महिला-जगत विविधा माहवारी पर विमर्श : बस, सुर्खियों में बने रहने की चाहत April 7, 2015 / April 11, 2015 by व्यालोक पाठक | 3 Comments on माहवारी पर विमर्श : बस, सुर्खियों में बने रहने की चाहत व्यालोक पाठक हमारे-आपके लिए इसका अंदाज़ा भी लगा पाना मुश्किल है कि महिला सशक्तिकरण में भला माहवारी की क्या भूमिका हो सकती है, लेकिन हालिया कुछ विमर्शों को देखें तो यही कहना पड़ेगा कि सशक्तिकरण में माहवारी की महती भूमिका है। नारीवादी आंदोलन महिलाओं के शरीर को लेकर पहले भी मुखर रहा है, लेकिन इसकी […] Read more » Featured नारीवाद माहवारी स्त्री विमर्श
महिला-जगत पवित्रता और अपवित्रता का फलसफा March 30, 2015 / April 4, 2015 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 4 Comments on पवित्रता और अपवित्रता का फलसफा सोनाली मिश्रा होली अभी बीती है. होली के आते ही मेरे ज़ेहन में कई बरस पहले की एक घटना एकदम से जैसे सामने से आ जाती है। वह होली थी, मैं शायद 9 बरस की रही होऊँगी। इटावा शहर में हमारा मोहल्ला होली की सुबह से ही गुलज़ार हो जाया करता था। बच्चों की टोली […] Read more » Featured नारी विमर्श
चिंतन जन-जागरण महिला-जगत क्या एक महिला दूसरी महिला की पीड़ा को समझती है ? March 20, 2015 by शैलेन्द्र चौहान | 1 Comment on क्या एक महिला दूसरी महिला की पीड़ा को समझती है ? भारतको अंग्रेजी शासन से आज़ाद हुए छह दशक से भी अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन आज भी लिंग आधारित भेदभाव और महिलाओं पर अत्याचारों में कोई कमी नहींआई है। महिला सशक्तिकरण और महिला उत्थान के लिए आज भी ज्यादा कुछ नहीं किया जा रहा है। निर्भया कांड पर बीबीसी की वृत्त फिल्म ‘इंडिया […] Read more » ‘इंडिया डॉटर कन्या भ्रूण हत्या क्या एक महिला दूसरी महिला की पीड़ा को समझती है ? निर्भया कांड महिला उत्थान महिला की पीड़ा महिला सशक्तिकरण महिलाअशिक्षा महिलाओं पर अत्याचारों सामाजिक-सांस्कृतिक कुरीतियां
महिला-जगत मातृत्व अवकाश : महिलाओं से भेदभाव क्यों March 18, 2015 by बी.आर.कौंडल | Leave a Comment किसी भी समाज में बड़े बदलाव उस समाज में महिलाओं की स्थिति और उनकी सामाजिक प्रगति के साथ ही आते हैं | विकासशील से विकसित राष्ट्र की तरफ अग्रसर भारत अपनी शिक्षा व बुनियादी ढांचे में लगातार सुधार करता जा रहा है | परन्तु जहाँ तक महिलाओं के विकास का प्रश्न है, भारत विश्व […] Read more » महिलाओं से भेदभाव क्यों मातृत्व अवकाश
महिला-जगत क्या एक महिला दूसरी महिला की पीड़ा को समझती है ? March 18, 2015 / March 18, 2015 by शैलेन्द्र चौहान | Leave a Comment शैलेन्द्र चौहान भारत को अंग्रेजी शासन से आज़ाद हुए छह दशक से भी अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन आज भी लिंग आधारित भेदभाव और महिलाओं पर अत्याचारों में कोई कमी नहीं आई है। महिला सशक्तिकरण और महिला उत्थान के लिए आज भी ज्यादा कुछ नहीं किया जा रहा है। निर्भया कांड पर बीबीसी […] Read more » molestation with women in office women's sexual harrasment बलात्कार के मामले भंवरी देवी सामूहिक बलात्कार महिला की पीड़ा
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म पर्व - त्यौहार महिला-जगत वर्त-त्यौहार साहित्य गणगौर: महिलाओं के सौभाग्य का लोकपर्व March 17, 2015 / March 18, 2015 by ललित गर्ग | Leave a Comment राजस्थान अपने यहां आयोजित होने वाले सांस्कृतिक एवं धार्मिक मेलांे एवं उत्सवों के लिये प्रसिद्ध है। गणगौर इसे और विशिष्ट रूप प्रदान करता है। गणगौर का त्यौहार सदियों पुराना हैं। हर युग में कुंआरी कन्याओं एवं नवविवाहिताओं का ही नहीं अपितु संपूर्ण मानवीय संवेदनाओं का गहरा संबंध इस पर्व से जुड़ा रहा है। यद्यपि इसे […] Read more » गणगौर गणगौर: महिलाओं के सौभाग्य का लोकपर्व महिलाओं का लोकपर्व लोकपर्व
