व्यंग्य गोली नेकी वाली

गोली नेकी वाली

“ये दौरे सियासत भी क्या दौरे सियासत है चुप हूँ तो नदामत है ,बोलूँ तो बगावत है” आम वोटर चुनाव के वक्त ऐसे ही सोचता है कि…

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राजनीति सांस्कृतिक संवेदनहीनता के समय में लोकजीवन और मीडिया

सांस्कृतिक संवेदनहीनता के समय में लोकजीवन और मीडिया

-प्रो. संजय द्विवेदी       ‘मोबाइल समय’ के दौर में जब हर व्यक्ति कम्युनिकेटर, कैमरामैन और फिल्ममेकर होने की संभावना से युक्त हो, तब असल खबरें गायब…

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लेख आइए जिंदगी को सवारें

आइए जिंदगी को सवारें

-ललित गर्ग-जिंदगी को हर कोई अनूठा रचना चाहता है एवं तरक्की के शिखर देना चाहता है। इसी भांति जिन्दगी के मायने भी सबके लिये भिन्न-भिन्न…

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विविधा घर ही नहीं, घट को भी रोशन करें

घर ही नहीं, घट को भी रोशन करें

– ललित गर्ग – भारत को त्यौहारों का देश माना जाता है। दीपावली सबसे अधिक प्रमुख त्यौहार है। यह त्यौहार दीपों का पर्व है। जब…

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मीडिया डेंगू के डंक से बीमार है पटना, आखिर इसका कैसे होगा समाधान

डेंगू के डंक से बीमार है पटना, आखिर इसका कैसे होगा समाधान

–            मुरली मनोहर श्रीवास्तव आखिर बिहार को क्या हो गया है? अपने ही आंगन में अपने लाल दम तोड़ रहे हैं और सरकार चाहकर भी…

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कहानी अम्मा

अम्मा

अम्मा की उम्र यही होगी क़रीब 78 साल और बाबूजी होंगे 82 के।  अम्मा बड़ी लगन से पूजा पाठ व्रत उपवास करती थीं उनके व्रत …

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राजनीति हिंदूराष्ट्र के स्वप्नद्रष्टा : बंदा वीर बैरागी

हिंदूराष्ट्र के स्वप्नद्रष्टा : बंदा वीर बैरागी

अध्याय — 6 लक्ष्मण देव से बने बैरागी माधोदास क्रांतिकारी नेताओं को जन्म देने में भारत भूमि प्राचीन काल से ही उर्वरा भूमि के रूप…

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प्रवक्ता न्यूज़ तुम सुर में बसी उनकी झलक!

तुम सुर में बसी उनकी झलक!

तुम सुर में बसी उनकी झलक,  लख लिया करो; भाए न भाए उनकी ग़ज़ल,  गा लिया करो !  दरम्यान उनके औ तुम्हारे, दूरियाँ कहाँ; दरवाज़ा खोल बार बार, मिल लिया करो ! आँखों का नूर चित को चूर, करता रहा है; आहिस्ते बना रिश्ते खुद को,  खो दिया करो ! खोये वहीं हैं हर ही सबब, शब्द में सोये; चुपचाप उनकी चाप सुने, सुध लिया करो !  हर उर के आफ़ताब झाँके, झरोखे रहे; ‘मधु’ उनकी सृष्टि मुस्कराए, ध्यान तुम करो !  ✍? गोपाल बघेल ‘मधु’ 

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राजनीति “दीदी बनाम दादा” बंगाल चुनाव।

“दीदी बनाम दादा” बंगाल चुनाव।

जी हां बंगाल की राजनीति में बहुत बड़े उलट फेर होने का दृश्य दिखाई देने लगा है। क्योंकि, बंगाल की राजनीति में दीदी बड़ी ही…

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लेख देश में धर्म व संस्कृति पर हावी होता बाजारवाद

देश में धर्म व संस्कृति पर हावी होता बाजारवाद

दीपक कुमार त्यागीआज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बाजारवाद और इसकी ताकतवर व्यवस्था के प्रभाव से समाज का कोई भी वर्ग अछूता नहीं रहा है।…

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धर्म-अध्यात्म गृहलक्ष्मी  बनाम श्रीलक्ष्मी

गृहलक्ष्मी बनाम श्रीलक्ष्मी

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव  महिलाओं की प्रसन्नता, सहयोग और समर्पण से ही पुरुष धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को प्राप्त करने में सफल होता है।…

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राजनीति बैंकों के विश्वास पर ग्रहण लगना!

बैंकों के विश्वास पर ग्रहण लगना!

-ः ललित गर्ग :- पंजाब एंड महाराष्ट्र कोआपरेटिव बैंक के तीन खाताधारकों ने पिछले दो-तीन दिनों में अपनी जीवनलीला इसलिये समाप्त कर दी कि बैंक…

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