तुम्हे जान प्यारी है या पैसे प्यारे हैं ?
Updated: September 13, 2019
डॉ. वेदप्रताप वैदिक केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए मोटर वाहन अधिनियम को लेकर देश में विचित्र विवाद चल पड़ा है। इस अधिनियम को…
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डिजिटल इंडिया और फिट इंडिया में हिंदी।
Updated: September 13, 2019
अंग्रेजी भाषा के बढ़ते प्रभाव और हिंदी की उपेक्षा को रोकने के लिए 14 सितंबर को हर वर्ष हिंदी दिवस मनाया जाता है ।अन्य दिवसों…
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एक शांत शहर में प्राइमरी स्कूल के बच्चों की चुनौतियां
Updated: September 13, 2019
मसोयो हुनफुन अवांगशी उखरूल, मणिपुर हम अक्सर युद्धग्रस्त शहरों में लोगों विशेषकर बच्चों को होने वाली कठिनाइयों के बारे में पढ़ते रहते हैं। ऐसे अशांत क्षेत्रों…
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नए मोटर व्हीकल एक्ट से मेरा देश परेशान
Updated: September 12, 2019
– ललित गर्ग – नया बना मोटर व्हीकल एक्ट देश को राहत पहुंचाने की बजाय परेशानी का सबब बन रहा है। अनेकों विरोधाभासों एवं विसंगतियों…
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कार्यकर्त्ता कैसा हो ?
Updated: September 12, 2019
डॉ. मधुसूदन’ (एक)अनुरोध:विश्व हिन्दू परिषद (यु. एस. ए.) के नेतृत्व नें अगली पीढी के कार्यकर्ता को, मार्गदर्शक हो, ऐसा आलेख चाहा था। अब, ऐसा आलेख…
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हिंदी के दुश्मन कौन?
Updated: September 12, 2019
– लोकेन्द्र सिंह कुछ प्रश्न आपके सामने रख रहा हूं। भारत की बहुसंख्यक आबादी की मातृभाषा कौन-सी है? भारत में सम्पर्क और संवाद की सबसे बड़ी भाषा…
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शारदीय नवरात्रि 2019
Updated: September 12, 2019
इस वर्ष शारदीय नवरात्रि 29 सितंबर 2019 से शुरु होने जा रहे हैं। हिंदू धर्म के लोगों के लिए ये पूजा अर्चना के विशेष दिन…
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‘जय श्री राम’ को ‘जेएसआर’ बनाने वाली मानसिकता
Updated: September 12, 2019
मोदी के बहाने हिन्दुओं की भावनाओं से खिलवाड़ करने वाले नेताओं की संजय सक्सेना हिन्दुस्तान में ऐसे लोगों की लम्बी-चैड़ी फौज है जिनका समाज और…
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उदितराज के बदमिजाज का ‘राज’
Updated: September 11, 2019
मनोज ज्वाला चन्द्रमा के अभियान पर जा रहे ‘विक्रम’ नामक भारतीय चन्द्रयान के ‘इसरो’ से सम्पर्क टुटने और जुटने के बीच भारत में सदभावनाओं व…
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राज हर कोई करना है जग चह रहा !
Updated: September 11, 2019
राज हर कोई करना है जग चह रहा, राज उनके समझना कहाँ वश रहा; राज उनके कहाँ वो है रहना चहा, साज उनके बजा वह कहाँ पा रहा ! ढ़पली अपनी पै कोई राग हर गा रहा, भाव जैसा है उर सुर वो दे पा रहा; ताब आके सुनाए कोई जा रहा, सुनके सृष्टा सुमन मात्र मुसका रहा ! पद के पंकिल अहं कोई फँसा जा रहा, उनके पद का मर्म कब वो लख पा रहा; बाल बन खेल लखते मुरारी रहे, दुष्टता की वे सारी बयारें सहे ! सृष्टि सारी इशारे से जिनके चले, सहज होके वे जगती पै क्रीड़ा करे; जीव गति जान कर तारे उनको चले, कर विनष्टि वे आत्मा में अमृत ढ़ले ! हर निमिष कर्म करके वे प्रतिपालते, धर्म अपना धरे वे प्रकृति साधते; ‘मधु’ है उनका समझ कोई कब पा रहा, अपनी जिह्वा से चख स्वाद बतला रहा ! ✍? गोपाल बघेल ‘मधु’
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चंद्रयान शब्द का अनुसंधान और…..
Updated: September 11, 2019
डॉ. मधुसूदन (एक) आलेख सारांश:ॐ==> चंद्रयान शब्द कैसे बना ?ॐ===>संस्कृत शब्द के सरल पारदर्शक अर्थ। ॐ===> इसी संदर्भ से, (आधार ) अन्य रचे गए…
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व्यक्ति प्रकृति और संस्कृति के अनुकूल बनें शासन की नीतियां
Updated: September 11, 2019
बृजनन्दन राजू भविष्य के भारत की कल्पना करने से पहले हमें अपनी गौरवशाली परंपरा का स्मरण करना होगा। हम क्या थे कहां थे आज कहां…
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