माता-पिता और संतान के संबंधों की संस्कृति को जीवंतता दें
Updated: June 2, 2025
विश्व माता-पिता दिवसः 1 जून 2025– ललित गर्ग – विश्व के अधिकतर देशों की संस्कृति में माता-पिता का रिश्ता सबसे बड़ा एवं प्रगाढ़ माना गया है। भारत…
Read more
हिंदी पत्रकारिता उद्भव से लेकर डिजिटल युग तक
Updated: June 2, 2025
हिंदी पत्रकारिता दिवस (30 मई)विशेष- -संदीप सृजन हिंदी पत्रकारिता का इतिहास भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक परिदृश्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। यह…
Read more
परिवारों से मिटता दादी मां का अस्तित्व चिंता का विषय
Updated: June 25, 2025
आज अनाथालयों में वृद्ध महिलाओं के झुंड आंसू बहा रहे हैं। हमारे देश की परंपरा तो “मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, आचार्य देवो भव,…
Read more
युवाओं की जिंदगी को गर्त में धकेल रही आनलाइन गेमिंग
Updated: June 2, 2025
हाल ही में भारत के माननीय सुप्रीम कोर्ट ने स्टूडेंट्स सुसाइड और गेमिंग ऐप से बर्बादी पर चिंता जताई है और इस पर सख्त लहजा…
Read more
विश्वसनीयता के संकट से जूझती हिंदी पत्रकारिता
Updated: May 29, 2025
डॉ घनश्याम बादल 30 मई 1826 को कोलकाता से प्रकाशित हिंदी के पहले समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तण्ड’ के प्रकाशन की ऐतिहासिक शुरुआत को याद करते…
Read more
सावधान रहना होगा कोरोना के नए वेरियंट्स से
Updated: May 29, 2025
संजय सिन्हा भारत सहित अन्य देशों में एक बार फिर से कोरोना वायरस संक्रमण का खतरा मंडराने लगा है। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी हालिया आंकड़ों…
Read more
प्रकाशन की लागत बढ़ने से गहराया आर्थिक संकट
Updated: May 29, 2025
हिंदी पत्रकारिता : क्षेत्रीय भाषा और आर्थिक संकट की “छाया” प्रदीप कुमार वर्मा भारतीय शासन व्यवस्था में मुख्य रूप से तीन स्तंभ हैं जिनमें कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका शामिल हैं। देश में स्वतंत्र पत्रकारिता के महत्व एवं उपयोगिता को देखते हुए पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है। पत्रकारिता हर आम और खास को विभिन्न समाचारों, घटनाओं और मुद्दों से अवगत कराती है। पत्रकारिता को जनमानस को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक के रूप में भी जाना जाता है। पत्रकारिता के इसी महत्व को रेखांकित करने का दिन “हिंदी पत्रकारिता दिवस” है। यह हिंदी पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास को याद करने और इसकी वर्तमान उपलब्धियों का जश्न मनाने का दिन भी है। यह दिवस उन सभी पत्रकारों और लेखकों को याद करने का अवसर है जिन्होंने हिंदी भाषा को गौरव और सम्मान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत में हर साल 30 मई को हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारत के इतिहास का एक महत्वपूर्ण दिन है, क्योंकि वर्ष 1826 में इसी दिन हिंदी भाषा का पहला समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तण्ड’ प्रकाशित हुआ था। इस प्राचीन समाचार पत्र का प्रकाशन कलकत्ता शहर से पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा शुरू किया गया था। यह ऐसा समय था जब भारत में उर्दू, अंग्रेजी, बांग्ला और फारसी भाषा का प्रचार-प्रसार चरम पर था। ऐसे समय में हिंदी भाषी लोगों के सामने साहित्य और पत्रकारिता का संकट पैदा हो रहा था। तब हिन्दी भाषा के पाठकों को हिंदी समाचार पत्र की आवश्यकता हुई। हिंदी पत्रकारिता की इसी अनिवार्य आवश्यकता के चलते 30 मई 1826 को हिन्दी भाषा का प्रथम समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तण्ड’ प्रकाशित हुआ था। यह महज एक समाचार पत्र ही नहीं था बल्कि साहित्य एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में हिंदी के “उत्थान” के लिए किया गया यह एक प्रयोग भी था। इसीलिए इस दिवस को हिन्दी पत्रकारिता दिवस के रूप में मानते हैं। भले ही यह पत्र एक साप्ताहिक के रूप में कलकत्ता से प्रकाशित होना प्रारम्भ हुआ था लेकिन इसने तत्कालीन समय में हिंदी भाषा एवं हिंदी पत्रकारिता को एक