं। कुछ समय पूर्व भाजपा नेता जसवंत सिंह […] Read more » independence विचार स्वातन्त्र्य
विविधा घुसपैठियों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई June 30, 2010 / December 23, 2011 by अनिल सौमित्र | Leave a Comment देश में तीन करोड़ से अधिक घुसपैठिए -अनिल सौमित्र घुसपैठ और सामान्य आवाजाही में फर्क है। दुनियाभर में अपनी आवश्यकताओं के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर आबादी की आवाजाही सामान्य बात है। लेकिन घुसपैठ सुनियोजित और रणनीतिक है। अर्थात भारत में घुसपैठ आवश्यकता या परिस्थितियों के कारण नहीं बल्कि किसी खास मकसद का […] Read more » Infiltration घुसपैठ
विविधा टैंकर पुराण June 30, 2010 / December 23, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 2 Comments on टैंकर पुराण -मनोज लिमये रहिमन पानी राखिये बिन पानी सब सून . . . . . ये कहावत पूर्व में जितनी प्रासंगिक रही होगी आज उससे भी अधिक मौंजू नज़र आती है। आज सुन्दर गृहणियों के चेहरे का पानी हौद में पानी भरने के चक्कर में लुप्त होता जा रहा है। घरों के निर्माण में हौद निर्मिति […] Read more »
विविधा सपना या सच June 30, 2010 / December 23, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 2 Comments on सपना या सच -मनोज लिमये एक किसना था। सुबह हो या शाम पीकर आराम, यही इसके जीवन का मूल मंत्र था। पिता की असमय हुई मृत्यु ने इस मूलमंत्र में छुपी मूल आत्मा को थोड़ा नुकसान पहुँचाया है, पर जिन्दगी यथावत् जारी है। पहले पिताजी जब खेत देख लेते थे तब कभी ये सोचने की जरूरत नहीं हुई […] Read more » Dream सपना
विविधा भारतरत्न बाबू डा.राजेंद्र प्रसाद June 29, 2010 / December 23, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 4 Comments on भारतरत्न बाबू डा.राजेंद्र प्रसाद -प्रभाकर पाण्डेय सदियों से भोजपुरिया माटी की एक अलग पहचान रही है। इस माटी ने केवल भोजपुरी समाज को ही नहीं अपितु माँ भारती को ऐसे-ऐसे लाल दिए जिन्होंने भारतीय समाज को हर एक क्षेत्र में एक नई दिशा दी एवं विश्व स्तर पर माँ भारती के परचम को लहराया। भोजपुरिया माटी की सोंधी सुगंध […] Read more » Dr Rajendra Prasad Yadav डा.राजेंद्र प्रसाद
विविधा बाजार के हवाले ‘हम भारत के लोग’ June 28, 2010 / December 23, 2011 by संजय द्विवेदी | 1 Comment on बाजार के हवाले ‘हम भारत के लोग’ बढ़ती कीमतों ने जाहिर किया आम आदमी की चिंता किसी को नहीं – संजय द्विवेदी एक लोककल्याणकारी राज्य जब खुद को बाजार के हवाले कर दे तो कहने के लिए क्या बचता है। इसके मायने यही हैं कि राज्य ने बाजार की ताकतों के आगे आत्मसमर्पण कर दिया है और जनता को महंगाई की ऐसी […] Read more » Inflation बाजार महंगाई
विविधा उफ् ये आम आदमी भी न..? June 28, 2010 / December 23, 2011 by गिरीश पंकज | 5 Comments on उफ् ये आम आदमी भी न..? -गिरीश पंकज ” उफ् ये आम आदमी भी न..? मिस्टर मनमोहन, व्हॉट डू यू थिंक अबाउट दिस डर्टी कॉमन मेन?” संसद के गलियारे में श्रीमान् ”क” ने अपनी बात शुरू की, ” जिसे देखो, इन दिनों महंगाई को रो रहा है। हम यहाँ ग्लोबल वार्मिंग की चिंता करने के लिए विदेश जा-जा कर टेंशनाएँ जा […] Read more » Inflation आम आदमी महंगाई