शुभ सुकून का अहसास कराती टीसीएस
Updated: April 24, 2018
– ललित गर्ग- भारत और यहां की संस्कृति, समाज, तकनीक, शिक्षा एवं व्यवसाय एक नये मोड़ पर खड़े हैं। सूचना, ज्ञान, तकनीक एवं शक्ति का…
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संसार में अनादि पदार्थ कितने व कौन कौन से हैं?
Updated: April 24, 2018
मनमोहन कुमार आर्य हम जब आंखे बन्द करते हैं तो हमें कुछ दिखाई नहीं देता और जब आंखों को खोलते हैं तो हमें यह संसार…
Read moreपानी प्रणय पक्ष
Updated: April 24, 2018
अरुण तिवारी आतुर जल बोला माटी से मैं प्रकृति का वीर्य तत्व हूं, तुम प्रकृति की कोख हो न्यारी। इस जगती का पौरुष मुझमें, तुममें…
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चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को RSS एजेंट साबित करना चाहती है कांग्रेस?
Updated: April 24, 2018
डॉ मनीष कुमार चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाना कोई मजाक है क्या? क्या अभी विपक्ष के नेताओं को डा. भीमराव अंबेडकर…
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न्यायपालिका को कठघरे में खड़ा मत करो महाराज
Updated: April 24, 2018
– लोकेन्द्र सिंह देश में राजनीतिक विरोध का ऐसा माहौल पहले कभी नहीं देखा गया है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के बीच अपनी राजनीतिक लड़ाई हारे…
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देश में असुरक्षित स्त्री
Updated: April 25, 2018
प्रमोद भार्गव कठुआ, उन्नाव, सूरत और राजस्थान में मासूम बलिकाओं और महिलाओं के साथ हुए दुष्कर्मो के बाद पनपे जनाक्रोश के बाद केंद्र की नरेंद्र मोदी…
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“आर्यसमाज का उद्देश्य संसार का उपकार करना”
Updated: April 24, 2018
मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य समाज की एक इकाई है। मनुष्य का अभिप्राय स्त्री व पुरुष दोनों से होता है। इन दोनों के समूहों से मिल…
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गायत्री महामंत्र का महत्व
Updated: April 23, 2018
मनमोहन कुमार आर्य वेदों में गायत्री मंत्र के नाम से एक मंत्र आता है जो निम्न है। इसे गायत्री मंत्र इस लिये कहते हैं कि…
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महाभियोग: कांग्रेस का दुस्साहस
Updated: April 23, 2018
डॉ. वेदप्रताप वैदिक स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह पहली घटना है कि सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को महाअभियुक्त के कठघरे में खड़ा किया…
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पंचायतों में महिला आरक्षण से ग्रामीण भारत में बदलाव का दौर’’
Updated: April 23, 2018
लेखक – अशोक बजाज, स्थानीय इकाई के रूप में त्रि-स्तरीय पंचायत राज व्यवस्था प्रजातंत्र की सबसे लघु इकाई है । गांव स्तर पर ग्राम पंचायतें,…
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खोया है गाँव मेरा !
Updated: April 23, 2018
डॉ. मधुसूदन (१) सीढीपर बैठा बालवृन्द, मस्ती से,आवाजाही निरखता हो. बरखा की शीतल खुशी, हथेली पर झेलता हो. —मिल जाएँ ऐसा गाँव, तो लौटाना ना…
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संघर्ष कभी शब्दों के मोहताज नहीं रहे
Updated: April 23, 2018
दिलीप बीदावत शब्द जब सियासत के लिए आफत बन जाते हैं या शब्द की अवधारणा से उजागर समाज के किसी वर्ग विषेष के जीवन स्तर…
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