संजीवनी प्रदान की थी। उस जमाने मे कलकत्ता में हिन्दी पाठकों की संख्या बहुत कम थी। हिन्दी भाषी स्थानों पर यह डाक से भेजा जाता था, जिससे यह महंगा होता था और इसका खर्च नहीं निकल पाता था। इसके अलावा उस समय आर्थिक तंत्र कुछ कुलीन लोगों के हाथ में था। जिनका हिंदी से कोई लेना देना नहीं था। यही वजह रही कि ‘उदन्त मार्तण्ड’ को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। उस समय जुगल किशोर शुक्ल ने सरकार से अखबार को हिंदी पाठ उत्तर पहुंचने के लिए डाक खर्च में कुछ रियायत देने का अनुरोध भी ब्रिटिश सरकार से किया लेकिन तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने हिंदी भाषा के चलते इस अनुरोध को नकार दिया। यही वजह रही कि मात्र कुछ ही महीनों के बाद आर्थिक तंगी के कारण 19 दिसंबर 1826 को इसका प्रकाशन बंद करना पड़ा। इसके मात्र 79 अंक ही निकले थे लेकिन करीब करीब दो सौ साल के लंबे सफर के बावजूद आज भी हिंदी पत्रकारिता पर संकट के बादल छाए हैं। संकट के यह बादल भाषाई पत्रकारिता में आए उछाल, सोशल मीडिया के बढ़ते दखल तथा अखबारों के प्रकाशन में बड़े खर्च और लागत को लेकर है। बदले समय में अब अखबारों को विज्ञापन कम मिल रहे हैं। इसके साथ ही कागज और छपाई के खर्चे बढ़ गए हैं। जिसके चलते अखबार मालिकों को अखबारों की रेट भी बढ़ानी पड़ी है। हालात ऐसे हैं कि आज के समय में कोई भी राष्ट्रीय अथवा प्रादेशिक समाचार पत्र 5 रुपये की कीमत से कम नहीं है और यह है कीमत कई अखबारों के मामले में 10 से 15 रुपए तक भी है। क्षेत्रीय भाषाओं के बढ़ते प्रभाव के चलते कुछ बड़े मीडिया घरानों ने देश के विभिन्न राज्यों में भाषा के आधार पर अपने क्षेत्रीय प्रकाशन भी शुरू कर दिए हैं जिसकी वजह से भी आज के दौर में हिंदी पत्रकारिता को चुनौती मिल रही है। अखबारों को मिल रही सरकारी मदद के बारे में गौर करें,तो आज भी आशा के अनुरूप सरकारी मदद का इंतजार अखबारों को है। देश में केंद्रीय विज्ञापन एजेंसी डीएवीपी और राज्यों के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालयों की ओर से भी विज्ञापन जारी करने की संख्या में कमी आई है। जिसके चलते विज्ञापनों के रूप में अपेक्षित सरकारी मदद अखबारों को नहीं मिल पा रही है। इसके साथ ही सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों से मिलने वाले विज्ञापनों पर एक मोटा कमीशन विज्ञापन एजेंसी को देना पड़ता है और इसका असर भी अखबारों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। इसके अलावा लगभग हर राजनीतिक एवं जनप्रतिनिधियों, सामाजिक एवं व्यापारिक संस्थाओं ने भी अपने “प्रचार-प्रसार” का माध्यम सोशल मीडिया को बना लिया है। …
Read more
सुप्रीम कोर्ट -किशोरों के बीच सहमति के संबंधों में पोक्सो एक्ट के तहत जेल क्यों?
Updated: May 29, 2025
रामस्वरूप रावतसरे सुप्रीम कोर्ट ने एक प्रकरण की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से कहा है कि किशोरों के बीच सहमति से बनने वाले प्रेम-संबंधों…
Read more
आखिरकार बंगलादेश की कमजोर नसों को कब दबाएगा भारत?
Updated: May 29, 2025
कमलेश पांडेय कभी ‘ग्रेटर बंगलादेश’ का स्वप्न संजोने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता और बंगलादेश के कार्यवाहक सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस अब अपने ही देश…
Read more
हिन्दी पत्रकारिता को व्यवसाय नहीं, मिशन बनाना होगा
Updated: May 29, 2025
हिन्दी पत्रकारिता दिवस- 30 मई, 2025– ललित गर्ग – भारत में हिन्दी पत्रकारिता की न केवल आजादी के संघर्ष में बल्कि उससे पूर्व के गुलामी…
Read more
‘देशहित’ से ही बचेगी पत्रकारिता की साख
Updated: May 29, 2025
– लोकेन्द्र सिंह ‘हिंदुस्थानियों के हित के हेत’ इस उद्देश्य के साथ 30 मई, 1826 को भारत में हिंदी पत्रकारिता की नींव रखी जाती है। पत्रकारिता के अधिष्ठाता देवर्षि नारद…
Read more
एमएसपी में वृद्धि :कृषि और किसान कल्याण को गति
Updated: May 29, 2025
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने विपणन(मार्केटिंग) सीजन 2025-26 के लिए 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम…
Read more