आलोचना चिंतन जरूर पढ़ें परिचर्चा महत्वपूर्ण लेख महिला-जगत विधि-कानून समाज स्त्री-पुरुष संबंध: पूर्व और पश्चिम March 14, 2015 by डॉ. मधुसूदन | 8 Comments on स्त्री-पुरुष संबंध: पूर्व और पश्चिम (एक) साहस भीड पर एक पत्थर मार कर कुछ कहना चाहता हूँ, कि रूको मेरी बात सुनो। आज, मैं तालियों के लिए नहीं लिख रहा । वैसे दुःख पर तालियाँ कैसी? एक दुःसाहस ही करता हूँ। यह मेरा अपना दृष्टिकोण है। आज ही सुन लो; कल देर हो जाएगी। एक सुशुप्त ज्वालामुखी देश में उबाल […] Read more » changing woman gender biased gender discourse gender equality live in relation relationship sexual views woman in the modern world womans world स्त्री-पुरुष संबंध: पूर्व और पश्चिम
महिला-जगत सामाजिक विसंगतियों की परिणति है कन्या भ्रूणहत्या March 7, 2015 by जगमोहन ठाकन | Leave a Comment प्रकृति के साथ की गयी छोटी सी भी छेड़खानी पर प्रकृति गुणात्मक रूप से प्रतिक्रिया करती है , जिसके परिणामस्वरूप समाज को काफी क्षति झेलनी पड़ती है .लिंगानुपात में आये असंतुलन का कारण भी मनुष्य द्वारा प्रकृति की इच्छा के विरोध में अपनाए गए तरीके ही हैं . जब समाज में पनपती बुराइयों व […] Read more » कन्या भ्रूणहत्या सामाजिक विसंगतियों की परिणति है
महिला-जगत समाज माँ बनने के लिए बच्चा होना काफी नही, माँ में ममता होना जरूरी February 24, 2015 by बी.आर.कौंडल | 1 Comment on माँ बनने के लिए बच्चा होना काफी नही, माँ में ममता होना जरूरी कहते हैं पुत्र कुपुत्र हो सकता है परन्तु माँ कुमाता नही होती | माँ और बच्चे का एक ऐसा रिश्ता है जो खून की डोर से बंधा है | तभी तो कहते है माता-पिता के अधिकतर गुण उनकी संतान में जन्म से आते है व जन्म लेने के उपरान्त कैसे बच्चे की […] Read more » माँ बनने के लिए बच्चा होना काफी नही माँ में ममता होना जरूरी
जन-जागरण महिला-जगत क्यों रुकता नहीं नारी पर वार February 12, 2015 / February 12, 2015 by निर्मल रानी | 2 Comments on क्यों रुकता नहीं नारी पर वार निर्मल रानी पिछले दिनों देश को एक बार फिर हरियाणा के रोहतक में दोहराए गए निर्भया कांड से शर्मसार होना पड़ा। राक्षसी प्रवृति के बलात्कारियों ने नेपाली मूल की एक लडक़ी के साथ न सिर्फ बलात्कार किया बल्कि उसके शरीर की ऐसी दुर्गति कर डाली जिसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। पोस्टमार्टम करने […] Read more » नारी पर वार
महिला-जगत समाज गलीज़ धंधे वालियों के लिए January 24, 2015 / January 24, 2015 by अलकनंदा सिंह | Leave a Comment अकसर कहा जाता है कि किसी भी समाज में बड़े बदलाव उस समाज में औरतों की स्थिति और उनकी सामाजिक प्रगति के साथ ही आते हैं । समाज में आम तौर पर औरतों की दशा के ऊपर व्याख्यानों – विमर्शों तथा दावों के प्रलाप भी होते रहते हैं मगर इस कथित प्रगति-गाथा के बीच कहीं […] Read more » धंधे वालियों के लिए
महिला-जगत स्त्री का पुरुषोचित आचरण सबसे बड़ी मूर्खता है। January 10, 2015 / January 10, 2015 by डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' | 1 Comment on स्त्री का पुरुषोचित आचरण सबसे बड़ी मूर्खता है। डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ स्त्री और पुरुष का के बीच लैंगिक अंतर तो प्रकृति की अनुपम दैन है! इसको स्त्री की कमजोरी और पुरुष की ताकत समझना, पुरुष की सबसे बड़ी मूर्खता है और इसे अपनी कमजोरी मानकर, इसे छुपाने के लिए स्त्री द्वारा पुरुषोचित व्यवहार या आचरण करना उससे भी बड़ी मूर्खता है। केवल भारत में […] Read more »