कविता मेरे बाबा तो भोलेनाथ…

मेरे बाबा तो भोलेनाथ…

तारकेश कुमार ओझा बाबा का संबोधन मेरे लिए अब भी है उतना ही पवित्र और आकर्षक जितना  था पहले अपने बेटे और भोलेनाथ को मैं…

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समाज कचरा बनी दिल्ली में टूटती जीवन सांसें

कचरा बनी दिल्ली में टूटती जीवन सांसें

 ललित गर्ग  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छता अभियान एवं उनके कथन कि “एक स्वच्छ भारत के द्वारा ही देश 2019 में महात्मा गांधी की 150वीं…

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समाज ‘‘ समाज में उजालें कम क्यों हो रहे हैं? ’

‘‘ समाज में उजालें कम क्यों हो रहे हैं? ’

ललित गर्ग  स्वार्थ चेतना अनेक बुराइयों को आमंत्रण है। क्योंकि व्यक्ति सिर्फ व्यक्ति नहीं है, वह परिवार, समाज और देश के निजी दायित्वों से जुड़ा…

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राजनीति समलैंगिकता पर समय की बर्बादी

समलैंगिकता पर समय की बर्बादी

डॉ. वेदप्रताप वैदिक समलैंगिकता को लेकर हमारा सर्वोच्च न्यायालय और सरकार, दोनों ही अपना समय बर्बाद कर रहे हैं। दोनों में से कोई भी इस…

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गजल एक गजल सच्चाई पर

एक गजल सच्चाई पर

कोई टोपी कोई पगड़ी कोई इज्जत अपनी बेच देता है मिले अच्छी रिश्वत,जज भी आज न्याय बेच देता है वैश्या फिर भी अच्छी है उसकी…

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धर्म-अध्यात्म “स्वामी अमरस्वामी के पिता के ऋषि दयानन्द के दर्शन की घटना और कुछ प्रासंगिक बातें”

“स्वामी अमरस्वामी के पिता के ऋषि दयानन्द के दर्शन की घटना और कुछ प्रासंगिक बातें”

  मनमोहन कुमार आर्य, स्वामी अमरस्वामी (पूर्व नाम ठाकुर अमर सिंह जी) आर्यसमाज के दिग्गज विद्वान थे। वह शास्त्रार्थ महारथी थे। हमने स्वामी जी को…

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धर्म-अध्यात्म “सृष्टि में ईश्वर का अस्तित्व सत्य व यथार्थ है”

“सृष्टि में ईश्वर का अस्तित्व सत्य व यथार्थ है”

  –मनमोहन कुमार आर्य, हम जिस संसार को देखते हैं वह अति प्राचीन काल से विद्यमान है। यह कब बना, इसका प्रमाण हमें वेद, वैदिक…

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समाज  यह लड़ाई है अच्छाई और बुराई की

 यह लड़ाई है अच्छाई और बुराई की

  डॉ नीलम महेंद्र उच्चतम न्यायालय ने 9 जुलाई 2018 के अपने ताजा फैसले में 16 दिसंबर 2012 के निर्भया कांड के दोषियों की फाँसी…

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विश्ववार्ता पाकिस्तान के गले में एफएटीएफ की फांस-अरविंद जयतिलक

पाकिस्तान के गले में एफएटीएफ की फांस-अरविंद जयतिलक

अरविंद जयतिलक आतंकियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह का तमगा हासिल कर चुके पाकिस्तान के लिए यह शुभ संकेत नहीं है कि वित्तीय कार्रवाई कार्य बल…

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कविता उर की तरन में घूर्ण दिए !

उर की तरन में घूर्ण दिए !

गोपाल बघेल ‘मधु (मधुगीति १८०७०३ द) उर की तरन में घूर्ण दिए, वे ही तो रहे; सम-रस बनाना वे थे चहे, हम को विलोये ! हर तान में उड़ा के, तर्ज़ हर पे नचा के; तब्दील किए हमरा अहं, ‘सो’ से मिला के ! सुर दे के स्वर बदल के, कभी रौद्र दिखा के; पोंछे भी कभी अश्रु रहे, गोद बिठा के ! फेंके थे प्रचुर दूर कभी, निकट बुलाए; ढ़िंग पाए कभी रास, कभी रास न आए ! जो भी थे किए मन को लिये, हिय में वे भाए; ‘मधु’ समझे लीला प्रभु की, चरण उनके ज्यों गहे !’

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राजनीति राजनीति का ‘कुरूपतम’ काल

राजनीति का ‘कुरूपतम’ काल

निर्मल रानी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को हुए क्रूरतम निर्भया सामूहिक बलात्कार कांड में पिछले दिनों उच्चतम न्यायालय ने दोषियों को दी…

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कविता वे किसी सत्ता की महत्ता के मुँहताज नहीं !

वे किसी सत्ता की महत्ता के मुँहताज नहीं !

  (मधुगीति १८०७१२) गोपाल बघेल ‘मधु’ वे किसी सत्ता की महत्ता के मुँहताज नहीं, सत्ताएँ उनके संकल्प से सृजित व समन्वित हैं; संस्थिति प्रलय लय उनके भाव से बहती हैं, आनन्द की अजस्र धारा के वे प्रणेता हैं ! अहंकार उनके जागतिक खेत की फ़सल है, उसका बीज बो खाद दे बढ़ाना उनका काम है; उसी को देखते परखते व समय पर काटते हैं, वही उनके भोजन भजन व व्यापार की बस्तु है ! विश्व में सभी उनके अपने ही संजोये सपने हैं, उन्हीं के वात्सल्य रस प्रवाह से विहँसे सिहरे हैं; उन्हीं का अनन्त आशीष पा सृष्टि में बिखरे हैं, अस्तित्व हीन होते हुए भी मोह माया में अटके हैं ! जितने अधिक अपरिपक्व हैं उतने ही अकड़े हैं, सिकुड़े अध-खुले अन-खिले संकुचित चेतन हैं; स्वयं को कर्त्ता निदेशक नियंत्रक समझते हैं, आत्म-सारथी गोपाल का खेल कहाँ समझे हैं ! वे चाहते हैं कि हर कोई उन्हें समझे उनका कार्य करे, पर स्वयं को समझने में ही जीव की उम्र बीत जाती है; ‘मधु’ के बताने पर भी बात कहाँ समझ आती है, प्रभु जगत से लड़ते २ भी कभी उनसे प्रीति हो जाती है !  

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